Tribal Development
आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग

आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19


1.सामान्य समीक्षा

भारतीय अर्थव्यवस्था ने वृहद आर्थिक स्थिरता को मान्य रखने के लिए प्राप्त लाभ को मजबूती से निरन्तर जारी रखा है। यह स्थिरता घरेलू नीतिगत विकास के अन्तर्गत् 1 जुलाई, 2017 से लागू वस्तु एवं सेवा कर तथा कर ढांचे में परिवर्तनों के फलस्वरुप है। अर्थव्यवस्था के लघु अवधि में परिवर्तन प्रमुखतयः वस्तु एवं सेवा कर तथा विमुद्रीकरण नीति रही है। देश की अर्थव्यस्था पुर्नस्थापित हो चुकी है तथा भविष्य में उच्च आर्थिक वृद्वि दर प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। भारतीय अर्थव्यवस्था की सतत वृद्वि पिछले तीन वर्षों से सकारात्मक रही है। वर्ष 2017-18 में अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है और इसके वर्ष 2018-19 में 7.2 प्रतिशत रहने की सम्भावना है। भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालीन सकारात्मक वृद्वि की सम्भावनाएं इसकी युवा पीढ़ी तथा साथ ही कम जनसंख्या निर्भरता अनुपात, संदृढ़ बचत एवं निवेश दर और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते एकीकरण से है।
भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से स्थापित हुई है जोकि विविध व्यवसायिक क्षेत्रों में वृद्वि के कारण ही सम्भव हो पाया है। भारत ने यह दिखाया है कि वह विश्व अर्थ-व्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक वृद्वि कर सकता है। अन्तर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के मूल्यों में वृद्वि होने के बाबजूद भी बड़े आर्थिक मापदण्ड जैसे वित्तीय घाटा, चालू खाता संतुलन तथा मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही है। वर्ष के दौरान थोक मूल्य मुद्रास्फीति भी नियंत्रणीय सीमा में रही जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्वि हुई है और भारतीय निर्यात में भी वृद्वि हुई है, जिसके फलस्वरूप वैश्विक स्तर पर भारत एक सर्वाधिक आकर्षक अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है।
वर्तमान दीर्घ आर्थिक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है और बाह्य कारणों का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था नए आधार वर्ष 2011-12 के अनुसार स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2017-18 में ृ130.11 लाख करोड़ हुआ जो कि वर्ष 2016-17 में ृ121.96 लाख करोड़ था। प्रचलित भाव पर सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2017-18 में ृ167.73 लाख करोड़ आंका गया है, जोकि वर्ष 2016-17 में ृ152.54 लाख करोड़ था, जोकि 10.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में स्थिर भाव ;आधार 2011-12द्ध के अनुसार सकल मूल्य संवर्धन वर्ष 2016-17 में 7.1 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2017-18 में 6.5 प्रतिशत रहा। वर्ष 2016-17 की तुलना में 2017-18 में कम वृद्धि का कारण मुख्यतयः कृषि, बागवानी एवं मत्स्य (3.4 प्रतिशत)ए खनन एवं खदान (2.9 प्रतिशत)ए विनिर्माण (5.7 प्रतिशत)ए वित्तीय, स्थावर संपदा व व्यावसायिक सेवाएं (6.6 प्रतिशत) एवं निर्माण (5.7 प्रतिशत)।
वर्ष 2016-17 में प्रचलित भाव पर प्रति व्यक्ति आय ृ1,03,870 थी जोकि वर्ष 2017-18 में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ृ1,12,835 हो गई। स्थिर भाव ;2011.12द्ध के अनुसार प्रति व्यक्ति आय 2016-17 में ृ82,229 से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ृ 86,668 हो गई है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में विकास दर अग्रिम अनुमानों के अनुसार 7.2 प्रतिशत रहने की सम्भावना है।.
मुद्रास्फीति प्रबन्धन सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है। मुद्रास्फीति जोकि वर्ष दर वर्ष थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर मापी जाती है। चालू वित्त वर्ष 2018-19 ;अप्रैल-दिसम्बरद्ध के दौरान अधिकतर समय 5 प्रतिशत से नीचे बनी रही। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दिसम्बर, 2017 में 3.6 प्रतिशत से बढ़कर दिसम्बर, 2018 में 3.8 प्रतिशत हो गई। औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ;समस्त भारतद्ध पर आधारित मुद्रास्फीति की दर नवम्बर, 2018 में 4.9 प्रतिशत रही जोकि नवम्बर, 2017 में 4.0 प्रतिशत थी।
हिमाचल प्रदेश अपने साधारण, मेहनतकश लोगों व केन्द्र व राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियों के कारण देश में जीवन्त अर्थव्यवस्था बनती जा रही है। आज के परिपेक्ष में हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था देश में सबसे अधिक सम्पन्न तथा तीव्र गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में जानी जाती है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 में राज्य की अर्थव्यवस्था के 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की सम्भावना है।

राज्य सकल घरेलू उत्पाद, प्रचलित भावों पर वर्ष 2016-17 में ृ1,25,122 करोड़ से 9.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्ष 2017-18 में ृ1,36,542 करोड़ रहा। स्थिर भाव ;2011.12द्ध पर वर्ष 2016-17 में ृ1,03,038 करोड़ से 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्ष 2017-18 में ृ1,09,747 करोड़ रहा, जोकि गत वर्ष में 7.0 प्रतिशत थी। सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि मुख्यतः सामुदायिक व व्यैक्तिक सेवाओं 20.4 प्रतिशत, वित्तीय व स्थावर सम्पदा में 4.5 प्रतिशत, यातायात व व्यापार 3.7 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र 8.5 प्रतिशत, निर्माण 1.1 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, व जलापूर्ति 2.8 प्रतिशत के कारण सम्भव हुई है, जबकि प्राथमिक क्षेत्र में 1.0 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्वि रही। खाद्य उत्पादन वर्ष 2016-17 में 15.63 लाख मी.टन से कम होकर वर्ष 2017-18 में 15.31 लाख मी.टन रहा जबकि वर्ष 2018-19 में 16.69 लाख मी.टन का लक्ष्य है। फल उत्पादन वर्ष 2017-18 में 7.68 प्रतिशत की कमी के साथ 5.65 लाख मी.टन रहा जोकि वर्ष 2016-17 में 6.12 लाख मी.टन था तथा वर्ष 2018-19 में दिसम्बर, 2018 तक उत्पादन 4.06 लाख मी.टन हुआ है।
वर्ष 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय प्रचलित भाव पर ृ1,49,028 से बढ़कर वर्ष 2017-18 में ृ1,60,711 हो गई जोकि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
अग्रिम अनुमानों के अनुसार तथा दिसम्बर, 2018 की आर्थिक स्थिति के दृष्टिगत वर्ष 2018-19 में विकास दर 7.3 प्रतिशत के आसपास रहेगी।


प्रदेश की अर्थव्यवस्था जोकि मुख्यतः कृषि व सम्बन्धित क्षेत्रों पर ही निर्भर है। 1990 के दशक में विशेष उतार चढ़ाव नहीं आए और विकास दर अधिकांशतः स्थिर रही। अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र से उद्योग व सेवा क्षेत्रों के पक्ष में रूझान पाया गया क्योंकि कृषि क्षेत्र का कुल राज्य घरेलू उत्पाद में योगदान जो घटकर वर्ष 1950-51 में 57.9 प्रतिशत था तथा घटकर 1967-68 में 55.5 प्रतिशत, 1990-91 में 26.5 प्रतिशत और 2017-18 में 8.8 प्रतिशत रह गया।


उद्योग व सेवा क्षेत्रों का प्रतिशत योगदान 1950-51 में क्रमशः 1.1 व 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 1967-68 में 5.6 व 12.4 प्रतिशत, 1990-91 में 9.4 व 19.8 प्रतिशत और 2017-18 में 29.2 व 43.3 प्रतिशत हो गया। शेष क्षेत्रों में 1950-51 के 35.1 प्रतिशत की तुलना में 2017-18 में घटकर 27.5 प्रतिशत रह गया। .
उद्योग व सेवा क्षेत्रों का प्रतिशत योगदान 1950-51 में क्रमशः 1.1 व 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 1967-68 में 5.6 व 12.4 प्रतिशत, 1990-91 में 9.4 व 19.8 प्रतिशत और 2017-18 में 29.2 व 43.3 प्रतिशत हो गया। शेष क्षेत्रों में 1950-51 के 35.1 प्रतिशत की तुलना में 2017-18 में घटकर 27.5 प्रतिशत रह गया। .
कृषि क्षेत्र के घट रहे अंशदान के बावजूद भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की महत्ता पर कोई असर नहीं पड़ा। राज्य की अर्थव्यवस्था का विकास अधिकतर कृषि तथा उद्यान उत्पादन द्वारा ही निर्धारित होता है और सकल घरेलू उत्पाद में भी इसका मुख्य योगदान रहता है। अन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव रोजगार, अन्य आदान तथा व्यापार सम्बद्धताओं के कारण रहा है। सिंचाई सुविधाओं के अभाव में हमारा कृषि उत्पादन अभी भी अधिकांशतः सामयिक वर्षा व मौसम स्थिति पर निर्भर करता है। सरकार द्वारा भी इस क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता दी गई है।
राज्य ने फलोत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विविध जलवायु, उपजाऊ गहन और उपयुक्त निकासी वाली भूमि तथा भू-स्थिति में भिन्नता एवं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में समशीतोषण से उप्पोषण कटिबन्धीय फलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। प्रदेश का क्षेत्र फलोत्पादन में सहायक व सम्बन्धी उत्पाद जैसे फूल, मशरूम, शहद और हॉप्स की पैदावार के लिए भी उपयुक्त है।
वर्ष 2018-19 में ;दिसम्बर, 2018 तकद्ध 4ण्06 लाख टन फलों का उत्पादन हुआ तथा 2,004 हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र फलों के अधीन लाने का लक्ष्य है जबकि दिसम्बर,2018 तक 2,351 हैक्टेयर क्षेत्र फलों के अधीन लाया जा चुका है तथा इसी अवधि में 6.50 लाख विभिन्न प्रजातियों के फलों के पौधों का वितरण किया गया। प्रदेश में बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2017-18 में 16.92 लाख टन सब्जी उत्पादन हुआ जबकि वर्ष 2016-17 में 16.54 लाख टन का उत्पादन हुआ था जो कि 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वर्ष 2018-19 में बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन 16.50 लाख टन होने का अनुमान है।
हिमाचल प्रदेश सरकार मौसम परिवर्तन से तालमेल बिठाने हेतु महत्वाकांक्षी योजना पर काम रही है। राज्य की कार्य योजना में मौसम परिवर्तन से सम्बन्धित संस्थागत क्षमता का सृजन तथा क्षेत्रवार गतिविधियों को अमल में लाना है। प्रदेश की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने एक कार्यक्रम प्रारम्भ किया है जिसमें राज्य को निरन्तर निर्बाध विद्युत की आपूर्ति की जा रही है। विद्युत के उत्पादन, संचारण तथा वितरण को बढ़ाने के लिए कई पग उठाए गए हैं। ऊर्जा संसाधन के रूप में जलविद्युत आर्थिक रूप से व्यवहारिक प्रदूषण रहित तथा पर्यावरण के अनुकूल है। इस क्षेत्र के पुनर्गठन के लिए राज्य की विद्युत नीति सभी पहलुओं जैसे कि अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन संरक्षण की क्षमता, उपलब्धता, वहन करने योग्य, दक्षता, पर्यावरण संरक्षण व प्रदेश के लोगों को रोज़गार सुनिश्चित करने पर जोर देती है और निजी क्षेत्रों के योगदान को भी प्रोत्साहित करती है। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा प्रदेशवासी निवेशकों के लिए 2 मैगावाट की लघु परियोजनाओं को आरक्षित रखा गया है और 5 मैगावाट की परियोजनाओं तक उन्हें प्राथमिकता दी जाती है।
पर्यटन, अर्थव्यवस्था में वृद्धि करने का एक प्रमुख साधन है तथा राजस्व प्राप्ति का एक महत्त्वपूर्ण सत्रोत है तथा विविध प्रकार के रोज़गारों का जनक है। राज्य सरकार ने पर्यटन विकास के लिए उपयुक्त आधारभूत सुविधाओं की संरचना की है जिनमें नागरिक सुविधाओं का प्रावधान, सड़क मार्ग, दूरसंचार तंत्र, विमानपत्तन, यातायात सुविधाएं, जलापूर्ति तथा नागरिक सुविधाएं इत्यादि उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके परिणाम स्वरूप उच्च-स्तरीय प्रचार से घरेलू तथा विदेशी पर्यटकों के आगमन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान महत्त्वपूर्ण वृद्धि हुई है जोकि निम्नलिखित है।

सूचना प्रौद्योगिकी में रोजगार सृजन और राजस्व अर्जन की काफी संभावनाएं हैं। हिमस्वान विभिन्न जी2जी, जी2सी, जी2बी, ई-प्रोक्योरमेंट और ई-समाधान आदि प्रदान करता है। प्रशासन में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए प्रणालियाँ। राज्य भर में 2095 सरकारी कार्यालय हिमस्वान नेटवर्क के माध्यम से जुड़े हुए हैं।
2019-20 के लिए वार्षिक योजना `7100.00 करोड़ प्रस्तावित की गई है जो चालू वर्ष 2018 के योजना आकार से 12.7 प्रतिशत अधिक होगी -19.
कीमतों पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता सूची में है। 2018-19 के दौरान हिमाचल प्रदेश में श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या पर आधारित मुद्रास्फीति 2.3 बढ़ी नवंबर, 2018 में प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 4.9 प्रतिशत थी।
सरकार की प्राथमिकता हमेशा सामाजिक कल्याण कार्यक्रम रही है। दक्षता में सुधार के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं और सार्वजनिक सेवा वितरण की गुणवत्ता। वर्ष के दौरान प्राप्त कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:-
1) हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुशासन सूचकांक लागू किया है।
2) हिमाचल सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'शक्ति बटन ऐप' और 'गुड़िया हेल्पलाइन'शुरू की गई है।
3) वन, खनन और ड्रग माफिया से सख्ती से निपटने के लिए 'होशियार सिंह हेल्पलाइन' 1090 शुरू की गई है।
4) कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार सृजन और जन-मंच की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन निगरानी प्रणाली "हिम प्रगति" शुरू की गई है।
5) आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए मोबाइल ऐप सुविधा शुरू की गई।
6) "ई-पी.डी.एस." एच.पी. राज्य के 70 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को आसानी से रियायती दर पर राशन उपलब्ध कराने, निगरानी करने और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में मोबाइल ऐपलॉन्च किया गया है।
7) पर्यटकों को राज्य की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना और स्थानीय युवाओं को सांस्कृतिक मार्गदर्शक के रूप में प्रशिक्षित करना, इस उद्देश्य से कि वे स्वयं रोजगार के लिए 'आज पुरानी राहों से' नाम से एक योजना शुरू की गई है।
8) राज्य की सभी उचित मूल्य की दुकानों में 'प्वाइंट ऑफ सेल'(POS) मशीनें लगाई गई हैं।
9) सोलन, चंबा और हमीरपुर जिलों में नए महिला पुलिस थाने खोले गए हैं।
10) राज्य में नशे के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया गया है और नशा विरोधी उपचार शुरू किया गया है।
11) 'सामाजिक सुरक्षा पेंशन' योजना के तहत बिना किसी आय सीमा के पेंशन पाने की आयु सीमा 80 से घटाकर 70 वर्ष कर दी गई।
l2) सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर `750/- कर दिया गया है और इस योजना के तहत 76,025 नए पेंशन मामले स्वीकृत कर दिए गए हैं और कुल पात्र लाभार्थी अब 4,90,022 व्यक्ति हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु तथा 70 प्रतिशत विशेष योग्यजन पात्र व्यक्तियों की पेंशन बढ़ाकर `1,300 प्रति माह कर दी गई है।
13) संपर्क आधार पर महिला कर्मचारियों का मातृत्व अवकाश 135 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया है।
14) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़कर 225/- हो गई।
15) हर माह मंत्रियों की अध्यक्षता में "जनमंच" के माध्यम से लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया जाता है।
16) “हिमाचल गृहणी सुविधा योजना” के तहत नवंबर, 2018 तक राज्य में 32,134 नए एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।
17)केंद्र सरकार के "उज्वला योगना" के तहत, 85,421 एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।
18) कक्षा 1 से 10+2 तक के 9 लाख से अधिक विद्यार्थियों को स्मार्ट वर्दी के दो सेट निःशुल्क प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
19) इस प्री-प्राइमरी कार्यक्रम के तहत राज्य के चयनित 3,391 स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षाएं शुरू की गई हैं, जिनमें 23,800 बच्चों का नामांकन हुआ है।
20) राज्य के 137 डिग्री कॉलेजों में से 114 कॉलेजों में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है।
21) राज्य में उन परिवारों के लिए हिम केयर योजना शुरू की गई है जोआयुष्मान भारत योजनाया किसी अन्य स्वास्थ्य प्रतिपूरक योजना के तहत कवर नहीं हैं। इस योजना के तहत अस्पताल में इनडोर मरीज के रूप में भर्ती होने वाले परिवार के किसी भी सदस्य को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।
22) नागरिकों को विभिन्न चिकित्सा परीक्षण सुविधाएं प्रदान करने के लिए "मुख्यमंत्री निरोग योजना" शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य में 130 वेलनेस सेंटर स्थापित किये जायेंगे।
23) राज्य में 108 बाइक एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है। हिमाचल उत्तर भारत में यह सेवा शुरू करने वाला पहला राज्य है।
24) शिमला, सिरमौर और चंबा जिलों के 25 स्वास्थ्य उप केंद्रों और जनजातीय क्षेत्र किलाड़ में टेली-मेडिसिन सुविधाएं शुरू की गई हैं, इस सुविधा से 29,000 लोग लाभान्वित हुए हैं।
25) Yoga facility has been started in selected 471 Ayurvedic Health Centres after witnessing its importance.
26) राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए `25 करोड़ आवंटित करके एक नई योजना "प्राकृतिक खेती खुश-हाल किसान" शुरू की गई है। राज्य का बजट।
27) किसानों को 10.31 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये गये हैं।
28) राज्य के बागवानों को नवीनतम तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए राज्य में एम-किसान मोबाइल पोर्टल योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 6.90 लाख किसानों का पंजीकरण किया गया है।
29) पर्यटकों के लिए शिमला से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से शिमला के लिए हेली-टैक्सी सेवा शुरू की गई है।
30) युवाओं को उद्यमिता के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए "मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना" शुरू की गई है।
31) “मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप योजना” के तहत 8 इन्क्यूबेशन सेंटरों में 27 स्टार्ट-अप शुरू किए गए हैं और 3 होनहार उद्यमियों को पुरस्कृत किया गया है।
32) राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की एक बटालियन को मंजूरी दी गई है।
33) 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने के लिए देव भूमि दर्शन योजना शुरू की गई है।
34) प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के संबंध में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य को तीन पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
35) प्रदेश को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के संबंध में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
36) स्वास्थ्य के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन के लिए राज्य को चार पुरस्कार मिले हैं।
37) 2017-18 में प्रति व्यक्ति आय `1,60,711 के स्तर को छू गई है, जो 2016-17 की तुलना में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि है और अनुमान है कि `1,76,968 2018-19 में

2.राज्य आय-समष्टि अर्थशास्त्र दृष्टिकोण

राज्य आय अथवा सकल राज्य घरेलू उत्पाद किसी भी राज्य के आर्थिक विकास को मापने के लिए अति आवश्यक सूचक हैं। द्रुत अनुमानों के अनुसार वर्ष 2017-18 में प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद ृ1,09,747 करोड़ आंका गया, जबकि वर्ष 2016-17 में यह ृ 1,03 038 करोड़ था। वर्ष 2017-18 में प्रदेश के आथि्र्ाक विकास की दर स्थिर भावों ;आधार वर्षः 2011-12द्ध पर 6.5 प्रतिशत रही।
राज्य के द्रुत अनुमानों के अनुसार प्रचलित भाव पर राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2017-18 में पिछले वर्ष 2016-17 के ृ1,25,122 करोड़ की तुलना में ृ1,36,542 करोड़ आंका गया है, जो कि 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। विकास दर की इस वृद्धि का मुख्य श्रेय कृषि तथा सम्बन्धित क्षेत्रों के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में हुई वृद्धि को जाता है। वर्ष 2017-18 में खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2016-17 के 15.63 लाख मी.टन से घट़कर 15.31 लाख मी.टन हो गया है तथा वर्ष 2017-18 में सेब उत्पादन वर्ष 2016-17 के 4.68 लाख मी.टन से कम होकर 4.47 लाख मी.टन रह गया।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर ही निर्भर है। कृषि क्षेत्र पर निर्भरता तथा औद्योगिक आधार कमजोर होने के कारण खाद्यान्नों व फलों के उत्पादन का उतार-चढ़ाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। वर्ष 2017-18 के दौरान राज्य की कुल आय का लगभग 8.84 प्रतिशत योगदान केवल कृषि क्षेत्र से ही प्राप्त हुआ है।
राज्य की अर्थव्यवस्था सशक्त रुप से बढ़ रही है। राज्य की वृद्वि दर वर्ष 2017-18 में 6.5 प्रतिशत की अपेक्षा वर्ष 2018-19 अग्रिम अनुमानों के अनुसार 7.3 प्रतिशत अनुमानित की गई है।
गत तीन वर्षों में प्रदेश की आर्थिक विकास दर सारणी 2.1 में दर्शाई गई हैः
राज्य आय के द्रुत अनुमानों वर्ष 2017-18 के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय प्रचलित भावों पर ृ 1,60,711 है जोकि वर्ष 2016-17 के ृ 1,49,028 की तुलना में 7.8 की वृद्वि दर्शाती है। वर्ष 2011-12 के स्थिर भावों पर वर्ष 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय ृ1,18,888 आंकी गई, जोकि वर्ष 2017-18 में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हुए ृ 1,25,078 हो गई है।
क्षेत्रीय विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2017-18 में प्रदेश की राज्य आय में प्राथमिक क्षेत्रों का योगदान 13.73 प्रतिशत रहा। गौण क्षेत्रों का 43.01 प्रतिशत, परिवहन संचार एवं व्यापार का 11.66 प्रतिशत, विŸा एवं स्थावर सम्पदा का योगदान 14.87 प्रतिशत तथा सामुदायिक वैयक्तिक क्षेत्रों का 16.73 प्रतिशत रहा।
प्रदेश अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान से इस दशक में महत्वपूर्ण परिवर्तन पाए गए। कृषि क्षेत्र जिसमें उद्यान व पशुपालन भी सम्मिलित है, का योगदान वर्ष 1990-91 में 26.86 प्रतिशत से घट कर वर्ष 2017-18 में 8.84 प्रतिशत रह गयाए फिर भी कृषि क्षेत्र का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यही कारण है कि खाद्यान्न/फल उत्पादन में आया उतार-चढाव अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। प्राथमिक क्षेत्रों का योगदान, जिनमें कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन तथा खनन व उत्खनन सम्मिलित हैं, 1990-91 में 35.52 प्रतिशत से घट कर 2017-18 में 13.73 प्रतिशत रह गया।
गौण क्षेत्र जिसका प्रदेश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान है जिस में वर्ष 1990-91 के पश्चात महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। इसका योगदान वर्ष 1990-91 में 26.50 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 43.01 प्रतिशत हो गया हैए जो कि प्रदेश औद्योगिकरण व आधुनिकीकरण की ओर स्पष्ट रूझान को दर्शाता है। विद्युत, गैस व जल आपूर्ति जो कि गौण क्षेत्रों का ही एक अंग है, का भाग वर्ष 1990-91 में 4.70 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 7.08 प्रतिशत हो गया, अन्य सेवा सम्बन्धी क्षेत्रों जैसे कि व्यापार, यातायात, संचार, बैक, स्थावर सम्पदा और व्यावसायिक सेवाएं तथा सामुदायिक व वैयक्तिक सेवाओं का योगदान भी सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वर्ष 2017-18 में 43.26 प्रतिशत रहा।
अर्थव्यवस्था के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं जो 2017-18 के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था की 6.5 प्रतिशत वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं।
प्राथमिक क्षेत्र जिसमें कृषि, वानिकी, मत्स्य खनन तथा उत्खनन सम्मिलित हैं, की वृद्वि वर्ष 2017-18 में नकारात्मक 1.0 प्रतिशत रही जिसका मुख्य कारण वर्ष 2016-17 की तुलना में कृषि व सेब उत्पादन में क्रमशः 2.04 और 4.61 प्रतिशत की कमी रही।

गौण क्षेत्र जिसमें विनिर्माण, निर्माण तथा विद्युत गैस व जल आपूर्ति सम्मिलित हैं, वर्ष 2017-18 में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इन क्षेत्रों में पिछले वर्षो की उपलब्धियां की अपेक्षा इस वर्ष विनिर्माण क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है।
वर्ष 2017-18 में इस क्षेत्र की विकास दर 3.7 प्रतिशत रही। इस क्षेत्र के परिवहन व अन्य साधनों से सम्बन्धित विकास दर 5.9 प्रतिशत की वृद्वि दर्शाती है।
इस क्षेत्र में बैंक, बीमा, स्थावर सम्पदा, आवासों का स्वामित्व एवं व्यवसायिक सेवाएं सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र की विकास दर वर्ष 2017-18 में 4.5 प्रतिशत रही ।
इस क्षेत्र में विकास दर वर्ष 2017-18 में 20.4 प्रतिशत रही।
राज्य सकल घरेलू उत्पाद में स्थानीय निकायों का योगदान वर्ष 2017-18 में 0.35 प्रतिशत रहा। निम्न सारणी में वर्षवार स्थानीय निकायों का प्रतिशत योगदान दर्शाया गया है।
दिसम्बर, 2018 तक प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर आधारित अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2018-19 में विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने की संभावना है। प्रदेश में वर्ष 2017-18 में वृद्वि दर 6.5 प्रतिशत तथा 2016-17 में 7.0 प्रतिशत रही। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद ;प्रचलित भावों परद्ध लगभग ृ1,51,835 करोड़ होने की सम्भावना है।
अग्रिम अनुमानों के अनुसार प्रचलित भावों पर प्रति व्यक्ति आय 2018-19 में ृ1,76,968 अनुमानित है जोकि वर्ष 2017-18 में ृ1,60,711 की तुलना में 10.1 प्रतिशत की वृद्वि दर्शाती है।
हिमाचल प्रदेश में आर्थिक विकास के विश्लेषण से प्रतीत होता है कि प्रदेश की आर्थिक विकास दर सदैव समस्त भारत की विकास दर के समकक्ष ही रहती रही है, जैसा कि सारणी 2.2 में भी दर्शाया गया हैः-
राज्य सरकार प्रशासनिक व विकास कार्यों का व्यय वित्तीय साधनों को प्रत्यक्ष एवम् अप्रत्यक्ष कर, कर रहित राजस्व व केन्द्रीय करों में भाग तथा केन्द्र से प्राप्त सहायता अनुदान से चलाती है । वर्ष 2018-19 के बजट अनुमानों के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां ृ30,400 करोड़ है जोकि वर्ष 2017-;संशोधितद्ध ृ28,024 करोड़ थी। राजस्व प्राप्तियों में वर्ष 2017-18 की तुलना मेंं वर्ष 2018-19 ;संशोधित अनुमानद्ध में 8.48 प्रतिशत की वृद्वि हुई है।
राज्य करों से कुल प्राप्त आय वर्ष 2018-19 ;बजट अनुमानद्ध में ृ8,248 करोड़ तथा वर्ष 2017-18 संशोधित में ृ7,864 करोड़ व वर्ष 2016-17 ;वा0द्ध में ृ7,039 करोड़ आंकी गई है। राज्य कर वर्ष 2018-19 ;बजट अनुमानद्ध में वर्ष 2017-18 ;संशोधित अनुमानद्ध की अपेक्षा 4.88 प्रतिशत अधिक है।
राज्य के कर रहित राजस्व जिसमें विशेषकर ब्याज प्राप्ति, ऊर्जा, परिवहन तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं इत्यादि से प्राप्त आय सम्मिलित हैं, वर्ष 2018-19 ;बजट अनुमानद्ध में ृ1,981 करोड़ आंका गया हैं, जोकि वर्ष 2018-19 के कुल राजस्व प्राप्तियों का 6.52 प्रतिशत हैं।
केन्द्रीय करों में राज्य का भाग वर्ष 2018-19 ;बजट अनुमानद्ध में ृ 6,387 करोड़ आंका गया है।
राज्य करों से प्राप्त आय के अन्तर्गत् वर्ष 2018-19 ;बजट अनुमानद्ध में मुख्यतः बिक्री करों से प्राप्त आय ृ6ए531 करोड़ आंकी गई है जोकि कुल कर प्राप्ति का 44.63 प्रतिशत है। वर्ष 2017-18 व वर्ष 2016-17 में यह क्रमशः 51.89 व 48.44 प्रतिशत थी। बजट अनुमानों के अनुसार वर्ष 2018-19 में राज्य उत्पादन शुल्क से प्राप्त आय ृ1,426 करोड़ आंकी गई है।
वर्ष 2016-17 में प्रदेश का राजस्व आधिक्य प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 0.74 प्रतिशत तथा 2017-18 में राजस्व घाटे की प्रतिशतता कुल सकल घरेलू उत्पाद का 1.92 प्रतिशत रही।

3.संस्थागत् एवम् बैंक वित्

The हिमाचल प्रदेश राज्य में 12 जिले शामिल हैं। प्रदेश में तीन बैंकों को लीड बैंक की जिम्मेदारी दी गई है जिसमें पंजाब नैशनल बैंक को 6 जिलों हमीरपुर, कांगड़ा, किन्नौर, कल्लू मण्डी तथा ऊना में, यूको बैंक को 4 जिलां बिलासपुर, शिमला, सोलन तथा सिरमौर में तथा स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया को 2 जिलों चम्बा तथा लाहौल स्पिति में यह कार्य आबंटित किया गया है। यूको बैंक राज्य स्तर बैंकर्स समिति (एस.एल.बी.सी.) का संयोजक बैंक हैं। सितम्बर, 2018 तक राज्य में कुल 2,139 बैंक शाखाओं का नेटवर्क है और 80 प्रतिशत से अधिक शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रही है। अक्तूबर, 2017 से सितम्बर, 2018 तक 56 नई बैंक शाखाएं खोली गई हैं। वर्तमान में 1,724 शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में, 322 शाखाएं अर्ध शहरी क्षेत्रों में तथा 93 शिमला में स्थित हैं, शिमला को ही आर.बी.आई. द्वारा राज्य में केवल शहरी क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
जनगणना, 2011 के अनुसार प्रति शाखा औसत जनसंख्या 3,209 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 11,000 है। सितम्बर,2018 तक राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पी.एस.बी.) की कुल 1,190 शाखाओं का नेटवर्क है। जो कि राज्य में बैंकिंग क्षेत्र का कुल शाखा नेटवर्क का 55 प्रतिशत है। पंजाब नैशनल बैंक का सबसे बडा नेटवर्क 338 शाखाओं को है। उसके बाद स्टेट बैंक आफ इंडिया (ैठप्) की 329 शाखाएं है, यूको बैंक की 174 शाखाएं हैं। निजी क्षेत्रों के बैंकों का 140 शाखाओं का नेटवर्क हैं जिसमें सबसे अधिक उपस्थिति एच.डी.एफ.सी. की 67 शाखाओें के साथ है उसके उपरान्त आई.सी.आई.सी.आई. बैंक है जिसकी 31 शाखाएं हैं।
इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आर.आर.बी.) अर्थात् हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक (एच.पी.जी.बी.) को पंजाब नेशनल बैंक द्वारा प्रायोजित किया गया है। जिसमें सितम्बर, 2018 तक कुल 264 शाखाओं का शाखा नेटवर्क है। इसके अतिरिक्त सहकारी बैंकों का कुल 545 शाखाओं का नेटवर्क तथा राज्य एपैक्स सहकारी बैंक जोकि हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक (एच.पी.एस.सी.बी.) है, का 217 शाखाओं का नेटवर्क है कांगड़ा केन्द्रीय सैन्ट्रल बैंक (के.सी.सी.बी.) की 217 शाखाएं है। जिलेवार बैंक शाखाओं के प्रसार के संदर्भ में कांगड़ा जिले में सबसे अधिक 417 बैंक शाखाएं तथा लाहौल स्पिति में सबसे कम 23 बैंक शाखाएं हैं। विभिन्न बैंकों द्वारा अपनी बैंक सेवाओं को आगे बढ़ाते हुए 1,964 ए.टी.एम. स्थापित किए गए हैं। अक्तूबर, 2017 से सितम्बर, 2018 तक बैंकों ने 212 नए ए.टी.एम. स्थापित किए हैं।
बैंकों द्वारा दूर दराज के क्षेत्रों में जहां ब्रिक एवं मोर्टार शाखाएं आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं हैं बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने हेतु व्यापार संवाददाता एजेंटों (जिन्हें बैंक मित्र के रूप में जाना जाता है) को तैनात किया है। वर्तमान में गांवों में मूलभूत बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए विभिन्न बैंकों द्वारा 1,577 बैंक मित्र तैनात किए गए हैं। राज्य में सभी बैंकों में से पी.एन.बी., एस.बी.आई., यूको, केनरा बैंक का सम्पूर्ण नियंत्रण कार्यालय (अर्थात् क्षेत्रीय कार्यालय/ आंचलिक कार्यालय/ सर्किल कार्यालय) है। भारतीय रिर्जव बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय, क्षेत्रीय निदेशक की अध्यक्षता में स्थित है तथा नाबार्ड का भी क्षेत्रीय कार्यालय मुख्य महाप्रबन्धक की अध्यक्षता शिमला में स्थित है।
हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक सीमित, एक तीन स्तरीय अल्पावधि ऋण ढांचे का शीर्ष बैंक है। हिमाचल प्रदेश के 6 जिलों में के.सी.सी.बी. और जे.सी.सी.बी. केन्द्रीय बैक भी है। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की समस्त शाखाएं पूर्णतः सी.बी.एस. प्रणाली पर कार्यरत हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक, सहकारी क्षेत्र में नेशनल फाईनेंशियल स्विच से जुड़ने वाला देश का पहला बैंक है जिसके द्वारा बैंक के खाता धारक देश के किसी भी स्थान पर विद्यमान ए.टी.एम. का प्रयोग कर सकते हैं, बैंक सीधे तौर पर आर.टी.जी.एस. व एन.ई.एफ.टी. के माध्यम से कहीं भी पैसों का हस्तांतरण कर सकते हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक प्रदेश के छः जिलों में 218 शाखाएं और 23 विस्तार पटलों, जिनमें से अधिकतर प्रदेश के दूरवर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में हैं, के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहा है। बैंक ने अपने लगभग 99 ए.टी.एम. स्थापित किए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक से बैंक द्वारा 9 नई शाखाएं खोलने एवं 11 विस्तार पटलों को पूर्ण शाखाओं में स्तरोन्नत करने के लिए लाईसैंस जारी करने हेतु आवेदन किया है। बैक डोडरा क्वार तथा कमराऊ में कोषागार तथा एजेसी के तौर पर पूर्ण रूप से कार्य कर रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए पूरे प्रदेश में पैंशन देने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। बैंक रूपे (त्नच्ंल) के.सी.सी. कार्ड एवं डैबिट कार्ड जारी कर रहा है तथा अपने बहुमूल्य ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग, एस.एम.एस. अलर्ट एवं एफ.डी.आर. के लिये स्वतः नवीकरण की सुविधा भी उपलब्ध करवा रहा है। बैंक केन्द्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे कि पी.एम.जे.जे.बी.वाई. एवं पी.एम.एस.बी.वाइ. एवं पी.एम.एस.बी.वाइ., अटल पैशन योजना, मुख्यमन्त्री स्वावलम्बन योजना, मुख्यमन्त्री आजीविका योजना, एन.आर.एस.एल.एम.,पी.एम.ई.जी.पी. एवं पी.एम.मुद्रा. योजना लागू करने में भी पूर्णरूप से भाग ले रहा है। बैंक ने 84,991 ग्राहकों को भारत सरकार के सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पी.एम.जे.जे.बी.वाइ. तथा पी.एम.एस.बी.वाइ. में शामिल किया है।
राज्य के सामाजिक आर्थिक विकास के पहिये को बढ़ाने के लिए बैंक भागीदार के रूप में ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। ऋण का प्रवाह सभी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बढ़ाया गया है। सितम्बर, 2018 तक राज्य के बैंकों ने आर.बी.आई. द्वारा छः में से चार राष्ट्रीय मानकों जिस में प्राथमिक क्षेत्र, कृषि क्षेत्र, कमजोर वर्ग तथा महिलाओं को ऋण उपलब्ध करवाया है। वर्तमान में बैंकों द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र जैसे कृषि, एम.एस.एम.ई., शिक्षा ऋण, आवास ऋण, लघु ऋण आदि गतिविधियों करने के लिए कुल ऋण का 61.60 प्रतिशत ऋण दिया है।
बैंकों द्वारा बढ़ाए गए कुल ऋण में से सितम्बर, 2018 तक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित 18 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानकों के विरूद्ध 18.74 प्रतिशत कृषि अग्रिम राशि प्रदान की है। बैंको द्वारा कुल ऋण में कमजोर वर्गो तथा महिलाओं का क्रमशः 17.20 प्रतिशत तथा 6.98 प्रतिशत अग्रिम राशि का भाग है जोकि राष्ट्रीय मानकों के अनुसार क्रमशः 10 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत होनी चाहिए। राज्य में बैंकों का सितम्बर,2018 तक क्रेडिट जमा अनुपात 47.46 प्रतिशत पर स्थिर रहा। राष्ट्रीय मानकों की स्थिति नीचे सारणी 3.1 में दर्शाई गई है।
वित्तीय समावेशन हमारे समाज के अपवर्जित वर्गो और कम आय वाले समूहों के लिए वहन करने योग्य वित्तीय सेवाओं और उत्पादों के वितरण को दर्शाता है। भारत सरकार द्वारा देश भर में वित्तीय समावेश, व्यापक अभियान के अन्तर्गत् “प्रधान मन्त्री जन-धन योजना” का शुभारंभ करके हिमाचल प्रदेश में औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में अपवर्जित समाज के लिए किया गया है इस अभियान ने चार वर्ष पूरे कर लिए है। वित्तीय समावेश उपक्रम के अन्तर्गत नई पहलों से ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में समाज के कमजोर वर्ग, महिलाओं, दोनों छोटे और सीमांत किसानों तथा मजदूरों को शामिल किया गया है।
प्रधान मन्त्री जन-धन योजना (पी.एम.जे.डी.वाई.) :बैंकों द्वारा राज्य में प्रत्येक घर में कम से कम एक बुनियादी बचत जमा खाते के साथ समस्त परिवारों को सम्मिलित किया गया है। बैंको द्वारा कुल 10.69 लाख बुनियादी बचत जमा खाते (बी.एस.बी.डी.ए.) सितम्बर, 2018 तक खोले गए है। प्रधान मन्त्री जन-धन योजना के अर्न्तगत खोले गए कुल 10.69 लाख खातों में से 9.45 लाख बुनियादी बचत जमा खाते ग्रामीण क्षेत्रों में तथा 1.26 लाख शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। राज्य में बैंकों द्वारा पी.एम.जे.डी.वाई. खाताधारकों को 8.41 लाख रूपे (त्नच्ंल) डेबिट कार्ड जारी किए गए, जिससे पी.एम.जे.डी.वाई. अन्तर्गत् खोले गए खातों को 79 प्रतिशत तक शामिल कर लिया गया है। सितम्बर, 2018 तक बैंकों द्वारा 91 प्रतिशत पी.एम.जे.डी. वाई. खातों को आधार संख्या तथा मोबाइल नंबर के साथ सम्मिलित करने की पहल की है।
प्रधान मन्त्री जन-धन योजना के अन्तर्गत सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा पहलः प्रधान मन्त्री जन-धन योजना के कार्यान्वयन के द्वितीय चरण के अन्तर्गत भारत सरकार ने गरीबों तथा दलित व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा पहल के रूप में तीन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को शुरू किया है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित हैः-
सूक्ष्म बीमा योजनाएः
1) प्रधान मन्त्री सुरक्षा बीमा योजना (पी.एम.एस.बी.वाई.) :इस योजना के अन्तर्गत् 18 वर्श से 70 वर्श के आयु के सभी बचत बैंक खाताधारकों को प्रति वर्श ृ12.00 के प्रीमियम से प्रति ग्राहक को एक वर्श के नवीकरणीय पर आकस्मिक मृत्यु सह दिव्यांगता के लिए ृ2.00 लाख (आंशिक स्थायी दिव्यांगता के लिए ृ1.00 लाख) प्रदान कर रहा है तथा हर वर्ष 1 जून को नवीकरणीय होता है। प्रधान मन्त्री सुरक्षा बीमा योजना के अन्तर्गत् सितम्बर, 2018 तक बैंकों में 12.12 लाख ग्राहक है। विभिन्न बीमा कम्पनियों द्वारा इस योजना के अन्तर्गत् 353 बीमा दावों का निपटारा 7 दिसम्बर, 2018 तक किया गया है।
2) प्रधान मन्त्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पी.एम.जे.जे.बी.वाई) :इस योजना के अन्तर्गत् 18 वर्श से 50 वर्श के आयु के सभी बचत बैंक खाताधारकों को बैंक प्रति वर्श ृ330.00 के प्रीमियम से प्रति ग्राहक को एक वर्श के नवीकरणीय पर किसी भी कारण से हुई मृत्यु पर ृ2.00 लाख प्रदान कर रहा है तथा हर वर्ष 1 जून को नवीकरणीय होता है। सितम्बर, 2018 तक बैंकों में 3.24 लाख ग्राहक प्रधान मन्त्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पी.एम.जे.जे.वी.वाई.) के अन्तर्गत् है। 7 दिसम्बर, 2018 तक इस योजना के अन्तर्गत् लगभग 850 बीमा दावों का बीमा कम्पनियों द्वारा निपटारा किया गया है।
सूक्ष्म पेंशन योजना : अटल पेंषन योजना असंगठित क्षेत्र पर केंद्रित है तथा इस योजना के अन्तर्गत् ग्राहकों को 60 वर्श की आयु पर न्यूनतम पेंशन ृ1,000, ृ2,000, ृ3,000, ृ4,000 और ृ5,000 प्रति माह उपलब्ध करवाई जाती है, यदि ग्राहक ने 18 वर्श से 40 वर्श के दौरान अंशदान विकल्प के आधार पर चुना हो। इस प्रकार इस योजना के अन्तर्गत् ग्राहक द्वारा 20 वर्श या इससे अधिक की अवधि में अंशदान किया हो तो निर्धारित न्यूनतम पेंशन की गारंटी सरकार द्वारा दी जायेगी। यदि यह योजना बैंक खाताधारकों द्वारा निर्धारित आयु वर्ग में शुरू की गई हो तो केन्द्रीय सरकार द्वारा कुल अंशदान का 50 प्रतिशत या ृ1,000 प्रति वर्ष जो भी कम हो 5 वर्ष की अवधि के लिए उन ग्राहकों को दिया जाता है जो किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना का सदस्य न हो और न ही आयकर दाता हो।
1) राज्य सरकार ने अटल पेंशन योजना में अंशदान करने का भी प्रावधान किया है। एपीवाई के ग्राहकों के लिए राज्य सरकार की ओर से सह-योगदान किया जाएगा पात्र खातों में ग्राहक द्वारा कुल योगदान का 50 प्रतिशत या `2,000 जो भी कम हो। राज्य सरकार ने का बजटीय आवंटन किया है 2017-18 में हिमाचल प्रदेश में अटल पेंशन योजना के तहत पात्र श्रमिकों/ग्राहकों को कवर करने के लिए `10.00 करोड़। राज्य सरकार मनरेगा मजदूरों पर फोकस कर रही है. मध्याह्न भोजन कर्मी, कृषि और बागवानी मजदूर और आंगनवाड़ी कर्मी अटल पेंशन योजना अपनाएं। बैंकों ने इसके तहत आक्रामक जागरूकता अभियान पर फोकस किया है शिविरों, प्रेस मीडिया प्रचार आदि के माध्यम से योजना। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में, बैंकों ने सितंबर, 2018 तक योजना के तहत 81,236 से अधिक ग्राहकों को नामांकित किया है। डाक विभाग भी एपीवाई योजना में भाग ले रहा है और सितंबर, 2018 तक कुल 2,055 ग्राहक जुटाए हैं।
्रधान मन्त्री मुद्रा योजना : हिमाचल प्रदेश सहित देश भर में से चल रही है। वह सुक्ष्म उद्यम जो मुख्य रूप से विनिर्माण, व्यापार, सेवा और गैर-कृषि क्षेत्रों मे कार्यरत है तथा उनकी आवश्यकता ृ10.00 लाख से कम है को आय सृजन के लिए दिए जाने वाले ऋण को मुद्रा ऋण कहा जाता है। प्रधान मन्त्री मुद्रा योजना में इस श्रेणी के अन्तर्गत् आने वाले सभी अग्रिम जो 8.04.2015 को या इसके बाद इस योजना के अधीन आए हो, को मुद्रा ऋण के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
1) अटल पेंशन योजना में राज्य सरकार ने भी योगदान दिया है। राज्य सरकार द्वारा ए.पी.वाई. के पात्र खातों के ग्राहकों के सह-योगदान करेगी जो ग्राहक द्वारा कुल योगदान का 50 प्रतिशत हो या ृ2,000 से जो भी कम हो। अटल पेंशन योजना के अर्न्तगत् हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार ने श्रमिकों/ ग्राहकों के लिए वर्ष 2018-19 में ृ10.00 करोड़ के बजट का आवंटन किया है। राज्य सरकार मनरेगा श्रमिकों, मिड डे मील कार्यकर्ताओं, कृषि एवं बागवानी श्रमिकों तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अटल पेंशन योजना के अन्तर्गत लाने हेतु ध्यान दे रही है। इस योजना के अन्तर्गत बैंकों द्वारा आक्रामक जागरूकता अभियान शिविरों, मीडिया प्रचार, प्रेस इत्यादि के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अटल पेंशन योजना (ए.पी.वाई.) के अर्न्तगत् बैंकों द्वारा सितम्बर, 2018 तक 81,236 ग्राहकों को नामांकित किया गया है। सितम्बर, 2018 तक ए.पी.वाई. योजना के अन्तर्गत् डाक विभाग भी भाग ले रहा है तथा इनके माध्यम से कुल 2,055 ग्राहक संगठित किए गए हैं।
स्टैण्ड अप भारत योजना एस.यू.आई.एस. :
1) स्टैण्ड अप भारत योजना को देश भर में औपचारिक रूप से शुरू किया गया। स्टैण्ड अप योजना के अधीन समाज में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला प्रतिनिधित्वों द्वारा असेवित तथा कमसेवित क्षेत्रों मे उद्यमशीलता की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
2) इस योजना के अन्तर्गत् कम से कम एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति उधारकर्ता या कम से कम एक महिला उधारकर्ता को ृ10.00 लाख से लेकर ृ1.00 करोड़ का ऋण नए उद्यम को स्थापित करने के लिए प्रत्येक बैंक की शाखा द्वारा सुविधा दी जाती है। (इसे ग्रीन फील्ड उद्यम भी कहा जाता है) अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ महिला उद्यमी द्वारा विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्र में एक नए उद्यम की स्थापना के लिए ऋणों की सुविधा प्रदान की जाती है। सितम्बर, 2018 तक इस योजना के अर्न्तगत बैंकों द्वारा 982 नए उद्यमों को स्थापित करने के लिए ृ162.13 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।
वित्तीय जागरूकता और साक्षरता अभियानः
1) वित्तीय साक्षरता और जागरूकता अभियान, लक्षित समूहों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैंक हिमाचल प्रदेश में वित्तीय साक्षरता केन्द्रों (एफ.एल.सी.) तथा अपनी बैंक शाखाओं के माध्यम से वित्तीय साक्षता अभियान चला रहे है। लीड बैंक द्वारा प्रबंधित कुल 22 वित्तीय साक्षरता केन्द्र (एफ.एल.सी.) जैसे पी.एम.बी./ एस.बी.आई./ यूको बैंक तथा सहकारी क्षे़त्रों में, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक (एच.पी.एस.सी.बी.) जोगिन्द्रा सैन्ट्रल सहकारी बैंक (जे.सी.सी.बी.) तथा कागडं़ा सैन्ट्रल सहकारी बैंक (के.सी.सी.बी.) शामिल है। आर.बी.आई. द्वारा बैंक शाखाओं को नियमित आधार पर एक महीने में कम से कम एक बार एफ.एल.सी. कैंप का संचालन करने का निर्देश दिया है, ताकि डिजिटल साक्षरता की प्रगति पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा आर.बी.आई. द्वारा नियमित आधार पर एफ.एल.सी. की समीक्षा की जा सके।
राज्य के सभी बैंकों द्वारा जमा राशि सितम्बर, 2017 से सितम्बर, 2018 तक ृ1,03,355 करोड़ से बढ़कर ृ1,11,458 करोड़ सितम्बर, 2018 तक दर्ज की गई। बैंकों की जमा राशि में वर्ष दर वर्ष 7.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। कुल अग्रिम सितम्बर, 2017 में ृ35,882 करोड़ से बढ़ कर सितम्बर, 2018 तक ृ46,691 करोड़ हो गए। इस प्रकार सितम्बर, 2018 तक वर्ष दर वर्ष वृद्धि 30.12 प्रतिशत रही। कुल बैंकिंग कारोबार ृ1,58,149 करोड़ तक बढ़ गया तथा वर्ष दर वर्ष वृद्धि 13.58 प्रतिशत दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बैंकों ने नाबार्ड की सहायता से, क्षमता के आधार पर विभिन्न प्राथमिकता क्षेत्र की गतिविधियों के लिए वार्षिक जमा योजना तैयार कर नए ऋण अदा किए गए हैं। वार्षिक जमा योजना 2018-19 के अधीन पिछली योजना के विŸाय परिव्यय में 6.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा ृ23,549 करोड़ परिव्यय का लक्ष्य तय किया गया। सितम्बर, 2018 तक बैंको ने वार्षिक जमा योजना के अन्तर्गत ृ10,502 करोड़ के नए ऋण वितरित किए तथा 44.60 प्रतिशत की वार्षिक प्रतिबद्धता हासिल की। क्षेत्रवार लक्ष्य तथा उपलब्धि सितम्बर, 2018 तक सारणी 3.3 में दर्शाई गई है।
राश्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम.) : ग्रामीण मन्त्रालय द्वारा भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रम को गरीबों में गरीबी कम करने के लिए मजबूत संस्थानों का निर्माण विशेषकर महिलाओं को समर्थ करने के लिए, नई वित्तीय सेवाओं और आजीविका सेवाओं को पहुंचाने के लिए शुरू किया गया है। इस योजना को राज्य में हि0प्र0 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कार्यान्वित किया गया है। राज्य में इस योजना के अन्तर्गत् बैंकों द्वारा ृ60.00 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य 5,400 लाभार्थियों में आवंटित करके अर्जित किया है। 7 दिसम्बर, 2018 तक एन.आर.एल.एम. योजना के अन्तर्गत् बैंको ने ृ25.55 करोड़ के ऋण की स्वीकृति दी है।
राश्ट्रीय षहरी आजीविका मिशन कार्यक्रम (एन.यू.एल.एम.) :भारत सरकार, आवास मन्त्रालय और शहरी गरीबी उन्मूलन (एम.ओ.एच.यू.पी.ए.) ने मौजूदा स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (एस.जे.एस.आर.वाई.) को पुनर्गठित किया और राष्ट्रीय शहरी जीविका मिशन (एन.यू.एल.एम.) को शुरू किया। स्वयं रोजगार कार्यक्रम (एस.ई.पी.) एन.यू.एल.एम. के घटकों (4 घटकों) में से एक है जो व्यक्तिगत और समूह उद्यमों तथा शहरी गरीबों के स्वयं सहायता समूहों (एस.एच.जी.) की स्थापना के लिए ऋणों पर ब्याज अनुदान के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित करेगा। एन.यू.एल.एम. हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास विभाग के ृ10.00 करोड़ के अंशदान से स्वयं रोजगार कार्यक्रम (एस.ई.पी.) के घटक डे-एन.यू.एल.एम. को वर्ष 2018-19 में हिमाचल प्रदेश में लागू किया गया। इस योजना के अंतर्गत् बैंकों द्वारा अक्तूबर, 2018 तक ृ2.67 करोड़ के ऋण वितरित किए गए है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पी.एम.ई.जी.पी.) :्रधानमन्त्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पी.एम.ई.जी.पी.) एक क्रेडिट लिंक्ड अनुदान कार्यक्रम है जो कि भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मन्त्रालय द्वारा प्रशासित है। इस योजना के कार्यन्वयन के लिए खादी एवं ग्रामोउद्योग (के.वी.आई.सी.) राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी है। राज्य स्तर पर के.वी.आई.सी., के.वी.आई.बी. तथा जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से यह योजना कार्यान्वित की जाती है। इस योजना के अन्तर्गत् बैंकों द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1,085 नई इकाइयों के वित्तपोषण का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के अन्तर्गत् कार्यान्वयन शाखाओं ने ृ27.11 करोड़ का मार्जिन राशि के वितरण का लक्ष्य रखा है। 686 इकाइयों के लिए उद्यमियों को ृ22.65 करोड़ सितम्बर, 2018 तक स्वीकृत किये गये हैं।
डेयरी उद्यमी विकास योजना (डी.ई.डी.एस.): नाबार्ड के माध्यम से डेयरी उद्यमशीलता विकास योजना (डी.ई.डी.एस.) कृषि और किसान कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा डेयरी क्षेत्र की गतिविधियों के लिए लागू की गई है। नाबार्ड के माघ्यम से इस योजना के अन्तर्गत् पूंजीगत अनुदान प्रशासित किया जाता है। बैंकों द्वारा सितम्बर, 2018 तक ृ4.21 करोड़ की राशि से 139 प्रस्तावों को (डी.ई.डी.एस.) स्वीकृति दी है।नाबार्ड के माध्यम से डेयरी उद्यमशीलता विकास योजना (डी.ई.डी.एस.) कृषि और किसान कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा डेयरी क्षेत्र की गतिविधियों के लिए लागू की गई है। नाबार्ड के माघ्यम से इस योजना के अन्तर्गत् पूंजीगत अनुदान प्रशासित किया जाता है। बैंकों द्वारा सितम्बर, 2018 तक ृ4.21 करोड़ की राशि से 139 प्रस्तावों को (डी.ई.डी.एस.) स्वीकृति दी है।
किसान क्रेडिट कार्ड: किसानों को बैंकिंग प्रणाली क अन्तर्गत अल्पकालिक ऋण, फसलों की खेती तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए एक ही स्थान एंव समय पर पर्याप्त ऋण बैंकों की ग्रामीण शाखाओं द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड (के.सी.सी.) के माध्यम से दिया जा रहा है। सितम्बर, 2018 तक बैंकों द्वारा 82,282 किसानों को ृ1,493 करोड़ की राशि नये के.सी.सी. के माध्यम से वितरित की गई है। सितम्बर, 2018 तक बैंकों द्वारा कुल 4,28,763 किसानों को के.सी.सी.योजना के अन्तर्गत् ृ6,268 करोड़ की राशि से वित्तोपोषण किया गया हैं
ग्रामीण स्वयं रोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर.एस.ई.टी.आई.) :जिला स्तर पर ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देने, कौशल उन्नयन के लिए एवं उद्ययमिता विकास हेतु बुनियादी ढाचे के लिए ग्रामीण विकास मन्त्रालय (एम.ओ.आर.डी.) की पहल पर ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर.एस.ई.टी.आई.) योजना चला रहा है। आर.एस.ई.टी.आई का प्रबन्धन ग्रामीण विकास मन्त्रालय तथा हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के सक्रिय सहयोग द्वारा किया जाता है। राज्य के 10 जिलों (लाहौल-स्पिति, किन्नौर छोड़कर) में अग्रणी बैंक जिनमें यूको बैंक, पी.एन.बी. व स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (आर.एस.ई.टी.आई.) का गठन किया है। यह ग्रामीण स्वंय रोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर.एस.ई.टी.आई.) प्रधानमन्त्री रोजगार सृजन (पी.एम.ई.जी.पी.) योजना व विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत गरीबी उन्मूलन तथा उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आर.एस.ई.टी.आई. ने वर्ष 2018-19 में कुल 233 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन का लक्ष्य रखा है तथा 6,265 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
बैंक खातों के साथ आधार लिंकेज के लिए विशेष अभियान तथा सभी मौजूदा बैंक खाते में आधार का सत्यापन
हिमाचल प्रदेश में विभिन्न बैंकों द्वारा आधार नामांकन और अद्यतन (अपडेट) के लिए 156 केन्द्रों को चिन्हित किया है।
राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक ;नाबार्डद्ध ने पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण संरचना विकास, लघु ऋण, ग्रामीण गैर कृषि क्षेत्र, लघु सिंचाई तथा अन्य कृषि क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त ऋण वितरण व्यवस्था में सुदृढ़ीकरण व विस्तृतीकरण करके एकीकृत ग्रामीण विकास प्रक्रिया में निरन्तर सहयोग दिया है। नाबार्ड के सक्रिय सहयोग के कारण राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बहुत से सामाजिक व आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहे हैं। नाबार्ड अपनी योजनाओं के अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा प्रायोजित ऋण युक्त अनुदान, योजनाएं जैसे डेरी उद्यमिता विकास योजना ;डी.ई.डी.एस.द्धए सौर योजनाएं तथा एग्रीक्लिनिक एवं कृषि व्यापार केन्द्रों, को भी प्रभावी ढंग से कार्यान्वित कर रहा है।
भारत सरकार द्वारा नाबार्ड में वर्ष 1995-96 में ग्रामीण संरचना विकास निधि आर.आई.डी.एफ. की स्थापना की गई थी। इस योजना के अन्तर्गत् राज्य सरकारों तथा राज्य के स्वामित्व वाले निगमों की चल रही योजनाओं को पूर्ण करने तथा कुछ चुने हुए क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए रियायती ऋण दिए जाते हैं। किसी स्थान से सम्बन्धित विशेष संरचना ढांचे के विकास, जिसका सीधा असर समाज व ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था पर हो, के लिए इस योजना का विस्तार पंचायती राज संस्थाओं, स्वंय सहायता समूहों तथा गैर सरकारी संगठनों तक भी कर दिया गया है।
ग्रामीण आधार संरचना विकास (आर.आई.डी.एफ.) निधि के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों व बुनियादी ढांचे का विकास किया जाता है, 1995-96 में इसकी शुरुआत से ही, यह राज्य सरकारों की साझेदारी में नाबार्ड के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरा है। इस हेतु केन्द्रीय बजट में वार्षिक आबंटन हर वर्ष जारी रखा गया है। इस व्यवस्था के अर्न्तगत् नाबार्ड द्वारा राज्य सरकारों तथा राज्य के अधीन आने वाले निगमों को चालू परियोजनाओं को पूरा करने व कुछ चिन्हित क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए ऋण दिया जाता है। प्रारम्भ में आर.आई.डी.एफ. निधि का उपयोग राज्य सरकार की सिंचाई क्षेत्र की अधूरी पड़ी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता रहा है परन्तु समय के साथ-साथ इस निधि के उपयोग से विŸाय सहायता का क्षेत्र विस्तृत करके 3़7 कार्यकलापों जिनमें कृषि तथा संबंधित क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र तथा ग्रामीण सम्पर्क सम्बन्धित आधारभूत कार्यकलाप भी शामिल है।
इस निधि के अन्तर्गत वर्ष 1995-96 में आर.आई.डी.एफ-प् में ृ15.00 करोड़ का बजट प्रावधान था जो अब बढ़कर आर.आई.डी.एफ-ग्ग्प्ट में (वर्ष 2018-19) में ृ544.21 करोड़ हो गया है। आर.आई.डी.एफ. ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिंचाई, सड़कें तथा पुल निर्माण, बाढ़ नियन्त्रण, पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक शिक्षा, पशुधन सेवाएं, जलागम विकास तथा सूचना प्रौद्योगिकी इत्यादि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही के वर्षो में पॉली हाउस व सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आदि नवीन परियोजनाओं के विकास के लिए भी सहायता प्रदान की है जो व्यावसायिक आधार, पर कृषि व्यवसाय और सतत खेती के विकास के लिए नई दिशा है।
आर.आई.डी.एफ. निधि के अर्न्तगत् राज्य को दिसम्बर,2018 तक 5,603 परियोजनाओं को लागू करने के लिए ृ7,342 करोड़ की स्वीकृति दी जा चुकी है जिनमें मुख्यतः ग्रामीण सड़कें, पुल, सिंचाई, पेयजल, शिक्षा, आदि की परियोजनाएं भी शामिल हैं जिन्हें स्वीकृति दी है। चालू विŸा वर्ष 2018-19 के अन्तर्गत् दिसम्बर, 2018 तक आर.आई.डी.एफ-ग्ग्प्ट के अन्तर्गत ृ544ण्00 करोड़ की स्वीकृति दी जा चुकी है तथा राज्य सरकार को 19.12.2018 तक ृ363.00 करोड़ वितरित किए गए़ तथा अब तक कुल मिलाकर ृ5,059 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
स्वीकृत की गई इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद 46.06 लाख से अधिक लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करवाया जाएगा, 8,708 किलोमीटर मोटर योग्य सड़कें, 3,335 मीटर स्पैन पुलों के निर्माण तथा 1,33,112 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।
इसके अतिरिक्त 27,317 हैक्टेयर भूमि का बचाव, बाढ़ नियन्त्रण परियोजनाओं से होगा, 6,219 हैक्टेयर भूमि जलागम विकास योजनाओं में शामिल होगी। कृषि खेती हेतु 231 हैक्टेयर भूमि को सू़क्ष्म सिंचाई पद्धति के साथ पॉली हाउस के अर्न्तगत् लाया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्राथमिक स्कूलों के लिए 2,921 कमरे, वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के लिए 64 विज्ञान प्रयोगशालाएं, 25 सूचना तकनीक केन्द्र तथा 397 पशु चिकित्सालयों एवं कृत्रिम गर्भाकरण केन्द्रों का निर्माण पहले ही किया जा चुका है।
वर्ष 2011-12 से नाबार्ड ने राज्य सरकार के संस्थाओं/निगमों के लिए सतत आय के स्त्रोतों ऋण की एक अलग व्यवस्था की है यह व्यवस्था बजट के माध्यम से तथा इसके बिना भी हो सकती है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों मे आधार सरंचना तैयार की जा सके। ऋण की यह व्यवस्था आर.आई.डी.एफ. ऋण की व्यवस्था से बाहर है। इस निधि के आने से गैर परम्परागत क्षेत्रों में ग्रामीण अधोसंरचना तैयार करने हेतु संभावनाएं खुली हैं। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के दायरे को बढ़ाने के लिए नीडा के तहत सार्वजनिक व निजी साझेदारी से वित्तपोषण करने पर बल दिया जा रहा है। ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं जिनसे बड़े पैमाने पर ग्रामीण क्षेत्र्रों को लाभ मिलता हो और आर.आई.डी.एफ. और रूरबन मिशन के तहत भारत सरकार/ भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित गतिविधियां भी र्सावजनिक एवं निजी सहयोग के तहत वित्तपोषण के लिए पात्र हैं। दिसम्बर, 2018 तक नीडा के अंतर्गत हि0प्र0 पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड को विद्युत सब स्टेशन एवं संबधित ट्रांसमिशन लाईन के निर्माण हेतु ृ101.00 करोड़ स्वीकृत किए गए है।
खाद्य प्रसंस्करण निधि (FPF): नाबार्ड ने `2,000 करोड़ के कोष के साथ एक खाद्य प्रसंस्करण निधि की स्थापना की है के लिए वर्ष 2014-15 नामित खाद्य पार्कों की स्थापना और व्यक्तिगत खाद्य/कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए देश में खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करने के लिए क्लस्टर आधार पर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से नामित खाद्य पार्कों में कृषि उपज और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना। क्रेमिका मेगा फूड पार्क प्रा. लिमिटेड सिंघा, ऊना के साथ स्थापित की जा रही है फंड के तहत `32.94 करोड़ की वित्तीय सहायता, जिसमें से दिसंबर, 2018 तक `29.65 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
पुनर्वित्त सहायता: नाबार्ड ने 2017-18 के दौरान `1,904 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता दी और दिसंबर, 2018 तक 2018-19 के दौरान राज्य में कार्यरत बैंकों को विभिन्न गतिविधियों के लिए पुनर्वित्त संवितरण का विस्तार करके कुल `734.45 करोड़ मिले। ग्रामीण आवास, छोटे सड़क परिवहन संचालक, भूमि विकास, लघु सिंचाई, डेयरी विकास, स्वयं सहायता समूह, कृषि मशीनीकरण, मुर्गीपालन, वृक्षारोपण और बागवानी, भेड़/बकरी/सूअर पालन, पैकिंग और ग्रेडिंग हाउस गतिविधि और अन्य क्षेत्रों में 2018-19 के दौरान दिसंबर तक `226.45 करोड़ का निवेश हुआ। 2018. नाबार्ड ने अल्पकालिक एसटी (एसएओ) क्रेडिट सीमा को मंजूरी देकर राज्य में फसल ऋण वितरण के लिए सहकारी बैंकों और आरआरबी के प्रयासों को भी पूरक बनाया। `930.00 करोड़ की, जिसके विरुद्ध बैंकों ने मार्च, 2018 को `885.00 करोड़ की पुनर्वित्त सहायता प्राप्त की है। 2018-19 के दौरान `720.00 करोड़ की क्रेडिट सीमा थी स्वीकृत किया गया और इसके विरुद्ध दिसंबर, 2018 तक कुल `508.26 करोड़ का वितरण किया गया है।
माइक्रो क्रेडिट: स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आंदोलन फैल गया है पूरे राज्य में और अब एक मजबूत आधार पर है। मानव संसाधन और वित्तीय उत्पादों में समर्थन के साथ आंदोलन को बढ़ाया गया है। हिमाचल प्रदेश में संचयी राज्य में कुल ऋण वाले 13.12 लाख ग्रामीण परिवारों की तुलना में 7.12 लाख ग्रामीण परिवारों को कवर करने वाले ऋण से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की संख्या 49,353 थी। मार्च, 2018 तक `99.30 करोड़ का बकाया। महिला स्वयं सहायता समूह कार्यक्रम नाबार्ड द्वारा स्थानीय गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से दो जिलों में कार्यान्वित किया जा रहा है। मंडी, सिरमौर के साथ `29.55 करोड़ की अनुदान सहायता और क्रमशः 1,500 और 1,455 महिला एसएचजी के गठन और क्रेडिट लिंकेज का लक्ष्य। दिसंबर, 2018 तक, संचयी 2,934 महिला स्वयं सहायता समूहों को बचत से जोड़ा गया है और 2,714 महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण से जोड़ा गया है।
केंद्रीय बजट 2014-15 में संयुक्त कृषि समूहों "भूमि हीन किसान" (भूमिहीन किसान) के वित्तपोषण की घोषणा ने और अधिक विश्वसनीयता प्रदान की है वित्तपोषण के संयुक्त देयता समूह मोड के माध्यम से भूमिहीन किसानों तक पहुँचने और नवाचार करने में नाबार्ड के प्रयास के लिए। मार्च, 2018 तक लगभग राज्य में बैंकों द्वारा 3,338 संयुक्त देयता समूह उपलब्ध कराये गये हैं। "स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज कार्यक्रम" और "संयुक्त देयता समूह" के प्रचार-प्रसार के लिए योजना नाबार्ड राज्य में लगभग 50 स्वयं सहायता संवर्धन संस्थानों/संयुक्त देयता संवर्धन संस्थानों के साथ साझेदारी कर रहा है। वर्ष 2017-18 के दौरान, नाबार्ड ने हिमाचल को `10.00 लाख स्वीकृत किए हैं 3 वर्षों की अवधि में 500 जेएलजी के प्रचार और क्रेडिट लिंकेज के लिए प्रदेश ग्रामीण बैंक। इसके अलावा, नाबार्ड छोटी अवधि के कौशल विकास की सुविधा प्रदान करता है बैंकों से ऋण सुविधा प्राप्त करने वाले एसएचजी सदस्यों के लिए प्रशिक्षण। 2017-18 के दौरान, 33 सूक्ष्म उद्यमिता विकास कार्यक्रम (एमईडीपी) विभिन्न एसएचपीआई भागीदारों को मंजूरी दे दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप 910 एसएचजी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से आजीविका गतिविधि शुरू करने के लिए प्रशिक्षण मिला है। या समूह मोड में. इसके अलावा, वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 150 एसएचजी सदस्यों के प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास के लिए एक आजीविका उद्यम विकास कार्यक्रम (एलईडीपी) स्वीकृत किया गया है।
दिसम्बर, 2018 तक राज्य में 3,183 कृषक संघ बनाए गए हैं जिनके अर्न्तगत् 6,041 गांवों में 39,136 कृषकों को लाभ पहुंचाया गया है। जिला सिरमौर तथा बिलासपुर जिले में कृषक महासंघों का गठन किया गया है, जो कृषकों के कल्याण हेतु कार्य कर रहे हैं।
ए) वाटरशेड विकास: नाबार्ड, हिमाचल प्रदेश, क्षेत्रीय कार्यालय ने दिसंबर तक 13 वाटरशेड परियोजनाओं और दो स्प्रिंगशेड परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 2018. अब तक, परियोजनाओं के तहत `12.21 करोड़ की स्वीकृत राशि के मुकाबले `7.90 करोड़ की राशि वितरित की जा चुकी है। साल के दौरान 2017-18 में `1.49 करोड़ की राशि जारी की गई। सभी परियोजनाएं संयुक्त रूप से लगभग 15,933 हेक्टेयर क्षेत्र और 7,230 घरों को कवर करती हैं 136 गांव. इन परियोजनाओं के परिणामस्वरूप न केवल पानी की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र साबित होगा संरक्षण के अलावा किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि और घटते चरागाहों का संरक्षण, जिससे पशुपालन में भी सुविधा होगी।
बी) जनजातीय विकास निधि (टीडीएफ) के माध्यम से जनजातीय विकास: नाबार्ड, क्षेत्रीय कार्यालय, शिमला ने दिसंबर, 2018 तक `8.74 करोड़ की राशि सहित 5 जनजातीय विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। `8.17 करोड़ की अनुदान सहायता और 1,725 परिवारों को कवर करते हुए `56.30 लाख की ऋण सहायता। इन परियोजनाओं का उद्देश्य वाडी (छोटे बगीचे) की स्थापना करना है। आम, किन्नू, नींबू, सेब, अखरोट, नाशपाती, जंगली खुबानी के वृक्षारोपण के लिए लगभग 1,149 एकड़ क्षेत्र को कवर करने वाले चयनित गांवों में डेयरी इकाइयों के साथ-साथ। उम्मीद है कि परियोजनाओं से आदिवासियों को वाडी और डेयरी पहल के माध्यम से अपनी आय का स्तर बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
सी) फार्म सेक्टर प्रमोशन फंड (एफएसपीएफ) के माध्यम से सहायता: एफएसपीएफ के तहत, 23 परियोजनाओं और 17 सेमिनारों/कार्यशालाओं/मेलों/एप्पल प्रदर्शनी को वित्त पोषित किया गया है। अब तक `1.93 करोड़ की अनुदान सहायता के साथ। अब तक दिसंबर, 2018 तक इस उद्देश्य के लिए `1.47 करोड़ की अनुदान सहायता जारी की गई है। ये परियोजनाएं स्वदेशी शहद मधुमक्खी (एपिस सेरेना) के पालन के लिए स्थिर मधुमक्खी छत्ते के सत्यापन और प्रचार, प्रणाली के प्रचार और प्रतिकृति से संबंधित हैं। सतत आजीविका के लिए चावल गहनता (एसआरआई) विधि, गेहूं गहनता प्रणाली, संरक्षण पर ध्यान देने के साथ कृषि विकास के लिए परियोजना चिलगोज़ा पाइंस, औषधीय और सुगंधित और मसाला फसलों की खेती, टिकाऊ खेती और किसानों के लिए विदेशी सब्जियों का प्रचार और उत्पादन दूर-दराज के क्षेत्रों में शीतोष्ण फलों के उत्पादन और संरक्षण प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण और प्रदर्शन। परियोजनाओं और एस के माध्यम से सेमिनारों/कार्यशालाओं/मेलों से लगभग 30,000 किसान लाभान्वित हुए हैं।
घ) किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को बढ़ावा देना: कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने 2,000 किसान उत्पादकों के गठन के लिए `200 करोड़ का बजट आवंटित किया है देश में संगठन. हिमाचल प्रदेश राज्य में, नाबार्ड ने शिमला, मंडी में 53 एफपीओ के गठन/प्रचार के लिए 17 गैर सरकारी संगठनों को `4.80 करोड़ का अनुदान मंजूर किया है। किन्नौर, सिरमौर, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, कुल्लू और सोलन जिले। ये एफपीओ सब्जियों, औषधीय और सब्जियों के उत्पादन, प्राथमिक प्रसंस्करण और विपणन का कार्य करेंगे। एकत्रीकरण के आधार पर सुगंधित पौधे और फूल। दिसंबर, 2018 तक `3.41 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके अतिरिक्त, कम लागत दृष्टिकोण मॉडल के तहत, नाबार्ड ने `45.36 लाख की अनुदान सहायता के साथ 23 नए एफपीओ को मंजूरी दी गई।
ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र: नाबार्ड ने ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र को अपने प्रमुख क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना है। विकास। यह वाणिज्यिक बैंकों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान कर रहा है/ राज्य में ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र के विकास के लिए आरआरबी और सहकारी बैंक। नाबार्ड पुनर्वित्त के माध्यम से स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड (एससीसी) योजना का भी समर्थन कर रहा है कार्यशील पूंजी या ब्लॉक पूंजी या दोनों के लिए समय पर और पर्याप्त ऋण का प्रावधान रखकर ग्रामीण कारीगरों और अन्य छोटे उद्यमियों को लाभ पहुंचाना उन्हें। ग्रामीण गैर-कृषि उत्पादों के उत्पादन और विपणन के लिए पुनर्वित्त प्रदान करने के अलावा, नाबार्ड कौशल को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहा है। ग्रामीण युवाओं के बीच उद्यमिता विकास, मास्टर क्राफ्ट्समैन द्वारा प्रशिक्षण, ग्रामीण विकास और स्व-रोज़गार प्रशिक्षण संस्थान। RUDSETI प्रकार के संस्थान ग्रामीण युवाओं को रोजगार और आय सृजन की क्षमता वाली विभिन्न गतिविधियों में प्रशिक्षित करने में लगा हुआ है। कौशल विकास पहल में विकास, उन्नयन या की परिकल्पना की गई है ग्रामीण क्षेत्रों में समूह या व्यक्तिगत रूप से मजदूरी रोजगार या आजीविका के अवसरों की तलाश कर रहे लोगों के मौजूदा कौशल में विविधता लाना। संचयी संख्या मार्च, 2018 तक राज्य में स्वीकृत एसडीपी की संख्या 233 थी, जिसमें अनुदान सहायता शामिल थी
ग्राउंड लेवल क्रेडिट फ्लो: प्राथमिकता क्षेत्र के लिए 2017-18 के दौरान ग्राउंड लेवल पर क्रेडिट प्रवाह एकत्रित हुआ। 13,278 करोड़, जो 2016-17 की तुलना में 2.17 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। नाबार्ड द्वारा तैयार संभावित लिंक्ड क्रेडिट योजनाओं के आधार पर विभिन्न बैंकों के लिए 2018-19 का लक्ष्य `22,389 करोड़ निर्धारित किया गया है। सितंबर, 2018 में इसके मुकाबले उपलब्धि 7,962 करोड़ रुपये थी. नाबार्ड राज्य के सभी जिलों के लिए वार्षिक आधार पर जिला स्तरीय संभावित लिंक्ड क्रेडिट प्लान (पीएलपी) तैयार कर रहा है, जो वास्तविक रूप से जमीनी स्तर की संभावनाओं को दर्शाता है, साथ ही परिकल्पित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्रेडिट और गैर-क्रेडिट लिंकेज को भी दर्शाता है। . पीएलपी विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा/बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। राज्य सरकार, जिला प्रशासन, बैंक, गैर सरकारी संगठन, किसान और अन्य संबंधित एजेंसियां। चौड़ा हिमाचल प्रदेश के लिए 2019-20 के लिए क्षेत्रवार पीएलपी अनुमान `23,631 करोड़ आंका गया है।
वित्तीय समावेश की मुख्य धारा की वित्तीय संस्थाओं द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सस्ती कीमत पर समाज के सभी वर्गो और विशेष रूप से कमजोर वर्गो और निम्न आय वर्ग को उचित वित्तीय उत्पाद और सेवाएं उपलब्घ करवाने की प्रक्रिया है। देश में वित्तीय समावेश को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने वित्तीय समावेशन कोष (एफ.आई.एफ.) का गठन किया है। वित्तीय समावेशन अभियान को बड़े पैमाने पर संचालित करने के लिए एफ.आई.एफ. के अर्न्तगत् नाबार्ड द्वारा हिमाचल प्रदेश में संचालित किया गया है।
एफ.आई.एफ.का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर वर्गों, कम आय वाले समूहों तथा पिछड़े क्षेत्रों, बैंक रहित क्षेत्रों में अधिक से अधिक वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए “विकास और प्रचार गतिविधियां” को सहायता प्रदान करना है। नाबार्ड विकास और प्रचार-प्रसार सम्मेलनों के लिए एफ.आई.एफ. का प्रबन्धन कर रहा है। राज्य के बैंकिंग संरचना को मजबूत बनाने एंव वित्तीय साक्षरता वृद्धि करने हेतु वर्ष 2018-19 के दौरान नाबार्ड द्वारा विभिन्न बैंकों एवं गैर सरकारी संगठनों को ृ6.49 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गयी, वर्तमान में एफ.आई.एफ. के तहत दी गई कुल संचयी सहायता निम्न प्रकार है।
i) केन्द्रीयके.वाई.सी. (सी.के.वाई.सी) :गत वर्ष में नाबार्ड द्वारा ग्रामीण बैंक एवं सहकारी बैंको के सर्वर में केन्द्रीय के.वाई.सी. रिकार्ड रजिस्ट्री के संचालन हेतु ृ15.60 लाख की सहायता स्वीकृत की गई है
ii) डिजिटल कार्यक्रम की ओर अग्रसर: वित्तीय जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नाबार्ड ने वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंक के लिए 6,420 वित्तीय साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम स्वीकृत किए हैं। और आरआरबी को `3.21 करोड़ की संचयी मंजूरी के साथ।
iii) राज्य के कनेक्टिविटी मुद्दों को संबोधित करना: राज्य के कनेक्टिविटी मुद्दों को संबोधित करने के लिए, सौर ऊर्जा संचालित वी-सैट / गैर-सौर ऊर्जा संचालित की स्थापना कैपेक्स या ओपेक्स मॉडल पर वी-सैट लिया गया। इस संबंध में, नाबार्ड ने एसबीआई, पीएनबी, यूको और एचपीजीबी बैंकों के 247 उप सेवा क्षेत्रों को कवर करने के लिए `5.36 करोड़ मंजूर किए हैं।
iv) ऑडियो जिंगल्स के माध्यम से वित्तीय जागरूकता: नाबार्ड ने ऑल इंडिया रेडियो, बिग एफएम रेडियो मिर्ची और हिमाचल हरिजन को `32.40 लाख की संचयी मंजूरी दी है। कल्याण संस्था हिमाचल प्रदेश में ऑडियो जिंगल के प्रसारण के माध्यम से वित्तीय जागरूकता फैलाने के लिए।
v) बैंक सखी मॉडल:नाबार्ड ने एक परियोजना को मंजूरी दी है एचपीजीबी, मंडी को 50 बैंक सखियां, जिसमें 14.50 लाख की राशि शामिल है, जिसमें एसएचजी नेता/सदस्य गांवों में बीसी एजेंटों के रूप में काम करेंगे, जिससे वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य में समावेशन अभियान.
vi) कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा:
a) नाबार्ड ने एचपीजीबी को `1.20 करोड़ मंजूर किए हैं हिमाचल प्रदेश के 1,000 गांवों में 2,000 पीओएस मशीनें तैनात की जा रही हैं।
b) नाबार्ड ने हिमाचल प्रदेश में सभी 10 आरएसईटीआई को पूंजीगत व्यय यानी प्रशिक्षण उपकरण खरीदने और उसके रखरखाव के लिए `30.00 लाख का समर्थन दिया है।
c) नाबार्ड रूपे किसान क्रेडिट के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में 1.24 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारकों का कवरेज भी सुनिश्चित करेगा, जिससे किसान सक्षम होंगे। अर्थव्यवस्था के कैशलेस मोर्चे की ओर बढ़ें।
d) नाबार्ड ने डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए अपनी शाखाओं में 263 माइक्रो एटीएम स्थापित करने के लिए एचपीजीबी को `65.75 लाख का समर्थन भी दिया है और मोबाइल को भी मंजूरी दे रहा है। राज्य में डिजिटल बैंकिंग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सहकारी बैंकों और आरआरबी को डेमो वैन।
उत्पादक संगठनों को वित्तीय सहायता (PODF): उत्पादक संगठनों को समर्थन और वित्त प्रदान करने के लिए, नाबार्ड ने "की स्थापना की है उत्पादक संगठन विकास निधि” फंड का उद्देश्य पंजीकृत उत्पादक संगठन अर्थात उत्पादक कंपनी, उत्पादक सहकारी समितियां, पंजीकृत किसान संघों का समर्थन करना है। उत्पादकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादकों द्वारा स्थापित पारस्परिक सहायता प्राप्त सहकारी समितियां, औद्योगिक सहकारी समितियां, अन्य पंजीकृत संघ, पीएसीएस आदि। (किसान, कारीगर, हथकरघा बुनकर, आदि) समय पर ऋण (ऋण और सीमित अनुदान का मिश्रण) प्रदान करके, उत्पादकों की क्षमता निर्माण, उत्पादकों को मजबूत करना। संगठन. दिसंबर, 2018 तक नाबार्ड द्वारा कुल `4.50 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
बहु सेवा गतिविधियों को शुरू करने के लिए PACS को वित्तीय सहायता: PACS को अधिक सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाने के लिए उनके सदस्य और स्वयं के लिए आय उत्पन्न करने के लिए, PACS को अपने सदस्यों को सहायक सेवाएं प्रदान करने और सक्षम बनाने के लिए बहु सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। अतिरिक्त व्यावसायिक रास्ते और अपनी गतिविधियों में विविधता लाना। दिसंबर, 2018 तक नाबार्ड द्वारा कुल `4.89 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
महासंघों को वित्तीय सहायता: विपणन और अन्य कृषि गतिविधियों में विपणन महासंघों/सहकारिताओं को मजबूत करने के लिए क्रेडिट की एक अलग लाइन, अर्थात। कृषि उपज और अन्य उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए विपणन संघों/सहकारी समितियों को ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कृषि गतिविधियाँ. पैक्स और अन्य उत्पादक संगठनों वाले विपणन संघ/सहकारिताएं, सदस्य/शेयरधारक के रूप में इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं। वित्तीय सहायता न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना (एमएसपी) के तहत फसल खरीद और बीज, उर्वरक, कीटनाशकों की आपूर्ति के लिए अल्पकालिक ऋण के रूप में उपलब्ध होगी। किसानों को पौधों की सुरक्षा, आदि और फसल कटाई के बाद छंटाई और ग्रेडिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, विपणन आदि सहित दीर्घकालिक ऋण के रूप में। ऐसे संघ/सहकारिताएं ई-कृषि विपणन के माध्यम से कृषि सलाहकार सेवाएं और बाजार जानकारी प्रदान करने के लिए भी समर्थन किया जाना चाहिए।
सहकारी बैंकों को वित्तीय सहायता: नाबार्ड परंपरागत रूप से जिला सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता रहा है। राज्य सहकारी बैंकों के माध्यम से। नाबार्ड ने कार्यशील पूंजी और कृषि परिसंपत्ति रखरखाव को पूरा करने के लिए सीसीबी को सीधे वित्तपोषण के लिए एक अल्पकालिक बहुउद्देश्यीय क्रेडिट उत्पाद डिजाइन किया है व्यक्तिगत उधारकर्ताओं और संबद्ध प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) की आवश्यकताएं। वर्ष 2018-19 के लिए कांगड़ा सीसीबी को `100 करोड़ की नकद ऋण सीमा स्वीकृत की गई थी।
सरकार प्रायोजित योजनाएं: एसएचजी के सदस्यों और ग्रामीण लोगों को स्थायी रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से उनकी आय का स्तर और भी भारत सरकार की डीईडीएस योजना के माध्यम से बेहतर पशुधन एवं दूध प्रबंधन द्वारा राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाना। 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 200 लाभार्थियों को `1.94 करोड़ सब्सिडी वितरित की गई है।
इसके अलावा, तीन और सरकार प्रायोजित योजनाएं, जैसे, "कृषि क्लिनिक और कृषि व्यवसाय केंद्र योजना", "राष्ट्रीय पशुधन मिशन - उद्यमशीलता विकास एवं रोजगार गारंटी'' और आईएसएएम की एक उप-योजना ''नई कृषि विपणन अवसंरचना योजना'' राज्य में चालू है, जिसके तहत सब्सिडी नाबार्ड के माध्यम से दी जाती है।
नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (NABCONS) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) द्वारा प्रवर्तित एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और प्रदान करने में लगी हुई है। कृषि, ग्रामीण विकास और संबद्ध क्षेत्रों के सभी क्षेत्रों में परामर्श। नैबकॉन्स कृषि और कृषि के क्षेत्रों में नाबार्ड की मुख्य क्षमता का लाभ उठाता है ग्रामीण विकास, विशेष रूप से बहु-विषयक परियोजनाएँ, बैंकिंग, संस्थागत विकास, बुनियादी ढाँचा, प्रशिक्षण, आदि। विशिष्ट योग्यता के व्यापक क्षेत्र नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा जो परामर्श कार्य किए जाते हैं वे हैं व्यवहार्यता अध्ययन, परियोजना निर्माण, मूल्यांकन, वित्तपोषण व्यवस्था, परियोजना प्रबंधन और निगरानी, समवर्ती और प्रभाव मूल्यांकन, कृषि-व्यवसाय इकाइयों का पुनर्गठन, विज़न दस्तावेज़ीकरण, विकास प्रशासन और सुधार, ग्रामीण वित्तीय संस्थानों का संस्थान विकास और बदलाव, ग्रामीण एजेंसियों की प्रदर्शन रेटिंग, बैंक पर्यवेक्षण, नीति और कार्रवाई अनुसंधान अध्ययन, ग्रामीण पर सेमिनार विकास थीम, सूक्ष्म वित्त संबंधी प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विजिट और क्षमता निर्माण, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण और प्रशिक्षण संस्थानों का निर्माण, गैर-कृषि उद्यम प्रोत्साहन।
हिमाचल प्रदेश राज्य में, NABCONS ने गुणवत्ता बेंचमार्क और उच्च स्तर की ग्राहक संतुष्टि के साथ निम्नलिखित प्रमुख कार्य पूरे किए हैं:
i) किन्नौर और लाहौल-स्पीति में सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रमों का तृतीय पक्ष निरीक्षण जिले.
ii) राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत हस्तक्षेप का तृतीय पक्ष मूल्यांकन
iii) पं. के अंतर्गत पॉली हाउस योजना का मूल्यांकन। दीन दयाल किसान बागवान समृद्धि योजना।
iv) मंडी और कांगड़ा जिलों में जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव एजेंसी परियोजनाओं की डीपीआर, सर्वेक्षण और जांच तैयार करना।
v) सीए/सीएस स्टोर्स के लिए प्रबंधन परामर्श और हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के लिए मंडी ऑटोमेशन।
vi) राज्य के 12 जिलों के लिए प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेवाईएस) के तहत राज्य सिंचाई योजना (एसआईपी) जिला सिंचाई योजना (डीआईपी) की तैयारी।
vii) राज्य में अनुसूचित जाति उपयोजना योजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता का मूल्यांकन।
viii) राज्य में 12 नियंत्रित वातावरण (सीए) स्टोर/कोल्ड स्टोर की स्थापना के लिए व्यवहार्यता अध्ययन।
ix) डिजाइन, विकास, कार्यान्वयन और रखरखाव एपीएमसी में मंडी प्रबंधन सूचना प्रणाली।
x) कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के लिए परियोजनाओं का मूल्यांकन।
नाबार्ड क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ सूचना के परिचय और बेहतर उपयोग के लिए सहकारी ऋण संरचना (सीसीएस) को सहायता प्रदान करता है। तकनीकी। नाबार्ड ने एक विशेष और समर्पित फंड बनाया। इस उद्देश्य के लिए सहकारी विकास निधि (सीडीएफ)। राज्य सहकारिता को निधि से सहायता प्रदान की जाती है बैंक संचालित प्रशिक्षण संस्थान (ACSTI शिमला), जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS)। कुल `34.23 लाख की राशि स्वीकृत की गई राज्य में सहकारी समितियों के विकास के लिए 2017-18 के दौरान।
वित्तीय सहायता:
i) नाबार्ड प्रभावी प्रशिक्षण की सुविधा के लिए सीडीएफ से सॉफ्टकॉब के तहत विभिन्न सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों (सीटीआई) को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। उनकी प्रशिक्षण क्षमताओं का वितरण और समर्थन करना। वर्ष 2017-18 के दौरान, नाबार्ड ने कृषि सहकारी कर्मचारी प्रशिक्षण के लिए `30.23 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की सहकारी ऋण संस्थानों के कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक (HPStCB) द्वारा संस्थान (ACSTI) की स्थापना की गई। सहायता से मदद मिली प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मियों की क्षमता निर्माण में। दिसंबर, 2018 तक 2018-19 के दौरान, SOFTCOB के तहत ACSTI को `15.07 लाख की वित्तीय सहायता दी गई थी।
ii) बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 05 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को अनुदान के रूप में `4.00 लाख की राशि प्रदान की गई। अलमारी, नकदी के लिए सुरक्षित, कंप्यूटर और अन्य फर्नीचर आइटम. नाबार्ड द्वारा प्रदान किए गए समर्थन से पैक्स को अपनी छवि सुधारने और अपने सदस्यों को बेहतर सेवा सुनिश्चित करने में मदद मिली।
हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के लिए नाबार्ड की पहल: नाबार्ड को राष्ट्रीय कार्यान्वयन इकाई (NIE) नामित किया गया है अनुकूलन कोष (एएफ), हरित जलवायु कोष (जीसीएफ) की स्थापना जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के तहत और 'जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन कोष' के लिए की गई है। (NAFCC) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा स्थापित किया गया है।
i) नाबार्ड ने जलवायु परिवर्तन की भविष्य की चुनौतियों से निपटने के अपने प्रयासों में एक परियोजना की तैयारी, विकास और मंजूरी की सुविधा प्रदान की है सिरमौर जिले में 'जलवायु स्मार्ट समाधान के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के सूखाग्रस्त जिले में कृषि पर निर्भर समुदायों की सतत आजीविका' कार्यकारी इकाई (ईई) यानी पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार। MoEF और CC ने परियोजना के लिए `20.00 करोड़ मंजूर किए हैं। दिसंबर, 2018 तक नाबार्ड द्वारा `3.30 करोड़ की राशि जारी की गई है।

4.आबकारी एवम् कराधान

आबकारी एवम् कराधान विभाग प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व अर्जित करने वाला विभाग है। वर्ष 2017-18 के दौरान कुल ृ6,133.56 करोड़ के राजस्व संग्रहण में से वैट संग्रह ृ2,525.87 करोड़ है जोकि कुल राजस्व का 41.18 प्रतिशत बनता है। शीर्ष 0006 वस्तु एवं सेवा कर के तहत वर्ष 2017-18 में ृ1,833.15 करोड़ का संग्रहण किया गया, जोकि कुल संग्रहित राजस्व का 29.88 प्रतिशत है। शीर्ष 0039 राज्य आबकारी नियम के तहत ृ1,311.25 करोड़ का संग्रहण किया गया, जोकि कुल संग्रहित राजस्व का 21.37 प्रतिशत है, शेष 7.56 प्रतिशत हि0प्र0 यात्री वस्तु कर अधिनियम, हि0प्र0 विलासिता कर अधिनियम, हि0प्र0 सी.जी.सी.आर. अधिनियम, हि0प्र0 मंनोरंजन कर अधिनियम से किया गया।
सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए शीर्ष 0042-पी.जी.टी. के अन्तर्गत ृ145.27 करोड़ एवं ओ.टी.डी.-0045 के अन्तर्गत ृ351.19 करोड़ का लक्ष्य रखा है इस वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए मुख्य शीर्ष 0039-राज्य आबकारी के अर्न्तगत् ृ1,425.76 करोड का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जोकि पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 से ृ74.27 करोड ज्यादा है। अतः सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभाग हर सम्भव प्रयास कर रहा है ।
हिमाचल प्रदेश यात्रियों तथा सामान पर कर लगाने का अधिनियम, 1955 (0042 पी.जी.टी. एवं ए.जी.टी.) व हिमाचल प्रदेश ;सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन परद्ध कराधान अधिनियम, 1999 (0045 ओ.टी.डी.) के अर्न्तगत् क्रमशः लगभग ृ69.00 करोड़ व ृ185.17 करोड़ का राजस्व एकत्रित किया गया है।
विभाग द्वारा विभिन्न सेवाएं प्रदान करने एवं उनके अन्तर्गत् लक्ष्य प्राप्ति का ब्यौरा निम्नलिखित है।
1) पंजीकरण सीमा हो गई है एचपीजीएसटी अधिनियम, 2017 के तहत 2018 के अध्यादेश संख्या 1 दिनांक 05-11-2018 के तहत जीएसटी अधिनियम के तहत इसे बढ़ाकर `10 लाख से 20 लाख कर दिया गया।
2) वैट अधिनियम, 2005 और सीएसटी अधिनियम, 1956 के तहत भारी लंबित मामलों को कम करने के लिए वैट और सीएसटी के तहत मामलों के स्व-मूल्यांकन की सुविधा प्रदान करने वाली एक योजना शुरू की गई है।
3) एचपी पैसेंजर्स एंड गुड्स टैक्सेशन एक्ट, 1955 के तहत अतिरिक्त माल कर (एजीटी) नीचे दिए गए मानदंडों के अनुसार तय किया गया है: -
i) “सभी प्रकार के धागों (ऊनी धागों को छोड़कर) की कीमतें कम कर दी गई हैं। `3.00 से घटाकर `2.25 प्रति 10 किलोग्राम या उसका हिस्सा और आयरन और स्टील को घटाकर कर दिया गया है `3.75 प्रति क्विंटल या उसके भाग से `5.00 प्रति किग्रा या भाग और प्लास्टिक के सामान पर एजीटी 75 पैसे से बढ़ाकर 56 पैसे प्रति किग्रा या उसके भाग तय किया गया है।
(ii) सेब, फलों और सब्जियों पर सड़क मार्ग से ले जाने वाले कुछ सामान (एच.पी. सी.जी.सी.आर. अधिनियम, 1999 के तहत) को वापस ले लिया गया है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए लक्ष्य:
i) एजीटी सहित पीजीटी के संबंध में `145.27 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ii) ओटीडी (मनोरंजन कर, विलासिता कर, टोल टैक्स सीजीसीआर) के संबंध में `351.19 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी के लिए लक्ष्य:
i) ऑनलाइन उत्पाद शुल्क परमिट जारी करना
ii) ऑनलाइन उत्पाद शुल्क पास जारी करना।
iii) उत्पाद शुल्क विभाग की आईटी शाखा हितधारकों की सुविधा के लिए करों के भुगतान के लिए मोबाइल ऐप के विकास का प्रस्ताव करती है। संबद्ध करों के तहत ट्रांसपोर्टर/डीलर आदि, विभाग द्वारा प्रशासित अतिरिक्त माल कर (एजीटी), सड़क द्वारा ले जाने वाले कुछ सामान (सीजीसीआर), यात्री और माल कर (पीजीटी)।
एल-1डी, एल-13डी, एल-1 डब्लयु और एल-13 डब्लयु को के लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया। वर्ष 2018-19 के लिए.
ऑनलाइन प्रोविजनल लाइसेंस, लाइसेंस और सब-वेंड के पास जारी करने की ऑनलाइन सुविधा।
राज्य ने 18.08.2012 से अपना स्वयं का उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2011 लागू किया है, जिसके तहत उपयोग किए जाने वाले वाहनों को जब्त करने का एक विशिष्ट प्रावधान है। शराब की तस्करी पर रोक लगा दी गई है.
उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण शराब उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के लिए आईएमएफएस और देशी शराब की प्रत्येक बोतल पर होलोग्राम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

5.मूल्य संचलन

मुद्रा-स्फीति का नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता सूची में से एक है। मुद्रा-स्फीति आम व्यक्तियों को उनकी आय कीमतों की पहुंच से दूर रहने के कारण परेशान करती है। मुद्रा-स्फीति के उतार-चढ़ाव को थोक मूल्य सूचकांक के द्वारा मापा जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर थोक भाव सूचकांक नवम्बर माह के वर्ष 2017 में 116.4 से बढ़कर नवम्बर, 2018 माह में 121.8;अद्ध हो गया जो कि मुद्रा- स्फीति की दर (़) 4.64 प्रतिशत दर्शाता है। औसत मासिक थोक मूल्य सूचकांक व वर्ष 2018-19 में मुद्रा-स्फीति की दर नीचे सारणी 5.1 में दर्शाई गई हैः-
हिमाचल प्रदेश में कीमत की स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है। राज्य का खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग मूल्य स्थिति पर निरंतर निगरानी रख रहा है और 4,918 उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से जनता को आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति की व्यवस्था बनाए रखी है। खाद्य असुरक्षा और असुरक्षा के मुद्दों पर नजर रखने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग जीआईएस के माध्यम से खाद्य असुरक्षा और असुरक्षा मानचित्रण प्रणाली (FIVIMS) भी लागू कर रहा है। राज्य सरकार के विभिन्न उपायों के परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में रहीं। हिमाचल प्रदेश का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आईडब्ल्यू (बेस 2001=100) राष्ट्रीय स्तर की तुलना में थोड़ा कम दर पर बढ़ा। सी.पी.आई. हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक श्रमिकों के लिए नवंबर, 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर 4.86 प्रतिशत के मुकाबले केवल 2.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर उपभोग की आवश्यक वस्तुओं की बिक्री और वितरण में जमाखोरी, मुनाफाखोरी और अन्य कदाचार को रोकने के लिए, राज्य सरकार विभिन्न आदेशों/अधिनियमों को सख्ती से लागू कर रही है। वर्ष के दौरान अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की नियमित साप्ताहिक निगरानी की प्रणाली जारी रखी गई ताकि अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए समय पर प्रभावी उपाय किए जा सकें।

6.खाद्य सुरक्षा एवम् नागरिक आपूर्ति

लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने में सरकार की नीति का एक विशेष घटक है, जो उचित मूल्य की 4,918 दुकानों द्वारा जरूरी वस्तुएं जैसे गेहॅूंँ, गेहूंॅँ का आटा, चावल, लेवी चीनी इत्यादि का लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत् पूर्ति को सुनिश्चित करना है। खाद्य पदार्थां को वितरित करने हेतु सभी परिवारों को दो श्रेणियों में बांटा गया है।
1) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) (पात्र गृहस्थी)
i) अंत्योदय अन्न योजना (AAY)
ii) प्राथमिकता वाले परिवार
2) एनएफएसए (एपीएल) के अलावा

राज्य में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में कुल राशन कार्ड 18,32,389 हैं, जिसमें कार्डों की जनसंख्या 74,16,913 है। इन कार्ड धारकों को 4,918 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से आवश्यक वस्तुएं प्रदान की जाती हैं, जिनमें 3,221 सहकारी समितियां, 13 पंचायत, 69 एचपीएससीएससी, 1,608 व्यक्तिगत और 7 महिला मंडल शामिल हैं।
वर्ष 2018-19 नवंबर, 2018 के दौरान आवश्यक वस्तुओं का वितरण। वर्तमान में, टीपीडीएस और एच.पी. राज्य अनुदानित योजनाओं के तहत निम्नलिखित खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है, जो इस प्रकार है:-
पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पाद: वर्तमान में, 26 थोक केरोसिन तेल डीलर, 415 पेट्रोल पंप और 166 गैस एजेंसियां हैं प्रदेश में कार्यरत हैं।
एच हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (एचपीएससीएससी): एच.पी. राज्य नागरिक आपूर्ति निगम एक "केंद्रीय खरीद" के रूप में एजेंसी राज्य में सभी नियंत्रित और गैर-नियंत्रित आवश्यक वस्तुओं के लिए खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पूरी संतुष्टि के साथ खरीद और वितरण कर रही है। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत सरकार की। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान तक दिसंबर, 2018 में निगम ने टीपीडीएस के तहत `978.20 करोड़ की विभिन्न वस्तुओं की खरीद और वितरण किया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह `911.25 करोड़ थी।
वर्तमान में, निगम अन्य आवश्यक वस्तुएं जैसे रसोई गैस, डीजल/पेट्रोल/मिट्टी का तेल और जीवनरक्षक दवाएं भी उपलब्ध करा रहा है। राज्य के 117 थोक गोदामों, 76 खुदरा दुकानों/अपना स्टोर, 54 गैस एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को उचित दरों पर दवाएँ उपलब्ध करायी जाती हैं। 4 पेट्रोल पंप और 36 दवा दुकानें।
इसके अलावा, गैर-नियंत्रित वस्तुओं (जैसे चीनी, दालें, चावल, आटा, डिटर्जेंट पाउडर) की खरीद और वितरण साबुन, चाय की पत्तियां, व्यायाम नोट बुक, सीमेंट, सीजीआई शीट, दवाएं, पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत वस्तुएं, मनरेगा- सीमेंट और पेट्रोलियम उत्पाद आदि) निगम के थोक गोदामों और खुदरा दुकानों के माध्यम से, जिसने निश्चित रूप से प्रचलित इन वस्तुओं की कीमतों को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है खुला बाज़ार।
चालू वित्तीय वर्ष, 2018-19 के दौरान, दिसंबर, 2018 तक निगम ने योजना के तहत विभिन्न वस्तुओं की खरीद और वितरण किया पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान ₹370.48 करोड़ की तुलना में ₹473.42 करोड़ हो गया।
निगम मध्याह्न भोजन योजना के तहत चावल और अन्य पूरक वस्तुओं की आपूर्ति की व्यवस्था कर रहा है। संबंधित उपायुक्त द्वारा किए गए आवंटन के अनुसार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर तक, 2018 में निगम ने इस योजना के तहत पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 11,087 मीट्रिक टन की तुलना में 16,439 मीट्रिक टन चावल के वितरण की व्यवस्था की।
निगम चिन्हित विशेष रूप से सब्सिडी वाली वस्तुओं (विभिन्न प्रकार की दालें, खाद्य तेल (सरसों/रिफाइंड) और आई. नमक) की आपूर्ति की भी व्यवस्था कर रहा है। सरकार द्वारा गठित क्रय समिति के निर्णय के अनुसार राज्य प्रायोजित योजनाओं के तहत। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान, दिसंबर, 2018 तक निगम ने उक्त योजना के तहत `377.00 करोड़ की राशि का इन वस्तुओं का वितरण किया है, जबकि इस दौरान यह राशि `292.00 करोड़ थी। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित पैमाने के अनुसार प्रदेश के राशन कार्ड धारकों को पिछले वर्ष की इसी अवधि में।
वर्ष 2018-19 के दौरान इस योजना के क्रियान्वयन हेतु राज्य अनुदान के रूप में `220.00 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। वर्ष 2018-19 के दौरान निगम को कुल उपलब्धि हासिल होने की संभावना है वर्ष 2017-18 के दौरान 1,500 करोड़ की तुलना में 1,520 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ।
हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाओं, सरकारी विभाग/बोर्ड/निगमों और अन्य सरकारी संस्थानों को सीमेंट और हिमाचल प्रदेश सरकार के आई और पीएच विभाग को जीआई/डीआई/सीआई पाइपों की खरीद और आपूर्ति का प्रबंधन कर रहा है। . चालू वित्तीय वर्ष, 201819 के दौरान सरकारी आपूर्ति की अस्थायी स्थिति इस प्रकार रहेगी:-
मनरेगा सीमेंट आपूर्ति:वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक निगम ने कुल मिलाकर पंचायतों के विकासात्मक कार्यों के लिए विभिन्न पंचायतों को `69.86 करोड़ की राशि के 30,65,920 बैग सीमेंट की खरीद और वितरण का प्रबंधन किया। राज्य।
निगम आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में सभी आवश्यक वस्तुएं, केरोसिन तेल और एलपीजी सहित पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां व्यापार की आर्थिक अव्यवहार्यता के कारण निजी व्यापारी इन कार्यों को करने का जोखिम नहीं उठाते हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान जनजातीय एवं बर्फीले क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं एवं पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सरकार की जनजातीय कार्य योजना के अनुरूप की गई।
निगम अपनी स्थापना यानी 1980 से ही लाभ कमा रहा है। वर्ष 2017-18 के दौरान `1.28 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया था और `35.15 लाख की राशि हिमाचल प्रदेश सरकार को लाभांश के रूप में भुगतान करने का प्रस्ताव था।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के कार्यान्वयन हेतु भारत सरकार द्वारा राज्यों को सौंपे गए कार्य एवं उत्तरदायित्व के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम समय पर खरीद, भंडारण और आपूर्ति के माध्यम से योजना को लागू करने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है राज्य के लाभार्थियों के बीच आगे वितरण के लिए अपने 117 थोक केंद्रों के माध्यम से उचित मूल्य की दुकानों को खाद्यान्न आवंटित किया गया।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 61,484 मीट्रिक टन चावल और 38,766 मीट्रिक टन गेहूं क्रमशः `3.00 और `2.00 प्रति किलोग्राम प्रति माह की दर पर चिन्हित लाभुकों को वितरण कर दिया गया है। उपरोक्त के अतिरिक्त, राज्य सरकार के पृथक भण्डार निगम के अभाव में, हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम राज्य में 22,470 मीट्रिक टन स्वामित्व वाले और 34,840 मीट्रिक टन किराये के गोदामों के माध्यम से भंडारण क्षमता का प्रबंधन स्वयं कर रहा है।
एनएफएसए, 2013 के सफल कार्यान्वयन के मद्देनजर अतिरिक्त भंडारण क्षमता बनाई जा रही है और गोदामों के निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 500 मीट्रिक टन से लेकर 1,000 मीट्रिक टन क्षमता तक के विभिन्न स्थान जिसके लिए विभाग/निगम के नाम पर सरकारी भूमि की पहचान/हस्तांतरण किया जाता है चालू। राज्य सरकार ने 2018-19 के दौरान अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता बनाने के लिए धनराशि प्रदान की है जो अभी भी प्राप्य है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 में निगम द्वारा भारतीय इस्पात प्राधिकरण से सरिया व सम्बन्धित अन्य उत्पाद इत्यादि को शिमला में भट्टा कुफर से सभी विभागों, निगमों तथा बोर्ड़ों को उपलब्ध करवाने में पहल करने पर भारतीय इस्पात प्राधिकरण ने सेल यार्ड का दायित्व भी निगम को सौंपा है इसके अन्तर्गत् दिसम्बर, 2018 तक निगम द्वारा 907.27 मी.टन अच्छी गुणवता के सरिये की आपूर्ति की है।

7.कृषि एवम् उद्यान

कृषि हिमाचल प्रदेश के लोगों का मुख्य व्यवसाय है और राज्य की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। हिमाचल प्रदेश एकमात्र राज्य है वह देश जिसकी 89.96 प्रतिशत जनसंख्या (जनगणना 2011) ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसलिए कृषि/बागवानी पर निर्भरता अनिवार्य है क्योंकि यह प्रत्यक्ष प्रदान करता है राज्य के कुल श्रमिकों में से लगभग 62 प्रतिशत को रोजगार।
कृषि राज्य आय (जीएसडीपी) का प्रमुख स्रोत है। कुल जीएसडीपी का लगभग 9 प्रतिशत कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों से आता है। से बाहर राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 55.67 लाख हेक्टेयर है, परिचालन जोत का क्षेत्रफल लगभग 9.55 लाख हेक्टेयर है और 9.61 लाख किसानों द्वारा संचालित है। औसत जोत का आकार लगभग 1.00 हेक्टेयर है।
2010-11 की कृषि जनगणना के अनुसार भूमि जोत का वितरण दर्शाता है कि कुल जोत का 87.95 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों का है। लगभग 11.71 प्रतिशत जोत का स्वामित्व अर्ध मध्यम और मध्यम किसानों के पास है और केवल 0.34 प्रतिशत का स्वामित्व बड़े किसानों के पास है। हिमाचल प्रदेश में भूमि जोत का वितरण तालिका-7.1 में दर्शाया गया है
राज्य में कुल खेती योग्य क्षेत्र का लगभग 80 प्रतिशत वर्षा आधारित है। चावल, गेहूं और मक्का राज्य की महत्वपूर्ण अनाज फसलें हैं। खरीफ में मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी और रेपसीड/सरसों और रबी मौसम में तोरिया महत्वपूर्ण तिलहनी फसलें हैं। खरीफ मौसम में उर्द, सेम, मूंग, राजमाश और रबी में चना मसूर राज्य की महत्वपूर्ण दलहनी फसलें हैं।
कृषि-जलवायु की दृष्टि से राज्य चार क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है जैसे:-
1) उपोष्णकटिबंधीय, उप-पर्वत और निचली पहाड़ियाँ।
2) उप शीतोष्ण, उप आर्द्र मध्य पर्वतीय।
3) आर्द्र शीतोष्ण ऊँची पहाड़ियाँ।
4) शुष्क शीतोष्ण ऊँची पहाड़ियाँ और ठंडे रेगिस्तान। राज्य में कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ नकदी फसलों जैसे बीज आलू, बे-मौसमी सब्जियों और अदरक के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं।
राज्य सरकार बेमौसमी सब्जियों के अलावा आलू, अदरक, दलहन और तिलहन के उत्पादन पर जोर दे रही है। आदानों की समय पर और पर्याप्त आपूर्ति, उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन और प्रभावी प्रसार, प्रतिस्थापन के माध्यम से अनाज फसलों का उत्पादन बढ़ाना पुरानी किस्म के बीजों का उपयोग, एकीकृत कीट प्रबंधन को बढ़ावा देना, जल संसाधनों के कुशल उपयोग के तहत अधिक क्षेत्र लाना और बंजर भूमि विकास परियोजनाओं का कार्यान्वयन।
वर्षा के संबंध में चार अलग-अलग मौसम हैं। लगभग आधी वर्षा मानसून के मौसम में होती है और शेष वर्षा अन्य मौसमों में वितरित की जाती है। राज्य में औसतन 1,251 मिमी बारिश हुई। चम्बा, सिरमौर और मंडी के बाद कांगड़ा जिले में सबसे अधिक वर्षा होती है।
कृषि कार्यकलापों का मौनसून से गहन सम्बन्ध है। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2018 के मौनसून के मौसम ;जून-सितम्बरद्ध में सिरमौर सोलन में सामान्य रुप से बारिश हुई, चम्बा किन्नौर और लाहौल स्पीति में कमी रही। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश में मौनसून मौसम में सामान्य वर्षा की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। सारणी 7.2 में विभिन्न जिलों में दक्षिण पश्चिम मौनसून मौसम में वर्षा की स्थिति को दर्शाया गया है।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर करती है तथा अभी तक भी राज्य की अर्थ-व्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। वर्ष 2016-17 में कृषि तथा उससे सम्बन्धित क्षेत्रों का कुल राज्य घरेलू उत्पाद में लगभग 9.4 प्रतिशत योगदान रहा। खाद्यान्न उत्पादन में तनिक भी उतार-चढ़ाव अर्थ-व्यवस्था को काफी प्रभावित करता है। 12वीं पंचवर्षीय योजना 2012-17 के दौरान बेमौसमी सब्जियों, आलू, दालों तिलहनी फसलें व खाद्यान्न फसलों के उत्पादन पर पर्याप्त आदान आपूर्ति, िंसंचाई के अंतर्गत् नए क्षेत्र लाकर, जल संरक्षण विकास तथा सुधरी हुई कृषि प्रौद्योगिकी के प्रभावकारी प्रदर्शन व जानकारी पर विशेष महत्व दिया गया है। वर्ष 2017-18 कृषि के लिए सामान्य अच्छा वर्ष होने की वजह से तृतीय अनुमान के अनुसार खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2016-17 के 15.63 लाख मी.टन की तुलना में वर्ष 2017-18 में अनुमानित 15.31 लाख मी.टन उत्पादन हुआ। वर्ष 2016-17 के 1.96 लाख मी.टन आलू उत्पादन की तुलना में वर्ष 2017-18 में आलू उत्पादन 1.99 लाख मी.टन हुआ। सब्जियों का उत्पादन वर्ष 2016-17 के 16.54 लाख मी.टन की तुलना में वर्ष 2017-18 में 16.92 लाख मी.टन हुआ।
वर्ष 2018-19 में कुल उत्पादन का लक्ष्य 16.69 लाख मी.टन होने की आशा है। खरीफ उत्पादन मुख्यतः दक्षिण पश्चिम मौनसून पर निर्भर करता है क्योंकि राज्य के कुल जोते गए क्षेत्र में से लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र वर्षा पर निर्भर करता है। खरीफ सीजन में बुआई अप्रैल अन्त में शुरू होती है और जून मध्य तक जाती है। मक्की और धान खरीफ सीजन की मुख्य फसलें हैं। रागी, छोटे अनाज तथा दालें कम मात्रा में होती हैं। लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र अप्रैल-मई तथा शेष क्षेत्र जून-जुलाई के महीने में बोया गया जो कि खरीफ सीजन का शीर्ष समय होता है। राज्य के अधिकांश हिस्से में सामान्य वर्षा होने के कारण बीजाई समय पर की जा सकी और कुल मिलाकर फसल की स्थिति सामान्य थी। यद्यपि मानसून 2017 के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा के कारण खरीफ की खड़ी फसल कुछ सीमा तक प्रभावित हुई और 7.77 लाख मी0टन उत्पादन हुआ जो कि पिछले वर्ष सीजन के लिए 8.94 लाख मी.टन था। रबी सीजन 2017-18 के दौरान अक्तूबर से दिसम्बर, 2017 की अवधि में वर्षा ;-द्ध 49 प्रतिशत कम हुई परन्तु जनवरी,2018 के पहले पखवाडे में वर्षा आरम्भ हुई अतः संजम अंतपमजल बीज की बुआई की गई ताकि सुखे के कारण होने वाली हानि की सम्भावनाओं को कम किया जा सके जिस कारण 2017-18 में रबी उत्पादन के 7.51 लाख मी.टन पूर्व अनुमानित किया गया है। फसलबार खाद्यानों एवं वाणिज्य फसलों का उत्पादन तालिका 7.4 में दर्शाया गया है।
कृषि योग्य भूमि के विस्तार के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। पूरे देश की तरह हिमाचल भी लगभग इसी स्थिति में पहुँच गया है जहां तक खेती योग्य भूमि का सवाल है. इसलिए, उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण के अलावा उत्पादकता स्तर बढ़ाने पर जोर देना होगा। वाणिज्यिक फसलों की ओर बढ़ते रुझान के कारण, खाद्यान्न उत्पादन का क्षेत्र धीरे-धीरे घट रहा है क्योंकि 1997-98 में यह क्षेत्र 853.88 हजार था। 2016-17 में हेक्टेयर घटकर 752.88 हजार हेक्टेयर रह जाने की संभावना है, उत्पादन में कमी इस प्रकार उत्पादकता में हानि को दर्शाती है जैसा कि तालिका 7.5 से स्पष्ट है।

अधिक उपज देने वाली फसलों की किस्में संबंधित कार्यक्रम;एच.वाई.वी.पी.द्ध खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने हेतु किसानों को अधिक उपज देने वाले बीजों के वितरण पर जोर दिया गया। अधिक उपज देने वाली मुख्य फसलों जैसे मक्की, धान, गेहूं के अंतर्गत् पिछले पांच वर्षों में लाया गया क्षेत्र तथा 2018-19 के लिए लक्षित क्षेत्र सारणी 7.6 में दिया गया है
खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने हेतु किसानों को अधिक उपज देने वाले बीजों के वितरण पर जोर दिया गया। अधिक उपज देने वाली मुख्य फसलों जैसे मक्की, धान, गेहूं के अंतर्गत् पिछले पांच वर्षों में लाया गया क्षेत्र तथा 2018-19 के लिए लक्षित क्षेत्र सारणी 7.6 में दिया गया है।
फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए पौध संरक्षण उपायों को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक मौसम के दौरान, फसल की बीमारियों, कीड़ों और कीटों आदि के खतरे से लड़ने के लिए अभियान आयोजित किए जाते हैं। पिछड़े क्षेत्रों के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, आईआरडीपी परिवारों के किसानों और छोटे और सीमांत किसानों को 50 प्रतिशत लागत पर पौध संरक्षण रसायन और उपकरण प्रदान किए जाते हैं। . विभाग का दृष्टिकोण धीरे-धीरे कीटों/बीमारियों के जैविक नियंत्रण पर स्विच करके पौध संरक्षण रसायनों की खपत को कम करना है। गैर योजना मद से सब्सिडी की पूर्ति की जा रही है। रसायनों के वितरण में प्रस्तावित उपलब्धियाँ एवं लक्ष्य तालिका 7.7 में दर्शाये गये हैं

मृदा परीक्षण कार्यक्रम: प्रत्येक फसल मौसम के दौरान मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए, मिट्टी के नमूने किसानों के खेतों से एकत्र किया जाता है और मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किया जाता है। सभी जिलों (लाहौल और स्पीति को छोड़कर) में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। इन प्रयोगशालाओं को नवीनतम उपकरणों से सुदृढ़ किया गया है। वर्तमान में विभाग द्वारा 11 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ किया गया है, 9 मोबाइल प्रयोगशालाएँ और 47 मिनी प्रयोगशालाएँ भी स्थापित की गई हैं। भारत सरकार ने एक नई योजना शुरू की है जिसके तहत जीपीएस के आधार पर मिट्टी का नमूना लिया जाएगा। एक वर्ष में लगभग 50 हजार मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण किया जाता है। प्रस्तावित परिव्यय मिट्टी के नमूनों के परीक्षण के लिए इन प्रयोगशालाओं पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए है। मृदा परीक्षण सेवा को भी एच.पी. के अंतर्गत शामिल किया गया है। सरकार. लोक सेवा अधिनियम, 2011 जिसमें किसानों को निर्धारित समय सीमा के अंदर मृदा स्वास्थ्य कार्ड ऑनलाइन सेवा के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।
शून्य बजट प्राकृतिक खेती के तहत प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना: राज्य सरकार ने नई योजना "प्राकृतिक खेती" शुरू की है खुशहाल किसान योगना” राज्य में। सरकार का इरादा "शून्य बजट प्राकृतिक खेती" को प्रोत्साहित करने का है, ताकि खेती की लागत कम की जा सके। रासायनिक उर्वरकों एवं रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग को हतोत्साहित किया जायेगा। कृषि एवं बागवानी विभाग को कीटनाशकों/कीटनाशकों के लिए उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग जैव-कीटनाशकों और जैव-कीटनाशकों को उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा। 2018-19 के लिए `25.00 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है।
बायो-गैस विकास कार्यक्रम: पारंपरिक ईंधन यानी जलाऊ लकड़ी के घटते स्रोतों को ध्यान में रखते हुए, बायोगैस संयंत्रों ने राज्य में निचली और मध्य पहाड़ियों में इसका बहुत महत्व है। स्थापना के बाद से मार्च, 2017 तक राज्य में 44,815 बायो-गैस संयंत्र स्थापित किये गये हैं। 2017-18 के दौरान राज्य में 37 बायोगैस संयंत्र स्थापित किये गये। इस कार्यक्रम को वर्ष 2018-19 के कार्यान्वयन हेतु ग्रामीण विकास विभाग, हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित कर दिया गया है।
उर्वरक की खपत और सब्सिडी: उर्वरक एक महत्वपूर्ण इनपुट है, जो उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाने में मदद करता है। . 1985-86 में उर्वरक खपत का स्तर 23,664 मीट्रिक टन था। जो अब बढ़कर 57,560 एम.टी. हो गया है। 2017-18 में. रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, जटिल उर्वरकों पर `1,000 प्रति मीट्रिक टन की सब्सिडी की अनुमति दी गई है, पानी में घुलनशील उर्वरकों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया है, जिसके लिए लागत के 25 प्रतिशत की सीमा तक सब्सिडी की अनुमति दी गई है। योजना योजनाओं के तहत सब्सिडी प्रदान की जा रही है। लगभग 51,500 एम.टी. 2018-19 के दौरान पोषक तत्वों के संदर्भ में उर्वरकों का वितरण प्रस्तावित है।
ग्रामीण परिवारों की विभिन्न सामाजिक आर्थिक स्थिति के कारण पारम्परिक वित्त के गैर संस्थागत स्त्रोत ही ऋण के मुख्य साधन है। इनमें से कुछ एक बहुत अधिक ब्याज पर धन उपलब्ध करवाते हैं और गरीब लोगों के पास बहुत कम सम्पति होती है जिसके कारण उनके लिए जमानत जुटा पाने के अभाव में वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेना बहुत मुश्किल है फिर भी सरकार ने ग्रामीण परिवारों को कम दर पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के प्रयास किए हैं। किसानों की ऋण लेने की प्रवृति के मध्य नजर, जिनमें अधिकतर सीमान्त तथा छोटे किसान है, उनको आदान की खरीद के लिए बैंको द्वारा ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। संस्थागत ऋण को व्यापक रूप देना विशेषकर उन फसलों मे जो कि बीमा योजना के अंतर्गत् आती है, बढानें की जरूरत है। सीमान्त तथा लघु किसानों और अन्य पिछडे़ वर्ग को संस्थागत ऋण सही तरीके से उपलब्ध करवाना और उनके द्वारा नवीनतम तकनीकी तथा सुधरे कृषि तरीकों को अपनाना सरकार का मुख्य उद्धेश्य है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की मिटिंग में फसल बार ऋण योजना तैयार की है ताकि ऋण बहाव का जल्दी अनुश्रवण हो सके।
राज्य सरकार ने यह योजना रबी, 1999-2000 सीज़न से शुरू की है। अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) शुरू की गई है कृषि विभाग, मंत्रालय द्वारा जारी प्रशासनिक अनुमोदन और परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य में खरीफ, 2016 सीज़न के लिए कृषि विभाग, भारत सरकार। इस बीमा योजना में खरीफ मौसम के दौरान मक्का और धान की फसल को कवर किया गया है। के विभिन्न चरण बुआई रोकने, कटाई के बाद के नुकसान, स्थानीय आपदाओं और खड़ी फसलों (बुवाई से कटाई तक) के नुकसान के कारण फसल के नुकसान का जोखिम होता है। इस नई योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। यह योजना मौसमी कृषि परिचालन (एसएओ) फसल ऋण का लाभ उठाने वाले ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य है बैंकों और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसी) से बीमा योग्य फसलें और गैर ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक।
पीएमएफबीवाई के तहत सभी कंपनियों के दावे एकत्र किए गए प्रीमियम के 350 प्रतिशत से अधिक या बीमा राशि के दावों का प्रतिशत 35 प्रतिशत से अधिक है, जो भी राष्ट्रीय स्तर पर अधिक हो। संयुक्त रूप से, केंद्र और राज्य द्वारा समान रूप से भुगतान किया जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत, खरीफ 2017 और रबी में कुल 2,14,141 किसानों को कवर किया गया है। PMFBY के तहत 2017-18 सीज़न। वर्ष 2018-19 के लिए `7.00 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है जिसका उपयोग प्रीमियम सब्सिडी के राज्य हिस्से के भुगतान के लिए किया जाता है।
भारत सरकार, कृषि मंत्रालय ने खरीफ, 2016 सीज़न से "पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना" नामक एक और फसल बीमा योजना शुरू की है। (आर-डब्ल्यूबीसीआईएस) इस योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ बीमा सुरक्षा प्रदान करना है, जो खेती की अवधि के दौरान खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।
बीज प्रमाणीकरण कार्यक्रम: राज्य में कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ बीज उत्पादन के लिए काफी अनुकूल हैं। बीजों की गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादकों को बीजों की उच्च कीमतें सुनिश्चित करने के लिए, बीज प्रमाणीकरण कार्यक्रम पर उचित जोर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी ने बीज उत्पादन और उनकी उपज के प्रमाणीकरण के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में उत्पादकों को पंजीकृत किया।
कृषि विपणन: राज्य में कृषि उपज के विनियमन के लिए, हिमाचल प्रदेश कृषि/ बागवानी उपज विपणन अधिनियम, 2005 लागू किया गया है। अधिनियम के तहत राज्य स्तर पर हिमाचल प्रदेश विपणन बोर्ड की स्थापना की गई है। संपूर्ण एच.पी. को दस अधिसूचित बाज़ार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कृषक समुदाय के हितों की रक्षा करना है। विभिन्न में स्थापित विनियमित बाज़ार राज्य के कुछ हिस्से किसानों को उपयोगी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा, सोलन में एक आधुनिक बाजार परिसर कृषि उपज के विपणन के लिए कार्यात्मक है विभिन्न क्षेत्रों में बाजार प्रांगणों का निर्माण। वर्तमान में 10 मण्डी समितियाँ कार्य कर रही हैं तथा 58 मण्डियाँ क्रियाशील हो चुकी हैं। बाजार की जानकारी विभिन्न मीडिया अर्थात आकाशवाणी दूरदर्शन, प्रिंट मीडिया और नेट के माध्यम से किसानों तक प्रसारित किया जा रहा है। विपणन अवसंरचना के विकास का कार्य एपीएमसी के फंड से किया जाता है। दैनिक बाजार दरों की जानकारी आकाशवाणी/दूरदर्शन के माध्यम से भी प्रसारित की जाती है। 39 वस्तुओं के बाजार भाव भी हैं agmarknet.nic.in के माध्यम से प्रसारित किया गया। एपीएमसी अधिनियम को मॉडल अधिनियम के अनुसार दोहराया गया है और निजी बाजारों, एकल बिंदु बाजार शुल्क, अनुबंध खेती आदि के लिए प्रावधान किया गया है।
इस योजना के तहत किसानों के बीच नए कृषि उपकरणों/मशीनों को लोकप्रिय बनाया जाता है। इसके अंतर्गत नई मशीनों का परीक्षण भी किया जाता है कार्यक्रम. विभाग का प्रस्ताव पहाड़ी परिस्थितियों के अनुकूल छोटे पावर टिलर और उपकरणों को लोकप्रिय बनाने का है।
मृदा और जल संरक्षण: स्थलाकृतिक कारकों के कारण मिट्टी छींटे, चादर और नाली के कटाव के अधीन है जिसके परिणामस्वरूप मिट्टी के क्षरण में. इसके अलावा जैविक दबाव भी है ज़मीन पर। विशेष रूप से कृषि भूमि पर इस खतरे को रोकने के लिए, विभाग राज्य क्षेत्र के तहत दो मिट्टी और जल संरक्षण योजनाएं लागू कर रहा है। योजनाएं हैं:-
i) मृदा संरक्षण कार्य।
ii) जल संरक्षण एवं विकास। कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जल संरक्षण एवं लघु सिंचाई कार्यक्रम को प्राथमिकता दी गई है। विभाग ने फसल कटाई की योजना तैयार कर ली है टैंक, तालाब, चेक-डैम और भंडारण संरचनाओं का निर्माण करके वर्षा जल का प्रबंधन करना। इसके अलावा, कम पानी उठाने वाले उपकरण और स्प्रिंकलर के माध्यम से कुशल सिंचाई प्रणाली को भी लोकप्रिय बनाया जा रहा है। इन परियोजनाओं में मुख्य जोर मिट्टी और जल संरक्षण तथा कृषि स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर होगा। डॉ. वाई.एस. परमार किसान स्वरोजगार योजना 7.22 कृषि क्षेत्र में तेज और अधिक समावेशी विकास हासिल करने के लिए, हिमाचल प्रदेश सरकार ने शुरू की है "डॉ.वाई.एस.परमार किसान स्वरोजगार योजना।" (पॉलीहाउस और पॉलीहाउस के अंदर सूक्ष्म सिंचाई)।
परियोजना के घटकों में आवश्यकता आधारित बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है उच्च उत्पादकता, गुणवत्ता, प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा, कुशल इनपुट उपयोग आदि के उद्देश्यों को पूरा करने की उम्मीद है। परियोजना घटकों में शामिल हैं सूक्ष्म सिंचाई सुविधा के साथ पॉली हाउस के स्थान विशिष्ट मॉडल का निर्माण। इसके लिए किसानों को 85 प्रतिशत परियोजना सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। साथ ही किसानों के समूह द्वारा व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से जल स्रोतों के निर्माण (कम/मध्यम लिफ्ट, पंपिंग मशीनरी) के लिए 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई): राष्ट्रीय कृषि विकास योजना -RAFTAAR को 2007 में एक छत्र के रूप में शुरू किया गया था कृषि और संबद्ध क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए योजना। यह योजना भारत सरकार से अतिरिक्त केंद्रीय सहायता (100%) के रूप में लागू की गई थी। फंडिंग 2015-16 से उत्तर पूर्वी/हिमालयी राज्यों के लिए पैटर्न को 90:10 के अनुपात में बदल दिया गया है। अब आरकेवीवाई को आरकेवीवाई-रफ़्तार के रूप में नया रूप दिया गया है चौदहवें वित्त आयोग की शेष अवधि के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्र के कायाकल्प के लिए लाभकारी दृष्टिकोण। योजना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1) आवश्यक फसल पूर्व और कटाई के बाद के कृषि बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से किसानों के प्रयासों को मजबूत करना जो गुणवत्तापूर्ण इनपुट, भंडारण, बाजार सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाता है आदि और किसानों को सूचित विकल्प चुनने में सक्षम बनाता है।
2) कृषि और संबद्ध क्षेत्र की योजनाओं की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की प्रक्रिया में राज्यों को लचीलापन और स्वायत्तता प्रदान करना।
3) मूल्य श्रृंखला जोड़ से जुड़े उत्पादन मॉडल को बढ़ावा देना जो किसानों को उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन/उत्पादकता को प्रोत्साहित करने में मदद करेगा।
4) अतिरिक्त आय सृजन गतिविधियों जैसे एकीकृत खेती, मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों की खेती, फूलों की खेती आदि पर ध्यान केंद्रित करके किसानों के जोखिम को कम करना।
5) कई उपयोजनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में भाग लेना
6) कौशल विकास, नवाचार और कृषि-उद्यमिता आधारित कृषि व्यवसाय मॉडल के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना जो उन्हें कृषि की ओर आकर्षित करें।
भारत सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए सामान्य आरकेवीवाई के तहत केंद्रीय हिस्सेदारी (90%) के रूप में हिमाचल प्रदेश के पक्ष में `23.09 करोड़ आवंटित किए हैं। वर्ष 2018-19 के लिए कुल आवंटन में राज्य के हिस्से के बराबर `2.57 करोड़ के साथ `25.66 करोड़ था।
राष्ट्रीय कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी मिशन (एनएमएईटी): राष्ट्रीय कृषि विस्तार और प्रौद्योगिकी मिशन (एनएमएईटी) को विस्तार प्रणाली को किसान-संचालित और प्रौद्योगिकी प्रसार की किसान व्यवस्था बनाने के लिए लॉन्च किया गया है। NMAET को चार उप-मिशन में विभाजित किया गया है।
1) कृषि विस्तार पर उप मिशन (SAME)।
2) बीज और रोपण सामग्री पर उप मिशन (एसएमएसपी)।
3) कृषि मशीनीकरण पर उप मिशन (एसएमएएम)।
4) पादप संरक्षण और पादप संगरोध (एसएमपीपी) पर उप मिशन। नया घटक केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में होगा। योजना के तहत वर्ष 2018-19 के लिए `30.00 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
सतत कृषि पर राष्ट्रीय मिशन (NMSA): सतत कृषि उत्पादकता गुणवत्ता और उपलब्धता पर निर्भर करती है मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों का. उचित माध्यम से इन दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा देकर कृषि विकास को कायम रखा जा सकता है स्थान विशिष्ट उपाय. इस प्रकार, वर्षा आधारित कृषि के विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण खाद्यान्न की बढ़ती मांग को पूरा करने की कुंजी है राज्य में। इस दिशा में, विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) तैयार किया गया है। मुख्य इस मिशन के तहत वितरण योग्य हैं:
1) वर्षा आधारित कृषि का विकास करना।
2) प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन।
3) जल उपयोग दक्षता बढ़ाना।
4) मृदा स्वास्थ्य में सुधार।
5) संरक्षण कृषि को बढ़ावा देना। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है और इसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी क्रमश: 90:10 के अनुपात में होगी। योजना के तहत बजट प्रावधान वर्ष 2018-19 के लिए `22.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM): राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को बढ़ाना है। उत्पादन चावल, गेहूं और दालों की. एनएफएसएम को राज्य में रबी 2012 से दो प्रमुख घटकों एनएफएसएम-चावल और एनएफएसएम-गेहूं के साथ लॉन्च किया गया है। एनएफएसएम-राइस के तहत तीन में परिचालन चल रहा है राज्य के जिलों में और जबकि नौ जिलों में एनएफएसएम-गेहूं केंद्र सरकार से 100 प्रतिशत सहायता के साथ। मिशन का उद्देश्य चावल और गेहूं का उत्पादन बढ़ाना है क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता वृद्धि के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता को बहाल करना, रचनात्मकता रोजगार के अवसर और लक्ष्य में कृषि अर्थव्यवस्था के स्तर को बढ़ाना जिले. वर्ष 2018-19 के लिए `16.50 करोड़ का व्यय किया गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: कृषि उत्पादकता में सुधार के प्रयास में, सरकार भारत ने एक नई योजना शुरू की है, अर्थात। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई)। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं ("हर खेत को पानी") और शुरू से अंत तक सिंचाई समाधान इस योजना का मुख्य फोकस होगा। “पीएमकेएसवाई का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र स्तर पर सिंचाई में निवेश का अभिसरण हासिल करना, खेती योग्य भूमि का विस्तार करना है।” सुनिश्चित सिंचाई के तहत क्षेत्र, पानी की बर्बादी को कम करने के लिए खेत में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार, सटीक सिंचाई और अन्य जल-बचत प्रौद्योगिकियों को अपनाना। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 हेतु राज्य योजनान्तर्गत `22.00 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
सूक्ष्म सिंचाई योजना के माध्यम से कुशल सिंचाई: राज्य सरकार राज्य में कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है फसलों की उत्पादकता बढ़ाना। सिंचाई की कुशल प्रणाली के लिए सरकार ने 'सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से कुशल सिंचाई योजना' नामक एक योजना शुरू की है सिस्टम' 2015-16 से 2018-19 तक 4 वर्षों की अवधि में `154.00 करोड़ के परिव्यय के साथ। इस परियोजना के माध्यम से 8,500 हेक्टेयर क्षेत्र को ड्रिप/स्प्रिंकलर के अंतर्गत लाया जाएगा सिंचाई व्यवस्था से 14,000 किसानों को लाभ। किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत की दर से सब्सिडी प्रदान की जाएगी। एक बजट 2018-19 के दौरान इस घटक के लिए `15.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
उत्तम चारा उत्पादन योजना: राज्य सरकार ने राज्य में चारा उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तम चारा उत्पादन योजना शुरू की है। एक योजना; 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र को चारा उत्पादन के अंतर्गत लाकर चारा विकास के लिए 'उत्तम चारा उत्पादन योजना'। चारा घास, कलमों और बीजों के गुणवत्तापूर्ण बीज किसानों को उन्नत किस्म के चारे की आपूर्ति रियायती दरों पर की जाएगी। चारा काटने की मशीन पर सब्सिडी एससी/एसटी और बीपीएल के लिए उपलब्ध है किसान. 2018-19 के लिए `8.00 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना: बंदरों और जंगली जानवरों के आतंक से हर साल फसलों को भारी नुकसान होता है। मैन्युअल रखवाली द्वारा फसल सुरक्षा की वर्तमान प्रथा 100 प्रतिशत फसल सुनिश्चित नहीं करती है। इसलिए, हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक योजना शुरू की है "मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना"। इस योजना के तहत 80 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सौर ऊर्जा की मदद से बाड़ को ऊर्जावान बनाया जाएगा। खेतों के चारों ओर की बाड़ में करंट आवारा जानवरों, जंगली जानवरों और बंदरों को खेतों से दूर रखने के लिए पर्याप्त होगा। इस योजना के तहत बजट प्रावधान है वर्ष 2018-19 के लिए `30.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है और इस योजना के तहत लगभग 1,800 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि को जंगली / आवारा जानवरों और बंदरों के खतरे से बचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना: किसानों को बीमा कवर प्रदान करने के उद्देश्य से और कृषि कृषि मशीनरी के संचालन के कारण मजदूरों को चोट लगने या मृत्यु की स्थिति में, राज्य सरकार ने एक योजना शुरू की है जिसका नाम है; 'मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन 2015-16 में सुरक्षा। मृत्यु और स्थायी विशेष योग्यता के मामले में प्रभावित किसानों को 1.50 लाख रुपये और आंशिक विशेष योग्यता के मामले में 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। वर्ष 2018-19 हेतु `40.00 लाख का बजट प्रावधान रखा गया है।
लिफ्ट सिंचाई और बोरवेल योजना: राज्य के अधिकांश हिस्सों में, सिंचाई के लिए पानी उठाना पड़ता है . किसानों को प्रोत्साहन के रूप में, सरकार ने लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के निर्माण और व्यक्तिगत रूप से बोर-वेल की स्थापना के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। या सिंचाई प्रयोजनों के लिए किसानों का समूह। इस योजना के तहत निम्न और मध्यम लिफ्ट सिंचाई प्रणाली, उथले कुओं के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध है। उथले बोर कुएं, विभिन्न क्षमताओं के जल भंडारण टैंक, पंपिंग मशीनरी और व्यक्तिगत किसानों या किसानों के समूह के लिए जल संवहन पाइप। एक बजट प्रावधान वर्ष 2018-19 के लिए `10.00 करोड़ का बजट रखा गया है।
सौर सिंचाई योजना: सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा का वैकल्पिक स्रोत है और इसमें बहुत बड़ी क्षमता है। जो पूरा कर सकता है कृषि कार्यों की अधिकांश महत्वपूर्ण आवश्यकताओं के लिए। यह न केवल सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। सौर ऊर्जा एक निर्बाध स्रोत है और सारी ऊर्जा पृथ्वी में संग्रहित होती है कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे भंडार केवल 20 दिनों की धूप में ऊर्जा के बराबर हैं। राज्य सरकार ने एक नई योजना "सौर सिंचाई योजना" शुरू की है फसलों को सुनिश्चित सिंचाई प्रदान करें, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाएं जहां दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली की पहुंच सौर पीवी पंपों की तुलना में महंगी है। इसके अंतर्गत योजना के तहत छोटे/सीमांत किसानों को व्यक्तिगत आधार पर सोलर पंपिंग मशीनरी की स्थापना के लिए 90 प्रतिशत सहायता प्रदान की जाएगी। 80 फीसदी सहायता मिलेगी मध्यम/बड़े किसानों को सोलर पंपिंग मशीनरी की स्थापना के लिए प्रदान की जाती है व्यक्तिगत आधार पर. यदि न्यूनतम पांच किसान सामुदायिक आधार पर सौर पंपिंग मशीनरी की स्थापना का विकल्प चुनते हैं तो 100 प्रतिशत सहायता प्रदान की जाएगी। अंतर्गत इस योजना के तहत किसानों को 5,850 कृषि सोलर पम्पिंग सेट उपलब्ध कराये जायेंगे। इस योजना का कुल परिव्यय अगले पांच वर्षों के लिए `200 करोड़ है। वर्ष 2018-19 के लिए `30.00 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है
जल से कृषि को बाल योजना: सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, सरकार ने एक नई योजना शुरू की है योजना "जल से कृषि को बाल योजना"। इस योजना के तहत चेक डैम और तालाबों का निर्माण किया जायेगा. लघु निर्माण के बाद किसान इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए कर सकते हैं व्यक्तिगत आधार पर लिफ्टिंग योजनाएं या प्रवाह सिंचाई योजनाएं। अगले पांच वर्षों के लिए इस योजना का कुल परिव्यय `250.00 करोड़ है। `40.00 का बजट प्रावधान इसके लिए करोड़ रुपये रखे गये हैं. इस योजना के तहत समुदाय आधारित लघु जल बचत योजना के कार्यान्वयन के लिए 100 प्रतिशत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
उपजाऊ, गहरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी के साथ-साथ कृषि जलवायु स्थितियों, स्थलाकृतिक विविधताओं और ऊंचाई संबंधी अंतरों की समृद्ध विविधता हिमाचल में शीतोष्ण से लेकर उपोष्णकटिबंधीय फलों की खेती को बढ़ावा देना। यह क्षेत्र सहायक बागवानी उत्पादों की खेती के लिए भी उपयुक्त है फूल, मशरूम, शहद और हॉप्स।
हिमाचल की इस विशेष उपयुक्तता के परिणामस्वरूप भूमि उपयोग पैटर्न कृषि से फल की ओर स्थानांतरित हो गया है पिछले कुछ दशकों में फसलें। फलों का क्षेत्रफल, जो 1950-51 में 792 हेक्टेयर था, कुल उत्पादन 1,200 टन के साथ बढ़कर 2,30,852 हेक्टेयर हो गया। 2017-18 के दौरान. 2017-18 में कुल फल उत्पादन 5.65 लाख टन था, जबकि 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 4.06 लाख टन बताया गया है। 2018-19 के दौरान, फलदार पौधों के तहत 2,004 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र के लक्ष्य के मुकाबले 2,351 हेक्टेयर क्षेत्र वास्तव में इसके अंतर्गत लाया गया है। वृक्षारोपण और इस प्रक्रिया में वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 6.50 लाख विभिन्न फलों के पौधे वितरित किए गए।
सेब अब तक हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण फल फसल है, जो फल फसलों के तहत कुल क्षेत्रफल का लगभग 49 प्रतिशत है और लगभग कुल फल उत्पादन का 79 प्रतिशत। सेब का क्षेत्रफल 1950-51 में 400 हेक्टेयर से बढ़कर 1960-61 में 3,025 हेक्टेयर और 1,12,634 हेक्टेयर हो गया है। 2017-18.
सेब के अलावा अन्य शीतोष्ण फलों का क्षेत्रफल 1960-61 में 900 हेक्टेयर से बढ़कर 2017-18 में 28,369 हेक्टेयर हो गया है। मेवे और सूखे मेवे प्रदर्शनी क्षेत्र 1960-61 में 231 हेक्टेयर से बढ़कर 201718 में 10,301 हेक्टेयर हो गया है, खट्टे फल और अन्य उपोष्णकटिबंधीय फल 1,225 हेक्टेयर से बढ़ गए हैं और 1960-61 में 623 हेक्टेयर से 2017-18 में क्रमशः 24,649 हेक्टेयर और 54,899 हेक्टेयर हो गया।
मौसम की अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण अनियमित सेब उत्पादन के कारण विकास की यह गति और खतरे में पड़ गई है। आगमन डब्ल्यूटीओ, जीएटीटी और अर्थव्यवस्था के उदारीकरण से एप्पल के प्रभुत्व पर कई चुनौतियाँ आ रही हैं हिमाचल प्रदेश का फल उद्योग। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सेब के उत्पादन में उतार-चढ़ाव ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। विभिन्न कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों में विविध बागवानी उत्पादन के माध्यम से पहाड़ी राज्य की विशाल बागवानी क्षमता का पता लगाना और उसका दोहन करना आवश्यक है।
बागवानी विकास योजना एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में ढांचागत सुविधाओं का निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित करना है। सभी फलों की फसलों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक संसाधनों और इनपुट तक समान पहुंच। इस योजना के अंतर्गत फल उत्पादन का विकास जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं। क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम, फल उत्पादकों के बगीचों में नई प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं के बेहतर पैकेज का प्रदर्शन, अखरोट/हेज़लनट/का विकास पिस्ता अखरोट, आम/लीची, स्ट्रॉबेरी और जैतून का कार्यान्वयन किया जा रहा है।
मशीनीकृत खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2018-19 के दौरान 1,173 पावर स्प्रेयर, बागवानी विकास योजना के तहत बागवानों के बीच 1,808 नग पावर टिलर (<8बीएचपी) और 231 नग पावर ट्रिलर (>8बीएचपी) सब्सिडी पर वितरित किए जा रहे हैं।
फल उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले इसलिए राज्य में विपणन हस्तक्षेप योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना के तहत इस दौरान वर्ष 2018-19 में सेब का खरीद मूल्य पिछले वर्ष के समान ही `7.50 प्रति किलोग्राम रहा और विशेष मामले के रूप में लाहौल स्पीति जिले के लिए `20 प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। नवंबर, 2018 के अंतिम सप्ताह के दौरान भारी बर्फबारी के कारण हुए भारी नुकसान को ध्यान में रखते हुए।
आम के फल का खरीद मूल्य `6.00 प्रति किलोग्राम है। 250 मीट्रिक टन तक अंकुर आम, 200 मीट्रिक टन तक ग्राफ्टेड आम के लिए 7.00 प्रति किलोग्राम और 50 मीट्रिक टन तक कच्चे अचारी आम के लिए 6.00 प्रति किलोग्राम। इस वर्ष 2018-19 में 27,193 मीट्रिक टन सी-ग्रेड इस योजना के तहत `28.00 करोड़ मूल्य के सेब फल और `10,360 लाख मूल्य के 1.48 मीट्रिक टन ग्राफ्टेड आम खरीदे गए हैं। मार्केट क्रियान्वयन हेतु प्रस्ताव साइट्रस बी और सी ग्रेड के लिए हस्तक्षेप योजना 2018 अनुमोदन के लिए सरकार को प्रस्तुत की गई है।
राज्य के गर्म क्षेत्रों में आम एक महत्वपूर्ण फल फसल के रूप में उभरा है। कुछ क्षेत्रों में लीची का भी महत्व बढ़ रहा है। आम और लीची बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त कर रहे हैं। मध्य पहाड़ी क्षेत्र में, नए फलों की सफल खेती के लिए कृषि जलवायु परिस्थितियाँ अत्यधिक उपयुक्त हैं जैसे कीवी, जैतून, अनार, पेकन और स्ट्रॉबेरी। पिछले तीन वर्षों एवं चालू वर्ष में दिसम्बर, 2018 तक फलों का उत्पादन तालिका 7.9 में दिया गया है।

बागवानी उद्योग में विविधता लाने के लिए दिसंबर, 2018 तक कुल 441.00 हेक्टेयर क्षेत्र को फूलों की खेती के तहत लाया गया है। बढ़ावा देना फूलों की खेती महोगबाग (चायल, जिला सोलन) और पालमपुर में मॉडल फूल खेती केंद्रों के तहत दो ऊतक संस्कृति प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। जिला कांगड़ा. फूलों के उत्पादन और विपणन के लिए जिला शिमला, कांगड़ा, लाहौल और स्पीति और चंबा में चार किसान सहकारी समितियां कार्य कर रही हैं। मशरूम और मधुमक्खी पालन जैसी सहायक बागवानी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 361.47 मीट्रिक टन पाश्चुरीकृत खाद मशरूम के लिए चंबाघाट, बजौरा और पालमपुर स्थित विभाग की इकाइयों से तैयार और वितरित किया गया था। कुल 3,631.50 मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हुआ राज्य में दिसम्बर, 2018 तक मधुमक्खी पालन कार्यक्रम के तहत दिसम्बर, 2018 तक 309.79 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया गया है।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना शुरू में हिमाचल प्रदेश में रबी के दौरान सेब की फसल के लिए 6 ब्लॉकों में और आम की फसल के लिए 4 ब्लॉकों में शुरू की गई थी। 2009-10. इस योजना की लोकप्रियता को देखते हुए, इस योजना के तहत कवरेज को लगातार वर्षों के दौरान बढ़ाया गया है। फिलहाल यह योजना चल रही है सेब के लिए 36 ब्लॉक, आम के लिए 41 ब्लॉक, साइट्रस के लिए 15 ब्लॉक, प्लम के लिए 13 ब्लॉक और आड़ू की फसल के लिए 5 ब्लॉक में लागू किया गया।
इसके अलावा, सुरक्षा के लिए ओलावृष्टि से सेब फल की फसल एडऑन कवर योजना के तहत 19 ब्लॉकों को कवर किया गया है। वर्ष 2017-18 से योजना का नाम बदलकर रिस्ट्रक्चर्ड वेदर कर दिया गया है आधारित फसल बीमा योजना (आर-डब्ल्यूबीसीआईएस) और बीमा राशि को संशोधित किया गया है और बोली प्रणाली शुरू की गई है। रबी सीजन 2017-18 के दौरान 1,61,449 किसान रहे हैं सेब, आड़ू, प्लम, आम और खट्टे फलों की फसलों के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत कवर किया गया है, जिन्होंने अपने 95,88,892 पेड़ों का बीमा कराया है। राज्य सरकार ने 25 प्रतिशत प्रीमियम सब्सिडी `19.05 करोड़ वहन की है।
वर्ष 2018-19 के दौरान केंद्र प्रायोजित योजना RKVY-RAFTAAR के कार्यान्वयन के लिए `350.00 की धनराशि सरकार से लाख मिल चुके हैं। भारत का और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को आवंटित कर दिया गया है और कार्य प्रगति पर है। 'इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड एसेट' स्ट्रीम अमाउंटिंग के तहत फंड उपलब्ध कराया गया है फार्म मशीनीकरण के माध्यम से बागवानी विकास के लिए `42.10 लाख, वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों के माध्यम से जैविक खेती के लिए 49.50 लाख, स्थापना के लिए 80.00 लाख मशरूम इकाइयों की 'जल स्रोतों के निर्माण' के लिए `135.10 लाख, 'जैव नियंत्रण प्रयोगशाला राजहाना के सुदृढ़ीकरण' के लिए `9.00 लाख और मॉडल के विकास के लिए `34.30 लाख 'फ्लेक्सी फंड्स' स्ट्रीम के तहत हिमाचल प्रदेश में इसके शोधन, अपनाने और विस्तार के लिए शून्य बजट प्राकृतिक कृषि प्रणाली पर प्रदर्शन इकाई। कुल संख्या वर्ष 2007-08 से दिसंबर, 2018 तक 16,208 किसानों को लाभान्वित किया गया है।
प्रतिस्थापन के लिए एक नई लॉन्च की गई योजना मुख्यमंत्री ग्रीन हाउस नवीनीकरण योजना 5 साल पुराने पॉली हाउसों की पांच साल की पॉली फिल्म को वर्ष 2018-19 में `1.00 करोड़ की धनराशि प्रदान की गई और हैं कार्यान्वयन की प्रक्रिया में है और फलों की फसलों को ओलावृष्टि से बचाने के लिए एंटी-हेल नेट की स्थापना के तहत फील्ड पदाधिकारियों को `10.00 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है।
कुशल और अकुशल बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान करने और राज्य में वाणिज्यिक फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए 'हिमाचल' के तहत धन आवंटित किया गया है। पुष्प क्रांति योजना' के लिए वर्ष 2018-19 के दौरान `10.00 करोड़ की राशि।
इसी प्रकार, गुणवत्तापूर्ण फलों की फसलें पैदा करने और उत्पादन बढ़ाने, शहद उत्पादन और अन्य मधुमक्खी उत्पादों को बढ़ाने के लिए, बेरोजगार ग्रामीण/शहरी युवाओं को उनकी आजीविका के स्रोत के रूप में रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए, 'मुख्यमंत्री मधु विकास योजना' के तहत `10.00 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। वर्ष 2018-19 के दौरान.
राज्य में बागवानी विभाग द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना-मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) को राज्य में क्रियान्वित किया जा रहा है जिसके तहत सहायता दी जा रही है फलों, फूलों, सब्जियों, मसालों की खेती और स्थापना जैसी विभिन्न बागवानी गतिविधियों को करने के लिए किसानों को 50 प्रतिशत की दर से बैक एंडेड सब्सिडी प्रदान की जाती है। नए उद्यान, मशरूम उत्पादन, उच्च मूल्य वाले फूलों और सब्जियों की ग्रीन हाउस खेती, एंटी हेल नेट, बागवानी मशीनीकरण, फसल कटाई के बाद प्रबंधन आदि।
के लिए वर्ष 2018-19 के दौरान केंद्र प्रायोजित योजना एमआईडीएच के कार्यान्वयन के लिए `30.55 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से `15.27 करोड़ सरकार से प्राप्त हो चुके हैं। इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2003-04 से दिसंबर, 2018 तक प्रथम किस्त के रूप में भारत के कुल 2,44,314 किसान लाभान्वित हुए हैं।
बागवानी में संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने पॉली हाउस के तहत सब्सिडी 50% से बढ़ाकर 85% और 62,000 वर्ग मीटर कर दी है। माउंट क्षेत्र को लक्षित किया गया है वर्ष 2018-19 के दौरान ग्रीन हाउस के अंतर्गत लाया जाएगा। फलों की फसलों विशेषकर सेब को ओलावृष्टि से बचाने के लिए राज्य सरकार ने एंटी हेल नेट पर सब्सिडी बढ़ा दी है 50% से 80% तक. इसे 5 लाख वर्ग मीटर लाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2018-19 के दौरान एंटी हेल नेट के तहत क्षेत्र।
एच.पी.एम.सी. ताजे फलों और सब्जियों के विपणन और अप्राप्य वस्तुओं के प्रसंस्करण के उद्देश्य से प्रदेश में एक राज्य सार्वजनिक उपक्रम की स्थापना की गई थी अधिशेष और प्रसंस्कृत उत्पादों का विपणन। अपनी स्थापना के बाद से, एचपीएमसी राज्य के फल उत्पादकों को सुविधाएं प्रदान करके उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनकी उपज का लाभकारी रिटर्न।
वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक एचपीएमसी ने निर्धारित लक्ष्य `80.02 करोड़ के मुकाबले `42.63 करोड़ का कुल कारोबार दर्ज किया है। वित्तीय वर्ष के लिए 2018-19. बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत, वर्ष 2018-19 के दौरान, एच.पी. सरकार। आम, सेब और साइट्रस की बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) की नीति जारी रखी राज्य में फलों का समर्थन मूल्य इस प्रकार है:-
इसके अलावा, सेब के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस-2018) के तहत एचपीएमसी ने लगभग 15,400 मीट्रिक टन की खरीद की है। निगम ने "सी" ग्रेड के 7,594.31 मीट्रिक टन सेब का प्रसंस्करण किया वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 569.25 मीट्रिक टन एप्पल जूस कॉन्सन्ट्रेट निकाला गया। निगम मुख्य रूप से अपने थोक खरीदारों, रेलवे, को अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है। उत्तरी कमान मुख्यालय उधमपुर, विभिन्न धार्मिक संस्थान, एम/एस पार्ले और देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थान, खुदरा दुकानें और कियोस्क।
निगम ने इन संस्थानों को 260.31 मीट्रिक टन सेब का रस `4.35 करोड़ में और अन्य प्रक्रिया उत्पाद `9.39 करोड़ में बेचा है। एचपीएमसी भी मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ में आईटीडीसी के होटलों और संस्थानों को फलों और सब्जियों की आपूर्ति जारी रखी। दिसंबर, 2018 तक एचपीएमसी ने आपूर्ति की है इन संस्थानों को 2.75 करोड़ रुपये के फल और सब्जियां। एचपीएमसी ने राज्य में उत्पादकों को `3.57 करोड़ की सामग्री बेची है।
निगम ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, परवाणू में अपने कोल्ड स्टोर और पांच नियंत्रित वातावरण स्टोर के माध्यम से `5.12 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। हिमाचल प्रदेश के उत्पादक क्षेत्र का. निगम ने ट्रकों, किराया, अर्जित कमीशन और अन्य सामग्री की बिक्री से `5.75 करोड़ की आय अर्जित की है जैसे कि पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर, मिनरल वाटर, फार्म इनपुट, अन्य कंपनी के टैक्स भुगतान वाली वस्तुएं आदि दिसंबर 2018 के अंत तक और निगम ने बेची भी हैं। दिसंबर, 2018 तक घरेलू बाजार में `13.75 करोड़ का पीपी फूड मूल्य।
निगम एचपीएमसी को प्रौद्योगिकी के उन्नयन के लिए कुल `39.50 करोड़ की सहायता अनुदान स्वीकृत कराने में सक्षम रहा है। एपीडा भारत सरकार। इन्हें निम्नलिखित परियोजनाओं के लिए प्राप्त किया गया है:-
i) जरोल टिक्कर (कोटगढ़), गुम्मा (कोटखाई), ओड्डी (कुमारसैन) के पैकिंग हाउसों का उन्नयन। पतलीकुहल (कुल्लू) और रिकांग पियो को `7.97 करोड़ की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता के साथ।
ii) एचपीएमसी ने `10.09 करोड़ की अनुदान सहायता से जिला शिमला के गुम्मा और जरोल-टिक्कर में दो सीए स्टोर चालू किए हैं।
iii) नादौन जिला हमीरपुर में एक आधुनिक सब्जी पैक हाउस और कोल्ड रूम की स्थापना और पैकिंग ग्रेडिंग के लिए पैक हाउस और कोल्ड रूम की स्थापना जिला बिलासपुर के घुमारवीं में फलों, सब्जियों, फूलों और पाक जड़ी-बूटियों को `7.89 करोड़ की 100 प्रतिशत अनुदान सहायता के साथ।
iv) फ्रूट में स्थापित करने के लिए `3.55 करोड़ की 100 प्रतिशत अनुदान सहायता के तहत टेट्रा पैक फिलिंग मशीन टीबीए-9 को टीबीए-19 में बदलना उत्पादन में दक्षता में सुधार के लिए प्रसंस्करण संयंत्र परवाणु जिला सोलन।
v) परवाणु में एजेसी प्लांट के उन्नयन के लिए `10.00 करोड़ की सहायता अनुदान स्वीकृत किया गया है। उपरोक्त के अतिरिक्त, पिछले वर्ष एचपीएमसी ने परिवर्तन किया है नाबार्ड के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार की वित्तीय सहायता से रोहड़ू, ओड्डी और पतलीकुहल में 700 मीट्रिक टन क्षमता वाले सीए स्टोर में 3 कोल्ड स्टोरेज ऋण देना और आगे पार्टियों को पट्टे पर देना और निवेश पर रिटर्न देना शुरू कर दिया है।
vi) एचपीएमसी पैक हाउस, कोल्ड स्टोर, सीए स्टोर और फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट आदि के शेष मौजूदा बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए तत्पर है। पीपीपी मोड के तहत किसानों को सुविधा प्रदान करने के लिए जलग्रहण क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के साथ व्यवहार्य हरित क्षेत्र परियोजना ताकि अच्छे और कुशल विपणन परिणाम सामने आएं ताकि निगम का राजस्व बढ़ाया जा सके। इसके अलावा सीएस दिल्ली, चेन्नई और परवाणू जैसे परिचालन उद्देश्यों के लिए अन्य गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और घाटे में चल रही इकाइयों का निजीकरण करने पर भी विचार किया जा रहा है।

8.पशुपालन और मत्स्य पालन

पशुधन का पालन-पोषण ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। हिमाचल प्रदेश में सामान्य संपत्ति संसाधनों (सीपीआर) के बीच एक गतिशील संबंध है। जैसे जंगल, पानी और चारागाह, पशुधन और फसलें। पशुधन कुछ हद तक सीपीआर पर उगाए गए चारे और घास के साथ-साथ फसलों पर भी निर्भर करते हैं अवशेष. साथ ही जानवर चारा, घास और फसल के अवशेषों को खाद के रूप में सीपीआर और खेतों में लौटा देते हैं और बहुत आवश्यक मसौदा शक्ति प्रदान करते हैं।
इस प्रकार पशुधन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की स्थिरता का एक महत्वपूर्ण अभिन्न अंग है। वर्ष 2017-18 के दौरान प्रमुख पशुधन उत्पादों का योगदान 13.92 लाख टन दूध, 1,484 टन ऊन, 98.14 मिलियन अंडे और 4,492 टन मांस था जो संभवतः 14.71 लाख टन दूध, 1,503 के क्रम का होगा। 2018-19 के दौरान टन ऊन, 100 मिलियन अंडे और 4,500 टन मांस। दूध उत्पादन और प्रति व्यक्ति उपलब्धता तालिका- 8.1 में दर्शाई गई है

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पशुधन विकास कार्यक्रम के लिए इस पर ध्यान दिया जाता है। राज्य के माध्यम से:
i) पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण।
ii) मवेशी विकास।
iii) भेड़ प्रजनन और ऊन का विकास।
iv) कुक्कुट विकास।
v) चारा और चारा विकास।
vi) पशु चिकित्सा शिक्षा।
vii) पशुधन जनगणना।
पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण के अंतर्गत 1 राज्य स्तरीय पशु चिकित्सालय, 1 जोनल अस्पताल, 9 पॉलीक्लिनिक, दिसंबर, 2018 तक राज्य में 60 उप-विभागीय पशु चिकित्सालय, 348 पशु चिकित्सालय, 30 केंद्रीय पशु औषधालय और 1,766 पशु औषधालय हैं। इसके अलावा पशुओं को तत्काल पशु चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए 6 पशु चिकित्सा जांच चौकियां भी संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के तहत 1,251 पशु चिकित्सा दिसंबर, 2018 तक औषधालय खोले जा चुके हैं।
भेड़ और ऊन की गुणवत्ता में सुधार के लिए, जियोरी (शिमला), सरोल (चंबा) में सरकारी भेड़ प्रजनन फार्म, ताल (हमीरपुर), और करछम (किन्नौर) राज्य के प्रजनकों को उन्नत भेड़ की आपूर्ति कर रहे हैं। एक राम केंद्र जिला मंडी के नगवाईं में भी है यह कार्य कर रहा है जहां उन्नत मेढ़ों को पाला जाता है और क्रॉस ब्रीडिंग के लिए प्रजनकों को आपूर्ति की जाती है। वर्ष 2017-18 के दौरान इन फार्मों की झुंड संख्या 1,615 है और 178 मेढ़े प्रजनकों को वितरित किए गए। दृष्टि मे शुद्ध हॉगेट्स की बढ़ती मांग और प्रदेश में सोवियत मैरिनो और अमेरिकन रैंबौइलेट की स्थापित लोकप्रियता के कारण, राज्य ने इसे बदल दिया है राज्य में मौजूदा सरकारी फार्मों में शुद्ध प्रजनन के लिए। 9 भेड़ एवं ऊन विस्तार केंद्र कार्य करना जारी रखे हुए हैं। दौरान वर्ष 2018-19 में ऊन का उत्पादन 1,504 टन होने की संभावना है। प्रजनकों को खरगोशों के वितरण के लिए अंगोरा खरगोश फार्म कंडवारी (कांगड़ा) और नगवाईं (मंडी) में काम कर रहे हैं।
डेयरी उत्पादन पशुपालन का एक अभिन्न अंग है और हिमाचल प्रदेश में छोटे और सीमांत किसानों की कमाई का हिस्सा है। बाजारोन्मुख अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में हालिया रुझान ने दूध उत्पादन के महत्व पर जोर दिया है, खासकर शहरी उपभोग केंद्रों के आसपास के क्षेत्रों में। इसने किसानों को स्थानीय गैर-वर्णन नस्ल की गायों के स्थान पर संकर नस्ल की गायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। जर्सी और होल्स्टेन के साथ क्रॉस ब्रीडिंग द्वारा स्वदेशी मवेशियों का उन्नयन किया जा रहा है। भैंस उन्नयन में मुरल बैल को लोकप्रिय बनाया जा रहा है। डीप फ्रोज़न सीमेन की नवीनतम तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान का अभ्यास किया जा रहा है। 2017-18 के दौरान, स्पर्म स्टेशन द्वारा गायों के लिए 9.58 लाख वीर्य स्ट्रॉ और भैंसों के लिए 3.56 लाख वीर्य स्ट्रॉ का उत्पादन किया गया। 2018-19 के दौरान 11.50 लाख सीमेन स्ट्रॉ गायों और भैंसों के लिए 3.50 लाख वीर्य भूसे का उत्पादन होने की संभावना है। 2017-18 के दौरान 6.45 लाख लीटर तरल नाइट्रोजन (LN2) गैस का उत्पादन किया गया और 9.00 लाख लीटर 2018-19 में उत्पादन होने की संभावना है।
2017-18 के दौरान, 3,112 संस्थानों के माध्यम से 7.75 लाख गायों और 2.48 लाख को कृत्रिम गर्भाधान सुविधा प्रदान की जा रही है। वर्ष 2018-19 के दौरान भैंसों और 9.20 लाख गायों और 3.37 लाख भैंसों का गर्भाधान होने की संभावना है। जैसे कारकों के कारण क्रॉस ब्रीड गायों को प्राथमिकता दी जाती है लंबी स्तनपान अवधि, छोटी शुष्क अवधि और अधिक पैदावार। 2017-18 के दौरान "उत्तम पशु पुरस्कार योजना" `20.00 लाख के प्रावधान के साथ लागू की जाएगी और जिलों और ब्लॉक स्तर पर पशु मंडियों के संगठन के लिए `30.00 लाख की धनराशि प्रदान की गई है।
बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के तहत 2018-19 के दौरान 4.10 लाख दोहरे उद्देश्य वाले रंगीन नस्ल के चूजों को वितरित किए जाने की संभावना है और 750 व्यक्तियों को वितरित करने का लक्ष्य है मुर्गी पालन का प्रशिक्षण इस योजना के तहत दिसंबर, 2018 तक 6,700 लाभार्थियों के बीच 2.50 लाख चूजों को सब्सिडी पर वितरित किया गया। 60 के साथ 50 लाभार्थियों को लक्षित करने के लिए 2.79 करोड़ के बजट प्रावधान के साथ राज्य में नई परियोजना "5,000 ब्रॉयलर फार्म की स्थापना" शुरू की गई है। 2018-19 के दौरान पूंजी और आवर्ती लागत पर प्रतिशत सब्सिडी।
लाहौल और स्पीति जिले के लारी में एक घोड़ा प्रजनन फार्म स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य घोड़ों की स्पीति नस्ल को संरक्षित करना है। वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक इस फार्म में 55 घोड़े रखे गए हैं। एक याक प्रजनन फार्म भी रहा है अश्व प्रजनन लारी के परिसर में स्थापित। वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक इस फार्म में याकों की संख्या 74 थी। चारे और चारे के तहत विकास योजना, 2017-18 के दौरान 15.35 लाख चारा जड़ें, 69,000 चारा पौधे वितरित किए जाएंगे।
दूध गंगा योजना 25 सितंबर, 2009 से राज्य में नाबार्ड के सहयोग से शुरू की गई है। योजना के घटकों में शामिल हैं:
1) छोटी डेयरी इकाइयों की स्थापना (इकाइयों का आकार 2-10 दुधारू पशुओं का होता है) 10 पशुओं की खरीद के लिए `7.00 लाख का बैंक ऋण।
2) दूध देने वाली मशीन/थोक दूध ठंडा करने वाली इकाइयों की खरीद के लिए `20.00 लाख तक का बैंक ऋण।
3) स्वदेशी दुग्ध उत्पादों के निर्माण के लिए डेयरी प्रसंस्करण उपकरणों की खरीद, `13.20 लाख का बैंक ऋण।
4) डेयरी उत्पाद परिवहन सुविधाओं की स्थापना और `26.50 लाख का कोल्ड चेन बैंक ऋण।
5) दुग्ध उत्पादों की कोल्ड स्टोरेज सुविधा, बैंक से `33.00 लाख का ऋण।
6) डेयरी, मार्केटिंग आउटलेट/डेयरी पार्लर `1.00 लाख का बैंक ऋण।
सहायता का पैटर्न
i) बैंक ने सामान्य वर्ग के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत और एससी/एसटी वर्ग के किसानों के लिए 33.33 प्रतिशत की दर से पूंजी सब्सिडी समाप्त की।
ii) `3.00 लाख से अधिक के ऋण के लिए उद्यमी का योगदान (मार्जिन - धन) परियोजना लागत का 10 प्रतिशत होगा।
गोजातीय प्रजनन पर राष्ट्रीय परियोजना: `23.87 करोड़ की गोजातीय प्रजनन पर राष्ट्रीय परियोजना को सरकार द्वारा मंजूरी दे दी गई है भारत में 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता पैटर्न पर `5.00 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की गई और इसका उपयोग अनुमोदित परियोजना घटक के अनुसार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य पशुपालन विभाग की निम्नलिखित गतिविधियों को मजबूत करना है।
1) तरल नाइट्रोजन भंडारण, परिवहन और वितरण को मजबूत करना।
2) शुक्राणु स्टेशनों, वीर्य बैंकों और ए.आई. को मजबूत करना। केंद्र.
3) उच्च वंशावली बैल या शुक्राणु स्टेशनों का अधिग्रहण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राकृतिक सेवा के लिए।
4) प्रशिक्षण सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण।
5) स्वदेशी नस्ल का विकास और संरक्षण।
6) "ए" मान्यता प्राप्त स्पर्म स्टेशन से स्वदेशी नस्ल डीएफएस की खरीद।
हिमाचल प्रदेश में पोल्ट्री क्षेत्र को विकसित करने के लिए, विभाग विशेष रूप से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में निम्नलिखित पोल्ट्री विकास योजनाएं चला रहा है। बैकयार्ड पोल्ट्री परियोजना के तहत राज्य के किसानों को रंगीन स्ट्रेन किस्म यानी चैब्रो के 3 सप्ताह के चूजे प्रदाय किये जाते हैं और एक इकाई में 50-100 चूजे होते हैं। इन चूजों का उत्पादन दो हैचरी यानी नाहन और सुंदरनगर में किया जाता है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन इस परियोजना के अंतर्गत `207.36 लाख (`186.62 लाख केंद्रांश एवं `20.74 लाख राज्यांश) प्राप्त हो चुका है तथा स्वीकृत परियोजना के अनुसार राशि का उपयोग किया गया है। INAPH पर डेटा अपलोड करने के लिए 3,470 टैबलेट, 3,650 टैग एप्लिकेटर, 9,60,567 टैग और 7.78 लाख पशु स्वास्थ्य कार्ड खरीदे गए हैं और भ्रूण स्थानांतरण प्रौद्योगिकी के माध्यम से साहीवाल और लाल सिंधी नस्लों के संरक्षण और प्रसार के लिए भारत सरकार द्वारा `1.95 करोड़ जारी किए गए हैं। (ई.टी.टी.) पर पालमपुर राष्ट्रीय गोकुल मिशन निम्नलिखित उद्देश्य से कार्यान्वित किया जा रहा है:-
1) स्वदेशी नस्ल का विकास और संरक्षण।
2) देशी मवेशियों की नस्लों की आनुवंशिक संरचना में सुधार और स्टॉक बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम।
3) दूध उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि।
4) साहीवाल और लाल सिंधी जैसी विशिष्ट स्वदेशी नस्लों का उपयोग करके अवर्णनीय मवेशियों का उन्नयन।
5) प्राकृतिक सेवा के लिए रोग मुक्त उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले बैलों का वितरण।
6) 100 प्रतिशत अनुदान सहायता योजनाओं के तहत आरजीएम का वित्तपोषण।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो दिनांक 01.12.2017 से शुरू की गई है। वर्ष 2014-15. एनएलएम के तहत प्रस्तावों के कार्यान्वयन के लिए पशुपालन विभाग नोडल विभाग है। मिशन को पशुधन उत्पादन प्रणालियों और सभी हितधारकों की क्षमता निर्माण में मात्रात्मक और गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी गतिविधियों को कवर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। छोटे जुगाली करने वाले जानवरों यानी भेड़ और बकरी के विकास, चारा विकास, जोखिम प्रबंधन और मुर्गीपालन विकास से संबंधित गतिविधियाँ योजना में शामिल हैं।
इस योजना के तहत विभिन्न घटकों के लिए राज्य का हिस्सा अलग-अलग है। यह मिशन पशुधन क्षेत्र के सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए तैयार किया गया है गुणवत्तापूर्ण आहार और चारे की उपलब्धता में सुधार। सहायता का पैटर्न पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्य को सहायता: निकटवर्ती राज्यों से बड़े पैमाने पर अंतरराज्यीय प्रवास और पहाड़ी राज्यों के कारण पोषण घास और चारे की कमी के कारण स्थलाकृति के कारण अधिकांश जानवर विभिन्न पशुधन रोगों से ग्रस्त हैं। केंद्र सरकार ने संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को सहायता प्रदान की है ASCAD जो 90 प्रतिशत केंद्रीय हिस्सेदारी और 10 प्रतिशत राज्य हिस्सेदारी की तर्ज पर है। जिन बीमारियों के लिए पशुधन मालिकों को मुफ्त टीकाकरण प्रदान किया जा रहा है वे हैं एफएमडी, एचएसबीक्यू, इस परियोजना के तहत एंटरोटोक्सिमिया, पीपीआर, रानीकेट रोग, मारेक रोग और रेबीज।
स्थानीय भेड़ों को अच्छी गुणवत्ता वाले रेंबौइलेट और रूसी मेरियोनो के मेढ़ों से संकरण कराया जा रहा है ताकि गुणवत्ता के साथ-साथ ऊन उत्पादन की मात्रा भी बढ़ाई जा सके। इस तरह इन मेढ़ों को भेड़ पालकों को 60 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2018-19 के लिए 1,041 रैम उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बीपीएल कृषक बकरी पालन योजना: इस योजना के तहत 11 बकरियों (10) की इकाइयों को वितरित करने का प्रस्ताव किया गया है मादा+1 नर), 5 बकरियां (4 मादा+1 नर) और 3 बकरियां भूमिहीन, बीपीएल श्रेणी के किसानों को उनकी आय बढ़ाने के लिए 60 प्रतिशत अनुदान पर क्रमशः बीटल्स सिरोही/जमनापारी/सफेद हिमालयन नस्ल की (2 मादा + 1 नर)।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई): आरकेवीवाई के तहत बुनियादी ढांचे, पशु चिकित्सा सेवा को मजबूत करने के लिए परियोजनाएं प्रस्तुत की जाएंगी , विस्तार क्रियाकलाप, छोटे जुगाली करने वाले पशुओं का कुक्कुट विकास, पशुधन की पोषण स्थिति में सुधार, पशुधन की स्वास्थ्य स्थिति और संबंधित अन्य गतिविधियाँ राज्य के पशुधन मालिक.
प्रमुख पशुधन उत्पाद के उत्पादन के आकलन के लिए एकीकृत नमूना सर्वेक्षण: यह सर्वेक्षण राज्य में इस प्रकार किया जाता है भारतीय कृषि की गाइडलाइन के अनुसार सांख्यिकीय अनुसंधान संस्थान (एएचएस प्रभाग) नई दिल्ली। यह पशुधन आबादी से संबंधित एक विश्वसनीय डेटाबेस प्रदान करता है।
केंद्र सरकार अनुदान सहायता प्रदान करती है योजना के कार्यान्वयन के लिए राज्यों को 50:50 के आधार पर। एकीकृत नमूना सर्वेक्षण 1977-78 से नियमित रूप से हर साल इस उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है:-
1) मौसम के अनुसार और वार्षिक दूध, अंडा और ऊन उत्पादन का अनुमान लगाना।
2) औसत जनसंख्या और उपज का अनुमान लगाना।
3) गोबर उत्पादन का अनुमान लगाना।
4) औसत फ़ीड और चारे की खपत की गणना करना।
5) जनसंख्या, उपज और उत्पादन की प्रवृत्ति का अध्ययन करना।
पशुधन जनगणना: भारत सरकार द्वारा पशुधन जनगणना हर साल आयोजित की जा रही है। अब तक ऐसी 19 जनगणनाएँ की जा चुकी हैं। इसी क्रम में, 20वीं पशुगणना 1 अक्टूबर 2018 से आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत विभाग के कर्मचारी पशुपालक के घर-घर जाकर डेटा एकत्र कर रहे हैं। राज्य में पशुपालन के विकास के लिए पशुधन गणना महत्वपूर्ण है। पशु विकास से संबंधित नई नीतियां पशुधन और मुर्गीपालन की सटीक संख्या के आधार पर तैयार की जाती हैं हिमाचल प्रदेश द्वारा. फंडिंग का पैटर्न 100 प्रतिशत भारत सरकार से है।
अन्य राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश में भी पहली बार पशुओं का डाटा टेबलेट कंप्यूटर पर ऑनलाइन एकत्र किया गया। इस कार्य को अंजाम देने के लिए देश भर में 29 जांच अधिकारी, लगभग 350 पर्यवेक्षक और 3,200 प्रगणक नियुक्त किए गए हैं।
एच.पी. मिल्कफेड राज्य में डेयरी विकास गतिविधियों को कार्यान्वित कर रहा है। एच.पी. मिल्कफेड के पास 977 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां हैं। इन समाजों की कुल सदस्यता 42,650 है जिनमें से 205 महिला डेयरी सहकारी समितियाँ भी कार्य कर रही हैं। दुग्ध उत्पादकों से अतिरिक्त दूध ग्राम डेयरी सहकारी समितियों द्वारा एकत्र किया जाता है, संसाधित किया जाता है और एच.पी. द्वारा विपणन किया गया। मिल्कफेड. वर्तमान में मिल्कफेड 22 दूध शीतलन केंद्र चला रहा है, जिनकी कुल क्षमता 91,500 लीटर दूध प्रतिदिन है और 11 दूध प्रसंस्करण संयंत्र हैं। प्रति दिन 1,00,000 लीटर दूध की कुल क्षमता।
शिमला जिले के दत्तनगर में प्रति दिन 5 मीट्रिक टन का एक दूध पाउडर संयंत्र और 16 मीट्रिक का एक पशु चारा संयंत्र जिला हमीरपुर के भोर में टन प्रतिदिन क्षमता स्थापित और कार्यशील है। गांवों से प्रतिदिन औसत दूध की खरीद लगभग 63,500 लीटर है ग्राम डेयरी सहकारी समितियाँ।
एच.पी. मिल्कफेड प्रतिदिन लगभग 27,397 लीटर दूध का विपणन कर रहा है जिसमें विभिन्न प्रतिष्ठित डेयरियों को दूध की आपूर्ति शामिल है थोक में और डगशाई, शिमला, पालमपुर और धर्मशाला (योल) क्षेत्रों में सेना इकाइयों को आपूर्ति। दुग्ध शीतलन केंद्रों में एकत्र किए गए दूध को दूध प्रसंस्करण संयंत्रों में ले जाया जाता है जहां इसे संसाधित किया जाता है, पैक किया जाता है (हिम ब्रांड) और पाउच के साथ-साथ ढीले कंटेनरों में भी विपणन किया जाता है।
एच.पी. मिल्कफेड ग्रामीण क्षेत्रों में सेमिनार, शिविर आयोजित करके डेयरी के क्षेत्र में तकनीकी जानकारी, जागरूकता गतिविधियाँ प्रदान करता है। इसके अलावा अन्य इनपुट जैसे पशु चारा और स्वच्छ दूध किसानों को उनके दरवाजे पर उत्पादन गतिविधियाँ प्रदान की जाती हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूध खरीद दरों में 1.00 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। 01.04.2018 इस प्रकार दे रहा हूँ दुग्ध महासंघ से जुड़े 42,650 परिवारों को सीधा वित्तीय लाभ।
विकासात्मक प्रयास: अधिशेष दूध का उपयोग करने और इसके राजस्व को बढ़ाने और इसके घाटे को कम करने के लिए एच.पी. मिल्कफेड ने पहल कर दी है निम्नलिखित विकासात्मक गतिविधियाँ:-
1) 5,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता के प्रसंस्करण संयंत्र रिकांग पियो, जिला किन्नौर, नालागढ़, जिला सोलन, जिला कुल्लू और मोहाल में स्थापित किए जा रहे हैं। जंगल बेरी, जिला हमीरपुर, चंबा, रोहड़ू, नाहन, ऊना और मंडी और कांगड़ा जिले में 20,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता के प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड आईसीडीएस परियोजना के तहत कल्याण विभाग की आवश्यकता को पूरा करने के लिए 'पंजीरी विनिर्माण संयंत्र' चक्कर (मंडी) में पंजीरी का निर्माण कर रहा है। 2017-18 के दौरान 39,331 क्विंटल 'न्यूट्रीमिक्स' की आपूर्ति की गई है। हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड ने 4,798 क्विंटल स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) और 11,551 क्विंटल की आपूर्ति भी की है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग को क्विंटल बेकरी बिस्किट।
1) एच.पी. दुग्ध महासंघ ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादकों को अच्छी गुणवत्ता का दूध पैदा करने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
2) एच.पी. मिल्कफेड ने भी दीपावली उत्सव के दौरान 390 क्विंटल मिठाइयाँ बनाकर अपनी गतिविधियों में विविधता लाई है।
3) एच.पी. मिल्कफेड आईजीएमसी शिमला में रक्तदाताओं को रिफ्रेशमेंट किट प्रदान कर रहा है। एच.पी. की उपलब्धि मिल्कफेड को तालिका 8.2 में दर्शाया गया है
एच.पी. दुग्ध महासंघ दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले दुग्ध उत्पादकों को न केवल लाभकारी बाजार उपलब्ध कराता है, बल्कि दुग्ध एवं दूध भी उपलब्ध कराता है। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद। यह सुनिश्चित करने के लिए कि दूध को ग्रामीण स्तर पर तुरंत ठंडा किया जाए, एच.पी. मिल्कफेड ने 105 बल्क लगाए हैं राज्य के विभिन्न हिस्सों में ग्रामीण स्तर पर मिल्क कूलर।
पारदर्शिता और स्वचालन लाने के लिए ग्रामीण स्तर पर दूध का परीक्षण, एच.पी. मिल्कफेड ने विभिन्न ग्राम डेयरी सहकारी समितियों में 268 स्वचालित दूध संग्रह इकाइयाँ स्थापित की हैं।
फेडरेशन का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश राज्य में ऊन उद्योग की वृद्धि और विकास को बढ़ावा देना है ऊन उत्पादकों को बिचौलियों/व्यापारियों के शोषण से मुक्त कराना। उपरोक्त उद्देश्य के अनुसरण में, फेडरेशन सक्रिय रूप से शामिल है भेड़ और अंगोरा ऊन की खरीद, चरागाह स्तर पर भेड़ की ऊन काटना, भेड़ ऊन की सफाई और ऊन का विपणन। भेड़ कतरने का काम आयातित स्वचालित मशीनों से किया जाता है।
वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक भेड़ ऊन की खरीद 64,174 किलोग्राम थी। और उसका मूल्य `36.06 लाख था। फेडरेशन कुछ को क्रियान्वित भी कर रहा है राज्य में भेड़ और अंगोरा प्रजनकों के लाभ और उत्थान के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाएं। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान इन योजनाओं का लाभ मिलने की संभावना है लगभग 15,000 प्रजनकों तक प्रसारित करने के लिए। फेडरेशन स्थापित बाजारों में ऊन बेचकर ऊन उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य भी प्रदान कर रहा है।
हिमाचल प्रदेश भारत के कुछ राज्यों में से एक है जिसे प्रकृति ने ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों का उपहार दिया है। पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरें और अंततः राज्य के अर्ध-मैदानी क्षेत्र को अपने ऑक्सीजन युक्त पानी से समृद्ध करें। इसकी रैखिक रूप से बहने वाली नदियाँ ब्यास, सतलुज और हैं रावी को अपनी नीचे की यात्रा के दौरान कई जलधाराएँ प्राप्त होती हैं और वे शिज़ोथोरैक्स, गोल्डन महसीर और विदेशी ट्राउट्स जैसे बहुमूल्य ठंडे पानी के मछली जीवों को आश्रय देते हैं।
राज्य के ठंडे जल संसाधनों ने महत्वाकांक्षी इंडो-नॉर्वेजियन ट्राउट खेती परियोजना के सफल समापन और जबरदस्त प्रदर्शन के साथ अपनी क्षमता दिखाई है। विकसित प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए पहाड़ी जनता द्वारा रुचि दिखाई गई। गोबिंद सागर और पोंग बांध जलाशयों में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण मछली प्रजातियाँ, चमेरा और रणजीत सागर बांध स्थानीय आबादी के उत्थान का साधन बन गए हैं। राज्य में लगभग 5,012 मछुआरे सीधे तौर पर जलाशय में मछली पालन पर निर्भर हैं उनकी आजीविका. 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक संचयी मछली उत्पादन 8,331 मीट्रिक टन था, जिसका मूल्य `106.44 करोड़ था।
हिमाचल प्रदेश के जलाशय गोविंद सागर में प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक मछली उत्पादन और पकड़ी गई मछली का बिक्री मूल्य मूल्य सबसे अधिक होने का गौरव प्राप्त है देश में पोंग बांध. चालू वर्ष के दौरान दिसंबर, 2018 तक, राज्य के फार्मों से 7.12 टन ट्राउट बेचा गया है और `102.30 लाख का राजस्व अर्जित किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में मछली की बिक्री तालिका 8.3 में दर्शाई गई है

मत्स्य पालन विभाग ने आवश्यकता को पूरा करने के लिए राज्य में कार्प के साथ-साथ ट्राउट बीज उत्पादन फार्मों का निर्माण किया है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में जलाशय, ग्रामीण तालाब और वाणिज्यिक खेत। 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक 70 मिमी और उससे अधिक आकार की कुल 13.93 लाख अंगुलियाँ राज्य में सामान्य कार्प, समान आकार की 4.15 लाख आईएमसी और 8.34 लाख रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया गया है।
के दौरान उत्पादित कुल बीज उत्पादन का अनुमानित मूल्य वर्ष 2018-19 दिसम्बर, 2018 तक `51.43 लाख है। राज्य के पहाड़ी इलाकों के बावजूद जलीय कृषि को उचित महत्व दिया जा रहा है। "राष्ट्रीय कृषि विकास योजना" (आरकेवीवाई) के तहत सरकार द्वारा `100.60 लाख के परिव्यय को तालिका 8.4 में दर्शाए अनुसार ब्रेकअप के साथ अनुमोदित किया गया है।

मत्स्य पालन विभाग ने मछुआरों के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। मछुआरे अब कवर हो गए हैं बीमा योजना के तहत जहां `2.00 लाख (मृत्यु/स्थायी विकलांगता के मामले में) या `1.00 लाख (आंशिक विकलांगता के मामले में) और अस्पताल के लिए `10,000 दिए जाते हैं खर्च और यहां तक कि उनके गियर और शिल्प के नुकसान को राज्य सरकार द्वारा "जोखिम निधि योजना" के तहत 50 प्रतिशत तक वहन किया जा रहा है। एक अंशदायी बचत यह योजना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई है, इस योजना के तहत मछुआरे, राज्य और केंद्र को समान रूप से योगदान दिया जाता है।
यह निधि मछुआरों को करीबी मौसम के दौरान प्रदान की जाती है। वर्ष 2018-19 के दौरान मछुआरे द्वारा योगदान की गई `80.73 लाख` `26.91 लाख की राशि और राज्य और केंद्र सरकार की ओर से `53.82 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी बचत-सह-राहत निधि योजना के तहत 2,691 मछुआरों को।
मत्स्य पालन विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में ईमानदारी से योगदान दे रहा है। युवाओं और इस दिशा में विभिन्न योजनाएं शुरू की गई हैं। विभाग द्वारा कुल 517 स्वरोजगार के अवसर सृजित किये गये विभिन्न योजनाएँ. नीली क्रांति के तहत विभाग ने 2022 तक राज्य में 1,000 हेक्टेयर नए तालाबों और 1,000 ट्राउट इकाइयों के निर्माण की परिकल्पना की है।
केंद्रीय नीली क्रांति की सेक्टर योजना को केंद्र और राज्य सरकार के बीच 90:10 में साझा किया जा रहा है। इस योजना के तहत 2018-19 के दौरान
1) 20 हेक्टेयर का निर्माण। एच.पी. में प्रथम वर्ष के इनपुट सहित `79.90 लाख की लागत से प्रस्तावित पालन तालाबों के आकार में नए तालाब/टैंक।
2) `8.00 लाख की वित्तीय सहायता से निजी क्षेत्र में 2 कार्प फीड मिल की स्थापना। राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली मछली के उत्पादन के लिए बिलासपुर और कांगड़ा जिले में।
3) निजी क्षेत्र में 2 ट्राउट फीड मिल की स्थापना। कुल्लू और शिमला जिले में `8.00 लाख की वित्तीय सहायता के साथ।
4) `10.00 लाख की वित्तीय सहायता से एक ट्राउट हैचरी की स्थापना।
5) राज्य में 100 ट्राउट पालन इकाइयों की स्थापना के लिए प्रथम वर्ष के इनपुट सहित निर्माण हेतु 228.60 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
6) सरकारी क्षेत्र में जलीय कृषि के लिए 2 सौर ऊर्जा सहायता की स्थापना।
7) सरकारी क्षेत्र में रीस्युलेटरी एक्वाकल्चर प्रणाली की स्थापना। 2018-19 के दौरान मत्स्य पालन के नीली क्रांति एकीकृत विकास और प्रबंधन पर सीसीएस के तहत `7.77 करोड़ का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है।
हालांकि जलीय कृषि को मत्स्य पालन विकास का इंजन माना जाता है, लेकिन राज्य में अब तक इसकी सफलता शायद ही संतुष्टिदायक है। सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ाना। हिमाचल प्रदेश में लगभग 2.63 हेक्टेयर क्षेत्र की 762 रेसवे/इकाइयाँ रखने वाले 366 ट्राउट उत्पादक हैं।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक विभाग की उपलब्धियां और 2019-20 के लिए प्रस्तावित लक्ष्य तालिका 8.5 में दर्शाए गए हैं।

9.वन तथा पर्यावरण

हिमाचल प्रदेश में वनों के अधीन राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 68.16 प्रतिशत अर्थात 37,947 वर्ग कि.मी. क्षेत्र आता है। हालांकि, वर्तमान में वन आवरण राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 26.4 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश सरकार की वन नीति का मूल उद्देश्य वनों के उचित उपयोग के साथ-साथ इनका संरक्षण तथा विस्तार करना है। वन विभाग का लक्ष्य वर्ष 2030 स्तत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने तक वन आवरण को राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 30 प्रतिशत तक करने का है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए विभाग द्वारा चलाई जा रही कुछ योजनाओं का विवरण निम्नानुसार हैंः-
वन वृक्षारोपण विभिन्न राज्य योजना योजनाओं जैसे वृक्ष आवरण में सुधार, और मृदा संरक्षण, CAMPA के साथ-साथ केंद्रीय स्तर पर भी किया जा रहा है। प्रायोजित योजना राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम। राज्य की चारागाह एवं चारागाह भूमियों का प्रबंधन राज्य चारागाह विकास योजना के तहत किया जा रहा है और चरागाह भूमि. राज्य, सर्कल और डिवीजन स्तर पर वन महोत्सव भी जनता को शिक्षित करने और सभी के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है नई वानिकी योजना (सांझी वन योजना) के तहत वानिकी और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बारे में हितधारकों। एक अन्य योजना जिसका नाम "स्मृति वन योजना" भी है वृक्षारोपण के बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने की दृष्टि से कार्यान्वित किया जा रहा है।
इस योजना में विशेष रूप से लोगों द्वारा वृक्षारोपण की परिकल्पना की गई है उनके जन्मदिन, शादी की सालगिरह या उनके माता-पिता/रिश्तेदारों/बुजुर्गों की मृत्युतिथि के अवसर पर निर्दिष्ट क्षेत्र। ऊपर से एक भाग, चालू वित्तीय वर्ष के दौरान विभाग ने दिनांक 01.12.2017 से पूरे राज्य में 3 दिवसीय वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया है। 12 से 14 जुलाई, 2018 तक स्थानीय शामिल महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों जैसे समुदायों में 86,251 लोगों ने भाग लिया और 17,63,899 पौधे लगाए गए।
वर्ष 2018-19 के लिए, CAMPA और केंद्र प्रायोजित योजनाओं सहित 9,500 हेक्टेयर का वृक्षारोपण लक्ष्य `41.00 करोड़ की लागत से निर्धारित किया गया है जिसमें से नवंबर, 2018 तक 6,605.10 हेक्टेयर लक्ष्य प्राप्त किया गया है और `28.23 करोड़ का व्यय किया गया है।
मानव आबादी में वृद्धि, पशुपालन प्रथाओं में बदलाव और विकासात्मक गतिविधियों के कारण राज्य में वनों पर जैविक दबाव बढ़ रहा है। गतिविधियाँ। जंगल आग, अवैध कटाई, अतिक्रमण और अन्य वन अपराधों के खतरे में हैं। वन संरक्षण को मजबूत किया जा रहा है वन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील स्थानों पर चेक पोस्ट को सीसीटीवी से लैस करके।
अग्निशमन उपकरण और सुधार तकनीकों को उन सभी वन प्रभागों में भी लागू और उपलब्ध कराया जा रहा है जहां आग एक प्रमुख विनाशकारी तत्व है। के लिए संचार नेटवर्क वन संपदा का प्रभावी प्रबंधन एवं संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन कारकों को ध्यान में रखते हुए, वन प्रबंधन योजना की गहनता केन्द्रीय सहायता से क्रियान्वित किया गया। वर्ष 2018-19 के दौरान वन अग्नि के तहत केंद्रीय हिस्सेदारी (90%) के रूप में `3.69 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दी गई है रोकथाम एवं प्रबंधन योजना को केन्द्र सरकार ने पुनः मान्य कर दिया है इस योजना के तहत नवंबर, 2018 तक केवल 2017-18 की अप्रयुक्त शेष राशि `1.74 करोड़। राज्य क्षेत्र के तहत अनुमोदित गतिविधियों को पूरा करने के लिए और राज्य योजना के तहत `1.44 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दी गई है।
देर से अनुमोदन प्राप्त होने के कारण केंद्रीय क्षेत्र के तहत नवंबर, 2018 तक का व्यय शून्य है। सरकार भारत का और राज्य क्षेत्र के अंतर्गत `35.33 लाख है।
नगर वन उद्यान योजना - "एक कदम हरियाली की ओर" - जलवायु स्मार्ट हरित शहरों के लिए एक कार्यक्रम: पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय चेंज ने नगर वन उद्यान योजना नामक एक नई योजना शुरू की है - "एक कदम हरियाली की ओर" - जलवायु स्मार्ट हरित शहरों के लिए एक कार्यक्रम। इसका दर्शन योजना का उद्देश्य नगर निगम वाले प्रत्येक शहर में पौष्टिक, स्वस्थ रहने का वातावरण प्रदान करने और योगदान देने के लिए कम से कम एक सिटी फॉरेस्ट बनाना है स्मार्ट, स्वच्छ, हरित, टिकाऊ और स्वस्थ शहरों का विकास। इस योजना के तहत 80 प्रतिशत धनराशि राष्ट्रीय कैम्पा सलाहकार परिषद द्वारा उपलब्ध करायी जानी है (एनसीएसी) और राज्य सरकार द्वारा 20 प्रतिशत। `80.00 लाख प्रत्येक की किश्तें और राज्य सरकार। वर्ष 2017-18 के दौरान अपने हिस्से के लिए `20.00 लाख और शेष `20.00 का प्रावधान भी किया है वर्ष 2018-19 के दौरान लाख स्वीकृत किये गये हैं। दिसम्बर 2018 तक राज्यांश से कोई व्यय नहीं किया गया है।
स्थानीय समुदायों, छात्रों और आम जनता को वनों के महत्व और पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करने के लिए टिकाऊ फसल प्रबंधन और जंगली कटाई वाले गैर-लकड़ी लघु वन उपज का मूल्यवर्धन और आर्थिक रिटर्न बढ़ाना निम्नलिखित तीन नए हैं योजनाएं 2018-19 से शुरू की गई हैं:-
i) सामुदायिक वन संवर्धन योजना: इस योजना का मुख्य उद्देश्य संरक्षण और विकास में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। वृक्षारोपण के माध्यम से वनों की वृद्धि, वनों की गुणवत्ता में सुधार और वन आवरण में वृद्धि। यह योजना मौजूदा जेएफएमसी/वीएफडीएस के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। इस योजना के तहत 2018-19 के दौरान `2.00 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है और 20 साइटों का चयन किया गया है और प्रत्येक चयनित साइट का माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है।
ii) विद्यार्थी वन मित्र योजना: यह योजना छात्रों को वनों के महत्व और पर्यावरण में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करने के लिए शुरू की गई है। संरक्षण, छात्रों में प्रकृति संरक्षण, वनों की सुरक्षा और वन आवरण बढ़ाने के प्रति लगाव की भावना पैदा करना। का बजट प्रावधान 2018-19 के दौरान इस योजना के तहत 1.00 करोड़ रुपये रखे गए हैं और 223 स्कूलों के माध्यम से वृक्षारोपण के लिए 158 हेक्टेयर क्षेत्र का चयन किया गया है।
iii) वन समृद्धि जन समृद्धि योजना:यह योजना सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से राज्य में एनटीएफपी संसाधन आधार को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। आय बढ़ाने के लिए एनटीएफपी के संग्रह, संरक्षण और विपणन में स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण ग्रामीण आबादी का. यह योजना प्रारंभ में 7 सबसे अधिक जैव विविधता वाले जिलों अर्थात् चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, किन्नौर में लागू की जाएगी। और लाहौल एवं स्पीति और उसके बाद राज्य के शेष जिलों में। इस योजना के तहत 2018-19 के दौरान `1.00 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है।
बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं
1) हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु प्रूफिंग परियोजना (K.F.W सहायता प्राप्त): हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु प्रूफिंग परियोजना के साथ जर्मनी की सहायता से (KfW) परियोजना 7 वर्ष की अवधि के लिए राज्य के चंबा और कांगड़ा जिलों में कार्यान्वित की जा रही है। 2015-16. की लागत परियोजना `308.45 करोड़ है। परियोजना का वित्त पोषण पैटर्न 85.10 प्रतिशत ऋण और 14.90 प्रतिशत राज्य हिस्सेदारी है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य है वन पारिस्थितिकी के लचीलेपन को बढ़ाने और सुरक्षित करने के लिए हिमाचल प्रदेश में चयनित वन पारिस्थितिकी प्रणालियों का पुनर्वास, संरक्षण और टिकाऊ उपयोग जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रणालियाँ और वन आधारित उत्पादों और अन्य सेवाओं का प्रवाह सुनिश्चित करती हैं, जिससे वन पर निर्भर समुदायों को लाभ होता है।
लंबे समय में यह जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की सुरक्षा, जलग्रहण क्षेत्रों के स्थिरीकरण के लिए वन पारिस्थितिकी प्रणालियों की अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने में योगदान देगा। प्राकृतिक संसाधन आधार का संरक्षण और साथ ही हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए बेहतर आजीविका के लिए `25.00 करोड़ का परिव्यय किया गया है चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए अनुमोदित और नवंबर, 2018 तक व्यय `9.81 करोड़ है।
2) हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन और आजीविका सुधार परियोजना: एक नई परियोजना जिसका नाम है "हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र जापान की सहायता से 8 वर्षों (2018-19 से 2025-26) के लिए `800.00 करोड़ की प्रबंधन और आजीविका सुधार परियोजना शुरू की गई है। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जे.आई.सी.ए.)। परियोजना का वित्त पोषण पैटर्न 80 प्रतिशत ऋण और 20 प्रतिशत राज्य का हिस्सा है। परियोजना क्रियान्वित की जायेगी परियोजना मुख्यालय के साथ बिलासपुर, कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर, लाहौल-स्पीति जिलों और चंबा जिलों के पांगी और भरमौर उपमंडलों के जनजातीय क्षेत्रों में कुल्लू (शम्शी), जिला कुल्लू और क्षेत्रीय कार्यालय रामपुर, जिला शिमला में।
परियोजना का उद्देश्य वन और पर्वत पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है। और वैज्ञानिक और आधुनिक जंगलों का उपयोग करके वन क्षेत्र, घनत्व और उत्पादक क्षमता को बढ़ाकर जंगल और चरागाह पर निर्भर समुदायों की आजीविका में सुधार करना टी प्रबंधन प्रथाएं; जैव विविधता और वन पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण को बढ़ाना और गाँव को उपलब्ध कराकर वन संसाधनों पर दबाव/तनाव को कम करना वैकल्पिक आजीविका अवसर वाले समुदाय। वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान, सरकार ने इस परियोजना के तहत `15.00 करोड़ प्रदान किए हैं और व्यय किया है नवंबर, 2018 तक `1.43 करोड़ का व्यय किया गया है।
3) स्रोत स्थिरता और जलवायु अनुकूल वर्षा आधारित कृषि के लिए विश्व बैंक सहायता प्राप्त एकीकृत विकास परियोजना: विश्व बैंक भी सहमत हो गया है `650.00 करोड़ की लागत से इस परियोजना का समर्थन करने के लिए जिसका शीर्षक है 'स्रोत स्थिरता के लिए एकीकृत परियोजना और जलवायु अनुकूल वर्षा आधारित कृषि'। परियोजना का वित्त पोषण पैटर्न 80 प्रतिशत ऋण और 20 प्रतिशत राज्य का हिस्सा है। परियोजना की अवधि 7 वर्ष है। यह परियोजना राज्य के विभिन्न जलक्षेत्रों में फैले शिवालिक और मिड हिल्स कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 900 ग्राम पंचायतों में लागू की जाएगी।
इस परियोजना के मुख्य उद्देश्यों में लगभग 2 लाख हेक्टेयर गैर-कृषि योग्य और 20,000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का व्यापक उपचार शामिल है; और वृद्धि परियोजना क्षेत्र में जल उत्पादकता/दक्षता, दुग्ध उत्पादन और आजीविका में सुधार। इस परियोजना के तहत `35.00 करोड़ का परिव्यय स्वीकृत किया गया है चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान नवंबर, 2018 तक `7.97 करोड़ का व्यय किया गया है।
4) पर्यावरण वानिकी और वन्य जीवन: हिमाचल प्रदेश बहुत प्रभावशाली, विविध और अद्वितीय जीवों का घर है - जिनमें से कई दुर्लभ हैं। इस योजना का उद्देश्य सुरक्षा है, पर्यावरण और वन्य जीवन में सुधार, वन्यजीव अभयारण्यों/राष्ट्रीय उद्यानों का विकास और वन्यजीव आवास में सुधार ताकि विभिन्न प्रजातियों को सुरक्षा प्रदान की जा सके। विलुप्त होने का सामना कर रहे पक्षियों और जानवरों की संख्या।
वन्यजीवों की रक्षा, विकास और वैज्ञानिक रूप से प्रबंधन करने और उनके आवास में सुधार करने के लिए `17.59 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में से नवम्बर, 2018 तक `2.72 करोड़ का व्यय किया जा चुका है।
जलवायु परिवर्तन पर राज्य ज्ञान कक्ष: पर्यावरण विभाग में जलवायु परिवर्तन पर एक राज्य ज्ञान कक्ष की स्थापना की गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन के तहत भारत सरकार के पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सहायता से हिमाचल प्रदेश। (एनएमएसएचई) नॉलेज सेल की स्थापना और कामकाज के लिए स्वीकृत कुल बजट `2.73 करोड़ है, जिसमें से केवल `1.00 करोड़ जारी और उपयोग किया गया है। `31.00 लाख की दूसरी किस्त भी जारी कर दी गई है और मार्च, 2019 तक इसका उपयोग करने का प्रस्ताव है।
जलवायु परिवर्तन भेद्यता का आकलन किया जा रहा है ब्यास नदी बेसिन चार जिलों को कवर करता है। कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा में 1200 से अधिक पंचायतें शामिल हैं। 3 जिलों की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और कांगड़ा जिला की रिपोर्ट मार्च, 2019 तक पूरी हो जाएगी।
NAFCC के तहत स्वीकृत परियोजना का कार्यान्वयन: "कृषि पर निर्भर ग्रामीण समुदायों की सतत आजीविका" नामक एक कार्यक्रम ( एस.एल.ए.डी.आर.सी.) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन निधि के तहत जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में कार्यान्वित किया जा रहा है। भारत सरकार का कुल वित्तीय परिव्यय `20.00 करोड़ है। यह परियोजना राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी नाबार्ड के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है कृषि, बागवानी और आईपीएच विभागों के साथ।
इस परियोजना के लिए `3.31 करोड़ जारी किए गए हैं और इसका उपयोग पूर्व-निर्धारित गतिविधियों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। `6.40 करोड़ दूसरी किस्त जारी कर दी गई है और राज्य सरकार ने इसका उपयोग कर लिया है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 'जलवायु परिवर्तन अनुकूलन' पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम लागू कर रहा है (CCARAI) द्विपक्षीय वित्त पोषण और जर्मन एजेंसी (GIZ) के साथ सहयोग के तहत `44.84 लाख के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ।
राज्य स्तरीय पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कारों की शुरुआत: हिमाचल प्रदेश पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार शुरू किए गए हैं राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से प्रत्येक वर्ष राज्य के विभिन्न श्रेणियों के संस्थानों/व्यक्तियों को प्रदान किया जाएगा। जो सफल पहल का प्रदर्शन करके पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं। पुरस्कार प्रशस्ति पत्र के रूप में दिया जाना है प्रथम पुरस्कार के रूप में `50,000 और द्वितीय पुरस्कार के रूप में `25,000 का नकद पुरस्कार। राज्य स्तरीय पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार 2018-19 के आयोजन के लिए कुल स्वीकृत बजट `15.00 लाख का उपयोग किया गया था।
मॉडल इको विलेज का निर्माण- हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ सामुदायिक विकास कार्यक्रम।: मॉडल इको विलेज योजना को राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से क्रियान्वित किये जाने हेतु अधिसूचित किया गया है। इस पहल के जरिये राज्य सरकार की मंशा है पर्यावरणीय स्थिरता के विभिन्न घटकों को रेखांकित करें, जो कार्यान्वित उदाहरणों के रूप में ऐसी डिजाइनिंग और चित्रण में जाएंगे। पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और पारिस्थितिक रूप से उन्मुख इको गांवों को कम प्रभाव वाली जीवनशैली विकसित करने के परिप्रेक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा योजना के लॉन्च से आधार मूल्यांकन के 50 प्रतिशत तक "पारिस्थितिकी पदचिह्न"। यह "पृथ्वी और लोगों की देखभाल" के मूल्यों पर आधारित होगा।
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मात्रात्मक और गुणात्मक सामाजिकता के साथ विभिन्न घटकों-विशेषताओं की एक रूपरेखा स्थापित करके समुदाय को प्रकृति में सबसे अच्छा एकीकृत कैसे किया जाए। इन सुविधाओं को लागू करने के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ जिनका उपयोग यह निर्धारित करने में मदद के लिए किया जा सकता है कि उन्हें विकास योजनाओं में किस हद तक शामिल किया जा रहा है।
स्थायी समुदायों को लागू करने के लाभ लघु और दीर्घकालिक दोनों में महत्वपूर्ण होंगे। इस योजना के तहत `50.00 लाख की अवधि में उपयोग किया जाना है मॉडल इको विलेज योजना को अपनाने के लिए चिन्हित गाँव द्वारा 5 वर्ष। पूरे राज्य में 11 गांव चिन्हित हैं जहां यह योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना के लिए 2018-19 के दौरान `20.00 लाख की राशि निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश राज्य के लिए पर्यावरण नीति की तैयारी और अधिसूचना।: राज्य सरकार ने निर्णय लिया है विभिन्न हितधारक विभागों के बीच तालमेल लाने और राज्य में निर्णय लेने की मुख्यधारा में पर्यावरण समन्वय लाने के लिए राज्य पर्यावरण नीति तैयार करना। यह दस्तावेज़ राज्य में सुदृढ़ पर्यावरणीय प्रशासन और स्वीकृत कुल बजट के साथ स्थायी तरीके से प्राथमिकता वाले कार्यों को निर्धारित करने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाएगा वर्ष 2018-19 के लिए इस प्रयोजन के लिए `20.00 लाख है।
कुफरी, शिमला में जैव-मिथेनेशन संयंत्र की स्थापना:विभाग 2.5 MTPD जैव-मिथेनेशन स्थापित कर रहा है घोड़े के गोबर/बायोडिग्रेडेबल कचरे का उपयोग कर संयंत्र कुफरी, शिमला में टर्नकी और एंड टू एंड आधार (निपटान तक अपशिष्ट संग्रह) पर बायोगैस/बायो सीएनजी उत्पन्न करने के लिए होटल और आवासीय क्षेत्र। कुल बजटीय प्रावधान इस संयंत्र के लिए `1.40 करोड़ है जिसके सापेक्ष वर्ष 2018-19 के लिए `30.00 लाख निर्धारित किये गये हैं।
प्रदर्शन की स्थापना माइक्रो नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सुविधाएं: प्रदर्शन की स्थापना माइक्रो पीपीपी मोड पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राज्य में 10 विभिन्न स्थानों पर विशेषज्ञ एजेंसियों के माध्यम से नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं।
पर्यावरण की रक्षा के लिए अन्य पहल:
1) राज्य में थर्मोकोल कटलरी के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
2) "हॉर्न नॉट ओके" अभियान दो शहरों शिमला और मनाली में शुरू किया गया है।
3) राज्य में ध्वनि प्रदूषण के संबंध में आम जनता को शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करने के लिए एक मोबाइल ऐप "शोर नहीं" विकसित किया गया है।
एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी में अनुसंधान और विकास परियोजनाएं: राज्य जैव प्रौद्योगिकी नीति के अनुसार, सरकार हिमाचल प्रदेश को बनाने के लिए तैयार है कृषि, बागवानी, पशुपालन, स्वास्थ्य और जैव-संसाधन के क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के माध्यम से एक समृद्ध हिमालयी बायोबिजनेस हब राज्य के विकास के लिए उपयोग.
एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी के तहत परियोजना प्रस्ताव: "बायोटेक्नोलॉजी" विजन और आगे का रास्ता पर एक दिवसीय कार्यशाला एच.पी. थे आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के वैज्ञानिकों और छात्रों ने भाग लिया और जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर अपने विचार रखे। राज्य में। कुल व्यय `1.75 लाख था।
खाद्य जैव प्रौद्योगिकी: हिमाचल प्रदेश से अलग किए गए दुर्लभ किण्वन सूक्ष्म जीवों और उनके वाणिज्यिक से समृद्ध नवीन न्यूट्रास्यूटिकल्स का विकास प्रमोशन के लिए `4.08 लाख जारी किए गए हैं।
कृषि जैव प्रौद्योगिकी:
1) इन विट्रो चयन तकनीक का उपयोग करके सेब में रोग प्रतिरोधी सोमाक्लोनल वेरिएंट का विकास।
2) हिमाचल प्रदेश में प्रचलित बीमारी फ्यूजेरियम विल्ट के खिलाफ टमाटर में प्रतिरोध विकसित करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप। `10.80 लाख जारी किए गए हैं।
इस योजना के तहत एप्लाइड बायो-टेक्नोलॉजी के विषयगत क्षेत्र के तहत विभिन्न अनुसंधान एवं विकास संस्थानों से 09 प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिनमें से 06 प्रस्तावों को परियोजना अनुमोदन समिति के समक्ष प्रस्तुतिकरण के लिए चुना गया है। उपरोक्त परियोजाओं के लिए मार्च, 2019 से पहले लगभग ृ20.00 लाख जारी किए जाएगें।

10.जल स्त्रोत प्रबन्धन

जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है। सभी जनगणना गांव राज्य में मार्च 1994 तक पेयजल सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। पेयजल आपूर्ति के नवीनतम अद्यतन/मान्य सर्वेक्षण के अनुसार मार्च, 2008 तक हिमाचल प्रदेश में सभी 45,367 बस्तियों को सुरक्षित पेयजल सुविधा से कवर कर लिया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति दिशानिर्देश प्रभावी 01.04.2009 और उसके बाद बस्तियों के पुनर्संरेखण/मानचित्रण के बाद, 53,205 बस्तियाँ हैं राज्य में, जिनमें से 19,473 बस्तियाँ (0 और 100 से अधिक जनसंख्या कवरेज वाली 7,632 बस्तियाँ और 0 जनसंख्या कवरेज वाली 11,841 बस्तियाँ) अपर्याप्त पेयजल की पहचान की गई है। पानी सुनिश्चित करने के लिए बस्तियों के कवरेज के मानदंड को बदलकर जनसंख्या आधारित कवरेज कर दिया गया है घरेलू स्तर पर सुरक्षा. विभिन्न राज्यों के अनुरोध के अनुसार, सरकार। भारत ने राज्यों को सर्वेक्षण के डेटा सुधार के लिए निर्देशित किया था। आवासों की स्थिति 01.04.2018 को निम्नानुसार अंतिम रूप दिया गया:-
वर्ष 2018-19 के दौरान 500 बस्तियों को कवर करने के लक्ष्य के विरूद्ध 50 बस्तियों को राज्य क्षेत्र और केंद्रीय क्षेत्र के अंतर्गत 450 बस्तियाँ क्रमशः `24.97 करोड़ और `72.64 करोड़ के परिव्यय के साथ, 289 बस्तियाँ जिनमें नवंबर, 2018 तक केंद्रीय क्षेत्र के तहत 260 बस्तियों और राज्य क्षेत्र के तहत 29 बस्तियों को कवर किया गया है। केंद्रीय क्षेत्र के तहत `33.54 करोड़ का व्यय नवंबर, 2018 तक सेक्टर और राज्य सेक्टर के तहत `9.46 करोड़ खर्च किए गए हैं।
हैंड पंप कार्यक्रम: सरकार के पास हैंडपंपों की कमी का सामना करने वाले क्षेत्रों पर ध्यान देने के साथ हैंडपंप उपलब्ध कराने का एक कार्यक्रम चल रहा है। गर्मी के मौसम में पानी. कुल मार्च, 2018 तक 37,265 हैण्डपम्प स्थापित किये गये हैं। वर्ष 2018-19 के दौरान नवम्बर, 2018 तक 1,519 हैण्डपम्प स्थापित किये गये हैं।
इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कुल 52 शहरों की पेयजल योजनाओं का रख-रखाव सिंचाई एवं जन-स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। इनमें से 37 शहरों की पेयजल योजनाओं के सम्बर्धन का कार्य मार्च, 2016 तक पूर्ण कर लिया गया है। धर्मशाला, कांगड़ा, हमीरपुर, सरकाघाट, नगरोटा बगवां, कुल्लू, मण्डी, रामपुर तथा मनाली की पेयजल योजनाओं का सम्बर्धन यू.आई.डी.एस.एस.एम.टी. कार्यक्रम के अन्तर्गत् किया जा रहा है। नाहन व बन्जार शहरों की पेयजल योजनाओं का सम्बर्धन कार्य राज्य क्षेत्र के अन्तर्गत किया जा रहा है। इनमें से 5 शहरों करसोग, नेरचौक, ज्वाली, बैजनाथ-पपरोला और टाहलीवाल के लिए जलापुर्ति योजनाओं का विस्तार किया जाएगां। वर्ष 2018-19 में कुल ृ71.81 करोड,़ योजनाओं के सम्बर्धन के कार्य के लिए रखे गये हैं, जिसके अन्तर्गत् कुल ृ20.42 करोड़, नवम्बर,2018 तक व्यय किये जा चुके हैं।
कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए सिंचाई का विशेष महत्व है। कृषि उत्पादन प्रक्रिया में पर्याप्त तथा समय पर िंसंचाई की पूर्ति उन क्षेत्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जहां वर्षा बहुत कम या अनियमित होती है। कृषि योग्य भूमि को बढ़ाया नहीं जा सकता इसलिए उत्पादन में तीव्र वृद्धि के लिए बहुविध फसलों तथा प्रति यूनिट क्षेत्र में अधिक फसल पैदावार उगाने के लिए िंसंचाई पर निर्भर रहना पड़ता है। राज्य योजना में सिंचाई की क्षमता बढ़ाना व उसके पूर्ण दोहन पर विशेष ध्यान देना सरकार की प्राथमिकता में है।
हिमाचल प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र 55.67 लाख हेक्टेयर में से केवल 5.83 लाख हेक्टेयर ही शुद्ध बोया गया क्षेत्र है। अनुमान है कि राज्य की अंतिम सिंचाई क्षमता लगभग 3.35 लाख हेक्टेयर है, इसमें से 0.50 लाख हेक्टेयर प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से शेष 2.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के अंतर्गत लाया जा सकता है लघु सिंचाई योजनाओं के माध्यम से सिंचाई प्रदान की गई। नवंबर, 2018 तक 2.73 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा के अंतर्गत लाया गया है।
प्रमुख और मध्यम सिंचाई: राज्य की एकमात्र प्रमुख सिंचाई परियोजना कांगड़ा जिले में शाहनहर परियोजना है। प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है तथा 15,287 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। कमांड क्षेत्र विकास कार्य प्रगति पर है और 15,287 हेक्टेयर में से 9,933.50 नवंबर, 2018 तक हेक्टेयर भूमि को कमांड क्षेत्र विकास गतिविधियों के तहत लाया गया है। मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के तहत, चेंजर क्षेत्र बिलासपुर 2,350 हेक्टेयर, सिधथा कांगड़ा, 3,150 हेक्टेयर और बल्ह घाटी लेफ्ट बैंक 2,780 हेक्टेयर का काम पूरा हो चुका है। सीएडी सिद्धाथा का कार्य प्रगति पर है नवंबर, 2018 तक 2,635.10 हेक्टेयर भूमि को सीएडी गतिविधियों के तहत लाया गया है।
वर्तमान में मध्यम सिंचाई परियोजना फिन्ना सिंह (सीसीए 4,025 हेक्टेयर) का काम चल रहा है। और जिला हमीरपुर में नादौन क्षेत्र (CCA 2,980 हेक्टेयर) प्रगति पर है। वर्ष 2018-19 के लिए प्रमुख और मध्यम के तहत 1000 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य है सिंचाई जिसके विरुद्ध नवंबर, 2018 तक 300 हेक्टेयर उपलब्धि दर्ज की गई और `127.00 करोड़ के देय प्रावधान में से `25.67 करोड़ की राशि खर्च की गई है।
लघु सिंचाई: वर्ष 2018-19 के दौरान `250.36 करोड़ का बजट प्रावधान था के एक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु राज्य क्षेत्र 3,000 हेक्टेयर के मुकाबले नवंबर, 2018 तक `58.31 करोड़ के व्यय के साथ 1,880.18 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है।
वर्ष 2018-19 के दौरान, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा `130.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसमें HIMCAD के लिए `32.00 करोड़ शामिल हैं निर्मित और उपयोग की गई क्षमता के अंतर को पाटने के लिए पूर्ण लघु सिंचाई योजनाओं में गतिविधियाँ और शेष राशि बड़ी/मध्यम सिंचाई के लिए है और केंद्रीय हिस्सेदारी सहित राज्य में चल रही लघु सिंचाई योजनाएं। सीएडी गतिविधियाँ प्रदान करने के लिए 3000 हेक्टेयर सीसीए का भौतिक लक्ष्य है, जिसमें से 983.60 हेक्टेयर का लक्ष्य नवंबर, 2018 तक `11.18 करोड़ के व्यय के साथ हासिल किया गया है।
प्रमुख सिंचाई शाहनहर और मध्यम सिंचाई सिद्धाथा परियोजनाओं के लिए सीएडी भारत सरकार के कमांड एरिया डेवलपमेंट जल प्रबंधन कार्यक्रम के तहत वित्त पोषण के लिए शामिल किया गया था। भारत सरकार ने ISBIG लॉन्च किया है 2016-17 के दौरान पूर्ण/चालू सिंचाई परियोजनाओं और तदनुसार 6 परियोजनाओं (शाहनहर प्रमुख सिंचाई परियोजना) में सीएडी गतिविधियां प्रदान करने की योजना सिधथा चेंजर, नादौन क्षेत्र, बल्लाह घाटी बाएं किनारे की मध्यम सिंचाई परियोजनाओं और सीएडीडब्ल्यूएम की 23 छोटी सिंचाई योजनाओं पर विचार किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत सिद्धांत और इन 6 परियोजनाओं की डीपीआर सरकार को सौंप दी गई है। योजना के तहत शामिल करने के लिए भारत की.
वर्ष 2018-19 में 2,050 हैक्टेयर भूमि में बाढ़ नियंत्रण कार्य के अन्तर्गत् लाने के लिए ृ62.01 करोड़ का प्रावधान किया गया है। नवम्बर, 2018 तक ृ1.99 करोड़ व्यय करने उपरान्त 65.00 हैक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया है। स्वां नदी चरण-प्ट तथा छोंच खड्ड के तटीयकरण का कार्य प्रगति पर है।

11.उद्योग एवम् खनन

हिमाचल प्रदेश सरकार ने औद्योगिकरण की दिशा में पिछले कुछ वर्षो में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रदेश सरकार ने निवेश को बढ़ाने के लिए हाल ही में बहुत सी पहलें की है।
प्रदेश में दिसम्बर, 2018 तक 49,058 औद्योगिक इकाईयां कार्यरत है इसमें 140 बडें और 522 मध्यम स्तर के उद्योग शामिल है।
विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों/संपदाओं के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वर्ष 2018-19 के लिए ₹ 27.00 करोड़ की राशि का बजट आवंटित किया गया है। 09.01.2019 तक आवंटित निधि में से `19.53 करोड़ औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा में विभिन्न विकास कार्यों के निर्माण के लिए बुक किए गए हैं। शेष बजट 7.47 करोड़ मार्च, 2019 से पहले खर्च किया जाएगा।
MIIUS के अंतर्गत अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्र: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (DIPP), भारत सरकार भारत ने अंतिम मंजूरी दे दी है संशोधित औद्योगिक बुनियादी ढांचे के तहत पंडोगा जिला ऊना और कंदरोड़ी, जिला कांगड़ा में दो अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए उन्नयन योजना (एमआईआईयूएस)। इन परियोजनाओं के वित्तपोषण पैटर्न का विवरण तालिका 11.1 में दिखाया गया है
अनुदान का उपयोग इन औद्योगिक क्षेत्रों में भौतिक बुनियादी ढांचे (सड़कें) के तहत बुनियादी सुविधाओं के उन्नयन के उद्देश्य से किया जाएगा। और तूफान जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, 132 केवी पावर सबस्टेशन आदि का संवर्द्धन), तकनीकी बुनियादी ढांचा (सामान्य सुविधा केंद्र आदि), और सामाजिक बुनियादी ढाँचा (कामकाजी महिला छात्रावास, बस स्टॉप, रेन शेल्टर और सामान्य स्वास्थ्य केंद्र आदि) और विविध/प्रशासनिक अनुदान के लिए। वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों और एकीकृत क्षेत्रों के निर्माण के तहत `46.05 करोड़ की राशि आवंटित की गई है अवसंरचना उन्नयन योजना जिसमें से कोई व्यय बुक नहीं किया गया है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी): इस योजना के अंतर्गत दिसंबर, 2018 तक लक्ष्य के विरूद्ध 434 मामले, 1,292 मामले विभिन्न बैंकों को प्रायोजित किए गए हैं, जिनमें से 500 मामले शामिल हैं मार्जिन मनी सब्सिडी `12.86 करोड़ स्वीकृत की गई है। 353 मामलों में, `8.18 करोड़ की मार्जिन मनी (सब्सिडी) की राशि वितरित की गई है।
रेशम उद्योग राज्य का एक महत्वपूर्ण कुटीर उद्योग है जिससे लगभग 10,245 ग्रामीण परिवारों को रेशम कोकून उत्पाद से लाभकारी रोजगार प्राप्त हो रहा है और उनकी आय में भी बढोतरी हो रही है। 14 रेशम के धागे के रीलिंग यूनिट निजी क्षेत्र जिनमें जिला कांगडा, बिलासपुर में 5-5 तथा हमीरपुर, मण्डी ऊना एवं सिरमौर में 1-1 यूनिट सरकार की सहायता से स्थापित किए गए है। माह दिसम्बर, 2018 तक 204.34 मी.टन रेशम के कोकून का उत्पादन किया गया है जिन में से 27.48 मी.टन कच्चे रेशम में परिवर्तित कर राज्य को बिक्री से ृ6.12 करोड़ की आय प्राप्त हुई है।
जनजातीय उपयोजना के अन्तर्गत, ृ1.07 करोड़ व अनुसूचित घटक योजना के अन्तर्गत् ृ1.00 करोड़ के मामले, जिनमें हि0प्र0 राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा 54 प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाने है। राज्य सरकार को स्वीकृति हेतु भेजे जा चुके है।
खनिज प्रदेश के आर्थिक आधार का मुख्य घटक है। उत्तम किस्म का चूना-पत्थर जो कि पोर्टलैंड सीमेंट उद्योग के लिये आवश्यक पदार्थ हैं यहां प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। वर्तमान में प्रदेश में छः सीमेंट प्लांट, जिनमें मै. ए.सी.सी. की बिलासपुर जिला के बरमाणा में (दो इकाईयां), मै. अम्बूजा सीमेंट लिमिटिड की सोलन जिला के कशलोग में (दो इकाईयां), मै. अल्ट्रा टेक सीमेंट की बागा भलग, जिला सोलन में (एक इकाई) पहले जे.पी. हिमाचल सीमेंट था तथा मै.सी.सी.आइ. की सिरमौर जिला के राजबन में (एक इकाई) कार्यरत है, जिला मण्डी, शिमला एवं चम्बा में सीमेंट प्लांट लगाने की प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त सरकार ने संभावित लाईसैंस भी कम्पनियों को जारी किए हैं, ताकि चूना पत्थर व अन्य गौण जमा खनिजों की गुण एवं मात्रा का पता लगाने के लिए गहन अध्ययन किया जा सके। अन्य खनिज जिनका प्रदेश में वाणिज्यक दोहन किया जा सकता है जैसे शेल, बेराइटस, रॉक सॉलट, सिलिका सैंड, क्वार्टजाईट, भवन सामग्री जैसे की पत्थर, रेत व बजरी और इमारती पत्थर इत्यादि भी प्रदेश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। उद्योग विभाग की भौमिकीय शाखा द्वारा खनिजों के विकास एवं दोहन के लिए मापदंड बनाने के अतिरिक्त प्रदेश में बनाए जा रहे भवनों और पुलों का भौमकीय अध्ययन एवं भू-पर्यावरण सम्बन्धित अध्ययन इत्यादि का कार्य कर रहा है।
नए खनन के पटटे प्रदान करनाः विभाग ने वर्ष 2015-16 में वित्तीय वर्ष में मुख्य खनिज के 30 खन्न पट्टे प्रदान/नवीकरण किये गये तथा वर्ष 2016-17 के दौरान खान एवं खनिज (विकास एवं विनियम) संशोधित अधिनियम, 2015 की धारा 8 ए (5) एवं 8 ए (6) में निर्दिष्ट प्रावधानों के अनुरूप 30 खन्न पट्टा मामलों में खनन पट्टा की अवधि, स्वीकृति तिथि से आगामी 50 वर्षो के लिए बढ़ाई गई जबकि वित्तीय वर्ष 2015-16 में, 68 खनन पट्टे गौण खनिजों के प्रदान किये गये थे व 2016-17 में 92 खनन पट्टे, गौण खनिजों के प्रदान किये गये। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसम्बर, 2018 तक 85 गौण खनिजों के खनन पट्टे प्रदान किये गये।
ii) भू-तकनीकी अन्वेषणः विभाग द्वारा 2016-17 में प्रदेश में बनाए जा रहे पुलों, सड़कों, बड़े-बड़े भवनों, भू-स्खलन क्षेत्रों इत्यादि की नींव सम्बन्धी भौमिकीय अध्ययन किये और 20 भू-तकनीकी अन्वेषण रिपोर्ट्स सम्बन्धित एजेंसियों को आगामी कार्यवाही के लिए भेजी गई हैं। वर्ष 2017-18 में 8 भू-तकनीकी अन्वेषण रिपोर्ट्स सम्बन्धित एजेसियों को भेजी गई।

12.श्रम और रोजगार

2011 जनगणना के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या में 30.05 प्रतिशत मुख्य कामगार, 21.80 प्रतिशत सीमांत कामगार तथा शेष 48.15 गैर कामगार थे। कुल कामगारों ;मुख्य़सीमांतद्ध में से 57.93 प्रतिशत काश्तकार, 4.92 प्रतिशत कृषि श्रमिक, 1.65 प्रतिशत गृह उद्योग इत्यादि तथा 35.50 प्रतिशत अन्य गतिविधियों में कार्यरत थे। राज्य में 3 क्षेत्रीय रोजगार कार्यालयों, 9 जिला रोजगार कार्यालयों, 2 विश्वविद्यालयों में रोजगार सूचना एवं मार्गदर्शन केन्द्र और 62 उप-रोजगार कार्यालय, विकलांगों के लिए निदेशालय में एक विशेष रोजगार कार्यालय, एक केन्द्रीय रोजगार कक्ष निदेशालय में जो पूरे प्रदेश के युवाओं को व्यवसायिक एवं रोजगार परामर्श सम्बन्धित जानकारी के साथ-साथ रोजगार बाजार की जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु कार्यरत है। सभी 74 रोजगार कार्यालयों को कम्पयूटराईज किया जा चुका है तथा 71 रोजगार कार्यालय ऑन लाईन है बाकि 3 रोजगार कार्यालयों को शीघ्र ही ऑनलाईन किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सलाह देने के उद्देश्य से न्यूनतम वेतन अधिनियम-1948 के तहत एक न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। राज्य सरकार श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दरें तय करने और संशोधित करने के मामले में। राज्य सरकार ने न्यूनतम राशि बढ़ा दी है अकुशल श्रेणी के श्रमिकों के लिए मजदूरी `210 से `225 प्रति दिन या `6,300 से `6,750 प्रति माह। 01.04.2018, में कार्यरत न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के प्रावधान के तहत सभी मौजूदा 19 अनुसूचित रोजगार।
रोजगार बाजार सूचना कार्यक्रम : जिला स्तर पर रोजगार बाजार के तहत रोजगार डेटा एकत्र किया जा रहा है 1960 से सूचना कार्यक्रम। 30.06.2017 तक राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र में कुल रोजगार 2,76,539 था और निजी क्षेत्र में था। 1,66,743 जहां सार्वजनिक क्षेत्र में प्रतिष्ठानों की संख्या 4,235 और निजी क्षेत्र में 1,731 है।
व्यावसायिक मार्गदर्शन श्रम एवं रोजगार विभाग के अंतर्गत कुल चार व्यावसायिक मार्गदर्शन केंद्र हैं जिनमें से एक व्यावसायिक मार्गदर्शन केंद्र निदेशालय में और अन्य तीन क्षेत्रीय रोजगार कार्यालय अर्थात मंडी, शिमला और धर्मशाला में स्थित हैं। इस के अलावा, पालमपुर और शिमला में दो विश्वविद्यालय रोजगार सूचना और मार्गदर्शन ब्यूरो हैं। ये व्यावसायिक मार्गदर्शन केंद्र प्रदान करते हैं इच्छुक बेरोजगार युवाओं को व्यावसायिक मार्गदर्शन। राज्य के कई शैक्षणिक संस्थानों में व्यावसायिक मार्गदर्शन शिविर भी आयोजित किये जाते हैं। वित्तीय वर्ष के दौरान दिसम्बर, 2018 तक राज्य के विभिन्न भागों में 145 शिविर आयोजित किये गये।
सभी औद्योगिक इकाइयों, संस्थानों और प्रतिष्ठानों को तकनीकी और उच्च कुशल जनशक्ति प्रदान करने की दृष्टि से, राज्य के श्रम एवं रोजगार निदेशालय में स्थापित केंद्रीय रोजगार सेल प्रतिपादन में लगा रहा वर्ष 2018-19 के दौरान इसकी सेवाएं। इस योजना के तहत एक ओर जहां रोजगार चाहने वालों को निजी क्षेत्र में उपयुक्त नौकरी ढूंढने में सहायता प्रदान की जाती है उनकी योग्यता के लिए और दूसरी ओर धन, सामग्री और समय की बर्बादी के बिना उपयुक्त श्रमिकों की भर्ती करना।
केंद्रीय रोजगार सेल निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए अकुशल श्रम की आवश्यकता के लिए कैंपस साक्षात्कार आयोजित करता है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक केंद्रीय रोजगार सेल ने 151 कैंपस साक्षात्कार आयोजित किए हैं, जिसमें 2,549 उम्मीदवारों को नौकरी मिली है। केंद्रीय रोजगार प्रकोष्ठ राज्य में नौकरी मेलों का भी आयोजन करता है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक छह नौकरी विभाग द्वारा मेलों का आयोजन किया गया है, जहां 1,974 उम्मीदवारों को राज्य के विभिन्न उद्योगों में रोजगार के लिए रखा गया है।
विशेष रोजगार कार्यालय;दिव्यांगों की नियुक्ति शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों की नियुक्ति के लिए विशेष रोजगार कार्यालय (दृष्टि विकलांग, श्रवण विकलांग और लोकोमोटर विकलांग) की स्थापना वर्ष 1976 के दौरान श्रम और रोजगार निदेशालय में की गई थी। यह विशेष रोजगार कार्यालय विशेष योग्यजन अभ्यर्थियों को व्यावसायिक मार्गदर्शन के क्षेत्र में सहायता प्रदान करता है सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में रोजगार सहायता।
विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों को, जो समाज के कमजोर वर्ग का गठन करते हैं, प्रदान किया गया है सुविधाओं/रियायतों की संख्या जिसमें गठित मेडिकल बोर्ड के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों की निःशुल्क चिकित्सा जांच शामिल है राज्य और जिला स्तर पर, आयु में 5 वर्ष की छूट, विकलांगता से पीड़ित लोगों के लिए टाइपिंग टेस्ट उत्तीर्ण करने की छूट ऊपरी अंग, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण और लड़कियों के लिए 5 प्रतिशत सीटों का आरक्षण औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और सिलाई केंद्र।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान दिसंबर, 2018 तक कुल 1,208 विशेष योग्यजन विशेष रोजगार कार्यालय के लाइव रजिस्टर पर लाए गए जिससे कुल संख्या 17,547 हो गई और 70 शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को रोजगार में रखा गया।
बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत जिला सतर्कता समितियों और उप प्रभाग सतर्कता समितियों का गठन किया गया है बंधुआ मजदूरी प्रणाली के कार्यान्वयन की निगरानी और सुनिश्चित करना। बंधुआ मजदूरी पर विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय स्थायी समिति राज्य में व्यवस्था एवं अन्य संबंधित अधिनियमों का गठन किया जा चुका है।
राज्य सरकार द्वारा स्थापित किया जा चुका है दो श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण, एक का मुख्यालय शिमला में है और इसका अधिकार क्षेत्र जिला शिमला, किन्नौर, सोलन और सिरमौर है और दूसरा धर्मशाला में जिसके अधिकार क्षेत्र में जिला कांगड़ा, चंबा, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पीति हैं। श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी प्रत्येक श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण के लिए जिला और सत्र न्यायाधीशों के पद पर नियुक्त किए गए हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि एवं बीमा योजना: कर्मचारी राज्य बीमा सोलन, परवाणू के क्षेत्रों में लागू है। बरोटीवाला, सोलन जिले में नालागढ़, बद्दी, ऊना जिले में मैहतपुर, बाथरी और गगरेट, सिरमौर जिले में पौंटा साहिब और काला अंब, बलियासपुर जिले में गोलथाई, मंडी, रत्ती, नेर चौक, मंडी जिले में भंगरोटू, चक्कर और गुटकर और जिला शिमला में औद्योगिक क्षेत्र शोघी और शिमला का नगर निगम क्षेत्र। लगभग 9,733 प्रतिष्ठान मार्च, 2018 तक हिमाचल प्रदेश में अनुमानित 3,14,720 बीमित व्यक्ति ईएसआई योजना के तहत कवर किए गए हैं। कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत लगभग 15, दिसम्बर, 2018 तक 18,443 प्रतिष्ठानों में 80,258 श्रमिकों को लाया गया है।
औद्योगिक संबंध: औद्योगिक संबंधों की समस्या ने औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के कारण काफी महत्व प्राप्त कर लिया है। प्रदेश. प्रदेश में सुलह तंत्र कार्य कर रहा है और औद्योगिक विवादों के निपटारे और रखरखाव के लिए एक महत्वपूर्ण एजेंसी साबित हुई है औद्योगिक शांति और सद्भाव. सुलह अधिकारी का कार्य संयुक्त श्रम आयुक्त, उप श्रम आयुक्त, श्रम अधिकारियों को सौंपा गया है और श्रम निरीक्षक अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत क्षेत्र में। जिन मामलों/विवादों में निदेशालय स्तर से उच्च अधिकारी हस्तक्षेप करते हैं सुलह निचले स्तर पर कोई सौहार्दपूर्ण समाधान लाने में विफल रहती है।
भवन एवं अन्य निर्माण कार्य (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम-1996 एवं उपकर अधिनियम-1996 इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यान्वयन हेतु विभिन्न प्रावधान किये गये हैं कल्याणकारी योजनाएं जैसे मातृत्व/पितृत्व लाभ, विकलांगता पेंशन, सेवानिवृत्ति पेंशन, पारिवारिक पेंशन, चिकित्सा सहायता, वित्तीय प्रदान करना स्वयं और दो बच्चों तक की शादी के लिए सहायता, कौशल विकास भत्ता, महिला श्रमिकों को साइकिल और वॉशिंग मशीन प्रदान करना। लाभार्थियों को इंडक्शन हीटर या सोलर कुकर और सोलर लैंप। लगभग 2016 प्रतिष्ठान श्रम और रोजगार विभाग के साथ पंजीकृत हैं और नवंबर, 2018 तक 1,58,878 लाभार्थी हिमाचल प्रदेश भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। पात्र लाभार्थियों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत `96.42 करोड़ की राशि का लाभ प्रदान किया गया है एच.पी. के पास लगभग 462.43 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। भवन एवं अन्य निर्माण कल्याण बोर्ड, शिमला दिसंबर, 2018 तक।
कौशल विकास भत्ता योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 100 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। योजना के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश के पात्र बेरोजगार युवाओं को उनके कौशल विकास हेतु भत्ते का प्रावधान है ताकि उनकी कौशल विकास व रोजगार प्राप्त करने की क्षमता बढ़ सके। यह भत्ता बेरोजगार व्यक्ति को ृ1,000 प्रतिमाह देय है और 50 प्रतिशत या इसके अधिक स्थायी दिव्यांग आवेदकों को ृ1,500 प्रति माह की दर से कौशल विकास प्रशिक्षण के दौरान अधिकतम दो वर्ष तक देय है।
बेरोजगारी भत्ता योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए ृ40.00 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। योजना के अन्तर्गत् पात्र बेरोज़गार हिमाचली युवाओं को बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान है। यह भत्ता ृ1,000 प्रतिमाह देय है तथा 50 प्रतिशत या इससे अधिक स्थायी विकलांग आवेदकां को ृ1,500 प्रतिमाह की दर से अधिकतम दो वर्ष तक देय है।
इस वित्तीय वर्ष में दिसम्बर, 2018 तक कुल 1,37,662 आवेदक रोजगार सहायता हेतु पंजीकृत हुए तथा इस अवधि में 1,953 नियुक्तियां सरकारी क्षेत्र में 2,871 अधिसूचित रिक्तियों के समकक्ष हुई व 4,788 नियुक्तियां निजी क्षेत्र में 4,000 अधिसूचित रिक्तियों के समकक्ष हुई। सभी रोजगार कार्यालयों में दिसम्बर, 2018 तक सक्रिय पंजिका में कुल संख्या 8,49,981 थी।इस वित्त वर्ष में जिलावार रोजगार केन्द्रों में अप्रैल से दिसम्बर, 2018 तक पंजीकरण एवं नियुक्तियां निम्न सारणी संख्या 12.1 में दर्शाई गई हैः-

13.ऊर्जा

पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में जलविद्युत ऊर्जा के दोहन की प्राकृतिक शक्ति है। जल विद्युत विकास आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन है हिमाचल प्रदेश राज्य, क्योंकि यह राजस्व सृजन, रोजगार के अवसरों और के मामले में अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण योगदान देता है जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना। हिमाचल प्रदेश में हाइड्रो पावर सेक्टर पर्यावरण और सामाजिक रूप से आर्थिक आयामों पर जोर देता है समावेशी हरित विकास को बढ़ावा देने के हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्देश्य के अनुरूप राज्य में सतत जलविद्युत विकास राज्य के आर्थिक विकास के प्रमुख इंजनों में परिवर्तनकारी कार्यों से संबंधित जलवायु परिवर्तन के माध्यम से राज्य का विकास।
हिमाचल प्रदेश राज्य की अनुमानित जल विद्युत क्षमता 27,436 मेगावाट है, जिसमें से 24,000 मेगावाट का उपयोग किया जा चुका है। दोहन योग्य के रूप में मूल्यांकन किया गया है, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण की सुरक्षा के बदले में संतुलन क्षमता को त्यागने का निर्णय लिया है। पारिस्थितिकी को बनाए रखने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक सरोकारों की रक्षा करना। लगभग 24,000 मेगावाट की कुल दोहन योग्य क्षमता में से, की क्षमता विभिन्न क्षेत्रों के तहत 20,912 मेगावाट पहले ही आवंटित किया जा चुका है। राज्य सक्रिय भागीदारी के माध्यम से जलविद्युत विकास की गति को तेज कर रहा है सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की। विभिन्न क्षेत्रों के तहत अब तक लगभग 10,547.17 मेगावाट की क्षमता का दोहन किया जा चुका है।
नीति संशोधन: हाइड्रो सेक्टर में मंदी को दूर करने और राज्य में हाइड्रो पावर डेवलपमेंट में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए हाइड्रो पावर पॉलिसी में संशोधन किए गएः-
1) पहले टाइम बैंड की महत्वपूर्ण अवधि के जो कि 12 वर्ष होती है फ्री पावर शेयर को वसूलने के लिए 28 वर्ष कर दिया गया है। जो कि एक ही दर से लागू होगी और यह प्रावधान नए आवंटित परियोजनाओं के लिए लागू होगा और पहले से ही चलने वाली परियोजनाओं पर यह नियम लागू नहीं होगा।
2) निःशुल्क पावर रॉयल्टी को आवंटित की जाने वाली परियोजनाओं के लिए पूरे समझौते की अवधि के लिए समान रुप से 12 प्रतिशत की दर से वसूल किया जायेगा।
3)25 मैगावाट तक की परियोजनाओं के लिए क्प्ैब्व्ड द्वारा बिजली की अनिवार्य खरीद।
4) टैरिफ निर्धारण प्। पर हस्ताक्षर करने की तारीख के बजाय ब्व्क् को प्राप्त करने की तारीख से होगा।
5) 25 मैगावाट तक की क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए खुले उपयोग शुल्क में छूट।
6) रुकी हुई परियोजनाओं के लिए मील पत्थर को फिर से परिभाषित करना जहां 100 प्रतिशत इक्विटी हस्तांतरण शामिल है।
जलविद्युत परियोजनाओं का आवंटन: 1229 मेगावाट की दो जलविद्युत परियोजनाएं यानी डुगर एचईपी (449 मेगावाट) स्थित चंबा जिले में चिनाब नदी पर और किन्नौर जिले में सतलुज नदी पर स्थित जंगी-थोपनपोवारी एचईपी (780 मेगावाट) को राष्ट्रीय जल विद्युत निगम को आवंटित किया गया है। (एनएचपीसी) और सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएनएल) क्रमशः 7-08-2018 और 24-11-2018 को।
हाइड्रो इलेक्ट्रिकल परियोजनाओं की तकनीकी सहमति: ऊर्जा निदेशालय को परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहमति देने का दायित्व सौंपा गया है। इसमें परियोजना लागत शामिल नहीं है द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्टों की विस्तृत जांच करने के बाद `1,000 करोड़ से अधिक की 14 परियोजनाओं को तकनीकी सहमति प्रदान की गई है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान नवंबर 2018 तक राज्य में जल विद्युत परियोजनाओं को कार्यान्वित करने वाली विभिन्न निजी, राज्य और केंद्रीय क्षेत्र की विकासशील एजेंसियां।
रॉयल्टी पावर की बिक्री से राजस्व: सरकार। हिमाचल प्रदेश ने नवंबर 2018 तक `906.00 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है और यह है अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंत तक मुफ्त और इक्विटी बिजली की बिक्री से `980.00 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त होगा।
ऊर्जा लेखा सॉफ्टवेयर का कार्यान्वयन: ऊर्जा लेखा सॉफ्टवेयर को ऊर्जा निदेशालय में लागू किया गया है जो मदद करेगा में परियोजना प्रभावित परिवारों को एलएडीएफ निधि का वितरण और बिजली की बिक्री के मैनुअल और भारी काम को कम करना।
राज्य में सौर परियोजनाओं और जलविद्युत परियोजनाओं की शुरुआत: 10 मेगावाट की क्षमता वृद्धि हासिल की गई है वर्तमान समय में सौर परियोजनाएँ वित्तीय वर्ष 2018-19 में नवंबर, 2018 तक 3 सौर परियोजनाओं अर्थात जाहू (4 मेगावाट), भोगपुर सिंबलवाला (1 मेगावाट), नंद सौर परियोजना (5 मेगावाट) की कमीशनिंग हो चुकी है। राज्य। इसके अलावा, इस वित्तीय वर्ष 2018-19 की शेष अवधि के भीतर यानी मार्च 2019 तक कुट एचईपी (24 मेगावाट) से 24 मेगावाट जलविद्युत परियोजना जोड़े जाने की संभावना है।
केंद्र प्रायोजित योजनाएं एवं विभागीय योजनाएं:
i) दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई): भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने 3 दिसंबर को दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) लॉन्च की। ग्रामीण घरों के विद्युतीकरण, कृषि और गैर-कृषि फीडरों को अलग करने, उप-पारेषण और वितरण को मजबूत करने और बढ़ाने के लिए 2014 (एसटी और डी) ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, जिसमें वितरण ट्रांसफार्मर, फीडर और उपभोक्ताओं के स्तर पर मीटरिंग शामिल है। मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय सुनिश्चित करना है और ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति।
योजना की स्थिति: एचपीएसईबीएल ने हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों के लिए 35 जिलों को कवर करते हुए बारह योजनाएं तैयार कीं। अविद्युतीकृत गांव, सांसद आदर्श ग्राम योजना और 3,288 बीपीएल परिवार। 6 नंबर जिलों बिलासपुर, शिमला, सोलन, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा पर कार्यान्वित किया जा रहा है टर्नकी आधार पर और 5 जिलों अर्थात् हमीरपुर, किन्नौर, सिरमौर, ऊना और चंबा को आंशिक टर्नकी/विभागीय आधार पर निष्पादित किया जा रहा है। लाहौल में काम करता है और स्पीति जिले को स्व-निष्पादन के आधार पर क्रियान्वित किया जा रहा है। वर्तमान में इन जिलों में विभिन्न चरणों में कार्य निष्पादनाधीन हैं।
ii) प्रधान मंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य): ऊर्जा मंत्रालय, सरकार। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) शुरू की 11 अक्टूबर, 2017 को देश के सभी शेष घरों में अंतिम मील कनेक्टिविटी और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए। हिमाचल प्रदेश में भी सौभाग्य योजना थी शेष सभी गैर-विद्युतीकृत घरों तक अंतिम मील कनेक्टिविटी और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए कार्यान्वित किया गया। 12,891 घरों में से 8,319 गैर-विद्युतीकृत थे सौभाग्य योजना के तहत विद्युतीकरण किया गया और शेष 4,572 का विद्युतीकरण जीएससी योजनाओं के तहत किया गया। सौभाग्य योजना के तहत सरकार। भारत सरकार ने तदर्थ अग्रिम के रूप में `82.46 लाख जारी किए हैं और यह राशि सौभाग्य लाभार्थियों को भुगतान के लिए एचपीएसईबीएल ऑपरेशन डिवीजन को आवंटित की गई है।
iii) इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आईपीडीएस): भारत सरकार (जीओआई) ने 3 दिसंबर 2014 को इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आईपीडीएस) लॉन्च की है। जनगणना 2011 के अनुसार शहरी कस्बों के लिए। योजना का मुख्य उद्देश्य है:
ए) शहरी क्षेत्रों में उप-पारेषण और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना;
बी) शहरी क्षेत्रों में वितरण ट्रांसफार्मर/फीडर/उपभोक्ताओं की मीटरिंग;
सी) आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) के अनुसार, वितरण क्षेत्र को आईटी सक्षम बनाना और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना। आईपीडीएस के लिए आर-एपीडीआरपी के अनुमोदन परिव्यय को आगे बढ़ाकर 12वीं और 13वीं योजना के लिए आर-एपीडीआरपी के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अनुमोदन दिनांक 21.06.2013।
योजना की स्थिति: हिमाचल प्रदेश में, आईपीडीएस योजना के तहत कुल बारह (12) परियोजनाओं को केंद्र स्तरीय निगरानी समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है। इन बारह परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत `110.60 करोड़ है। समिति ने योजना लागत के अतिरिक्त परियोजना का 0.5 प्रतिशत अनुदान भी स्वीकृत किया है परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) लागत के रूप में लागत। इसके अलावा, मेसर्स पीएफसी ने 21.03.2016 को `93.94 करोड़ (यानी परियोजना लागत का 85 प्रतिशत) के वित्तपोषण प्रावधानों के साथ मंजूरी पत्र जारी किया है। भारत सरकार अनुदान के रूप में और पीएमए घटक के रूप में `55.00 लाख। आईपीडीएस योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, समकक्ष ऋण के रूप में परियोजना लागत का 10 प्रतिशत (यानी `11.06 करोड़) है 17.10.2016 को मैसर्स आरईसी लिमिटेड के साथ समझौता किया गया है, और शेष 5 प्रतिशत (यानी `5.60 करोड़) एचपीएसईबीएल द्वारा अपने स्रोतों के माध्यम से योगदान दिया जाएगा। नाहन मण्डल के संबंध में कार्यों को टर्नकी आधार पर निष्पादित किया जा रहा है और अन्य 11 सर्किलों के संबंध में कार्यों को आंशिक टर्नकी/विभागीय आधार पर निष्पादित किया जा रहा है। कार्य वर्तमान में हैं इन सर्किलों में विभिन्न चरणों में कार्यान्वयन चल रहा है।
पूर्णता लक्ष्य: दिशानिर्देशों के अनुसार, योजना को 30 महीनों में पूरा किया जाना है (अर्थात निविदा के लिए 6 महीने और कार्यान्वयन के लिए 24 महीने) मंजूरी पत्र की तारीख से. दिशानिर्देशों के अनुसार, आईपीडीएस के तहत आईटी सक्षमता मूल रूप से सेंट्रल डेटा सेंटर में होस्ट की जा रही आईटी सेवाओं का विस्तार कर रही है 2011 की जनगणना के अनुसार 5,000 और उससे अधिक की आबादी वाले नए शहरी कस्बों के लिए न्यूनतम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर आवश्यकता के साथ आर-एपीडीआरपी पार्ट-ए परियोजना। इसलिए, दिशानिर्देशों के अनुसार; हिमाचल प्रदेश में 40 शहरों का चयन किया गया है। इन शहरों में आईटी सक्षमता से उपभोक्ता संतुष्टि और बिजली आपूर्ति में सुधार होगा सटीक माप और उचित ऊर्जा लेखांकन और ऑडिटिंग की मदद से विश्वसनीयता और अंततः एटी एंड सी घाटे में कमी। इसे देखते हुए यह आवश्यक भी है नेशनल पावर पोर्टल (एनपीपी) के माध्यम से देश के सभी 11 केवी फीडरों की प्रस्तावित निगरानी। इसलिए, छोटे शहरों में आईटी आधारित प्रणाली लागू करना समझदारी है निवेश में वृद्धि के साथ अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए पूरे राज्य में भी। इसके अलावा, परियोजना प्रबंधन एजेंसी की सेवाएं लेने का भी प्रावधान था (पीएमए) बोली प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय करने के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों से राज्य विद्युत उपयोगिताओं द्वारा, प्रणाली का अध्ययन, परियोजना योजना और कार्यान्वयन, गुणवत्ता निगरानी, ​​प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) और वेब पोर्टल अपडेशन, जिसमें एटी एंड सी विश्लेषण, तैयारी और जैसे कार्य भी शामिल हैं। विभिन्न रिपोर्टों को प्रस्तुत करना और नोडल एजेंसियों यानी मेसर्स पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) लिमिटेड के साथ समन्वय करना। तदनुसार, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार ने एचपीएसईबी लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार किया गया और हिमाचल प्रदेश के 40 शहरों के लिए `27.36 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई, जिसका विवरण इस प्रकार है:-
i) डेटा सेंटर (डीसी), डिजास्टर रिकवरी (डीआर) और कस्टमर केयर सेंटर (सीसीसी) अपग्रेडेशन सहित 40 शहरों के लिए स्वीकृत डीपीआर लागत `27.36 करोड़ है।
ii) भारत सरकार का अनुदान `23.26 करोड़ (स्वीकृत परियोजना लागत का 85 प्रतिशत)।
iii) परियोजना प्रबंधन एजेंसी के लिए भारत सरकार का अनुदान `14.00 लाख (स्वीकृत परियोजना लागत का 0.5 प्रतिशत)।
iv) कुल अनुदान `23.40 करोड़ है।
वर्तमान स्थिति:
a) परियोजना प्रबंधन एजेंसी नियुक्त की गई है।
b) सिस्टम मीटर (यानी फीडर, बाउंड्री, डीटीआर और एचटी उपभोक्ता मीटर) और संयुक्त सीटी-पीटी इकाइयों (11 केवी/110 वी) के लिए पुरस्कार रखा गया है।
c) आईपीडीएस आईटी चरण- II के लिए आईटी कार्यान्वयन एजेंसी (आईटीआईए) की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव (आरएफपी) के लिए अनुरोध जारी किया गया था और प्रीबिड सम्मेलन 30 तारीख को आयोजित किया गया था। 31 अक्टूबर, 2017. आरएफपी जमा करने की नियत तारीख और खोलने की तारीख 11 जनवरी, 2018 थी। नियत तारीख पर कोई बोली/प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी, तदनुसार, वही 15 फरवरी, 2018 तक बढ़ा दिया गया था। अंततः, शून्य प्रतिक्रिया के कारण, उक्त निविदा रद्द कर दी गई। एक नया एनआईटी जिसमें आईपीडीएस आईटी चरण- II के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का उन्नयन/खरीद शामिल है और आईपीडीएस ईआरपी के लिए हार्डवेयर की खरीद, 28 जुलाई, 2018 को शुरू की गई और 21 अगस्त, 2018 को प्रीबिड बैठक आयोजित की गई।
विभिन्न से कई प्रश्न प्राप्त हुए बोली पूर्व बैठक के दौरान और उसके बाद भी संभावित बोलीदाताओं को जवाब दिया जाता है, जिसके जवाब पीएमए के परामर्श से संभावित बोलीदाताओं को दिए जाते हैं। शून्य प्रतिक्रिया के कारण जारी आरएफपी के खिलाफ, अब शुद्धिपत्र संख्या 7 जारी किया गया है, जिसके तहत बोली जमा करने की तारीख 15.01.2019 निर्धारित है और काम का पुरस्कार फरवरी, 2019 के दौरान दिए जाने की उम्मीद है।
कम्प्यूटरीकृत बिलिंग और ऊर्जा लेखा पैकेज (आईटी पैकेज): कम्प्यूटरीकृत बिलिंग और लेखा पैकेज (आईटी पैकेज) था विद्युत मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए 'त्वरित विद्युत विकास और सुधार कार्यक्रम' के तहत कार्यान्वित किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत गतिविधियाँ ऑपरेशन सब-डिवीजन को प्री-बिलिंग गतिविधियों, बिलिंग गतिविधियों और पोस्ट बिलिंग जैसी कार्यात्मकताओं के माध्यम से कम्प्यूटरीकृत किया जाता है। गतिविधियाँ, उप-विभाग स्तर पर स्टोर प्रबंधन, ग्राहक संबंध प्रबंधन, विद्युत नेटवर्क प्रबंधन, और ऊर्जा लेखांकन/ लेखापरीक्षा और प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस)। यह पुरस्कार मेसर्स एचसीएल इन्फो सिस्टम्स नोएडा को `30.58 करोड़ की राशि के लिए दिया गया था। परियोजना 27 डिवीजनों और 12 सर्किलों के 132 सब डिवीजनों में 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को कवर करते हुए लागू किया गया है।
61 विद्युत उप प्रभागों में SAP आधारित कम्प्यूटरीकृत बिलिंग: मौजूदा कम्प्यूटरीकृत बिलिंग में समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया एचपीएसईबीएल प्रबंधन द्वारा विभिन्न विद्युत उप प्रभागों में बिलिंग के लिए एक मानक मंच अपनाने का निर्णय लिया गया है। विभिन्न मॉड्यूल के रूप में एसएपी को ईआरपी परियोजना के तहत एचपीएसईबीएल में कार्यान्वित किया जा रहा है, इसलिए एसएपी प्लेटफॉर्म पर बचे हुए 61 विद्युत उप प्रभागों में कम्प्यूटरीकृत बिलिंग की जा रही है। एकाधिक प्लेटफार्मों के संचालन से बचने के लिए मंजूरी दी गई थी। 61 विद्युत उपमंडलों में एसएपी आधारित कम्प्यूटरीकृत बिलिंग कार्यान्वयन का कार्य 24.07.2015 को मेसर्स टीसीएस लिमिटेड को `16.47 करोड़ की राशि का पुरस्कार दिया गया।
61 उप प्रभागों में एसएपी आधारित कम्प्यूटरीकृत बिलिंग का कार्यान्वयन इसमें न्यू कनेक्शन, डिसकनेक्शन, मीटरिंग, एएमआर, बिलिंग, स्पॉट बिलिंग, कलेक्शन और एमआईएस जैसी कई प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं। का प्रावधान 61 विद्युत उपमंडलों में 100 किलोवाट से अधिक कनेक्टेड लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए एसएपी आधारित कम्प्यूटरीकृत बिलिंग में एएमआर भी बनाया गया है। परियोजना में मीटर डेटा अधिग्रहण प्रणाली (एमडीएएस) की आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग के साथ-साथ पहचाने गए उपभोक्ता मीटरों को मोडेम प्रदान करना और ठीक करना शामिल है।
वर्तमान स्थिति: प्रारंभ में, जनवरी-2016 के दौरान विद्युत मंडल, अर्की के तहत चार विद्युत उपमंडलों में एसएपी आधारित कम्प्यूटरीकृत बिलिंग लागू की गई थी। एसएपी बिलिंग कार्यान्वयन के प्रारंभिक चरण के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान मेसर्स टीसीएस द्वारा किया गया था। इसके बाद, मई, 2016 में SAP बिलिंग का और रोलओवर शुरू हुआ। मेसर्स टीसीएस ने मार्च-2017 में 59 विद्युत उपखंडों में एसएपी बिलिंग कार्यान्वयन पूरा किया। दो विद्युत उपखंडों में एसएपी बिलिंग लागू नहीं की जा सकी (अर्थात लैपियाना और रे) नेटवर्क सेवा प्रदाताओं से कनेक्टिविटी की अनुपलब्धता के कारण।
इसके अलावा, एसएपी-आईएसयू को रोलओवर करने के लिए मेसर्स टीसीएस को पुरस्कार दिया गया है 132 विद्युत उपखण्डों में चरणबद्ध तरीके से बिलिंग। एचसीएलआई अनुकूलित बिलिंग समाधान से एसएपी आधारित एप्लिकेशन में रोलओवर जनवरी, 2018 में शुरू हुआ दिसंबर 2018 तक 124 विद्युत उपखंडों के लिए माइग्रेशन सफलतापूर्वक किया गया है। शेष आठ उपविभागों में रोलओवर प्रगति पर है जनवरी 2019 के अंत तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा, मैन्युअल रूप से बिल किए गए 47 विद्युत उपखंडों में एसएपी बिलिंग समाधान लागू करने का प्रस्ताव है जून, 2019 तक, कनेक्टिविटी की उपलब्धता के अधीन, जिसके लिए विभिन्न एनएसपी एजेंसियों से व्यवहार्यता की जानकारी के लिए संपर्क किया गया है।
एचपीएसईबी लिमिटेड में एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) परियोजना का कार्यान्वयन:
परियोजना की स्थिति:अब तक, निम्नलिखित स्थानों को SAP ERP एप्लिकेशन पर लाइव किया गया है:
i) प्रधान कार्यालय (विद्युत भवन, शिमला) के सभी विभाग।
ii) संपूर्ण दक्षिण क्षेत्र (ऑपरेशन विंग) - 1 मुख्य कार्यालय, 5 सर्कल कार्यालय, 21 डिवीजन कार्यालय, 89 सब डिवीजन।
iii) संपूर्ण मध्य क्षेत्र (ऑपरेशन विंग) - 1 मुख्य कार्यालय, 4 सर्कल कार्यालय, 16 डिवीजन कार्यालय, 80 सब डिवीजन।
iv) संपूर्ण विद्युत प्रणाली रखरखाव विंग - 1 मुख्य कार्यालय, 2 सर्कल कार्यालय, 1 एसई डिजाइन कार्यालय, 12 डिवीजन कार्यालय, 10 डिवीजनल स्टोर, 68 उप डिवीजन।
v) SAP ERP के मानव पूंजी प्रबंधन मॉड्यूल के तहत, 8,450+ कर्मचारियों का वेतन और अन्य भुगतान, 4,700+ पेंशनभोगियों की पेंशन, और लगभग का GPF वर्तमान में 13,300+ कर्मचारियों को हर महीने SAP ERP सिस्टम के माध्यम से संसाधित किया जा रहा है।
vi) सभी पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) एसएपी ईआरपी सिस्टम से उत्पन्न किए जा रहे हैं।
vii) सभी आईपीपी (कुल 90+ आईपीपी) से बिजली की बिक्री/खरीद की बिलिंग एसएपी ईआरपी सिस्टम के आईएसयू मॉड्यूल के माध्यम से की जाती है।
viii) रामपुर, एसजेवीएनएल, एनएचपीसी, यूपीसीएल, एचपीपीसी, पीपीसीएल, बीएएसपीए-II, एसईसीआई, एनएपीपी, आरएपीपी, पीजीसीआईएल, यूजेवीएनएल, खारा, एनटीपीसी और 25 मेगावाट से ऊपर के लिए अंतरराज्यीय बिजली बिक्री-खरीद SAP ERP परियोजना के माध्यम से किया जाता है।
ix) कैलेंडर वर्ष 2019 के दौरान उत्तरी क्षेत्र (ऑपरेशन विंग) और जेनरेशन विंग में ईआरपी सिस्टम के रोलआउट की योजना बनाई गई है।
काला अंब, हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन: एचपीएसईबी लिमिटेड स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट लागू कर रहा है काला अम्ब में. कार्य को पुरस्कृत किया गया है फरवरी, 2015 के दौरान मेसर्स एल्सटॉम टीएंडडी इंडिया लिमिटेड (अब मेसर्स जीई टीएंडडी इंडिया लिमिटेड) और मेसर्स जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कंसोर्टियम को `24.99 की राशि के लिए करोड़ और अब संशोधित होकर `25.50 करोड़ हो गया है। भारत सरकार इस परियोजना के लिए `9.72 करोड़ का वित्तपोषण कर रही है। एम/एस पीजीसीआईएल को सलाहकार सह परामर्श सेवाओं के रूप में नियुक्त किया गया है स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए एचपीएसईबीएल को प्रदाता।
वर्तमान स्थिति:
1) काला अंब में स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट के तहत सभी हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर को फील्ड स्थानों/नियंत्रण केंद्र पर वितरित किया गया और स्थापित किया गया संबंधित स्थान. वर्तमान क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार 1,335 स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं (1,404 आपूर्ति की गई मात्रा थी) 914 एकल चरण पर, 136 पर थ्री फेज होल करंट, 50 एलटीसीटी डीटी मीटर, 9 एलटीसीटी कंज्यूमर, 202 एचटीसीटी मीटर और 24 फीडर मीटर लगाए गए हैं।
2) सभी परीक्षण पूरे हो चुके हैं और उपलब्धता परीक्षण 1.4.17 से शुरू कर दिया गया है। 01-10-2018 अनुबंध की शर्त के अनुसार। उपलब्धता परीक्षण की अवधि 3 महीने का है और ठेकेदार को अनुबंध दस्तावेज़ के अनुसार सिस्टम की उपलब्धता बनाए रखनी होगी। उपलब्धता का सफल समापन परीक्षण से सिस्टम की परिचालन स्वीकृति प्राप्त होगी। फिलहाल उपलब्धता रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 1,35,000 उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराने का और प्रस्ताव शिमला और धर्मशाला शहरों को स्मार्ट सिटी के अंतर्गत लाने पर विचार चल रहा है।
1) HPSEBL के सभी कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण।
2) हिमाचल प्रदेश राज्य में उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय बिजली प्रदान करने के लिए नए सब-स्टेशनों और एचटी/एलटी लाइनों का विस्तार और निर्माण।
3) टी एंड डी घाटे को कम करने के लिए।
नेरी खड्ड इंटेक कार्यों, राणा खड्ड इंटेक कार्यों, भंडारण जलाशय, हेड रेस टनल, पेनस्टॉक और पावर हाउस के निर्माण के पैकेज पूरे हो चुके हैं। एचआरटी पैकेज का कार्य अगस्त, 2018 के दौरान पूरा हो चुका है, जिसके बाद परीक्षण के लिए संबंधित घटकों में पानी भरने का काम हाथ में लिया गया है। भंडारण जलाशय और पेनस्टॉक में परीक्षण के दौरान कुछ सुधार कार्य देखे गए हैं और उनकी मरम्मत का काम शुरू हो गया है। इस सुधार कार्य से बाहर भंडारण जलाशय का काम पूरा हो चुका है और पेनस्टॉक में सुधार कार्य पाइप लाइन में है, जिसे अप्रैल, 2019 तक अस्थायी रूप से पूरा कर लिया जाएगा।
उसके बाद अप्रैल, 2019 के अंतिम सप्ताह तक संबंधित घटकों में पानी भरना शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना की पहली इकाई मई, 2019 के अंत तक चालू हो जाएगी। दिसंबर, 2012 (मूल्य स्तर) पर परियोजना की अनुमानित लागत `1,281.50 करोड़ है और अक्टूबर, 2018 तक अद्यतन व्यय `1,571.36 करोड़ है। इलेक्ट्रो-मैकेनिकल का निर्माण कार्य पैकेज सभी तरह से पूरा हो चुका है, हालांकि टर्बाइन और जेनरेटर ट्रांसफार्मर की कमीशनिंग पानी की उपलब्धता और ट्रांसमिशन कार्य के बाद पूरी की जाएगी। चूल्हा से बस्सी (15.288 किमी) तक 132 केवी सिंगल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन और 132 केवी डबल सर्किट का निर्माण चूल्हा से हमीरपुर (34.307 किमी) तक ट्रांसमिशन लाइन पूरी हो गई है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने साईं कोठी-I (15 मेगावाट), साईं कोठी-II (16.50 मेगावाट), देवी कोठी (16 मेगावाट), हेल (18 मेगावाट), आवंटित किया है। कार्यान्वयन के लिए एचपीएसईबी लिमिटेड को एचईपी। उपरोक्त परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय स्थिति इस प्रकार है:-
साई कोठी स्टेज-I HEP(15 मेगावाट): यह परियोजना सरकार द्वारा HPSEBL को आवंटित की गई है। जांच और कार्यान्वयन उद्देश्य के लिए हिमाचल प्रदेश की। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पूरी हो चुकी है और अप्रैल, 2018 के दौरान डीओई से तकनीकी आर्थिक मंजूरी भी प्राप्त हो गई है। निर्माण-पूर्व चरण की गतिविधियाँ प्रगति पर हैं और उनकी स्थिति इस प्रकार है:
1) सभी संबंधित विभागों/ग्राम पंचायत/ग्राम सभाओं से एनओसी प्राप्त कर ली गई है और डीसी, चंबा से 28.04.2018 को एफआरए प्राप्त कर लिया गया है।
2) एफसीए मामले के लिए पेड़ों की गणना पूरी हो चुकी है, संयुक्त निरीक्षण, डीजीपीएस मैपिंग और प्रतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि की पहचान चल रही है।
3) 30.11.2018 तक `11.84 करोड़ की राशि खर्च की गई है और 31.03.2019 तक `4.91 करोड़ की अनुमानित राशि खर्च होने की उम्मीद है।
साई कोठी स्टेज-II HEP (16.50 मेगावाट): यह परियोजना सरकार द्वारा HPSEBL को आवंटित की गई है। जांच और कार्यान्वयन उद्देश्य के लिए हिमाचल प्रदेश की। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पूरी हो चुकी है और ऊर्जा निदेशालय से तकनीकी आर्थिक मंजूरी भी प्राप्त हो चुकी है। `152.26 करोड़। निर्माण-पूर्व चरण की गतिविधियाँ प्रगति पर हैं और उनकी स्थिति इस प्रकार है:
1) सभी संबंधित विभागों/ग्राम पंचायत/ग्राम सभाओं से एनओसी और एफआरए प्राप्त कर लिया गया है।
2) एफसीए मामला एमओईएफ और सीसी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है और टिप्पणियों में भाग लेने के बाद दिनांक 25.08.2018 को नोडल अधिकारी-सह-एपीसीसीएफ (एफसीए) शिमला को फिर से प्रस्तुत किया गया है।
3) 30.11.2018 तक `13.70 करोड़ की राशि खर्च की गई है और 31.03.2019 तक `6.96 करोड़ की अनुमानित राशि खर्च होने की उम्मीद है।
देवी कोठी स्टेज- II HEP (16 मेगावाट): यह परियोजना सरकार द्वारा HPSEBL को आवंटित की गई है। जांच और कार्यान्वयन उद्देश्य के लिए हिमाचल प्रदेश की। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पूरी हो चुकी है और दिनांक 19.03.2014 को ऊर्जा निदेशालय द्वारा तकनीकी आर्थिक मंजूरी दे दी गई है। निर्माण-पूर्व चरण की गतिविधियाँ प्रगति पर हैं और उनकी स्थिति इस प्रकार है:
1) सभी संबंधित विभागों/ग्राम पंचायत/ग्राम सभाओं से एनओसी और एफआरए प्राप्त कर लिया गया है।
2) परियोजना के लिए एफसीए मामला 23.03.2018 को एमओईएफ वेब पोर्टल पर अपलोड किया गया था। मामला अब भूमि की पहचान के अभाव में डीएफओ सलूणी के पास लंबित है सरकार के नए दिशानिर्देशों के अनुसार प्रतिपूरक वनरोपण (सीए)। सीए के लिए भूमि के रूप में निम्नीकृत वन भूमि के उपयोग पर भारत का।
3) 30.11.2018 तक `12.08 करोड़ की राशि खर्च की गई है और 31.03.2019 तक `7.11 करोड़ की अनुमानित राशि खर्च होने की उम्मीद है।
हेल एचईपी (18 मेगावाट): यह परियोजना सरकार द्वारा एचपीएसईबीएल को आवंटित की गई है। जांच और कार्यान्वयन उद्देश्य के लिए हिमाचल प्रदेश की। निर्माण-पूर्व चरण की गतिविधियाँ प्रगति पर हैं और उनकी स्थिति इस प्रकार है:
1) सभी संबंधित विभागों/ग्राम पंचायत/ग्राम सभाओं से एनओसी प्राप्त कर ली गई है।
2) दाहिने किनारे पर लेआउट के स्थानांतरण के कारण आवश्यक अतिरिक्त भूमि के राजस्व कागजात के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रक्रियाधीन है।
3) शासकीय/वन/प्रा. पर वृक्षों की गणना हेतु आवश्यक दस्तावेज। परियोजना के लिए अधिग्रहण की जाने वाली भूमि को एफसीए मामले की आगे की कार्रवाई के लिए डीएफओ सलूणी को सौंप दिया गया है।
4) 30.11.2018 तक `12.31 करोड़ की राशि खर्च की गई है और 31.03.2019 तक `5.03 करोड़ की अनुमानित राशि खर्च होने की उम्मीद है।
अन्य कार्य: अन्य कार्य जैसे सोलन में लाइनमैन ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण (लगभग 30% कार्य) पूरा हो चुका है और काम दिसंबर, 2019 तक पूरा हो जाएगा) मट्टनसिद्ध, हमीरपुर में इलेक्ट्रिकल सिस्टम बिल्डिंग का काम चल रहा है, टूटू, शिमला में एएल एंड डीसी बिल्डिंग (एनजीटी की मंजूरी लेने के लिए मामला संसाधित किया जा रहा है), कॉटेज और आवासीय क्वार्टरों का निर्माण संकटमोचन मंदिर के नीचे, तारा देवी (भूमि हस्तांतरण का मामला प्रक्रियाधीन है) पर भी काम चल रहा है।
एकीकृत काशांग एचईपी (243 मेगावाट): एकीकृत काशांग एचईपी (243 मेगावाट) काशांग और केरांग धाराओं, सहायक नदियों के विकास की परिकल्पना करता है सतलुज नदी के चार अलग-अलग चरण निम्नानुसार हैं:-
चरण- I (65 मेगावाट): पोवारी गांव के पास सतलुज के दाहिने किनारे पर स्थित एक भूमिगत बिजली घर में काशांग धारा का मोड़ शामिल है। प्रति वर्ष 245.80 एमयू प्रति यूनिट ₹2.92 उत्पन्न करने के लिए लगभग 830 मीटर का हेड विकसित करना। यह परियोजना वाणिज्यिक परिचालन के अधीन है 01.09.2016 से, कमीशनिंग की तारीख से 31.12.2018 तक परियोजना से 373.37 एमयू उत्पादन किया गया है।
स्टेज- II और III (130 मेगावाट): इसमें केरांग स्ट्रीम को एक भूमिगत जल कंडक्टर सिस्टम (के-के लिंक) में मोड़ना शामिल है जो अपस्ट्रीम छोर तक जाता है स्टेज-I जल कंडक्टर प्रणाली का निर्माण, स्टेज-I पावर हाउस की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 790.93 एमयू प्रति वर्ष करना।
चरण-IV (48 मेगावाट): यह चरण कमोबेश स्वतंत्र योजना है जो डायवर्जन स्थल के अपस्ट्रीम केरांग धारा की विद्युत क्षमता का दोहन करती है। स्टेज- II. इस योजना में, केरांग धारा के दाहिने किनारे पर स्थित एक भूमिगत बिजलीघर में बिजली विकसित करने के लिए लगभग 300 मीटर के हेड का उपयोग किया जा सकता है।
सैंज एचईपी (100 मेगावाट): सैंज एचईपी को नदी पर नदी विकास की एक प्रक्रिया के रूप में विचार किया गया है सैंज, ए हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में ब्यास नदी की सहायक नदी। इस परियोजना में निहारनी गांव के पास सैंज नदी पर एक डायवर्जन बैराज शामिल है सुइंद गांव के पास सैंज नदी के दाहिने किनारे पर 409.60 मीटर के सकल हेड के साथ भूमिगत बिजली घर, जो प्रति वर्ष 322.23 एमयू बिजली पैदा करता है। परियोजना ईपीसी मोड पर निष्पादित किया गया है। यह परियोजना 4.09.2017 से वाणिज्यिक संचालन में है। कमीशनिंग की तारीख से 31 दिसंबर तक परियोजना से 515.58 एमयू उत्पादन किया गया है। 2018.
सावरा कुड्डू एचईपी (111 मेगावाट): सावरा कुड्डू एचईपी (111 मेगावाट) एक रन-ऑफ- -पब्बर नदी पर नदी योजना रोहड़ू के पास शिमला जिले (हिमाचल प्रदेश) में। हेड रेस टनल (एचआरटी) पैकेज को छोड़कर परियोजना को एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है राज्य सरकार के इक्विटी योगदान से पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है। इस परियोजना से 385.78 एमयू बिजली पैदा होने की उम्मीद है 90 प्रतिशत भरोसेमंद वर्ष में। बैराज और पावर हाउस का काम लगभग पूरा हो चुका है लेकिन खराब भूविज्ञान और खराब प्रदर्शन के कारण एचआरटी पैकेज की प्रगति बुरी तरह प्रभावित हुई है तत्कालीन ठेकेदार का. एचआरटी पैकेज की पुनः निविदा की जानी थी और 25.11.2014 को मेसर्स एचसीसी लिमिटेड को काम सौंपा गया था। परियोजना के सिविल कार्य संभावित हैं जून, 2019 तक पूरा किया जाएगा और परियोजना जुलाई, 2019 से सितंबर, 2019 के बीच चालू की जाएगी।
शोंगटोंग करछम एचईपी (450 मेगावाट): शोंगटोंग करचम जलविद्युत परियोजना एक रन-ऑफ-रिवर योजना है। नदी हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सतलुज नदी के बाएं किनारे पर पोवारी गांव के पास डायवर्जन बैराज और भूमिगत बिजली घर स्थित है। रल्ली गांव के पास प्रति वर्ष 1,579 एमयू उत्पन्न करने के लिए 129 मीटर का सकल हेड उत्पन्न होगा। परियोजना का निर्माण ईपीसी मोड और सिविल और एचएम कार्यों के माध्यम से किया जा रहा है 04.08.2012 को मेसर्स पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को प्रदान किया गया। मेसर्स पीईएल ने 27.12.2013 को एचआरटी के एडिट-II पर पहला विस्फोट किया। जिसके लिए ईएंडएम का काम मेसर्स एएचपीएल को सौंपा गया है 4.03.2015 को अनुबंध समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। सभी मोर्चों पर प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है. परियोजना की निर्धारित कमीशनिंग तिथि अप्रैल, 2024 है।
चांजू HEP-III (48MW) और देवथल चांजू HEP (30 MW): चांजू HEP-III ( 48MW) चांजू धारा पर विकसित किया गया है रावी बेसिन की सहायक नदी बैरा और सियुल है। भरोसेमंद वर्ष में प्रति वर्ष ऊर्जा का अपेक्षित उत्पादन 176.19 एमयू है। देवथल चांजू एचईपी (30 मेगावाट) भी विकसित किया गया है देवथल धारा पर, जो रावी बेसिन की बैरा की एक सहायक नदी है। भरोसेमंद वर्ष में प्रति वर्ष ऊर्जा का अपेक्षित उत्पादन 101.35 एमयू है। पर्यावरण शुद्धि के लिए ये प्रोजेक्ट 29.09.2017 को दिए गए हैं. राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसएलईआईएए) द्वारा 29.09.2017 को परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी दे दी गई है। चांजूIII एचईपी (48 मेगावाट) और देओथल चांजू एचईपी (30 मेगावाट) की तकनीकी आर्थिक मंजूरी (टीईसी) ऊर्जा निदेशालय, सरकार द्वारा प्रदान की गई है। 14.07.2015 को हिमाचल प्रदेश की एवं क्रमशः 22.07.2015. उपायुक्त, चम्बा ने दिनांक 13.04.2016 को दोनों परियोजनाओं के लिए एफआरए प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। दोहरे के लिए प्रतिपूरक वनरोपण को छोड़कर वन मंजूरी का मामला दोनों परियोजनाओं के निर्माण के लिए प्रस्तावित वन भूमि का क्षेत्रफल डीएफओ चंबा को सौंप दिया गया है। डीएफओ चंबा ने मुआवजे के लिए आवश्यक गैर वन भूमि की पहचान की है जिला मण्डी में दोनों परियोजनाओं के लिए वनीकरण। डीजीपीएस मानचित्र और केएमएल फाइलें तैयार करने के लिए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी ने दी है चांजू-III एचईपी (48 मेगावाट) और देओथल चांजू एचईपी (30 मेगावाट) के वित्तपोषण के लिए इसकी सहमति और 80 मिलियन यूरो की क्रेडिट सुविधा समझौते पर सरकार के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं। 4.07.2017 को भारत और एएफडी की। इसके अलावा, 2.02.2018 को परियोजना समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए और एचपीपीसीएल, सरकार के बीच ऋण समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए। हिमाचल प्रदेश और एएफडी पर हस्ताक्षर किए गए 11.07.2018 को. भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से एनओसी प्राप्त हो गई है। दोनों परियोजनाओं के लिए दिनांक 11.12.2017 को भारत सरकार।
रेणुका जी बांध एचईपी (40 मेगावाट): रेणुकाजी बांध परियोजना, एक पेयजल आपूर्ति योजना के रूप में बनाई गई है राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, निर्माण की परिकल्पना करता है सिरमौर जिले के ददाहू में गिरि नदी पर 148 मीटर ऊंचा रॉक फिल बांध और बांध के सिरे पर एक पावर हाउस है। यह परियोजना 49,800 हेक्टेयर मीटर जीवित जल सुनिश्चित करेगी इसके जलाशय में भंडारण और दिल्ली को 23 घन मीटर की ठोस जल आपूर्ति के अलावा विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के उपयोग के लिए प्रति वर्ष 199.99 4MU पानी का उत्पादन होता है। मार्च 2015 के मूल्य स्तर पर परियोजना की डीपीआर को 4,596.76 करोड़ की मंजूरी दी गई थी।
अब जल संसाधन मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में, की लागत का अनुमान रेणुका जी बांध परियोजना को नवंबर, 2018 के मूल्य स्तर पर संशोधित किया गया है और सीडब्ल्यूसी को प्रस्तुत किया गया है। इस परियोजना को सरकार द्वारा "राष्ट्रीय परियोजना" घोषित किया गया है। भारत की और सरकार द्वारा वित्त पोषित होने के लिए पात्र है। भारत/लाभार्थी राज्यों को परियोजना लागत का 90:10 की सीमा तक (बिजली घटक को छोड़कर)। "राष्ट्रीय परियोजना" के अनुसार दिशानिर्देश शक्ति घटक को मूल राज्यों द्वारा ही वित्त पोषित किया जाना है। जल घटक की अनुमानित लागत `4,325.43 करोड़ है और बिजली घटक की अनुमानित लागत है `271.30 करोड़।
राज्य सरकार के लगातार अनुरोध के बाद। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली परियोजना के बिजली घटक की 90% लागत को वित्तपोषित करने पर सहमत हो गया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 23.10.2009 को परियोजना को पर्यावरण मंजूरी और 909 हेक्टेयर भूमि के डायवर्जन के लिए वन मंजूरी (चरण-I) प्रदान कर दी है। 20.02.2015 को वन भूमि। जल संसाधन मंत्रालय (एमओडब्ल्यूआर) की तकनीकी आर्थिक मंजूरी (टीएसी) ने कुछ शर्तों के अधीन 06.03.2017 को परियोजना को मंजूरी दे दी है। को छोड़कर सभी शर्तें संकलित कर ली गई हैं
(i) और चरण- II वन मंजूरी, जिसके लिए एचपीपीसीएल को पर्यावरण मंत्रालय के CAMPA खाते में `414.28 करोड़ जमा करने की आवश्यकता है एवं वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा
(ii) अंतरराज्यीय समझौते पर हस्ताक्षर, जिसके लिए सरकार को छोड़कर सभी लाभार्थी राज्य। हरियाणा ने एनओसी दे दी है। इसके बाद अंतरराज्यीय समझौते पर हस्ताक्षर किये जायेंगे सभी लाभार्थी राज्यों से एनओसी प्राप्त करना। रेणुकाजी के संबंध में भूमि अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार को `446.96 करोड़ की राशि जारी की गई है बांध परियोजना. नवंबर, 2018 तक भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, एचपीपीसीएल द्वारा भूमि मालिकों को `337.51 करोड़ की राशि वितरित की गई है। पर्यावरण मंजूरी को राष्ट्रीय अपीलीय प्राधिकरण/राष्ट्रीय हरित अधिकरण में चुनौती दी गई थी।
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने ऐसी सभी अपीलों का निपटारा आम सहमति से कर दिया है। निर्णय दिनांक 02.02.2016. इसके अलावा, माननीय राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण का गठन किया गया परियोजना पर सभी अनुपालनों की पर्याप्तता का अध्ययन और परीक्षण करने और परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता की जांच करने के लिए आठ सदस्यीय समिति। अब, पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद समिति ने परियोजना की पर्यावरण मंजूरी को संशोधित करने का निर्देश दिया है। निवेश मंजूरी मामला प्रस्तुत किया गया है 29.09.2018 को केंद्रीय जल आयोग को, जिसे मंजूरी के बाद आगे की मंजूरी के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के समक्ष रखा जाएगा। परियोजना के लिए केंद्रीय अनुदान उसके बाद जारी किया जाएगा।
सुरगनी सुंडला HEP (48 मेगावाट): इस योजना की परिकल्पना बैरा सुइल के टेल वॉटर का उपयोग करने के लिए की गई है 48 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए एचईपी। इस परियोजना से 209.60 एमयू उत्पादन होने की उम्मीद है 90% भरोसेमंद वर्ष में बिजली की. DoE, सरकार द्वारा तकनीकी-आर्थिक मंजूरी (TEC) प्रदान की गई है। 20.10.2012 को हिमाचल प्रदेश की। मंत्रालय द्वारा रक्षा मंजूरी दे दी गई है रक्षा विभाग, सरकार। 13.06.2018 को भारत का। राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसएलईआईएए), एचपी द्वारा 28.09.2018 को पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्रदान की गई है। के लिए प्रस्ताव फंडिंग सरकार को सौंपी गई थी। भारत की और 19.12.2017 को आयोजित आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की 78वीं स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में चर्चा की गई। स्क्रीनिंग कमेटी ने दिया सुझाव वह सरकार. एचपी को इसकी उच्च लागत यानी `800.00 करोड़ (जुलाई 2017 मूल्य स्तर) को देखते हुए वित्तीय/आर्थिक व्यवहार्यता के साथ परियोजना प्रस्ताव पर फिर से विचार करना चाहिए। तदनुसार, ऊर्जा निदेशक (डीओई), सरकार। जुलाई, 2017 के मूल्य स्तर पर लागत के पुनर्वैधीकरण के लिए हिमाचल प्रदेश से 22.02.2018 को अनुरोध किया गया है, जो प्रगति पर है।
धमवारी सुंडा एचईपी (70 मेगावाट): धमवारी सुंडा एचईपी (70) की तकनीकी-आर्थिक मंजूरी (टीईसी) (मेगावाट) जिले में। शिमला को ऊर्जा निदेशालय, सरकार द्वारा प्रदान किया गया। 10.01.2011 को हिमाचल प्रदेश की। यह परियोजना एचपीपीसीएल को 06.04.2015 को आवंटित की गई थी। धमवारी सुंडा एचईपी (70 मेगावाट) की डीपीआर भी स्वीकृत है, लेकिन मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
थाना प्लाउन HEP (191 मेगावाट): इस परियोजना को स्टोरेज-कम-रन-ऑफ रिवर के रूप में माना जाता है 107 मीटर के रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट (आरसीसी) ग्रेविटी बांध की परिकल्पना वाली योजना हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में ब्यास नदी पर उच्च। 90% भरोसेमंद वर्ष में वार्षिक बिजली उत्पादन 668.07 एमयू होगा। के डायवर्जन का मामला 406.79 हेक्टेयर वन भूमि डीएफओ, जोगिंदर नगर (एच.पी.) को प्रस्तुत की गई थी, लेकिन प्रतिपूरक वनरोपण (सीए) के लिए गैर वन भूमि की अनुपलब्धता के कारण इसमें देरी हुई। अब MoEF&CC ने दिनांक 16.11.2018 के पत्र के माध्यम से प्रतिपूरक वनरोपण के लिए गैर-सीमांकित और अपरिवर्तित संरक्षित वनों (पीएफ) पर विचार करने की अनुमति दी है। अब तक 810 हेक्टेयर में से 770 हेक्टेयर गैर वन भूमि चिन्हित की जा चुकी है। डीजीपीएस मानचित्र तैयार करने का कार्य अवार्ड हो चुका है और कार्य अपेक्षित है 07.01.2019 तक पूरा किया जाना है। इसके बाद मामले को "वन मंजूरी" के लिए आगे की प्रक्रिया हेतु वन विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा। वित्तपोषण के लिए मामला बाहरी सहायता के माध्यम से परियोजना तैयार की गई है और सरकार के योजना विभाग के सक्रिय विचाराधीन है। हिमाचल प्रदेश के. टेक्नो की प्रक्रिया विभिन्न सरकारी विभागों से आर्थिक मंजूरी अंतिम चरण में है। सीडब्ल्यूसी/सीईए की तुलना में एजेंसियां। चरण- I मंजूरी प्राप्त कर ली गई है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) लेवल-II मंजूरी के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) में जमा कर दी गई है। 09.02.2018. डीपीआर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए)/केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) में मूल्यांकन के उन्नत चरण में है।
नक्थन एचईपी (460 मेगावाट): जिले में नक्थन एचईपी (460 मेगावाट) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर)। कुल्लू केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए)/केंद्रीय जल में मूल्यांकन के उन्नत चरण में है आयोग (सीडब्ल्यूसी)। लेवल-I चरण के तहत कुल 11 पहलुओं/अध्यायों में से डीपीआर के 10 पहलुओं/अध्यायों के लिए सीडब्ल्यूसी/सीईए से मंजूरी/अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है। सीएसएमआरएस की अंतिम मंजूरी का काम जारी है और अगले 2 महीनों के भीतर इसकी उम्मीद है। परियोजना को पहले 2015 और 2016 में ईएसी द्वारा मूल्यांकन के लिए लिया गया था। फरवरी, 2016 में आयोजित ईएसी की 91वीं बैठक में एचपी के माननीय उच्च न्यायालय में मैसर्स साई इंजीनियरिंग के साथ अदालत में मामला लंबित होने के कारण पर्यावरण मंजूरी रोक दी गई थी। वन मंजूरी मामले पर कार्रवाई की जा रही है; हालाँकि, बरशैणी पंचायत द्वारा एफआरए प्रमाणपत्र जारी न करने के कारण यह पिछले कुछ समय से लंबित है बार-बार अनुसरण. विश्व बैंक के माध्यम से नक्थन एचईपी (460 मेगावाट) के वित्तपोषण के लिए, 804.75 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक संयुक्त वित्तपोषण प्रस्ताव (एचपीपीसीएल, एचपीपीटीसीएल, एचपीएसईबीएल और डीओई) था। डीईए को प्रस्तुत किया गया और क्रमशः 18-05-2018 और 17.07.2018 को आयोजित 83वीं और 85वीं स्क्रीनिंग समिति की बैठक में चर्चा की गई।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (660 मेगावाट): किशाऊ बांध परियोजना टोंस नदी (नदी की एक सहायक नदी) पर प्रस्तावित है (यमुना) उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर प्रदेश. टोंस नदी के बाएं किनारे पर 660 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ एक डैम टो पावर हाउस प्रस्तावित है। किशाऊ के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन सरकार के बीच बहुउद्देशीय विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर किये गये। हिमाचल प्रदेश और सरकार के. 20 जून, 2015 को यूके की। समझौता ज्ञापन के अनुसार, परियोजना को एक विशेष द्वारा कार्यान्वित किया जाना है पर्पज व्हीकल (एसपीवी) जो कंपनी अधिनियम 2013 के तहत हिमाचल और उत्तराखंड की समान हिस्सेदारी और स्टाफ भागीदारी वाली कंपनी होगी। इसलिए, किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KCL) को 16.01.2017 को शामिल किया गया था। इस परियोजना को सरकार द्वारा "राष्ट्रीय परियोजना" घोषित किया गया है। भारत का और द्वारा वित्त पोषित होने के लिए पात्र है सरकार. भारत/लाभार्थी राज्यों को परियोजना लागत के 90:10 की सीमा तक (बिजली घटक को छोड़कर)। की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अद्यतनीकरण का कार्य किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (660 मेगावाट) यूजेवीएनएल और एचपीपीसीएल दोनों द्वारा समानांतर रूप से प्रक्रियाधीन है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक 5.11.2018 को एमओडब्ल्यूआर के साथ, डीपीआर को एक वर्ष की अवधि के भीतर सभी मामलों में अद्यतन किया जाना है।
जिले में त्रिवेणी महादेव HEP (78 मेगावाट)। मंडीःजिले में काशांग चरण-IV (48 मेगावाट), चिरगांव मझगांव एचईपी (52 मेगावाट)। शिमला, जिस्पा बांध परियोजना (300 मेगावाट) जिले में। जिले में लाहौल स्पीति और बारा खंबा एचईपी (45 मेगावाट)। किन्नौर में जांच अलग-अलग चरणों में है। 350 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता वाली दो परियोजनाएं होंगी तीसरे चरण में लिया जाएगा और इन परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण और जांच कार्य किए जा रहे हैं। पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) के संबंध में जिले में लुजई एचईपी (45 मेगावाट)। चंबा, जिला में खाब एचईपी (305 मेगावाट) की प्रीफिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। किन्नौर को शीघ्र ही लिया जाएगा।
विद्युत विकास के अन्य क्षेत्र: एच.पी. पावर कॉर्पोरेशन हाइड्रो पावर डेवलपमेंट के अलावा राज्य और भारतीय राष्ट्र के विकास के लिए बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे ऊर्जा के अन्य नवीकरणीय स्रोतों में अपनी बिजली विकास गतिविधियों में विविधता लाने का इरादा रखता है।
एचपीपीसीएल ने जिला बिलासपुर में श्री नैना देवी जी तीर्थस्थल के पास 5 मेगावाट का बेर्रा डोल सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया है। यह काम मेसर्स भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड को सौंपा गया था और अनुबंध समझौते पर 22.07.2017 को हस्ताक्षर किए गए थे। प्लांट को 07.12.2018 को एचपीएसईबीएल ग्रिड के साथ सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज़ किया गया है। एचपीपीसीएल जिले के अघलोर में 10 मेगावाट क्षमता का एक और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का इरादा रखता है। ऊना. योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है:-
हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) सरकार का एक उपक्रम है। हिमाचल प्रदेश में ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश में और आगामी उत्पादन संयंत्रों से बिजली की निकासी की सुविधा के लिए। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा निगम को सौंपे गए कार्य अन्य बातों के साथ-साथ सभी नए कार्यों का निष्पादन शामिल है; 66 केवी और उससे अधिक वोल्टेज रेटिंग, फॉर्मूलेशन, अपग्रेडेशन, निष्पादन की दोनों ट्रांसमिशन लाइनें और सब-स्टेशन ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और बिजली की निकासी के लिए हिमाचल प्रदेश के ट्रांसमिशन मास्टर प्लान का।
एचपीपीटीसीएल एक राज्य के कार्यों का निर्वहन कर रहा है ट्रांसमिशन यूटिलिटी (एसटीयू) और केंद्रीय ट्रांसमिशन यूटिलिटी, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय के साथ ट्रांसमिशन संबंधी मुद्दों का समन्वय करना (भारत सरकार), हिमाचल प्रदेश सरकार और एचपीएसईबी लिमिटेड। इसके अलावा, निगम आईपीपी, सीपीएसयू, राज्य पीएसयू के साथ ट्रांसमिशन से संबंधित मुद्दों की योजना और समन्वय के लिए भी जिम्मेदार है। एचपीपीसीएल और अन्य राज्य/केंद्र सरकार एजेंसियां। विश्वसनीयता के सिद्धांतों को सुनिश्चित करने के लिए निगम इस तरह से ट्रांसमिशन सिस्टम की योजना बना रहा है, सुरक्षा, पर्यावरण-अनुकूल और अर्थव्यवस्था, प्रभावित और प्रभावित दोनों तरह के लोगों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित, स्वस्थ वातावरण की बढ़ती और वांछनीय अपेक्षा से मेल खाती है। अपनी गतिविधियों से लाभान्वित होना निगम के उद्देश्यों में से एक है।
भारत सरकार ने कार्यान्वयन के लिए 350 मिलियन डॉलर के एडीबी ऋण को मंजूरी दे दी है। हिमाचल प्रदेश में पावर सिस्टम मास्टर प्लान (पीएसएमपी) में शामिल ट्रांसमिशन परियोजनाओं की संख्या और कार्यान्वयन के लिए किश्त-I के लिए ऋण समझौता जिला किन्नौर (सतलुज बेसिन) और शिमला (पब्बर बेसिन) में 113 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किए गए हैं और उन्हें प्रभावी बनाया गया है। जनवरी, 2012 से। निम्नलिखित ट्रांसमिशन परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं:-
i) जिला किन्नौर के वांगटू में 400/220/66 केवी, 2x315 एमवीए सबस्टेशन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `310.00 करोड़ है और इसे मार्च, 2019 में चालू किया जाएगा।
ii) जिला किन्नौर के भोइकटू में 220/66/22 केवी, 2x315 एमवीए सबस्टेशन। दिसंबर, 2016 में शुरू की गई परियोजना के लिए आवंटित राशि `27.00 करोड़ है।
iii) 220 केवी, जिला शिमला में हाटकोटी से प्रगति नगर तक ट्रांसमिशन लाइन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `62.00 करोड़ है और इसे चालू कर दिया जाएगा मार्च, 2019.
iv) पंडोह में 33/132 केवी 31.5 एमवीए जीआईएस सबस्टेशन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `37.00 करोड़ है। इसे मार्च, 2019 में चालू किया जाएगा।
v) चंबी (शाहपुर) में 33/132 केवी 2x25/31.5 एमवीए जीआईएस सब-स्टेशन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `45.00 करोड़ है। इसे जून, 2019 में चालू किया जाएगा।
निम्नलिखित ट्रांसमिशन परियोजनाओं को घरेलू उधार के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है।
i) जिला कुल्लू के फोजल में 33/220 केवी, 2x315 एमवीए सबस्टेशन अक्टूबर, 2015 में चालू किया गया है।
ii) चंबा जिले के करियन में 33/220 केवी, 63 एमवीए सब-स्टेशन 2015 में चालू किया गया है और लाइन का काम शुरू किया गया है।
सितंबर, 2014 में एडीबी ऋण की 110 मिलियन डॉलर की किश्त-II पर हस्ताक्षर किए गए थे, अब यह घटकर 95 मिलियन डॉलर हो गई है। निम्नलिखित नौ परियोजनाएँ प्रदान की गई हैं:-
i) 66 केवी जीआईएस स्विचिंग सब-स्टेशन उरनी। परियोजना के लिए आवंटित राशि `28.00 करोड़ है और इसे मार्च, 2019 में चालू किया जाएगा।
ii) 400/220/33 केवी जीआईएस सब-स्टेशन लाहल। परियोजना के लिए आवंटित राशि `233.00 करोड़ है और इसे जून, 2019 में चालू किया जाएगा।
iii) चरोर से बनाला तक 220 केवी लाइन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `47.00 करोड़ है और इसे जून, 2019 में चालू किया जाएगा।
iv) लाहौल से बुधिल तक 220 केवी डी/सी लाइन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `5.00 करोड़ है और इसे मार्च, 2019 में चालू किया जाएगा।
v) उरनी से वांगटू सब-स्टेशन तक 66 केवी डी/सी लाइन। परियोजना के लिए प्रदान की गई राशि है `14.00 करोड़ और अगस्त, 2019 में चालू किया जाएगा।
vi) सुंडा से हाटकोटी तक 220 केवी डी/सी लाइन। परियोजना के लिए आवंटित राशि `56.00 करोड़ है और मार्च, 2020 में चालू किया जाएगा।
vii) चरोर में 220/132 केवी, 100 एमवीए जीआईएस सब स्टेशन। पुरस्कार की राशि `68.36 करोड़ है। दिसंबर, 2019 में काम पूरा हो जाएगा।
viii) सुंडा में 220/132 केवी, 2X100 एमवीए जीआईएस सब स्टेशन। पुरस्कार की राशि `63.30 करोड़ है। दिसंबर, 2019 में काम पूरा हो जाएगा।
ADB ऋण की $105 मिलियन की किश्त-III पर नवंबर 2018 में हस्ताक्षर किए गए हैं। इसमें निम्नलिखित 9 नंबर हैं। का कार्य निष्पादित किया जा रहा है इस किश्त के तहत, जिसमें से सात नग। परियोजनाओं का आवंटन किया जा चुका है और शेष दो परियोजनाएं बोली प्रक्रिया के अधीन हैं:
i) 33/132 केवी, 2 x31.5 एमवीए जीआईएस सबस्टेशन, जिला कुल्लू के बरसैनी में पूलिंग स्टेशन। पुरस्कार राशि `49.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और जून, 2020 में पूरा हो जाएगा।
ii) जिला शिमला के हाटकोटी में 220 केवी जीआईएस स्विचिंग स्टेशन। पुरस्कार राशि `46.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और दिसंबर, 2019 में पूरा हो जाएगा।
iii) जिला चंबा में 132/220 केवी पूलिंग स्टेशन माजरा। यह फरवरी, 2021 में पूरा हो जाएगा।
iv) जिला कुल्लू के निरमंड (भागीपुल) में 66/22 केवी जीआईएस सब-स्टेशन फरवरी, 2021 में पूरा हो जाएगा।
v) बाजोली होली एचईपी से लाहल तक 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन (ट्विन मूस कंडक्टर पर डीसी लाइन)। पुरस्कार राशि `58.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और जून, 2019 में पूरा हो जाएगा।
vi) जिला चंबा में पीजीसीआईएल के लाहल से चमेरा (राजेरा) पूलिंग स्टेशन तक 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन। पुरस्कार राशि `115.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और मई, 2020 में पूरा हो जाएगा।
vii) जिला चंबा में माजरा से करैन तक 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन। पुरस्कार राशि `37.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और जनवरी, 2021 में पूरा हो जाएगा।
viii) जिला कुल्लू में बरसैनी से चारोर तक 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन। पुरस्कार राशि `43.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और जून, 2020 में पूरा हो जाएगा।
ix) जिला कुल्लू में निरमंड से कोटला तक 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन। पुरस्कार राशि `23.00 करोड़ है। कार्य प्रगति पर है और यह जनवरी, 2021 में पूरा हो जाएगा।
उपरोक्त के अलावा, KfW द्वारा वित्त पोषित 57 मिलियन यूरो की राशि वाले ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-I (GEC-I) पर अक्टूबर में हस्ताक्षर किए गए हैं। , 2015. परियोजनाओं के निम्नलिखित 13 पैकेज हैं, कार्यों के कार्यान्वयन के लिए 14 पैकेजों में विभाजित किया गया है, जिनमें से 7 परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं और 7 परियोजनाएं बोली प्रक्रिया में हैं।
i) 132/220 केवी सुंडा सब-स्टेशन के यार्ड में 66/220 केवी, 80/100 एमवीए सब-स्टेशन का निर्माण। यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
ii) तांगनु रोमाई एचईपी के यार्ड में 22/132 केवी, 2x31.5 एमवीए सब-स्टेशन का निर्माण। यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
iii) तांगनु रोमाई एचईपी में 22/132 केवी सब-स्टेशन से 132/220 केवी तक 132 केवी, डी/सी लाइन का निर्माण सुंडा में सब-स्टेशन। पुरस्कार की राशि `16.91 करोड़ है। यह फरवरी, 2019 में पूरा हो जाएगा।
iv) जिला कांगड़ा में देहान में 132/220 केवी, 2x100 एमवीए जीआईएस सब-स्टेशन का निर्माण। पुरस्कार राशि `75.72 करोड़ है और यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
v) देहान सब-स्टेशन से हमीरपुर में पीजीसीआईएल के 400/220 केवी सब-स्टेशन तक 220 केवी, डी/सी ट्रांसमिशन लाइन (55 किलोमीटर)। पुरस्कार राशि `110.68 करोड़ है और यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
vi) रूपिन एचईपी के यार्ड में 33/132 केवी, 31.5 एमवीए सब-स्टेशन का निर्माण। यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
vii) 33/132 केवी के बीच 132 केवी डी/सी लाइन का निर्माण, रूपिन एचईपी में सब-स्टेशन और सुंडा में 132/220 केवी सबस्टेशन। यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
viii) 220 केवी बाजोली होली-लाहल डी/सी/ लाइन के लिलो द्वारा हेल्पिंग पर 66/220 केवी, 100 एमवीए सब-स्टेशन। यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
ix) अतिरिक्त 33/220 केवी प्रदान करना, 132/220 केवी पर 100 एमवीए ट्रांसफार्मर, जिले में चारोर (एडीबी वित्त पोषित) में 100 एमवीए जीआईएस उप-स्टेशन। कुल्लू. यह मार्च, 2020 में पूरा हो जाएगा।
x) जिले के पंडोह में 33/132 केवी, 31.5 एमवीए जीआईएस सब-स्टेशन पर अतिरिक्त 33/132 केवी, 31.5 एमवीए ट्रांसफार्मर प्रदान करना। मंडी. पुरस्कार की राशि `20.50 करोड़ है। यह सितंबर, 2019 में पूरा हो जाएगा।
xi) जिले में गुम्मा (एडीबी, वित्त पोषित) में 400/220 केवी सब-स्टेशन में अतिरिक्त 400/220 केवी, 1x315 एमवीए ट्रांसफार्मर प्रदान करना। शिमला. पुरस्कार राशि `43.01 करोड़ है। यह मार्च, 2019 में पूरा हो जाएगा।
xii) जिला कुल्लू के पलचान में 33 केवी जीआईएस स्विचिंग स्टेशन का निर्माण। यह फरवरी, 2020 में पूरा हो जाएगा।
xiii) जिला कुल्लू में 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन पलचान-प्रीणी का निर्माण। पुरस्कार की राशि `8.13 करोड़ है। यह जून, 2019 में पूरा हो जाएगा।
xiv) 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन स्नेल-हाटकोटी का निर्माण। पुरस्कार राशि `18.00 करोड़ है। यह मार्च, 2019 में पूरा हो जाएगा।
हिमऊर्जा ने मंत्रालय की वित्तीय सहायता से पूरे राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को लोकप्रिय बनाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (एमएनआरई), भारत सरकार एवं राज्य सरकार। को बढ़ावा देने एवं उपलब्ध कराने हेतु प्रयास जारी है नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण जैसे सौर सौर फोटोवोल्टिक अनुप्रयोग, सौर कुकर, सौर जल तापन प्रणाली आदि। हिमऊर्जा भी सहायता कर रहा है राज्य में लघु जलविद्युत (5 मेगावाट तक) के दोहन के लिए सरकार। वर्ष 2018-19 (दिसम्बर, 2018 तक) के दौरान हिमऊर्जा की उपलब्धियाँ, मार्च, 2019 तक अनुमानित और 2019-20 के लिए निर्धारित लक्ष्य इस प्रकार हैं:
a) सौर तापीय कार्यक्रम:
i) सोलर कुकर: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दिसंबर तक 27 बॉक्स प्रकार और 14 डिश प्रकार के सोलर कुकर उपलब्ध कराए गए हैं। 2018. मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धि लगभग 50 बॉक्स प्रकार और 50 डिश प्रकार के सौर कुकर होंगे। वर्ष के लिए 500 बॉक्स प्रकार और 500 डिश प्रकार के सौर कुकर का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है एमएनआरई, भारत सरकार कार्यक्रम के तहत 2019-20।
ii) सीएसटी सोलर स्टीम कुकिंग सिस्टम: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दिसंबर, 2018 तक दो स्थानों पर सोलर स्टीम कुकिंग सिस्टम की स्थापना की जा रही है। प्रगति।मार्च, 2019 तक अपेक्षित उपलब्धियाँ 150 वर्ग मीटर होंगी। 150 वर्ग मीटर का सीएसटी सोलर स्टीम कुकिंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य। एमएनआरई, भारत सरकार कार्यक्रम के तहत वर्ष 201920 के लिए मीटर कलेक्टर क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है।
iii) सौर जल तापन प्रणाली: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान, 5000 लीटर की सौर जल तापन प्रणाली। प्रतिदिन की क्षमता स्थापित की गई है दिसंबर, 2018 तक, मार्च 2019 तक अनुमानित उपलब्धि लगभग 10,000 लीटर होगी। प्रति दिन। प्रतिदिन 2,40,000 लीटर सौर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य वर्ष 2019-20 के लिए जल तापन प्रणाली स्थापना प्रस्तावित की गई है।
b) सौर फोटोवोल्टिक कार्यक्रम (एसपीवी):
i) एसपीवी स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान सामुदायिक उपयोग के लिए 6,023 एसपीवी स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। भारत सरकार के एमएनआरई और अन्य कार्यक्रमों के तहत दिसंबर, 2018 तक। मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धियाँ लगभग 10,000 होंगी। वर्ष 2019-20 के लिए 10,000 एसपीवी स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
ii) एसपीवी डोमेस्टिक लाइट: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दिसंबर, 2018 तक 297 एसपीवी डोमेस्टिक लाइटें प्रदान की गई हैं और अपेक्षित हैं मार्च, 2019 तक उपलब्धि लगभग 1000 होगी। वर्ष 2019-20 के लिए 1,000 एसपीवी घरेलू लाइटों का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
iii) एसपीवी लालटेन: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दिसंबर, 2018 तक 5,116 एसपीवी सौर लालटेन पूरी कीमत पर उपलब्ध कराए गए हैं। और मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धि लगभग 5,500 होगी। वर्ष 2019-20 के लिए 5,000 एसपीवी लालटेन का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
iv) सौर ऊर्जा संयंत्र/परियोजनाएं:
1) ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 203 किलोवाट के एसपीवी बिजली संयंत्र लगाए गए हैं। दिसंबर, 2018 तक चालू किया गया। मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धि लगभग 1,000 किलोवाट होगी। वर्ष 2019-20 के लिए 3,000 किलोवाट क्षमता के एसपीवी पावर प्लांट का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
2) ग्रिड-कनेक्टेड सोलर रूफ टॉप पावर प्लांट: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दिसंबर, 2018 तक 943.83 किलोवाट के एसपीवी पावर प्लांट चालू किए गए हैं। मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धि लगभग 10,000 किलोवाटपी होगी। वर्ष 2019-20 के लिए 10,000 किलोवाट एसपीवी पावर प्लांट का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
3) ग्राउंड माउंटेड ग्रिडकनेक्टेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 13.00 मेगावाट क्षमता की ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं चालू की गई हैं। दिसंबर, 2018 तक। मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धियाँ लगभग 13.00 मेगावाट होंगी। 15 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा का लक्ष्य वर्ष 2019-20 के लिए परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
c) 5 मेगावाट क्षमता तक की छोटी जल विद्युत परियोजनाएं निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही हैं: चालू वित्तीय वर्ष के दौरान वर्ष, 2 परियोजनाएँ दिसंबर, 2018 तक 5.50 मेगावाट की कुल क्षमता चालू की गई है, मार्च, 2019 तक अनुमानित उपलब्धि लगभग 20.00 मेगावाट होगी। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 30.00 मेगावाट क्षमता वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। 5 मेगावाट क्षमता तक आवंटित परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति (दिसंबर, 2018 तक) इस प्रकार है।

d) हिमऊर्जा MHEPs द्वारा क्रियान्वित की जा रही जलविद्युत परियोजनाएं: हिमऊर्जा लिंगती (400KW) में माइक्रो हाइडल परियोजनाओं का संचालन कर रहा है ), कोठी (200 किलोवाट), जुथेड (100 किलोवाट), पुर्थी (100 किलोवाट), सुराल (100 किलोवाट), घरोला (100 किलोवाट), साच (900 किलोवाट) और बिलिंग (400 किलोवाट) जो उत्पादन में हैं। चालू वर्ष में 22.68 लाख यूनिट बिजली इन परियोजनाओं से अक्टूबर, 2018 तक उत्पादन किया गया है। सरकार के निर्णय के अनुसार, माइक्रो हाइडल परियोजनाएं, अर्थात् लिंगती (400 किलोवाट), पुर्थी (100 किलोवाट), सुराल (100 किलोवाट), घरोला, साच (900 किलोवाट) और बिलिंग (400 किलोवाट) को स्थानांतरित कर संचालन के लिए एचपीएसईबीएल को सौंप दिया गया है। अन्य परियोजनाएँ, अर्थात् बड़ा भंगाल (40 किलोवाट) और सराहन (30 किलोवाट) को भी हिमऊर्जा द्वारा क्रियान्वित किया गया है।
बड़ा भंगाल परियोजना से, स्थानीय जनता को ऊर्जा प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार ने आवंटित कर दिया है हिमऊर्जा के लिए कुल 36.87 मेगावाट क्षमता वाली 18 परियोजनाएं। इनमें से 2.37 मेगावाट क्षमता वाली 10 परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं। हिमऊर्जा द्वारा सरकार की मंजूरी से बीओटी आधार पर 14.50 मेगावाट क्षमता की 3 एचईपी आवंटित की गई हैं। एक परियोजना पर निर्माण गतिविधियाँ हैं प्रगति पर है और अन्य दो परियोजनाओं के लिए, इन परियोजनाओं के लिए विभिन्न मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। 20.00 मेगावाट की शेष 5 एचईपी के लिए बीओटी आधार पर परियोजनाओं के आवंटन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राज्य में लघु जलविद्युत कार्यक्रमों के कार्यान्वयन सहित नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए बजटीय वार्षिक योजना परिव्यय के आधार पर वार्षिक योजना/गैर योजना के तहत 2018-19 के दौरान व्यय आईआरईपी और एनआरएसई योजनाओं के तहत लगभग `3.10 करोड़ होगा। 2019-20 के लिए योजना/गैर योजना `11.00 करोड़ का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है।

14.परिवहन एवम् संचार

सड़कें अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे का एक अनिवार्य घटक हैं। रेलवे और जलमार्ग जैसे परिवहन के किसी अन्य उपयुक्त और व्यवहार्य साधनों के अभाव में, सड़कें हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लगभग शून्य से शुरुआत करते हुए राज्य सरकार ने 37,913 किलोमीटर का निर्माण किया है। दिसंबर, 2018 तक मोटर योग्य सड़कों (जीप योग्य और ट्रैक सहित) की। राज्य सरकार सड़क क्षेत्र को बहुत उच्च प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2018-19 के लिए ₹ 955.14 करोड़ का परिव्यय है। वर्ष 2018-19 के लिए निर्धारित लक्ष्य एवं दिसम्बर, 2018 तक प्राप्त उपलब्धियाँ तालिका 14.1 में निम्नानुसार दी गई हैं:-

राज्य में 31.12.2018 तक नीचे दी गई तालिका 14.2 के अनुसार 10,308 गाँव सड़कों से जुड़े हुए थे:
राष्ट्रीय राजमार्ग (केंद्रीय क्षेत्र) 14.3 राज्य में कुल 2,017 किलोमीटर लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार की प्रक्रिया। जिसमें शहरी संपर्क और बाईपास शामिल हैं, वर्ष के दौरान भी जारी रहा। दिसंबर, 2018 के अंत तक `262.55 करोड़ का व्यय किया गया है।
दिसम्बर, 2018 तक प्रदेश में केवल दो छोटी लाईने शिमला-कालका ;96 किलोमीटरद्ध और जोगिन्द्रनगर- पठानकोट ;113 किलोमीटरद्ध तथा नंगल डैम-चरूडू़ ;33 किलोमीटरद्ध बड़ी लाईन है जोकि ऊना जिला में हैं।
पथ परिवहन राज्य में आर्थिक कार्यकलाप हेतु यातायात का एक मुख्य साधन है क्यांकि अन्य परिवहन सेवाएं जैसे रेलवे, वायु सेवा, टैक्सी, ऑटो रिक्शा इत्यादि नगण्य के बराबर है। इसलिए पथ परिवहन को प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हिमाचल पथ परिवहन निगम लोगों को राज्य में तथा राज्य के बाहर 3,078 बसें, 25 इलैक्टि््रक बसें, 21 टैक्सियां व 50 इलैक्टि््रक टैक्सियों द्वारा यात्री परिवहन सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है तथा प्रतिदिन 6.35 लाख किलोमीटर (लगभग) दूरी के साथ 2,869 रूटों (15.12.2018 तक) पर बस सेवाएं चलाई जा रही हैं।
लोगों के लाभ के लिए वर्ष के दौरान निम्नलिखित योजनाएँ चालू रहीं:-
i) ग्रीन कार्ड योजना: ग्रीन कार्ड धारक को किराए में 25 प्रतिशत की छूट दी जाती है, यदि यात्री द्वारा की गई यात्रा 50 किमी की है। इस कार्ड की कीमत `50 है और इसकी वैधता दो साल है।
ii) स्मार्ट कार्ड योजना: निगम ने स्मार्ट कार्ड योजना शुरू की है। इस कार्ड की कीमत `50 है और इसकी वैधता दो साल है। इस कार्ड में किराए में 10 प्रतिशत की छूट है और यह एचआरटीसी की साधारण, सुपर फास्ट, सेमी डीलक्स और डीलक्स बसों में भी मान्य है, वोल्वो और एसी बसों में भी छूट है। प्रत्येक वर्ष 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक अनुमति दी जानी है।
iii) सम्मान कार्ड योजना: निगम ने 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान कार्ड योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, साधारण बसों में किराये में 30 प्रतिशत की छूट अनुमन्य है।
iv) महिलाओं को मुफ्त सुविधा: महिलाओं को "रक्षा बंधन" के अवसर पर एचआरटीसी की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है। और "भैया दूज"। मुस्लिम महिलाओं को "ईद" और "बेकर ईद" के अवसर पर मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है।
v) महिलाओं को किराए में छूट: निगम ने महिलाओं को राज्य के भीतर साधारण बसों में किराए में 25 प्रतिशत की छूट भी दी है।
vi) सरकारी स्कूलों के छात्रों को मुफ्त सुविधा: सरकारी स्कूलों के +2 कक्षा तक के छात्रों को एचआरटीसी की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है।
vii) गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को निःशुल्क सुविधा: कैंसर, रीढ़ की हड्डी में चोट, किडनी और डायलिसिस रोगियों के साथ-साथ निःशुल्क यात्रा सुविधा राज्य के भीतर और बाहर डॉक्टर द्वारा जारी रेफरल पर्ची पर चिकित्सा उपचार के उद्देश्य से एचआरटीसी बसों में एक परिचारक।
viii) विशेष योग्यजन व्यक्तियों को निःशुल्क सुविधा: निगम दिव्यांगता वाले विशेष योग्यजन व्यक्तियों को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान कर रहा है। राज्य के भीतर एक परिचारक के साथ 70 प्रतिशत या अधिक।
ix) वीरता पुरस्कार विजेताओं को निःशुल्क सुविधा: वीरता पुरस्कार विजेताओं को निःशुल्क सुविधा प्रदान की गई है राज्य में डीलक्स बसों के अलावा एचआरटीसी की साधारण बसों में यात्रा सुविधा।
x) लक्जरी बसें: निगम अंतरराज्यीय सड़कों पर वेट-लीजिंग योजना के तहत 51 स्वामित्व वाली और 39 बसें सुपर लक्जरी (वोल्वो / स्कैनिया) और 24 लक्जरी एसी बसें चला रहा है। जनता को बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करें।
xi) 24X7 हेल्पलाइन: यात्रियों की शिकायतें दर्ज करने और उनका समाधान करने के लिए 24x7 HRTC/निजी बस यात्री हेल्पलाइन नंबर 94180-00529 और 0177-2657326 शुरू की गई है।
xii) सीलबंद सड़कों पर टैक्सियां: निगम द्वारा शिमला शहर में सीलबंद/प्रतिबंधित सड़कों पर जनता के लिए टैक्सी सेवाएं भी शुरू की गई हैं।
xiii) प्रमुख पर्यटक इलाकों के लिए टेम्पो ट्रैवलर: निगम ने राज्य के प्रमुख पर्यटक इलाकों के लिए वेट-लीजिंग योजना के तहत 11 टेम्पो ट्रैवलर की शुरुआत की। पर्यटकों/आम जनता को आरामदायक यात्रा प्रदान करने का आदेश। हिमाचल प्रदेश में रेल, हवाई और जल परिवहन सेवाओं की न्यूनतम उपस्थिति है, इसलिए, राज्य लगभग पूरी तरह से सड़क परिवहन पर निर्भर है। इस विभाग की भूमिका विभिन्न नियमों/अधिनियमों और विशेष रूप से केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम को लागू करना है। नवंबर, 2018 तक राज्य में कुल संख्या 15,64,738 थी परिवहन एवं गैर परिवहन वाहनों का पंजीयन किया जा चुका है। वर्ष 2018-19 के दौरान अक्टूबर, 2018 तक विभाग ने विभिन्न अपराधों के लिए 25,009 वाहनों को चुनौती दी है और `3.82 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।
वर्ष 2018-19 के दौरान विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:
1) आईटी: हस्तक्षेप परिवहन विभाग ने वेब-आधारित सॉफ्टवेयर लागू किया है। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सारथी और वाहन पंजीकरण के लिए वाहन, सभी पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्राधिकरण में कर संग्रह और परमिट जारी करना जिसमें आवेदक ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं संबंधित सेवाएं। इन सभी सेवाओं में आवेदक शुल्क/टैक्स साइबर ट्रेजरी के माध्यम से ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। परिवहन विभाग ने राज्य में व्यक्तिगत वाहनों के लिए डीलर पॉइंट पंजीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया अधिसूचित की है डीलर की ओर से वाहनों का पंजीकरण, जिसमें डीलर की ओर से सभी शुल्क/कर साइबर ट्रेजरी में जमा किए जा रहे हैं और पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं डीलरों द्वारा वाहन मालिक को भेजा जा रहा है। सिस्टम में वाहन मालिक को वाहनों के पंजीकरण के लिए RTO/R&LA कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं है सिस्टम को पायलट तौर पर शिमला यानी तपन इंडस्ट्रीज और आगे गोयल मोटर्स शिमला में शुरू किया गया है, जिसे आरटीओ, शिमला, आर एंड एलए, शिमला (शहरी) और आर एंड एलए, शिमला (ग्रामीण) में मैप किया गया है।
2) निरीक्षण और प्रमाणन केंद्र: राज्य में वाहनों के निरीक्षण और प्रमाणन में सुधार के लिए, MoRTH ने प्रस्ताव दिया है सोलन जिले के बद्दी में `16.50 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक आई एवं सी केंद्र को मंजूरी। निधि सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी. भारत को छोड़कर भूमि उपलब्ध कराने हेतु. 63.03 बीघे भूमि चिन्हित/परिवहन विभाग के नाम हस्तांतरित कर दी गई है। विस्तृत अनुमान के अनुसार MoRTH की गाइडलाइन मंत्रालय को भेज दी गई है. राज्य सरकार अतिरिक्त व्यय सुनिश्चित करने के लिए खाते में `3.65 करोड़ की गारंटी भी जमा की है निरीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र की स्थापना के लिए यदि कोई खर्च किया जाएगा।
3) ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण: वर्तमान में अधिकांश मोटर मैकेनिकल वर्कशॉप जो बड़ी संख्या में वाहनों की सेवा प्रदान करती हैं, सड़क किनारे काम कर रही हैं जो न केवल सड़क पर भीड़भाड़ पैदा कर रहे हैं बल्कि सार्वजनिक उपद्रव और दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। राज्य में यातायात जाम की समस्या से निपटने के लिए... विभाग ने कार्यशालाओं को सड़कों से दूर स्थानों पर स्थानांतरित करने और निर्माण करने के लिए राज्य में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर 08 ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की योजना बनाई है। नव निर्मित ट्रांसपोर्ट नगरों की साइट पर पार्किंग स्थल, बैठने की जगह, खाने की जगह, शौचालय, मनोरंजन केंद्र और अन्य सुविधाएं जैसी कई सुविधाएं राज्य के सभी जिलों में. इस प्रयोजन के लिए बद्दी, जिला में परिवहन विभाग के नाम पर भूमि का हस्तांतरण। सोलन तथा मोहाल रामपुर, जिला ऊना किया गया है। इसके अलावा नादौन, जिला हमीरपुर, डमटाल, जिला कांगड़ा और उदयपुर जिला चंबा में भी भूमि चिन्हित की गई है। परिवहन विभाग ने इसका बीड़ा उठाया है अपने अधिकार क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगरों के लिए भूमि की पहचान करने के लिए उपायुक्तों से बात करें। एच.पी. सरकार. के पक्ष में `12.00 करोड़ की राशि प्रदान की है विभाग बुनियादी ढांचे का विकास करेगा.
4) जल परिवहन: चमेरा, कोल्डम और गोविंद में यात्रियों, कार्गो और पर्यटकों, जल क्रीड़ाओं और शिकारों जैसी जल परिवहन गतिविधियाँ विकसित की जाएंगी। कार्गो और यात्री परिवहन दोनों के लिए सागर झील। इन क्षेत्रों में परियोजना अध्ययन के लिए आई मैरी टाइम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है। कंसल्टेंट ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी है. एचपी और एमओआरटीएच का। डीपीआर के अनुसार उपरोक्त बांधों पर घाटों के विकास हेतु सिविल कार्य हेतु `26.01 करोड़ की राशि की मांग की गई है।
5) ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल और प्रदूषण जांच केंद्र: वर्तमान में 10 सरकारी, 12 एचआरटीसी और 240 निजी ड्राइविंग राज्य में प्रशिक्षण विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जहां तक प्रदूषण जांच केंद्रों की बात है तो सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत 5 और निजी क्षेत्र के अंतर्गत 92 केंद्र विभिन्न स्थानों पर कार्यरत हैं राज्य में।
6) स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए दिशानिर्देश: राज्य सरकार स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। हाल ही में राज्य सरकार ने दिनांक 10.10.2018 की अधिसूचना के माध्यम से स्कूल बसों के लिए अधिसूचना/दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस अधिसूचना में निहित निर्देश को परिचालित कर दिया गया है सभी आरटीओ को सख्त कार्यान्वयन के लिए।
7) विशेष श्रेणी के व्यक्तियों के लिए सीटों का आरक्षण: सभी प्रकार की स्टेज कैरिज बसों में 40% सीटें विशेष श्रेणी के व्यक्तियों के लिए आरक्षित घोषित की गई हैं। यानी कैंसर रोगी, गर्भवती महिलाएं, शारीरिक रूप से विकलांग और वरिष्ठ नागरिक। यह सुविधा अपने आरंभिक बिंदु से 50 किलोमीटर के दायरे में चलने वाली बसों में स्वीकार्य है।
8) रोजगार सृजन: परिवहन विभाग ने वर्ष 2018-19 के लिए 24,000 लोगों को रोजगार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से 17,368 को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। लोगों को सितंबर, 2018 तक प्रदान किया गया है।
9) नए आधुनिक कार्यालय परिसर का निर्माण: क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय धर्मशाला, शिमला और मंडी का निर्माण/नवीनीकरण आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया है। जैसे रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, प्रतीक्षा क्षेत्र और आम जनता के लिए सभी सुविधाएं।
10) नए मार्गों की शुरूआत: एचआरटीसी ने 22,291 किमी/किलोमीटर जोड़कर 132 नए मार्ग शुरू किए हैं। वर्ष 2019-20 के दौरान इसके संचालन में दिन।
11) फेम इंडिया योजना का कार्यान्वयन: सरकार द्वारा 50 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई थी। शिमला शहर के लिए फेम-इंडिया योजना के तहत 27.07.2018 को भारत सरकार। पुरस्कार पत्र 30 बसों की खरीद के लिए 12.10.2018 को अधिसूचना जारी की गई थी और इन बसों को मार्च, 2019 तक चालू कर दिया जाएगा। स्मार्ट सिटी धर्मशाला के लिए 35 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी और एचआरटीसी द्वारा संचालित किया जाएगा। प्रदूषण मुक्त परिवहन के लिए मनाली-रोहतांग मार्ग पर तैनात इलेक्ट्रिक बसों को आगे मनाली-मंडी मार्ग पर तैनात किया गया।
12) नए बस अड्डों का निर्माण: भंजरारू, थुनाग, चैल चौक, मणिकर्ण, शाहपुर, जसूर, नालागढ़, परवाणू, हमीरपुर में नए बस अड्डों का निर्माण प्रस्तावित है। मनाली और बद्दी और सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर 2 बस अड्डों का निर्माण।
13) रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन: राज्य सरकार। ने परिवहन विभाग के नियंत्रण में एक नया रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन विकसित किया है जिसे वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु आवंटित किये जाने हेतु बजट प्रावधान प्रस्तावित है। रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन निम्नलिखित परियोजनाओं पर काम करेगा:-
(i) पैसेंजर रोपवे गांव जाणा कुल्लू, जिला कुल्लू।
(ii) हिमाचल प्रदेश में शहरों में भीड़ कम करने के लिए मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (एम.आर.टी.एस.) i:ई शिमला, मनाली और धर्मशाला।
14) इलेक्ट्रिक वाहन नीति: हिमाचल प्रदेश सरकार। हिमाचल प्रदेश को सभी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है (व्यक्तिगत, साझा और वाणिज्यिक) और टिकाऊ, सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल, समावेशी और एकीकृत गतिशीलता प्रदान करना। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाई जा रही है तैयार किया गया जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन उपभोक्ताओं, निर्माताओं के साथ-साथ चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना है। शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना है मिशन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य में 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना।

15.पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन

पर्यटन क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश को सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक माना गया है अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में महसूस किया जा रहा है राज्य सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 6.6 प्रतिशत है जो काफी महत्वपूर्ण है। राज्य सभी बुनियादी सुविधाओं से संपन्न है भौगोलिक और सांस्कृतिक जैसी पर्यटन गतिविधि को बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन विविधता, स्वच्छ और शांतिपूर्ण वातावरण और सुंदर जलधाराएँ, पवित्र तीर्थस्थल, ऐतिहासिक स्मारक और मैत्रीपूर्ण एवं मेहमाननवाज़ लोग।
पर्यटन उद्योग हिमाचल प्रदेश को बहुत कुछ दिया गया है उच्च प्राथमिकता और सरकार है के लिए उपयुक्त बुनियादी ढाँचा विकसित किया इसका विकास जिसमें जनता भी शामिल है उपयोगिता सेवाएँ, सड़कें, संचार नेटवर्क, हवाई अड्डे, परिवहन सुविधाएं, जल आपूर्ति और नागरिक सुविधाएं आदि। वर्तमान में लगभग 3,066 होटल हैं बिस्तरों की क्षमता लगभग 85,823 है विभाग में पंजीकृत है। में इसके अलावा, लगभग 1,340 होम हैं राज्य में पंजीकृत इकाइयां रहें लगभग 7,702 बिस्तर।
को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पर्यटन, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने मंजूरी दे दी है 95.16 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए राज्य में पर्यटन अवसंरचना. किश्त-I के अंतर्गत वित्तीय सहायता 33.00 मिलियन अमेरिकी डॉलर स्वीकृत किये गये हैं और की पूर्णता अवधि परियोजनाएं सितंबर, 2018 समुदाय हैं ट्रेंच-1 के अंतर्गत पर्यटन आधारित था 4 के 5 समूहों में लागू किया गया जिला यानी शिमला, कांगड़ा, बिलासपुर और प्रदेश के ऊना में विभिन्न प्रकार के कुशल एवं आजीविका आधारित प्रशिक्षण प्रदान किए गए और कुल 5,445 प्रतिभागी (महिला 2,984 और पुरुष 2,461) को प्रशिक्षित किया गया।
कुल किश्त-3 के अंतर्गत 62.16 मिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्त पोषण किया गया है सितंबर, 2015 को मंजूरी दे दी गई किश्त-3 की पूर्णता अवधि जून है, 2020. इस किश्त के अंतर्गत कुल हैं सिविल कार्यों की 11 उप-परियोजनाएँ और सभी उप-परियोजनाएँ प्रदान की गई हैं। जिले में परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और शिमला। किश्त-3, 19 के अंतर्गत के लिए पंचायतों का चयन कर लिया गया है समुदाय आधारित कार्यान्वयन जिनमें से पर्यटन (सीबीटी) परियोजनाएं में प्रारंभिक प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है 5 जिले की 12 पंचायतें और कुल 2,177 प्रतिभागियों ने भाग लिया। स्वदेश के तहत भारत सरकार दर्शन योजना, पर्यटन मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है परियोजना का एकीकृत विकास हिमाचल प्रदेश में हिमालयन सर्किट स्वदेश के तहत `99.76 करोड़ का मूल्य दर्शन योजना और सबसे पहले जारी की गई `19.95 करोड़ की किस्त। इसके अंतर्गत परियोजना कुल 14 पर्यटन विकास के लिए परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं राज्य।
विभाग पर्यटन निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहा है में पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का विकास करें सार्वजनिक निजी के अधीन राज्य साझेदारी (पीपीपी)। रोपवे परियोजना भुंतर से बिजली महादेव तक रहा है के बीच 23.02.2017 को हस्ताक्षर किये गये पर्यटन विभाग और उषा ब्रेको चामुंडा देवी रोपवे प्रा. लिमिटेड शर्त प्राथमिकता पूरी की जा रही है प्रमोटर द्वारा. उपरोक्त के अतिरिक्त, पर्यटन और नागरिक विभाग एविएशन ने निम्नलिखित पांच की पहचान की है निजी लोगों को समान पेशकश करने वाली साइटें दीर्घकालिक पट्टे के आधार पर क्षेत्र:-

का एक निरंतर विपणन पूरे राज्य में किया जा रहा है प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में वर्ष। में पर्यटन प्रसार को बढ़ावा देने का आदेश पर्यटक संबंधी जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है भूमिका। पर्यटन विभाग विभिन्न प्रकार के प्रचार-प्रसार तैयार करता है प्रचार सामग्री जैसे ब्रोशर/ पैम्फलेट, पोस्टर, ब्लो-अप आदि और विभिन्न पर्यटन मेलों में भाग लें और देश-विदेश में त्यौहार. विभाग और एचपीटीडीसी के साथ निजी होटल व्यवसायियों ने विभिन्न में भाग लिया अंदर और बाहर पर्यटन मेले और त्यौहार राज्य। उपरोक्त के अतिरिक्त विभाग सोशल पर भी फोकस कर रहा है पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मीडिया मंच।
विभाग के पास है विभिन्न सामान्य प्रशिक्षण आयोजित किये गये बेरोजगार युवाओं के लिए पाठ्यक्रम राज्य को पर्यटन पर बेसिक कोर्स पसंद है, होम स्टे एवं ढाबा हेतु प्रशिक्षण मालिक, खाद्य और पेय पदार्थ सेवाएँ और ट्रैकिंग गाइड कोर्स आदि में 2018-19 विभाग ने मंजूरी दे दी है 431 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव होगा का व्यय व्यय कर प्रशिक्षित किया गया वित्तीय वर्ष 2018-19 में ₹ 29.00 लाख। विभाग के पास है पर्यटन को संगठित और समर्थन करता है, संबंधित घटनाएँ और त्यौहार। विभाग ने भी तैयारी कर ली है प्रचारात्मक फिल्में और विज्ञापन जो राज्य में पर्यटन को बढ़ावा दे इसमें 20 मिनट, 10 अवधि की फिल्में शामिल हैं मिनट और 5 मिनट, तीन टेलीविजन 60 सेकंड और तीन के विज्ञापन 30 सेकंड के टेलीविजन विज्ञापन अवधि। जिस पर विभाग फोकस कर रहा है के प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर्यटन.
उच्च श्रेणी के पर्यटकों को आकर्षित करना राज्य में नियमित उड़ानें हो रही हैं तीन मौजूदा हवाई अड्डों से जगह यानी जुब्बड़हट्टी (शिमला), भुंतर (कुल्लू) और हिमाचल में गग्गल (कांगड़ा)। प्रदेश. सरकार इसका निर्माण कर रही है इनके विस्तार के लिए ईमानदार प्रयास हवाई पट्टियाँ। इस संदर्भ में, के लिए के विस्तार हेतु भूमि अधिग्रहण कांगड़ा हवाई अड्डा, `3.49 की राशि करोड़ की आवश्यकता है जबकि के लिए के लिए तटबंध का निर्माण शिमला हवाई अड्डे का विस्तार एक राशि `500.00 करोड़ की आवश्यकता है. राज्य सरकार ने मामला उठाया है भारत सरकार के साथ प्रदान करने के लिए इस उद्देश्य के लिए आवश्यक धनराशि. निर्माण हेतु प्रस्ताव में अंतर्राष्ट्रीय मानक हवाई अड्डे का मण्डी जिला विचाराधीन है राज्य सरकार. जमीन है इस उद्देश्य के लिए पहचान की गई है नागचला एवं सैद्धान्तिक अनुमोदन है प्राप्त किया जा रहा है. राज्य सरकार चालू 09.10.2018 की राशि जारी की है एयरपोर्ट अथॉरिटी को `99.47 लाख 110 बाधा दूर करने के लिए भारत (एएआई)। लिमटेशन सरफेस (ओएलएस) का सर्वेक्षण चयनित स्थल. में पर्यटन को बढ़ावा देना राज्य और आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए साथ ही स्थानीय लोग, राज्य सरकार ने हेलीटेक्सी भी शुरू की है सेवा जून, 2018 से प्रभावी होगी शिमला-चंडीगढ़-शिमला हवाई अड्डा चालू प्रत्येक सप्ताह का सोमवार एवं शुक्रवार। 385 पर्यटकों ने हेली टैक्सी सुविधा का लाभ उठाया है प्रथम में 04.06.2018 से 05.10.2018 तक चरण, यह सेवा उपलब्ध थी शिमला-चंडीगढ़-शिमला। में इसके अलावा, सरकार ने भी के लिए 25.10.2018 को मनालीरोहतांग-मनाली से जॉय राइड सेवा शुरू की। पर्यटकों की सुविधा. आरसीएस-उड़ान-II के तहत नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MOCA),भारत सरकार ने बताया कि मंत्रालय जुड़ रहा है राज्य के तीन हवाई अड्डों को प्रस्तावित हेलीपैड यानि एक-एक मंडी, कुल्लू, सोलन और तीन शिमला में ज़िला। डीपीआर आदि तैयार की जा रही है उन्नयन हेतु मेसर्स पवन हंस लिमिटेड द्वारा इन पर अपेक्षित बुनियादी ढांचे की कार्यात्मक बनाने के लिए हेलीपैड।
नई राहें नई मंजिलें: हिमाचल प्रदेश में है साहसिक कार्य की अपार संभावनाएं पर्यटन राज्य एडवेंचर का भी आयोजन करता है के लिए विभिन्न स्थानों में गतिविधियाँ यहां आने वाले पर्यटकों का मनोरंजन राज्य सरकार ने एक नई शुरुआत की है योजना "नई राहें नई मंजिलें" 2018 में `50.00 करोड़ के परिव्यय के साथ- 19 अज्ञात के विकास के लिए पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र एवं अधिक रोजगार पैदा करें बेरोजगार युवाओं के लिए अवसर राज्य की। इको-पर्यटन परियोजना जंजैहली जिला बीर-बिलिंग जिला कांगड़ा, चांसल में स्की गंतव्य जिला शिमला और लारजी परियोजना जिला किन्नौर में क्रियान्वित किया जा रहा है "नई राहें नई" का पहला चरण मंज़िलीन” योजना। की धनराशि को 21.72 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं उप निदेशक (पर्यटन) शिमला (`8.00) करोड़), कांगड़ा (`5.00 करोड़), मंडी (`5.00 करोड़) और परियोजना निदेशक, विभिन्न कार्यों के लिए एचपीएसईबीएल (`3.72 करोड़)। योजना के तहत क्रियान्वित किया जाना है।
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) अग्रणी है में पर्यटन अवसंरचना का विकास हिमाचल प्रदेश का गठन 1972 में हुआ पर्यटन का संपूर्ण पैकेज प्रदान करता है आवास सहित सेवाएँ, खानपान, परिवहन, कॉन्फ्रेंसिंग और खेल गतिविधियों की सबसे बड़ी श्रृंखला है राज्य के बेहतरीन होटल रेस्तरां में से 55 होटलों में 998 कमरे हैं 2,282 बिस्तर। एचपीटीडीसी भी 64 चलाता है रेस्तरां. एचपीटीडीसी एक वाणिज्यिक है संगठन और कार्य अलग-अलग हैं अन्य सरकार से विभाग/बोर्ड/ निगम और में लगी हुई है में पर्यटन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देना राज्य पर्यटकों को सुविधा प्रदान करेगा।
1) एचपीटीडीसी ने 5 कमरे और एक जोड़ा कन्वेंशन सेंटर/हॉल जिसमें ए 250-300 व्यक्तियों की क्षमता होटल हाटू, नारकंडा में चालू वर्ष।
2) नई लिफ्ट की क्षमता है मॉल शिमला में 26 व्यक्ति हाल ही में डाला गया है जिसका संचालन एचपीटीडीसी द्वारा किया गया है 111 पर्यटकों को और अधिक सुविधा हुई सुविधाजनक तरीके से.
3) एचपीटीडीसी भी प्रक्रिया में है रास्ते के किनारे आउटसोर्सिंग का जाठिया देवी, जिला में सुविधाएं शिमला घट्टा, जिला मण्डी के लिए जो सरकार की मंजूरी है. है प्रतीक्षित.
4) व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए साथ ही विपणन प्रदान करना हिमाचल पर्यटन को हाल ही में ए स्पेशल के साथ फूड फेस्टिवल हिमाचली व्यंजनों पर जोर पर आयोजित किया गया है अहमदाबाद जिसमें विभिन्न द्वारा व्यंजन तैयार किये गये एचपीटीडीसी के शेफ। एचपीटीडीसी ने आय अर्जित की `63.91 करोड़ तक नवंबर, 2018 जहां लक्ष्य निर्धारित किया गया है अगले वर्ष के लिए `125.00 करोड़ है।

16.शिक्षा

शिक्षा मानव क्षमता के विकास का प्रमुख साधन है। राज्य सभी को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सम्मिलित सरकार के प्रयासों ने प्रदेश को शैक्षिक साक्षरता में अग्रणी राज्यों में से एक बना दिया है। 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर 82.80 प्रतिशत है। राज्य में पुरुष/महिला साक्षरता दर 89.53 प्रतिशत के मुकाबले काफी भिन्न है पुरुषों के लिए साक्षरता दर प्रतिशत है जबकि महिलाओं के लिए यह 75.93 प्रतिशत है। इस अंतर को पाटने के लिए हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं।
प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की नीतियों का कार्यान्वयन प्रारंभिक शिक्षा एवं ब्लॉक उपनिदेशकों के माध्यम से किया जाता है क्रमशः जिला और ब्लॉक स्तर पर प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों के उद्देश्य:-
1) प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करना।
2) गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना।
3) प्रारंभिक शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना। वर्तमान में 31.12.2018 तक राज्य में 10,714 प्राथमिक विद्यालय और 2,102 मध्य विद्यालय कार्यरत हैं। कमी को दूर करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों के अलावा जरूरतमंद स्कूलों में शिक्षकों की नई नियुक्तियां करने का प्रयास किया जा रहा है। की पूर्ति का भी प्रयास किया गया है विशेष योग्यजन बच्चों की शैक्षिक आवश्यकता.
नामांकन बढ़ाने और स्कूल छोड़ने की दर को कम करने और इन स्कूलों में बच्चों की अवधारण दर को बढ़ाने के लिए विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की गईं और अन्य प्रोत्साहन अर्थात् गरीबी वजीफा छात्रवृत्ति, लड़कियों की उपस्थिति छात्रवृत्ति, सेना कर्मियों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, के लिए छात्रवृत्ति आईआरडीपी परिवारों से संबंधित छात्र, मिडिलमैट्रिक छात्रवृत्ति (मेधावी छात्रवृति योजना), अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति लाहौल-स्पीति पैटर्न छात्रवृत्ति। उपरोक्त के अलावा ओबीसी/आईआरडीपी/एससी/एसटी और कुछ मामलों में मुफ्त पाठ्य पुस्तकें और वर्दी भी प्रदान की जा रही है। गैर जनजातीय क्षेत्रों में सामान्य छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें प्रदान की जाती हैं। सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें एवं गणवेश उपलब्ध करायी जा रही है।
वर्ष 2018-19 के दौरान निम्नलिखित प्रोत्साहन प्रदान किये जा रहे हैं:-
i) मिडिल मेरिट/मेधावी चतरवर्ती योजना `800 प्रति वर्ष प्रति लड़का/लड़की। 1,450 विद्यार्थी लाभान्वित हुए तथा 11.60 लाख रुपये व्यय किये गये।
ii) आईआरडीपी परिवारों के बच्चों के लिए कक्षा 1 से 5वीं तक प्रति छात्र 150 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है और वर्ष 2018-19 के दौरान 50,385 छात्र लाभान्वित हुए और `75.58 लाख खर्च किए गए हैं। प्रति लड़के को 250 रुपये और लड़की को 500 रुपये प्रदान किये जाते हैं। इस योजना के तहत 41,078 विद्यार्थी लाभान्वित हुए तथा 1.60 करोड़ रुपये व्यय किये गये।
iii) बालिका उपस्थिति योजना के तहत 90 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति वाली छात्राओं को 10 महीने तक प्रति माह 2 रुपये का पुरस्कार दिया जा रहा है। कुल 39,098 विद्यार्थी लाभान्वित हुए तथा 7.82 लाख रुपये व्यय किये गये। निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें: हिमाचल प्रदेश द्वारा निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करायी जा रही हैं सरकार ने सभी आईआरडीपी/एससी/एसटी/ओबीसी/सामान्य छात्रों के लिए 2018-19 के दौरान `17.32 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।
अटल स्कूल वर्दी योजना: अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत कक्षा 1 से कक्षा तक के लिए दो सेट वर्दी प्रदान की जा रही है। 12वीं. वर्ष 2018-19 में लगभग 8,30,945 विद्यार्थी (कक्षा 1 से 12वीं तक) लाभान्वित हुए। वर्ष 2018-19 के दौरान `30.00 करोड़ का बजट प्रावधान है।
नि:शुल्क लेखन सामग्री: उन अनुसूचित जाति के छात्रों को नकद भुगतान प्रदान किया जा रहा है जो आईआरडीपी/बीपीएल परिवारों से हैं और जो पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ते हैं सरकारी स्कूलों में प्रतिवर्ष निम्नलिखित दरों के अनुसार।
i) प्रथम और द्वितीय श्रेणी `250
ii) तीसरी और चौथी कक्षा `300
iii) 5वीं कक्षा `350 वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान, 25,428 छात्र लाभान्वित हुए और `75.10 करोड़ का व्यय हुआ।
खेल गतिविधियां: वर्ष 2018-19 के लिए `335.00 लाख का बजट प्रावधान किया गया था बच्चों की खेल गतिविधियाँ केंद्र, ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिक/प्रारंभिक विद्यालयों की संख्या। विभाग अन्य लोगों के साथ मिलकर इन गतिविधियों का आयोजन कर रहा है सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और युवा एवं खेल विभाग आदि जैसे संबंधित विभाग।
सरकार ने 2018-19 के लिए मरम्मत और रखरखाव के लिए `18.20 करोड़ और पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए `10.90 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। प्राथमिक विद्यालय भवनों/कमरों और जिला/ब्लॉक कार्यालयों के निर्माण के लिए बुनियादी सुविधाएं।
अटल आदर्श विद्यालय योजना: अटल आदर्श विद्यालय योजना बरठीं (झंडूता) जिला ब्यालसपुर में शुरू की गई है। दस आदर्श विद्यालय होंगे 03.12.2018 से शुरू हुआ।
अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती: राज्य सरकार ने नई योजना अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल शुरू की से निकले मोती 10 अक्टूबर 2018 को। योजना की विशेषताएं इस प्रकार हैं: -
1) शैक्षिक बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर बढ़ाना।
2) निजी स्कूलों से तुलना करना।
3) समाज के लोगों को सरकारी स्कूलों तक लाना।
4) पुराने छात्रों को स्कूलों से जोड़ना ताकि वे स्कूलों के सुधार में योगदान दे सकें।
5) पुराने छात्रों/पूर्व छात्रों को छात्रों के लिए प्रेरक और प्रेरणा स्रोत के रूप में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना।
सर्व शिक्षा अभियान: सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) एक अच्छी तरह से परिभाषित पूर्व-परियोजना के साथ राज्य में शुरू किया गया बुनियादी ढांचे में सुधार पर चरण जिला परियोजना कार्यालयों में शैक्षिक प्रशासकों, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, स्कूल मैपिंग, माइक्रो-प्लानिंग, सर्वेक्षण आदि। इसका उद्देश्य आंदोलन का उद्देश्य सभी 6-14 आयु वर्ग के बच्चों के लिए सार्वभौमिक पहुंच, नामांकन, लिंग अंतर को दूर करना, प्राथमिक स्कूली शिक्षा को बनाए रखना और पूरा करना सुनिश्चित करना था। स्कूलों के प्रबंधन में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ संतोषजनक गुणवत्ता वाली प्रारंभिक शिक्षा को जोड़ा जाए।
एसएसए के तहत प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के मुख्य प्रयास इस प्रकार हैं:
1. हिमाचल प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा: राज्य सरकार ने चयनित 3,391 स्कूलों में प्री-प्राइमरी (नर्सरी और केजी) कक्षाएं शुरू की हैं। 1 अक्टूबर, 2018 से पहले चरण में राज्य। बाद के वर्षों में, शेष प्राथमिक विद्यालयों में पूर्व-प्राथमिक कक्षाएं शुरू की जाएंगी। 25,000 प्रथम चरण में अब तक प्री प्राइमरी में बच्चों का नामांकन हो चुका है।
प्री प्राइमरी के उद्देश्य:
i) एक एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से प्री-स्कूल शिक्षा गतिविधियों को स्थापित और सक्रिय करना शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक, भाषाई और संज्ञानात्मक विकास पर।
ii) बच्चों को बाद के वर्षों में प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करने के लिए स्कूल की तैयारी गतिविधियों के एक सेट से परिचित कराना।
iii) माता-पिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्री स्कूल शिक्षा के महत्व के बारे में समुदाय में जागरूकता पैदा करना।
iv) एक आकर्षक माहौल बनाना जो समाज को बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए प्रेरित करे।
सीखने के परिणाम: राज्य सरकार ने सभी को एनसीईआरटी द्वारा विकसित विषय और कक्षावार सीखने के परिणाम प्रदान किए हैं। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को इस तरह से पढ़ाने का निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक योग्यता में छात्रों को वांछित सीखने के परिणाम प्राप्त हों।
शिक्षक ऐप: राज्य सरकार। शिक्षण अधिगम को अधिक रोचक और आनंदमय बनाने के लिए शिक्षक ऐप लॉन्च किया है।
शिक्षा साथी ऐप: हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने नवोन्वेषी सुधारों को बढ़ावा देकर शिक्षा के स्तर को लगातार ऊंचा उठाया है। ।सबसे इन नवोन्मेषी प्रगतियों में हाल ही में शिक्षा साथी ऐप भी शामिल हुआ है। यह मोबाइल आधारित ऐप विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यों को एक ही मंच पर एकीकृत करता है।
i) ऐप विभाग के कई उद्देश्यों को पूरा करता है और शिक्षा अधिकारियों की विभिन्न जिम्मेदारियों में सहायता करता है, जिससे यह राज्य शिक्षा विभाग के लिए क्रांतिकारी बन जाता है।
ii) इसमें उन्नत सुविधा है जो निरीक्षण की पिछली प्रक्रिया को आसान बनाती है डेटा संग्रह आसान और अधिक प्रभावी।
iii) ऐप समग्र शिक्षा के लिए जारी किए गए पत्रों और निर्देशों की अधिसूचना के माध्यम से शिक्षा अधिकारी के साथ बातचीत करने के लिए एक त्वरित संचार चैनल भी प्रदान करता है।
iv) वर्तमान में, ऐप पर समीक्षा और निगरानी मॉड्यूल लॉन्च किया गया है।
v) ऐप स्कूल के दौरे पर ब्लॉक अधिकारियों से स्कूल में मुद्दे की तस्वीर खींचने के लिए कहकर जारी किए गए वास्तविक समय डेटा संग्रह की अनुमति देता है।
vi) ऐप में उल्लेखनीय विशेषताएं हैं जो हिमाचल के संदर्भ के अनुरूप बनाई गई हैं।
पढ़े भारत बढ़े भारत: प्ले वे विधि फ्लैश कार्ड, रीडिंग कार्ड, चार्ट, वर्कशीट के साथ पढ़ाने के लिए / वर्कबुक, कहानी की किताबें, कर्सिव राइटिंग वर्कशीट भाषा और गणित में उनके बुनियादी कौशल को बढ़ाने के लिए प्राथमिक स्तर पर सीखने के संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
स्मार्ट शालामथ के किट (संपर्क फाउंडेशन): राज्य परियोजना कार्यालय ने सीखने को बढ़ाने के लिए संपर्क फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं में छात्रों का स्तर गणित और अंग्रेजी विषय. संपर्क फाउंडेशन द्वारा सभी सरकारी स्कूलों को 10,661 संपर्क स्मार्ट शाला गणित किट प्रदान किए गए हैं। प्राथमिक स्कूल। कक्षा 2 और 3 में पढ़ने वाले सभी प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को गणित विषय की वर्कबुक प्रदान की जाएगी।
सतत व्यापक मूल्यांकन (सीसीई): आठवीं कक्षा तक के सभी सरकारी स्कूलों में सीसीई लागू किया जा रहा है। रचनात्मक और के माध्यम से बताएं प्रत्येक अध्याय के पूरा होने के बाद कक्षा परीक्षणों के अलावा योगात्मक मूल्यांकन भी लिया जाता है।
कंप्यूटर एडेड लर्निंग प्रोग्राम (CALP): अब तक 1,202 सरकारी स्कूलों को पहले से ही आवश्यक बुनियादी ढांचे से कवर किया जा चुका है जैसे कि; 3 कंप्यूटर, 1 बहुउद्देश्यीय लेजर प्रिंटर, 2 यूपीएस और फर्नीचर, प्रत्येक स्कूल में आपूर्ति किए गए तीन कंप्यूटरों में से एक 42” एलसीडी टीवी के साथ है।
2017-18 के दौरान 180 स्कूल पहले ही कवर किए जा चुके हैं।
चयनित लैब स्कूलों में आरएए के तहत गतिविधियाँ:
i) गणित प्रयोगशालाओं की स्थापना।
ii) मौजूदा विज्ञान प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ बनाना।
iii) प्रयोगशाला स्कूलों में विशेषज्ञों की मदद से विज्ञान पार्क विकसित करना। गणित से संबंधित BaLA सुविधाओं का परिचय और दीवार तथा अन्य उपलब्ध स्थान पर विज्ञान सीखना। वर्मी कम्पोस्ट संयंत्रों का विकास करना।
iv) क्षेत्रीय गणित ओलंपियाड के लिए छात्रों को तैयार करना। बाल विज्ञान कांग्रेस (सीएससी) के लिए छात्रों की तैयारी और आईआरडीपी परिवारों के बच्चों के लिए साइंस परस्यूट में नवाचार पहली से पांचवीं तक प्रति छात्र 150 रुपये प्रदान किया जा रहा है।
उपलब्धि सर्वेक्षण: राज्य स्तरीय उपलब्धि सर्वेक्षण, सभी कक्षा I का विषयवार राज्य स्तरीय उपलब्धि सर्वेक्षण (SLAS)। आठवीं तक राज्य परियोजना कार्यालय (आईएसएसई) द्वारा 2013-14 से बच्चों का संचालन किया जा रहा है से आगे। इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर शिक्षकों को तदनुसार शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण: प्रदेश में एनसीईआरटी द्वारा राष्ट्रीय स्तर का उपलब्धि सर्वेक्षण कराया गया है। मूल्यांकन डेटा एकत्र कर लिया गया है और विश्लेषण की प्रक्रिया में है।
बालिका शिक्षा: मॉडल-III के तहत, हिमाचल में 10 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) कार्यरत हैं। प्रदेश. आठ केजीबीवी जिला चंबा में, एक-एक शिमला और सिरमौर जिले में हैं। अभी तक, ये केजीबीवी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं 508 लड़कियों की जरूरत है। ये लड़कियाँ गरीब अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और इन्हें मुफ्त भोजन-आवास उपलब्ध कराया जाता है। वजीफा, चिकित्सा सहायता, स्टेशनरी, आवश्यकता के अनुसार कौशल शिक्षा, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विजिट आदि। वर्ष 2018-19 के लिए सात केजीबीवी को कक्षा -12 तक अपग्रेड किया गया है। प्रतिधारण: एसएसए के तहत सभी लड़कियों, सभी एससी/एसटी लड़कों, बीपीएल परिवारों से संबंधित बच्चों के लिए दो सेट मुफ्त वर्दी का प्रावधान है। कक्षा I से VIII तक के सभी सामान्य वर्ग के लड़के और लड़कियों के लिए निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें। बाकी छात्रों को राज्य के बजट से कवर किया जाता है।
सामुदायिक भागीदारी और एसएमसी सदस्यों का प्रशिक्षण: यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्कूल स्तर पर शिक्षा अच्छी तरह से प्रदान की जाए। प्रत्येक छात्र सीखता है और उत्कृष्टता प्राप्त करता है। छात्रों के माता-पिता और पीआरआई सदस्यों को हर साल जागरूक और उन्मुख किया जाता है। इस हस्तक्षेप के तहत स्कूल ऑपरेटिंग सिस्टम के तीनों हिस्सों यानी इनपुट, प्रोसेस और आउटपुट स्तर पर कार्रवाई बिंदुओं को प्रतिबिंबित करते हुए स्कूल विकास योजनाएं (एसडीपी) भी तैयार करते हैं। सामुदायिक गतिशीलता: यह राज्य और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई सभी शिक्षा पहलों/योजनाओं के व्यापक प्रचार के लिए है। इस हस्तक्षेप का उद्देश्य राज्य भर में सभी योजनाओं का संदेश फैलाना और साथ ही लोगों को इसके लिए तैयार करना है सभी शैक्षिक योजनाओं के कार्यान्वयन में सक्रिय भागीदारी और स्वामित्व।
निगरानी और समीक्षा: निगरानी और समीक्षा तंत्र को भी फिर से परिभाषित किया गया है। समीक्षा और निगरानी की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए, एक विस्तृत ओएमआर-आधारित गुणवत्ता निगरानी उपकरण, जो आसानी से डिजिटल और विश्लेषण योग्य है, तैयार किया गया है और विभिन्न को वितरित किया गया है। ब्लॉक अधिकारी. राज्य ने ब्लॉक अधिकारियों (शुरुआत में बीआरसीसी, और फिर बीईईओ) को अपने ब्लॉक के स्कूलों का दौरा करने और स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेश दिया है। सीसीई प्रदर्शन, बुनियादी ढांचे, कक्षा शिक्षण और स्कूल प्रबंधन जैसे विभिन्न प्रमुख मापदंडों पर। इनसे प्राप्त डेटा निरीक्षणों को एकत्र किया जाता है, उनका विश्लेषण किया जाता है और फिर समाधान निकालने के लिए जिला और राज्य स्तर पर चर्चा की जाती है जिससे प्रदर्शन में सुधार हो सके इनमें से प्रत्येक पैरामीटर पर स्कूलों की संख्या। इस हस्तक्षेप के लाभों में शामिल हैं:
) एक एकल ओएमआर-आधारित गुणवत्ता निगरानी उपकरण जो कई रूपों को एकीकृत करता है
i) समस्याओं/सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करने के लिए राज्य के अधिकारियों द्वारा नियमित स्कूल दौरे और निरीक्षण, यदि आवश्यक हो तो समय पर कार्रवाई करने के लिए इस आधार पर
ii) विस्तृत स्कूलवार डेटा का आसान डिजिटलीकरण
iii) जिला और राज्य स्तर पर मासिक समीक्षा बैठकें डेटा
iv) सरकार के भीतर डेटा-समर्थित निर्णय लेने की जवाबदेही और संस्कृति में वृद्धि
v) एक व्यापक गुणवत्ता निगरानी उपकरण के साथ कई समीक्षा प्रपत्रों को प्रतिस्थापित करके राज्य पदाधिकारियों पर बोझ कम करें।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN): वर्ष 2018 के लिए विशेष आवश्यकता वाले कुल 11,944 बच्चों की पहचान की गई है। -19. समावेशन की प्रक्रिया निम्नलिखित गतिविधियों के साथ चलती है:-
i) एसएमसी और सर्वेक्षण के माध्यम से पहचान
ii) प्रत्येक सीडब्ल्यूएसएन की आवश्यकता की पहचान करने के लिए चिकित्सा शिविर
iii) इन बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षक।
स्कूल से बाहर के बच्चे: हिमाचल प्रदेश में नगण्य बच्चे हैं जो शिक्षा की औपचारिक सीमा से बाहर हैं। हालाँकि वे एनआरबीसीसी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। आरटीई अधिनियम का पहला और महत्वपूर्ण दायित्व यह सुनिश्चित करना है 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को स्कूलों में होना चाहिए। आईएमआरबी और प्रथम द्वारा किए गए अन्य स्वतंत्र अध्ययन भी हैं पुष्टि की गई कि हिमाचल प्रदेश में स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या एक प्रतिशत से कम है। ऐसा देखा गया है कि दूसरे से प्रवास के कारण देश के कुछ हिस्सों से लेकर राज्य के शहरी/अर्धशहरी इलाकों तक, स्कूल न जाने वाले बच्चों के आंकड़े में उतार-चढ़ाव होता रहता है। जिले हो गए हैं प्रवासी आबादी पर नज़र रखने और उन्हें स्कूलों में नामांकित करने के लिए हर साल जुलाई और दिसंबर महीने में सर्वेक्षण करने को कहा।
राज्य के कुल योजना परिव्यय में शिक्षा की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण राज्य में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हर साल शिक्षण संस्थानों के साथ। दिसंबर, 2018 तक, 929 सरकारी हाई स्कूल, 1,841 सरकारी सीनियर स्कूल हैं माध्यमिक विद्यालय और 138 सरकारी डिग्री कॉलेज जिनमें 7 संस्कृत कॉलेज, 1 एससीईआरटी, 1 बी.एड. कॉलेज और 1 फाइन आर्ट कॉलेज राज्य में चल रहा है।
समाज के वंचित वर्गों की शैक्षिक स्थिति में सुधार लाने के लिए विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियाँ/वजीफे दिये जा रहे हैं राज्य/केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न चरणों में प्रदान किया जाता है। छात्रवृत्ति योजनाएँ हैं:-
i) डॉ. अंबेडकर मेधावी छात्रवृति योजना: इस योजना के तहत शीर्ष 1,000 मेधावी को छात्रवृत्ति दी जा रही है एचपीबीएसई द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा के आधार पर एससी वर्ग के छात्र और ओबीसी के शीर्ष 1,000 मेधावी छात्र राज्य के भीतर या बाहर मान्यता प्राप्त संस्थान में 10 +1 और 10+2 कक्षाएं `10,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत एससी वर्ग के 1,779 और ओबीसी वर्ग के 1,702 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
ii) स्वामी विवेकानन्द उत्कृष्ट छात्रवृति योजना: इस योजना के तहत सामान्य वर्ग के 1,000 शीर्ष मेधावी छात्र एचपीबीएसई द्वारा 10+1 और 10+2 कक्षाओं के लिए योग्यता के आधार पर आयोजित मैट्रिक और 10+1 परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए। राज्य के भीतर या बाहर मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को प्रति छात्र प्रति वर्ष 10,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत 1,644 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
iii) ठाकुर सेन नेगी उत्कृष्ट छात्रवृति योजना: इस योजना के तहत, शीर्ष 100 लड़कों को छात्रवृत्ति दी जा रही है और स्कूल में 10+1 और 10+2 कक्षाओं के लिए एचपीबीएसई द्वारा मेरिट के आधार पर आयोजित मैट्रिक परिणाम के आधार पर एसटी वर्ग की 100 छात्राएं राज्य के भीतर या बाहर `11,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष की मान्यता। वर्ष 2017-18 के दौरान कुल 306 ऐसे छात्र इस योजना के तहत लाभान्वित हुए।
iv) महर्षि बाल्मीकि छात्रवृति योजना: बाल्मीकि परिवारों से संबंधित वास्तविक हिमाचली छात्राएं जिनके माता-पिता हैं अस्वच्छ व्यवसाय में लगे लोगों को छात्रवृत्ति दी जा रही है, इस योजना के तहत मैट्रिक स्तर से आगे प्रति वर्ष प्रति छात्रा 9,000 रु. हिमाचल प्रदेश में कॉलेज स्तर तक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए उनकी स्थिति (सरकारी या निजी) की परवाह किए बिना। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत कुल 11 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है।
v) इंदिरा गांधी उत्कृष्ट: छात्रवृत्ति योजना: इस योजना के तहत पोस्ट प्लस के लिए 150 मेधावी छात्र कॉलेजों में अध्ययन करने या व्यावसायिक पाठ्यक्रम करने के लिए प्रति छात्र प्रति वर्ष `10,000 का पुरस्कार दिया जाएगा योग्यता के आधार पर और बिना किसी आय सीमा के। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत कुल 34 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
vi) सैनिक स्कूल छात्रवृत्ति: यह योजना वास्तविक एच.पी. पर लागू है। सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा में कक्षा छठी से बारहवीं तक के छात्र।
vii) एनडीए छात्रवृत्ति योजना: हिमाचल प्रदेश के कैडेटों को अलग-अलग दरों पर एनडीए छात्रवृत्ति दी जा रही है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1 छात्र को वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत लाभान्वित किया गया है।
viii) कल्पना चावला छात्रवृति योजना: इस योजना के तहत सभी +2 कक्षाओं की शीर्ष 2,000 मेधावी छात्राएं अध्ययन समूहों को प्रति छात्र प्रति वर्ष `15,000 दिए जाते हैं। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत कुल 692 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
ix) मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना: यह योजना वर्ष 2012-13 के दौरान शुरू की गई है और इसमें एक बार 75,000 रुपये दिए जाएंगे। राज्य के सभी छात्र जो चयनित हैं और किसी भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान या अखिल भारतीय में डिग्री पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश लेते हैं झारखंड में चिकित्सा विज्ञान संस्थान और किसी भी भारतीय प्रबंधन संस्थान धनबाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी)। 2017-18 में इस योजना के तहत कुल 72 छात्र लाभान्वित हुए।
x) राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज छात्रवृत्ति: यह पुरस्कार हिमाचल प्रदेश के दस वास्तविक छात्रों को दिया जाता है। आरआईएमसी, देहरादून में प्रत्येक कक्षा आठवीं से बारहवीं तक दो, `20,000 प्रति वर्ष प्रति छात्र। इस योजना के तहत 7 छात्रों को वर्ष 2017-18 के दौरान लाभान्वित किया गया।
xi) आईआरडीपी छात्रवृत्ति योजना: 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए `300 प्रति माह की राशि, +1 और +2 कक्षा के लिए `800 प्रति माह, कॉलेज/डे स्कॉलर छात्रों के लिए `1,200 प्रति माह और हॉस्टलर्स के लिए `2,400 प्रति माह उन छात्रों को दिया जा रहा है जो आईआरडीपी परिवारों से हैं और सरकारी/ सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान. वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत 38,826 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
xii) युद्ध के दौरान मारे गए/विकलांग हुए सशस्त्र बल कर्मियों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति: `300 (लड़के) की राशि और 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए `600 (लड़कियां) प्रति माह, 10+1 और 10+2 कक्षा के लिए `800 प्रति माह, कॉलेज के लिए `1,200 प्रति माह/ सशस्त्र बल कर्मियों के बच्चों को विश्वविद्यालय/डे स्कॉलर छात्रों को `2,400 प्रति माह और हॉस्टलर्स के लिए `2,400 प्रति माह दिया जा रहा है विभिन्न अभियानों/युद्ध में मारे गए/अक्षम हुए।
xiii) एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (केंद्र प्रायोजित योजना): छात्र अनुसूचित जाति से संबंधित हैं और अनुसूचित जनजाति जिनके माता-पिता की वार्षिक आय `2.50 लाख तक है और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र जिनके माता-पिता की वार्षिक आय है `1.00 लाख तक के सभी पाठ्यक्रमों के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति (अर्थात रखरखाव भत्ता + पूर्ण शुल्क) के लिए पात्र हैं और वे अध्ययन कर रहे हैं सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में। वर्ष 2017-18 के दौरान अनुसूचित जाति के 556, 2,204 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के किसी भी विद्यार्थी को लाभ नहीं मिला है।
xiv) अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: यह छात्रवृत्ति कक्षा 1 से 10वीं तक के छात्रों को प्रदान की जाएगी। जिनके माता-पिता/अभिभावकों की सभी स्रोतों से आय `2,50,000 प्रति वर्ष से अधिक न हो। डे स्कॉलर के लिए प्रति माह प्रति छात्र 100 रुपये की राशि छात्रों को और हॉस्टलर्स को 500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं।
xv) अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति:। यह छात्रवृत्ति उन छात्रों को प्रदान की जाएगी जिनके माता-पिता/अभिभावकों की कुल आय होती है स्रोत प्रति वर्ष `2.50 लाख से अधिक नहीं है। डे स्कॉलर को `3,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष और हॉस्टलर्स को `6,250 प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति कक्षा 9वीं एवं 10वीं की दी जा रही है। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत कुल 3,875 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
xvi) एसटी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: यह छात्रवृत्ति उन छात्रों को प्रदान की जाएगी जिनके माता-पिता/अभिभावकों की सभी आय होती है। स्रोत प्रति वर्ष `2.00 लाख से अधिक नहीं है। डे स्कॉलर को `2,250 प्रति छात्र प्रति वर्ष और हॉस्टलर्स को `4,500 प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति कक्षा 9वीं एवं 10वीं की दी जा रही है। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत कुल 1,691 छात्र लाभान्वित हुए हैं
xvii) माध्यमिक शिक्षा के लिए एससी/एसटी छात्राओं को प्रोत्साहन: इस केंद्र प्रायोजित योजना के तहत एससी/एसटी छात्राओं को जो एच.पी. से मिडिल स्टैंडर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 9वीं कक्षा में प्रवेश लें। बोर्ड स्कूल परीक्षा. प्रोत्साहन राशि इस योजना के तहत `3,000 है और यह सावधि जमा के रूप में दिया जाएगा।
xviii) अल्पसंख्यक समुदाय (सीएसएस) से संबंधित छात्रों के लिए मेरिट सह साधन छात्रवृत्ति योजना: यह छात्रवृत्ति मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यक छात्रों के लिए है। जिनके माता-पिता/अभिभावकों की सभी स्रोतों से आय `2.50 लाख से अधिक न हो तथा विद्यार्थी की आय इससे कम न हो 50 प्रतिशत से अधिक अंक. इस योजना के तहत 2017-18 के दौरान कुल 69 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
xix) अल्पसंख्यक समुदाय (सीएसएस) से संबंधित छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना: यह छात्रवृत्ति XI से दी जा रही है से पी.एच.डी. अल्पसंख्यक छात्रों के लिए तकनीकी/व्यावसायिक पाठ्यक्रमों सहित सरकारी/मान्यता प्राप्त निजी स्कूल/कॉलेज/संस्थान में स्तर (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी) से संबंधित। लाभार्थी के माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय अधिक नहीं होनी चाहिए सभी स्रोतों से `2.00 लाख और छात्र के पिछली अंतिम परीक्षा में 50% से कम अंक नहीं होने चाहिए। छात्र को परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी सरकार से. / सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान। 2017-18 के दौरान इस योजना के तहत कुल 570 छात्र लाभान्वित हुए हैं। छात्रवृत्ति की राशि दी जा रही है सरकार में वितरित. भारत स्तर का.
xx) नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप (सीएसएस): केंद्र प्रायोजित योजना सरकार द्वारा शुरू की गई है। भारत सरकार, मानव मंत्रालय स्कूली शिक्षा और साक्षरता संसाधन विकास विभाग माध्यमिक छात्रवृत्ति प्रभाग, नई दिल्ली। यह योजना प्राचार्य, एससीईआरटी, सोलन के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है।
द्वारा संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जबरदस्त प्रयास किये जा रहे हैं राज्य सरकार भी और केंद्र सरकार भी. विवरण इस प्रकार हैं:-
a) उच्च/वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना।
बी) माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत पढ़ाने के लिए संस्कृत व्याख्याताओं के वेतन के लिए अनुदान प्रदान करना।
c) संस्कृत विद्यालयों का आधुनिकीकरण।
d) संस्कृत को बढ़ावा देने और अनुसंधान/अनुसंधान परियोजनाओं के लिए विभिन्न योजनाओं के लिए राज्य सरकार को अनुदान।
शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम: सेवारत शिक्षकों को नवीनतम से लैस करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता है तकनीक/शिक्षण विधियाँ। एससीईआरटी सोलन, जीसीटीई धर्मशाला, हिपा फेयरलॉन और शिमला द्वारा सेमिनार/री-ओरिएंटेशन पाठ्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। एनयूपीए नई दिल्ली/सीसीआरटी/एनसीईआरटी/आरआईई, अजमेर और आरआईई चंडीगढ़। 2018-19 के दौरान लगभग 2,700 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है।
यशवन्त गुरुकुल आवास योजना: हाई/सीनियर सेकेंडरी में तैनात शिक्षकों को उपयुक्त आवासीय आवास प्रदान करने के लिए स्कूलों राज्य के जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों की. यह योजना राज्य के 61 चिन्हित विद्यालयों में क्रियान्वित की जा रही है। निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें 16.17 राज्य सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और बीपीएल वर्ग के 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा रही है। श्रेणियाँ। वर्ष 2018-19 के दौरान इस उद्देश्य के लिए `12.88 करोड़ खर्च किए गए हैं और 1,65,990 छात्र लाभान्वित हुए हैं।
विशेष योग्यजन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा: 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। बशर्ते 2001-02 से राज्य में विश्वविद्यालय स्तर तक।
लड़कियों को मुफ्त शिक्षा: छात्राओं को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जा रही है राज्य में वोकेशनल और व्यावसायिक समेत विश्वविद्यालय स्तर तक यानी केवल ट्यूशन फीस में छूट है।
सभी सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्व-वित्त आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्रदान की जा रही है आउटसोर्सिंग के माध्यम से जहां छात्रों ने वैकल्पिक विषय के रूप में आईटी शिक्षा को चुना था। विभाग आईटी शुल्क वसूल रहा है `110 प्रति माह प्रति छात्र। अनुसूचित जाति (बीपीएल) परिवारों के छात्रों को कुल शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिल रही है। साल में 2018-19 में लगभग 79,297 छात्र आईटी शिक्षा विषय में नामांकित हैं, जिनमें से 6,821 एससी (बीपीएल) छात्र लाभान्वित हो रहे हैं इस योजना के तहत. इस योजना में 45.02 लाख की राशि व्यय की गई जिसमें से 50 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा की जाएगी।
वर्ष 2018-19 से एकीकृत आरएमएसए (आरएमएसए, आईसीटी, गर्ल्स हॉस्टल, व्यावसायिक शिक्षा, आईईडीएसएस) का विलय कर दिया गया है। स्कूली शिक्षा के लिए एकीकृत योजना (आईएसएसई)। नई मर्ज की गई योजना को समग्र शिक्षा नाम दिया गया है। समग्र शिक्षा के अंतर्गत निम्नलिखित योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
i) राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान: विभाग ने हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत माध्यमिक स्तर पर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) को लागू करने का बीड़ा उठाया है। प्रदेश स्कूल एजुकेशन सोसाइटी (एचपीएसईएस) शेयरिंग फंडिंग पैटर्न 90:10 पर। आरएमएसए के तहत गतिविधियों को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं मौजूदा माध्यमिक विद्यालयों में बुनियादी ढांचा, सेवारत शिक्षकों को प्रशिक्षण, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और राज्य के स्कूलों को वार्षिक अनुदान के साथ कला उत्सव।
ii) शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों में गर्ल्स हॉस्टल: माध्यमिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण और संचालन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉक में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को नौवीं से बारहवीं कक्षा की लड़कियों के लिए भोजन और आवास सुविधाओं को मजबूत करना है। संबंधित लड़कियाँ इस योजना के तहत एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक समुदाय और बीपीएल परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा। सिरमौर जिले के चम्बा के बाछाड़ ब्लॉक में गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण। आरएमएसए के तहत स्वीकृत शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों में तीन बालिका छात्रावासों यानी हिमगिरी, मैहला (चंबा) और शिलाई (सिरमौर) का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। वर्ष 2018-19 के दौरान प्रत्येक 50 लड़कियों की क्षमता के साथ पूरा किया गया और कार्यात्मक बनाया गया।
iii) सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) परियोजना: स्मार्ट क्लास रूम का उपयोग करके शिक्षण-अधिगम गतिविधि को बेहतर बनाने और मजबूत करने के लिए और मल्टीमीडिया शिक्षण सहायता, विभाग ने 2017-18 तक 2,137 सरकारी हाई/हायर सेकेंडरी स्कूलों और पांच स्मार्ट स्कूलों में आईसीटी को सफलतापूर्वक लागू किया है। भारत सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए 145 और स्कूल शुरू किए हैं और काम प्रगति पर है।
iv) व्यावसायिक शिक्षा: छात्रों को रोजगार प्रदान करने के लिए विभाग ने 873 में एनएसक्यूएफ के तहत व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की। 11 विषयों/व्यापारों वाले स्कूल यानी ऑटोमोबाइल, खुदरा, सुरक्षा, आईटीईएस, स्वास्थ्य देखभाल, पर्यटन, कृषि, शारीरिक शिक्षा, दूरसंचार, बीएफएसआई और मीडिया। एमएचआरडी, भारत सरकार ने अतिरिक्त व्यावसायिक ट्रेडों यानी इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर, परिधान, मेड अप और फर्निशिंग, सौंदर्य और कल्याण और प्लंबर को मंजूरी दे दी है। कौशल को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से 80 और स्कूलों में जहां 9वीं कक्षा में अपेक्षित संख्या में छात्र उपलब्ध हैं वर्ष 2018-19 के दौरान छात्रों को
v) माध्यमिक स्तर पर विशेष योग्यजन के लिए समावेशी शिक्षा: माध्यमिक स्तर पर विशेष योग्यजन के लिए समावेशी शिक्षा है राज्य में वर्ष 2013-14 में प्रारंभ हुआ। इस योजना के तहत सभी जिलों में 12 मॉडल स्कूल और 18 स्पेशल स्कूल स्थापित किये गये हैं स्कूलों में नामांकित सीडब्ल्यूएसएन को विशेष शिक्षा प्रदान करने के लिए इन स्कूलों में शिक्षकों को नियुक्त किया जाता है। विशेष आवश्यकता वाले 2,748 बच्चे पहचान की गई है। इन बच्चों के मूल्यांकन के लिए 12 चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए हैं और जरूरतमंद बच्चों को 251 सहायक उपकरण और उपकरण वितरित किए गए हैं। वर्ष 2018-19 के दौरान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें, एस्कॉर्ट भत्ता, ब्रेल पुस्तक की आपूर्ति की गई है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान 16.22 उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए राज्य में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान लागू किया गया है। इस योजना के तहत, एमएचआरडी, भारत सरकार ने `231.00 करोड़ स्वीकृत किए हैं और `176.00 करोड़ (2013-17) की राशि जारी की है। भारत सरकार ने `88.00 करोड़ स्वीकृत किये हैं वर्ष 2018-19 के दौरान कॉलेजों को `5.00 करोड़ प्राप्त और जारी किए गए।
नेट बुक/लैपटॉप का वितरण: विभाग 8,800 मेधावी छात्रों को लैपटॉप/नेट बुक वितरित करेगा। 10वीं और 12वीं कक्षा हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला के (4400-10वीं और 4400-12वीं कक्षा) और 900 प्रथम श्रेणी कॉलेज के छात्रों को निःशुल्क मासिक वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान छात्र डिजिटल योजना/श्री निवास रामानुजन डिजिटल योजना के तहत शिक्षण-अधिगम गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 1 जीबी डेटा कार्ड वर्ष 2018-19.
अखंड शिक्षा ज्योति, मेरे स्कूल से निकले मोती: विभाग ने अखंड शिक्षा ज्योति, मेरे स्कूल योजना शुरू की है प्रदेश में स्कूल से निकले मोती। अंतर्गत इस योजना के तहत, उन सभी पुराने छात्रों के नाम, जिन्होंने अपने जीवन में कुछ अनुकरणीय हासिल किया है, स्कूल ऑनर बोर्ड पर दर्ज किए जा रहे हैं ताकि उन्हें प्रेरणा मिल सके। और वर्तमान स्कूली छात्रों में दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास की भावना पैदा करके उन्हें जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। इस संदर्भ में विभाग सभी सरकारी कार्यालयों में ऑनर बोर्ड लगाए गए हैं। स्कूलों
विद्यार्थी वन मित्र योजना: राज्यपाल ने दिनांक 20.08.2018 को विद्यार्थी वन मित्र योजना को अधिसूचित किया है। का मुख्य उद्देश्य इस योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों में वृक्षों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से वन और पर्यावरण की सुरक्षा के बारे में जागरूकता पैदा करना है वृक्षारोपण एवं संरक्षण. यह योजना सभी सरकारी कार्यालयों में स्थापित इको क्लबों के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। स्कूल. 1100 पौधे प्रति हेक्टेयर अधिमानतः होंगे वन एवं शिक्षा विभाग के नामित नोडल अधिकारियों की देखरेख में चयनित विद्यालय के आसपास खाली क्षेत्रों में पौधे लगाए जाएं।
बैग फ्री डे : विभाग ने हर सरकार में हर महीने के चौथे शनिवार को बैग फ्री डे घोषित किया है यह सुनिश्चित करने के लिए स्कूल स्कूलों में अंतर-सदनीय खेल प्रतियोगिताओं, अतिरिक्त पाठ्यचर्या गतिविधियों जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करके विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मेधा प्रोत्साहन योजना: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमारे प्रतिभाशाली छात्रों को प्रशिक्षित करना महत्वपूर्ण है। मेधा प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी शिक्षा विभाग. इस योजना के तहत चयनित 500 मेधावी छात्रों को जेईई में शामिल होने के लिए दो चरणों में 45 दिनों की कोचिंग दी जाएगी। FITZEE, ALLEN, Helix जैसे संस्थानों में NEET और सिविल सेवा परीक्षा। छात्रों को कोचिंग और कोचिंग में रहने के लिए ₹1.00 लाख दिए जाएंगे राज्य के बाहर के संस्थान. योजना के उचित कार्यान्वयन के लिए, सरकार। ने वर्ष 2018-19 के दौरान विभाग को `5.00 करोड़ स्वीकृत किये हैं।
अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना: युवा मन में जिज्ञासा, रचनात्मकता और कल्पना को बढ़ावा देने के लिए, अटल टिंकरिंग लैब एक है कार्य स्थान जहां युवा दिमाग हाथों से स्वयं करें मोड के माध्यम से अपने विचारों को आकार दे सकते हैं; और छोटे बच्चों को नवाचार कौशल सीखने को मिलेगा वर्ष 2018-19 के दौरान एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) की अवधारणाओं को समझने के लिए उपकरणों और उपकरणों के साथ काम करने का मौका, 119 सरकारी। सीनियर सेकेंड. स्कूलों, 03 स्थानीय निकाय स्कूलों, 13 निजी स्कूलों ने नीति आयोग को अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने के लिए पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।
36 भाषा प्रयोगशालाओं की स्थापना: 36 भाषा प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए, विभाग (आईएसएसई) ने ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसे पहले ही स्थापित कर लिया जाएगा वित्तीय वर्ष 2018-19 की समाप्ति। इस प्रयोजन के लिए, सरकार. भारत सरकार ने `60.00 लाख स्वीकृत किए हैं।
सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की स्थापना: सरकार की सुरक्षा प्रदान करने के लिए। शैक्षणिक संस्थान एवं छात्र, 100 सी.सी.टी.वी 100 सरकारी अस्पतालों में निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। वर्ष 2018-19 के दौरान स्कूल।
आधार सक्षम बायो मैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) की स्थापना: विभाग ने इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है की खरीद एचपीएसईडीसी के सहयोग से 2,700 आधार सक्षम बायो मैट्रिक उपस्थिति प्रणाली (एईबीएएस)। एईबीएएस जीएसएसएस/जीएचएस और सरकार में स्थापित किया जाएगा। के लिए कॉलेज मार्च, 2019 से पहले राज्य में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करना।
कॉलेजों में वाई-फाई की स्थापना: विभाग ने 137 में से 114 कॉलेजों में वाई-फाई स्थापित कर दिया है। वर्ष 2018- 19 और उसके दौरान कॉलेज शेष 23 में चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में स्थापना प्रक्रियाधीन है।
तकनीकी शिक्षा विभाग की स्थापना वर्ष 1968 में हुई थी और जुलाई 1983 में व्यावसायिक और औद्योगिक और प्रशिक्षण संस्थान को भी इस विभाग के अधीन लाया गया, वर्तमान में यह विभाग तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कर रहा है, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण. आज विभाग उस स्थिति में पहुंच गया है, जहां राज्य के इच्छुक छात्र इंजीनियरिंग/इंजीनियरिंग में प्रवेश पा सकते हैं। हिमाचल प्रदेश में निम्नलिखित संस्थानों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में फार्मेसी डिप्लोमा और डिग्री दोनों के साथ-साथ सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम भी।

17.स्वास्थ्य

राज्य सरकार ने किया है यह सुनिश्चित किया कि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी रहें रोकथाम और उपचार हस्तक्षेप हैं कुशलतापूर्वक लागू लोगों के लिए सुलभ। हिमाचल प्रदेश में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सेवाएं दे रहा है जिसमें उपचारात्मक, निवारक, आदिम और पुनर्वास सेवाएँ 89 अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से, 91 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 580 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 16 ईएसआई औषधालय और 2,085 उपकेंद्र। बेहतर प्रदान करने के लिए लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं, सरकार मौजूदा को मजबूत कर रही है आधुनिक बुनियादी ढाँचा प्रदान करके उपकरण, विशेष सेवाएँ, चिकित्सा की ताकत बढ़ाना और मेडिकल में पैरा-मेडिकल स्टाफ संस्थाएँ।
का संक्षिप्त विवरण विभिन्न स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के दौरान राज्य में की गई गतिविधियाँ 2018-19 इस प्रकार है:
i) राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम:के दौरान वर्ष 2018-19, (नवम्बर तक) 2018) 4,21,429 ब्लड स्लाइड हुईं जांच की गई, जिसमें से 97 स्लाइडें थीं पॉजिटिव पाए गए और कोई मौत नहीं हुई सुचित किया गया था।
ii) राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रमःइसके अंतर्गत प्रसार दर कार्यक्रम, जो प्रति दस हजार पर 5.14 था 1995 में घटाकर 0.19 कर दिया गया प्रति दस हजार पर यथावत नवंबर, 2018. 2018-19 के दौरान, (नवंबर,2018 तक), 101 कुष्ठ रोग के नए मामले सामने आए हैं पता चला, 80 मामले हटा दिए गए उपचार पूरा होने के बाद और कुष्ठ रोग के 140 मामले चल रहे हैं इलाज। उन्हें एमडीटी मिल रही है विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से बिना किसी मूल्य के।
iii) संशोधित राष्ट्रीय टी.बी. नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी):इसके अंतर्गत कार्यक्रम, 1 टी.बी. सेनेटोरियम, 12 जिला टी.बी. नियंत्रण कक्ष, 74 टी.बी. इकाइयाँ और 208 माइक्रोस्कोपी केंद्र, 1 मध्यवर्ती संदर्भ प्रयोगशाला, 1 राजकीय औषधि भण्डार, 1 राज्य टीबी प्रशिक्षण केंद्र, 20 कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड और प्रवर्धन परीक्षण प्रयोगशालाएँ, 6 जिला डीआर-टीबी केंद्र और 3 नोडल डीआर-टीबी केंद्र वाले 315 बिस्तरों की व्यवस्था थी राज्य में कार्य कर रहा है. दौरान वर्ष 2018-19 दिसम्बर तक, 2018 में 15,786 टीबी के मामले थे के लक्षण पाए गए रोग एवं बलगम परीक्षण 99,573 लक्षणात्मक थे निदान. हिमाचल प्रदेश है उन राज्यों में से एक जहां सभी के अंतर्गत जिलों को शामिल किया गया है इस प्रोजेक्ट। की उपलब्धि कुल मामलों की अधिसूचना दर थी 217 प्रति लाख प्रति वर्ष और इलाज हिमाचल प्रदेश की दर 89 है 90 के लक्ष्य के विरूद्ध प्रतिशत प्रतिशत.
iv) राष्ट्रीय कार्यक्रम अंधता पर नियंत्रणःइसके अंतर्गत वर्ष के दौरान कार्यक्रम 2018-19 (अक्टूबर 2018 तक), 16,038 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए के लक्ष्य के विरूद्ध प्रदर्शन किया 27,500 मोतियाबिंद ऑपरेशन। 11,565 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए I.O के साथ प्रदर्शन किया लेंस. 129
v) राष्ट्रीय परिवार कल्याण प्रोग्राम:यह प्रोग्राम है के रूप में राज्य में किया जा रहा है प्रजनन और बच्चे का हिस्सा स्वास्थ्य कार्यक्रम, के आधार पर समुदाय की जरूरतों का आकलन दृष्टिकोण। इस दृष्टिकोण के तहत, जमीनी स्तर के कार्यकर्ता पसंद करते हैं बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (दोनों) नर और मादा) एक अनुमान दें विभिन्न परिवार कल्याण के क्षेत्र में आवश्यक गतिविधियाँ/ उनके द्वारा कवर की गई जनसंख्या। इस कार्यक्रम के तहत 2,914 नसबंदी, 10,793 आई.यू.डी. सम्मिलन, 25,588 ओपी उपयोगकर्ता और 67,023 सीसी उपयोगकर्ता किये गये 2018-19 के दौरान (नवंबर तक) 2018).
vi) सार्वभौमिक टीकाकरण प्रोग्राम:यह प्रोग्राम है में भी क्रियान्वित किया जा रहा है प्रजनन के एक भाग के रूप में राज्य बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) कार्यक्रम को कम करने के उद्देश्य से रुग्णता और मृत्यु दर के बीच माताएँ, बच्चे और शिशु। टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारियाँ अर्थात. क्षय रोग, डिप्थीरिया, पर्टुसिस, नवजात टेटनस, पोलियोमाइलाइटिस और खसरा है उल्लेखनीय कमी देखी गई। के लिए लक्ष्य और उपलब्धियाँ वर्ष 2018-19 तालिका में दिया गया है 17.1.
पिछले वर्षों की तरह, पल्स पोलियो अभियान भी चला वर्ष के दौरान राज्य में लॉन्च किया गया 2018-19. भारत सरकार ने केवल एक राष्ट्रीय टीकाकरण का निर्णय लिया 3 फरवरी, 2019 को द्विसंयोजक दिवस ओरल पोलियो वैक्सीन (बीओपीवी)।
vii) मुख्यमंत्री राज्य स्वास्थ्य देखभाल योजनाःसरकार मुख्यमंत्री राज्य की शुरूआत की है एकल नारी को स्वास्थ्य देखभाल योजना, 130 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक आयु, दैनिक वेतन भोगी श्रमिक, भाग समय कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका, मध्याह्न भोजन श्रमिक, संविदा कर्मचारी और 70 से अधिक आयु वाले व्यक्ति प्रभाव सहित विशेष योग्यता प्रतिशत 01.03.2016 से. नीचे योजना 1.05 लाख स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं। का प्रावधान है की धुन पर कैशलेस उपचार बेसिक पैकेज के तहत `30,000 और क्रिटिकल केयर के लिए `1.75 लाख है के मामले में बनाया गया है योजना के तहत अस्पताल में भर्ती। कैंसर के लिए यह `2.25 लाख और अधिक है के तहत नवंबर, 2018 तक योजना में 12,000 मरीज हैं के कैशलेस इलाज का लाभ उठाया `8.00 करोड़।
viii) राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन: इस योजना के तहत 95 स्वास्थ्य संस्थानों की पहचान की गई 24 घंटे आपातकाल प्रदान करें सेवाएँ। इसके अलावा 698 रोगी कल्याण समितियाँ भी हैं जिला अस्पताल में कार्यरत, सिविल अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र. `5.71 करोड़ की राशि है तक सभी जिलों में वितरित कर दिया गया है दिसंबर, 2018.
ix) राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रमःवर्ष के दौरान 2018-19 दिसंबर, 2018 तक, 2,30,156 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें 363 एचआईवी पॉजिटिव मामले हैं पता लगाया गया.
ए) एकीकृत परामर्श और परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी):कुल हिमाचल में 45 आईसीटीसी केंद्र प्रदेश परामर्श प्रदान कर रहे हैं और परीक्षण सेवाएँ। साल में 2018-19, दिसंबर 2018 तक, कुल परीक्षण किए गए व्यक्तियों में से, 78,047 एएनसी ग्राहक थे, जिनमें से 14 एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। दो मोबाइल आईसीटीसी वैन इकाइयां हैं कार्यात्मक भी.
बी) एसटीआई/आरटीआई: कुल 20 क्लीनिक हैं में एसटीआई/आरटीआई सेवाएं प्रदान करना हिमाचल के विभिन्न जिले प्रदेश. वर्ष 2018-19 में उ.प्र दिसंबर 2018 तक, कुल 39,439 लोगों ने सेवाओं का लाभ उठाया है इन आरटीआई/एसटीआई क्लीनिकों में से।
सी) रक्त सुरक्षा: रक्त के अंतर्गत सुरक्षा, 17 ब्लड बैंक और 3 रक्त घटक पृथक्करण इकाइयां आईजीएमसी, शिमला, जेडएच मंडी और आरपीजीएमसी टांडा हैं राज्य में कार्य कर रहा है. दौरान वर्ष 2018-19 दिसम्बर तक, 2018, 390 वीबीडी शिविर लगाए गए हैं राज्य में आयोजित किया गया। एक चार दाताओं के साथ मोबाइल ब्लड बस राज्य में कोच भी क्रियाशील है।
घ) एंटी रेट्रोवायरल उपचार कार्यक्रम (एआरटी):राज्य में 3 हैं आईजीएमसी, शिमला, आरएच में एआरटी केंद्र हमीरपुर और डॉ. आरपीजीएमसी टांडा, 3 एफएआरटी और 7 लिंक एआरटी केंद्र इनके माध्यम से निःशुल्क एआरटी औषधियां दी जाती हैं रहने वाले लोगों को प्रदान किया जा रहा है एचआईवी/एड्स के साथ.
ई) लक्षित हस्तक्षेप: 17 लक्षित हस्तक्षेप परियोजना हैं के लिए राज्य में क्रियान्वित किया जा रहा है उच्च जोखिम समूह. साल के दौरान 2018-19, दिसंबर 2018 तक, कुल 13,803 लोगों ने लाभ उठाया है आरटीआई/एसटीआई सेवाएं। 9,771 ऊँचा जोखिम समूह की जांच की गई ये 21 एचआईवी पॉजिटिव केस थे पता चला.
चिकित्सा निदेशालय शिक्षा प्रशिक्षण एवं अनुसंधान था प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया बेहतर चिकित्सा शिक्षा प्रणाली और मेडिकल और पैरा मेडिकल को प्रशिक्षण और 131 नर्सिंग कर्मियों और को भी की निगरानी एवं समन्वय करें चिकित्सा और दंत चिकित्सा सेवाओं की गतिविधियाँ राज्य का।
वर्तमान में राज्य में है छह सरकारी मेडिकल कॉलेज इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, डाॅ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज, टांडा, डॉ.यशवंत सिंह परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज नाहन, पं. जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, चम्बा, डॉ. राधा कृष्ण राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर, श्री। लाल बहादुर शास्त्री सरकार मेडिकल कॉलेज मंडी और एक शिमला में सरकारी डेंटल कॉलेज कार्य कर रहे हैं. इसके अलावा एक मेडिकल कॉलेज और चार डेंटल कॉलेज निजी क्षेत्र में भी कार्यशील हैं राज्य। शैक्षणिक सत्र के दौरान 2018-19, एएनएम प्रशिक्षण के लिए 180 सीटें जीएनएम पाठ्यक्रमों के लिए 1,440 सीटें बढ़ीं, बीएससी के लिए 1,210 सीटें नर्सिंग कोर्स, पोस्ट बेसिक बीएससी के लिए 265 सीटें। नर्सिंग पाठ्यक्रम, और एम.एससी. के लिए 91 सीटें। नर्सिंग डिग्री कोर्स को मंजूरी दे दी गई है. एमबीबीएस की कुल 750 सीटें भरी गईं सरकारी और निजी क्षेत्र के अलावा विभिन्न विशिष्टताओं में 232 पीजी सीटें थीं आईजीएमसी शिमला, आरपीजीएमसी टांडा में भरा गया और महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी सोलन में बीडीएस की 340 सीटें हैं और दोनों में एमडीएस की 94 सीटें भर गईं इस दौरान सरकारी और निजी क्षेत्र शैक्षणिक सत्र 2018-19. दौरान वित्तीय वर्ष 2018-19 राज्य सरकार ने एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा दिया है छात्र `10,000 से `15,000 प्रति वार्षिक. संस्थावार धन का आवंटन और व्यय 2018-19 के दौरान 20.12.2018 तक हैं तालिका 17.2 में दिया गया है
संस्थानवार प्रमुख इस निदेशालय के अंतर्गत उपलब्धियाँ हैं निम्नलिखित नुसार:-
ए) आईजीएमसी, शिमला: इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल अब सुपर के रूप में अपग्रेड हो गया है विशेष संस्थान, प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है राज्य का संस्थान. वर्तमान के दौरान भारत सरकार का वित्तीय वर्ष था `12.60 की राशि प्रदान की गई केंद्र के अधीन करोड़ (90% हिस्सा)। प्रायोजित योजना और राज्य सरकार। है `1.40 करोड़ (10% राज्य) भी जारी करें शेयर) विकसित करने के लिए (एल-1) ट्रॉमा देखभाल आईजीएमसी शिमला में सुविधाएं। एक सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक निर्माणाधीन है चाम्याना की अनुमानित लागत के साथ `218.00 करोड़. सरकार के पास है के विस्तार हेतु सैद्धांतिक रूप से अनुमोदित क्षेत्र के लिए मौजूदा कैंसर अस्पताल आईजीएमसी शिमला में कैंसर सेंटर तृतीयक के अंतर्गत `45.00 करोड़ की लागत राष्ट्रीय कैंसर केंद्र योजना की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु कार्यक्रम कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक. निर्माण कार्य 132 लिफ्ट ब्लॉक सहित नए ओपीडी ब्लॉक का निर्माण कार्ट रोड से न्यू ओपीडी ब्लॉक तक आईजीएमसी शिमला की अनुमानित लागत `56.20 करोड़ एवं निर्माण कार्य कमला नेहरू राज्य का नया भवन लागत पर माँ एवं बच्चे के लिए अस्पताल 21.00 करोड़ का बहुत पूरा हो जाएगा शीघ्र ही.
बी) डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज, टांडा में कांगड़ा (DRPGMC): डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मेडिकल टांडा में कॉलेज कांगड़ा दूसरे स्थान पर है राज्य के मेडिकल कॉलेज की स्थापना अक्टूबर, 1996 में पहला बैच था की सेवन क्षमता के साथ 1999 में शुरू हुआ 50 एमबीबीएस छात्र जो बढ़ाए गए 100 छात्रों के लिए 2011. वर्तमान में इसमें 20वां बैच प्रशिक्षण ले रहा है संस्थान। वर्ष 2018-19 के दौरान, माननीय मुख्यमंत्री जी ने रखा है के लिए नये सुविधा ब्लॉक का शिलान्यास कॉलेज की लागत लगभग `3.00 करोड़. क्षमता वाला एक नया गर्ल्स हॉस्टल 120 छात्रों की लागत लगभग के लिए `14.91 करोड़ स्वीकृत किये गये हैं कॉलेज। एमबीबीएस के लिए एक नया छात्रावास छात्रों ने `11.69 करोड़ की लागत से अप्रैल माह में उद्घाटन किया गया 2018 माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा राज्य। संस्थान को ₹15.00 प्राप्त हुए थे की स्थापना के लिए एनएचएम से करोड़ रु एमसीएच विंग. भारत सरकार ने के निर्माण हेतु `6.00 करोड़ स्वीकृत किये गये मानसिक स्वास्थ्य केंद्र.
(सी) डॉ. यशवन्त सिंह परमार सरकारी मेडिकल कॉलेज, नाहन: डॉ.यशवंत सिंह परमार सरकारी मेडिकल कॉलेज, नाहन जिला। सिरमौर का तीसरा मेडिकल कॉलेज है प्रवेश क्षमता के साथ स्थापित राज्य 100 एमबीबीएस छात्रों में से। इसके दौरान वित्तीय वर्ष 3 एमबीबीएस छात्रों का तीसरा बैच इस संस्थान में प्रशिक्षण ले रही है। एक `10.00 करोड़ की राशि हो चुकी है मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए स्वीकृत इस मेडिकल कॉलेज में केंद्र.
(डी) पं. जवाहर लाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज, चम्बा: पं. जवाहर लाल नेहरू सरकार मेडिकल कॉलेज चंबा चौथा है केन्द्र के अधीन मेडिकल कॉलेज की स्थापना वार्षिक सेवन के साथ प्रायोजित योजना 100 एमबीबीएस छात्रों का और दूसरा वर्ष से बैच प्रारंभ किया गया है 2018. सरकार ने प्रदान किया था चालू वित्तीय वर्ष के दौरान `55.81 करोड़ सिविल कार्य और खरीद के लिए मशीनरी, उपकरण और फर्नीचर। ट्रामा सेंटर चालू कर दिया गया है इस मेडिकल कॉलेज में स्थापित करके अपेक्षित मशीनरी.
(ई) डॉ. राधा कृष्णन सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय,हमीरपुरः डॉ. राधा कृष्णन सरकार मेडिकल कॉलेज हमीरपुर पांचवें स्थान पर है राज्य में मेडिकल कॉलेज की स्थापना केंद्र प्रायोजित योजना के तहत 100 एमबीबीएस छात्रों का वार्षिक प्रवेश। से पहला बैच प्रारंभ किया गया है वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2018-19। एलओपी-1 चरण के लिए निर्माण कार्य पूरा हो गया है। सरकार की धनराशि उपलब्ध करायी है सिविल कार्य के लिए `55.81 करोड़ और इस मेडिकल कॉलेज के लिए मशीनरी चालू वित्तीय वर्ष के दौरान.
(च) श्री. लाल बहादुर शास्त्री सरकारी चिकित्सा कॉलेज, मंडीः प्रदेश का छठा मेडिकल कॉलेज 100 एमबीबीएस छात्रों के वार्षिक प्रवेश के साथ क्रियाशील बना दिया गया है और दूसरा बैच शुरू कर दिया गया है. बीएससी मेडिकल में नर्सिंग कॉलेज कॉलेज परिसर बन चुका है कार्यात्मक और 40 छात्रों का पहला बैच 133 वर्तमान में भर्ती कराया गया है शैक्षणिक सत्र 2018-19. लेवल III ट्रॉमा सेंटर भी बनाया गया है कार्यात्मक। स्थापना की स्वीकृति तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र में मेडिकल कॉलेज मिल गया है के अंतर्गत कुल लागत `45.00 करोड़ केंद्रीय प्रायोजक योजना
(जी) डेंटल कॉलेज और अस्पताल शिमलाः हिमाचल प्रदेश सरकार डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल, शिमला था एक सेवन के साथ 1994 में स्थापित किया गया प्रति वर्ष 20 छात्रों की क्षमता। से वर्ष 2007-08 में 60 का प्रवेश छात्रों को बीडीएस कोर्स करना होगा शुरू किया गया। डिप्लोमा के प्रवेश डेंटल मैकेनिक और डेंटल का कोर्स हाइजीनिस्ट बनाए गए हैं और कक्षाएं अक्टूबर, 2018 से शुरू किया गया है। शैक्षणिक सत्र 2017-18 के दौरान पी.जी एक और विषय में पाठ्यक्रम अर्थात मुख चिकित्सा विभाग एवं रेडियोलॉजी की शुरुआत की गई है प्रति वर्ष दो सीटों की प्रवेश क्षमता। आईआरडीपी को निःशुल्क दंत चिकित्सा उपचार और राज्य के बीपीएल परिवार हो रहे हैं संस्था द्वारा प्रदान किया गया।
भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है राज्य की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली. आयुर्वेद का अलग विभाग था 1984 में स्थापित और स्वास्थ्य देखभाल को सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं 2 क्षेत्रीय के माध्यम से आम जनता आयुर्वेदिक अस्पताल, 31 जिले आयुर्वेदिक अस्पताल, 1 प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल 1,178 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र, 3 यूनानी स्वास्थ्य केंद्र, 14 होम्योपैथिक स्वास्थ्य केंद्र और 4 आमची क्लीनिक. विभाग ने इनबिल्ट कर दिया है औषधियों के उत्पादन की प्रणाली 3 आयुर्वेदिक फार्मेसियों के माध्यम से जोगिंदरनगर (जिला मंडी), माजरा (जिला सिरमौर) और पपरोला (जिला) कांगड़ा). ये फार्मेसियाँ खानपान प्रदान करती हैं आयुर्वेदिक स्वास्थ्य की आवश्यकताएँ विभाग के संस्थान. राजीव गांधी शासकीय पी.जी. आयुर्वेदिक कांगड़ा जिले में कॉलेज पपरोला में एक है 60 छात्रों की प्रवेश क्षमता बी.ए.एम.एस. डिग्री और एमडी की 39 सीटें।
विभाग के पास बी-फार्मेसी है (आयुर्वेद) कॉलेज, जोगिंदरनगर के साथ 30 छात्रों की क्षमता में। आयुर्वेद विभाग भी है राष्ट्रीय स्वास्थ्य से जुड़े मलेरिया, परिवार कल्याण, जैसे कार्यक्रम एनीमिया मुक्त, एड्स, टीकाकरण, पल्स पोलियो और टीबी मुक्त हिमाचल आदि। भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है एनीमिया मुक्त हिमाचल की एक परियोजना तीन के लिए `50.00 लाख तक विकास खण्ड अर्थात बसंतपुर शिमला जिला, कुल्लू जिला का बंजार और कांगड़ा जिले के बैजनाथ। पहला इस परियोजना का चरण रहा है लगभग की कवरेज के साथ लागू किया गया 35% जनसंख्या और सांख्यिकी विश्लेषण आर्थिक और द्वारा किया जा रहा है सांख्यिकी विभाग. वर्तमान के दौरान वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट है `264.28 करोड़ का प्रावधान।
हर्बल संसाधनों का विकास: चार हर्बल गार्डन जोगिंदरनगर (जिला मंडी), नेरी (जिला हमीरपुर), डुमरेड़ा जिला शिमला) और जंगल झलेरा (बिलासपुर) और प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहे हैं औषधीय पौधों का संरक्षण. मंत्रालय आयुष, भारत सरकार उत्तर भारत के लिए क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र की स्थापना की है आईएसएम, जोगिंदर में अनुसंधान संस्थान समग्र रूप से नगर, जिला मण्डी औषधीय पौधों का विकास. एक के अंतर्गत 2018-19 की वार्षिक कार्य योजना 134 औषधीय पौधे राष्ट्रीय का घटक आयुष मिशन की राशि `63.75 लाख सरकार ने मंजूरी दे दी है भारत सरकार, आयुष मंत्रालय। अंतर्गत राष्ट्रीय आयुष मिशन क्लस्टर किसानों को सब्सिडी के लिए योजना बनाई जा रही है चयनित औषधीय पौधों की खेती और `65.18 लाख मूल्य के 216 डीबीटी हैं किसानों को खेती के लिए उपलब्ध कराया गया औषधीय पौधे।
वर्ष 2018-19 के दौरान (दिसंबर, 2018 तक), डीटीएल जोगिंदरनगर ने 169 का विश्लेषण किया है नमूने (सरकारी और निजी से)। फार्मेसियों) और का राजस्व उत्पन्न किया `1.30 लाख.
विकास गतिविधियां:
(i) निःशुल्क शिविर: लोगों को लोकप्रिय बनाना और बनाना आयुष उपचार के प्रति जागरूक, 50 निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं के विभिन्न स्थानों पर आयोजन किया गया वर्ष 2018-19 के दौरान राज्य जिसमें 13,130 मरीज हैं निदान और उपचार किया गया।
(ii) जनमंच: जनमंच कार्यक्रम के तहत 7 से शिविरों का आयोजन किया गया है जून से दिसंबर, 2018 और 21,434 मरीज लाभान्वित हुए।
(iii) सात्विक योग दिवस: सात्विक योग दिवस के अंतर्गत 77,535 लोग लाभान्वित हुए अप्रैल से दिसंबर, 2018 तक.

18.समाज कल्याण कार्यक्रम

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग राज्य सामाजिक-आर्थिक में लगा हुआ है और अनुसूचित का शैक्षिक उत्थान जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ, अन्य पिछड़ा वर्ग, अशक्त, विशेष सक्षम, अनाथ, बच्चे, विधवाएँ, बेसहारा, गरीब बच्चे और महिलाएं आदि निम्नलिखित योजनाएँ हैं सामाजिक कल्याण के तहत लागू किया गया कार्यक्रम:
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना:
ए) वृद्धावस्था पेंशन: वृद्धावस्था पेंशन `750 प्रति माह है उचित लोगों को प्रदान किया जा रहा है जो 60 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके हैं वर्ष या उससे अधिक लेकिन 70 से नीचे वार्षिक आय वाले वर्ष प्रति वर्ष `35,000 से नीचे, 70 वर्ष और उससे अधिक के पेंशनभोगी हैं पेंशन `1,300 प्रदान की जा रही है प्रति माह बिना किसी आय के मानदंड।
बी) विशेष योग्यता राहत भत्ताःविशेष योग्यता राहत भत्ता `750 प्रति उनको महीना दिया जा रहा है विशेष योग्यजन जो हैं कम से कम 40 प्रतिशत होना विशेष योग्यता और किसकी वार्षिक आय से अधिक न हो `35,000 प्रति वर्ष। तक विशेष योग्यता वाले व्यक्ति 70 प्रतिशत से ऊपर हो रहा है `1,300 प्रति माह प्रदान किया गया बिना किसी आय मानदंड के इस शर्त के अधीन कि आवेदक को अंदर नहीं होना चाहिए शासकीय सेवा/अर्ध सरकारी सेवा/बोर्ड/ निगम और नहीं होना चाहिए किसी भी प्रकार के कब्जे में पेंशन. वर्तमान के दौरान वित्तीय वर्ष 2018-19 है 2,79,184 पेंशनभोगियों का लक्ष्य उपरोक्त योजनाओं के अंतर्गत. एक की राशि `337.41 करोड़ है दिसंबर तक खर्च किया गया, 2018 बजट के विपरीत 391.54 करोड़ का प्रावधान।
सी) विधवा / परित्यक्त / एकल नारी पेंशन:विधवा/ परित्यक्ता/एकल नारी पेंशन `750 प्रति माह हो रहा है उन विधवाओं को प्रदान किया गया/ वीरान/एकल नारी देवियाँ जिनकी आयु 45 वर्ष से अधिक है वार्षिक आय से अधिक न हो `35,000 प्रति वर्ष। दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 87732 का लक्ष्य है पेंशनभोगी। उपरोक्त के अंतर्गत योजना, `104.16 की राशि करोड़ तक खर्च किये जा चुके हैं दिसंबर, 2018 के विरुद्ध `127.36 का बजट प्रावधान करोड़.
घ) पुनर्वास भत्ता कुष्ठरोग:पुनर्वास कुष्ठ रोग भत्ता `750 प्रति को माह प्रदान किया जा रहा है कुष्ठ रोग का रोगी जो है स्वास्थ्य द्वारा पहचाना गया विभाग चाहे उनका कोई भी हो आयु और वार्षिक आय. दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 1482 का लक्ष्य है उपरोक्त के तहत पेंशनभोगी योजना। `108.14 की राशि लाख तक खर्च हो चुके हैं दिसंबर, 2018 के विरुद्ध `134.50 का बजट प्रावधान लाख.
ई) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुराना आयु पेंशन: (IGNOAP): इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था को पेंशन उपलब्ध करायी जा रही है जिन व्यक्तियों ने उपलब्धि प्राप्त कर ली है आयु 60 वर्ष या उससे अधिक और 136 बीपीएल परिवार से हैं। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 2018-19 का लक्ष्य है के तहत 97,434 पेंशनभोगी उपरोक्त योजना. की राशि 43.32 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं दिसंबर, 2018 तक बजट प्रावधान `47.36 करोड़.
च) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन (IGNWP):इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा को पेंशन उपलब्ध करायी जा रही है आयु वर्ग के बीच की विधवाएँ 40 से 79 वर्ष के हैं और हैं बीपीएल परिवार. वर्तमान के दौरान वित्तीय वर्ष 2018-19 है 23,016 पेंशनधारियों का लक्ष्य उपरोक्त योजना के तहत. एक की राशि `9.73 करोड़ है दिसंबर तक खर्च किया गया, 2018 बजट के विपरीत `11.43 करोड़ का प्रावधान।
जी) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विशेष योग्यता पेंशन: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विशेष योग्यता पेंशन दी जा रही है विशेष योग्यजनों को प्रदान किया गया आयु वर्ग के बीच के व्यक्ति 18 से 79 वर्ष के 80 वर्ष के विशेष योग्यता का प्रतिशत और बीपीएल परिवार से हैं। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 2018-19 का लक्ष्य है के तहत 1,024 पेंशनभोगी उपरोक्त योजना. की राशि `106.87 लाख खर्च किये गये दिसंबर, 2018 तक `134.50 का बजट प्रावधान लाख.
उपरोक्त सभी के लिए केंद्रीय पेंशन योजनाओं का योग `200 प्रति माह से 60 वर्ष तक 79 वर्ष की आयु और `500 प्रति माह से 80 वर्ष और उससे अधिक आयु तक के अंतर्गत पेंशनधारियों को प्रदान किया जा रहा है भारत सरकार द्वारा IGNOAPS. वहीं IGNWPS और IGNDPS के तहत 300 की राशि प्रदान की जा रही है भारत सरकार द्वारा. हालांकि शेष राशि `550 प्रति माह 70 वर्ष से कम और `800 प्रति माह 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगी IGNOAPS और `450 प्रति माह के तहत IGNWPS सेवा शुल्क के साथ है राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है और इसके लिए बजट प्रावधान राज्य के अधीन उद्देश्य बनाया गया है वृद्धावस्था एवं राज्य विधवा पेंशन योजनाएं, ताकि सामाजिक सुरक्षा एक समान दर पर पेंशन प्रदान की जा सकती है सभी पेंशनभोगियों को दरें `750 प्रति 70 वर्ष से कम आयु और `1,300 प्रति माह 70 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनभोगियों को मासिक और उम्र से ऊपर. इसी प्रकार नीचे IGNDPS, राज्य सरकार है प्रति माह `1000 प्रदान करना सेवा के साथ-साथ पेंशनभोगी अपने स्वयं के संसाधनों से शुल्क लेता है, इसलिए वह सभी 70 प्रतिशत और उससे ऊपर विशेष योग्यजन पेंशनधारियों को पेंशन मिलती है `1,300 प्रति की एकसमान दर पर महीना।
विभाग भी है तीनों को धन उपलब्ध कराना निगमों के माध्यम से; हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त और विकास निगम, हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम और हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निगम के अधीन विभिन्न को चलाने के लिए निवेश स्व-रोज़गार योजनाएँ. वहां एक है के लिए `8.77 करोड़ का बजट प्रावधान वर्ष 2018-19 एवं दिसम्बर तक, 2018, `1.63 करोड़ की राशि है रिहा कर दिया गया
इस कार्यक्रम के तहत, महत्वपूर्ण योजनाएं क्रियान्वित की गई 2018-19 के दौरान निम्नानुसार हैं:-
i) अंतरजातीय विवाह के लिए पुरस्कार: की प्रथा को ख़त्म करने के लिए अनुसूचित के साथ अस्पृश्यता जातियां और गैर अनुसूचित जातियाँ, राज्य सरकार अंतरजातीय को प्रोत्साहित करता है विवाह. इस योजना के तहत, प्रति जोड़ा `50,000 की राशि प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है। के लिए अंतरजातीय विवाह के दौरान 2018-19 का बजट प्रावधान के लिए 1.30 करोड़ रुपये रखे गए हैं उद्देश्य और 176 जोड़े हैं की राशि से लाभान्वित किया गया दिसंबर तक `88.00 लाख, 260 के लक्ष्य के विरूद्ध 2018 जोड़े.
ii) आवास सब्सिडी: इसके अंतर्गत योजना के सदस्यों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक, व्यक्ति विशेष योग्यता वाली, विधवा/ निराश्रित/एकल महिलाओं को दिया जाता है प्रति परिवार `1,30,000 की सब्सिडी गृह निर्माण प्रयोजनों के लिए और घर की मरम्मत के लिए `25,000 से जिनकी वार्षिक आय होती है `35,000 से अधिक नहीं। दौरान वर्ष 2018-19 की राशि `18.36 करोड़ उपलब्ध कराए गए हैं बजट में और 1,416 व्यक्ति की राशि से लाभान्वित हुए दिसंबर तक `16.42 करोड़, 2018.
iii) प्रशिक्षण और दक्षता कंप्यूटर एप्लीकेशन और संबद्ध गतिविधियाँःइसके अंतर्गत योजना कंप्यूटर प्रशिक्षण हैं मान्यता प्राप्त में प्रदान किया गया उम्मीदवारों को कंप्यूटर पाठ्यक्रम बीपीएल, एससी, एसटी ओबीसी से संबंधित, अल्पसंख्यक, विशेष योग्यता, एकल औरत और विधवा या वो जिनकी वार्षिक आय कम हो `2.00 लाख. विभाग वहन करता है प्रशिक्षण लागत अधिक न हो `1,350 प्रति माह प्रति उम्मीदवार और विशेष योग्यजनों के लिए `1,500 यदि कोई हो तो उम्मीदवारों का शेष लागत अभ्यर्थी द्वारा वहन किया जायेगा। दौरान प्रशिक्षण के लिए `1,000 का वजीफा प्रति माह प्रदान की जा रही है और `1,200 प्रति माह हो रहा है विशेष योग्यजन के लिए प्रदान किया गया उम्मीदवार। पूरा होने के बाद प्रशिक्षण, उम्मीदवार हैं में छह महीने के लिए रखा गया संगठन/कार्यालय, ताकि कंप्यूटर में दक्षता हासिल करें अनुप्रयोग। की अवधि के दौरान प्लेसमेंट `1,500 प्रति माह प्रति उम्मीदवार उपलब्ध कराया जा रहा है और `1,800 प्रति माह प्रति उम्मीदवार विशेष योग्यजन छात्रों के लिए है उपलब्ध कराया जा रहा है. साल के दौरान, 2018-19, का बजट प्रावधान जिसमें से 4.66 करोड़ रुपये रखे गए हैं `1.10 करोड़ की राशि है दिसंबर, 2018 तक खर्च किया गया और 3,668 प्रशिक्षु थे के लक्ष्य के विरूद्ध लाभान्वित किया गया 3,940 प्रशिक्षु।
iv) अनुवर्ती कार्यक्रम: के अंतर्गत यह योजना, `1,300 प्रति लाभार्थी को उपलब्ध कराया जा रहा है बढ़ईगीरी के लिए उपकरणों की खरीद, बुनाई और चमड़े का काम और सिलाई की खरीद के लिए `1,800 अनुसूचित जाति को मशीन, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग जिसका वार्षिक से अधिक आय नहीं होती `35,000 प्रति वर्ष। साल के लिए 2018-19 का बजट प्रावधान इसके तहत 1.34 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया योजना जिसमें से एक राशि 0.56 करोड़ रुपये खर्च किये गये तक 3,111 व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया दिसंबर, 2018 के मुकाबले 7,416 लाभार्थी.
v) पीड़ितों को मुआवजा अनुसूचितों पर अत्याचार एससी/एसटी के अंतर्गत जाति/अनुसूचित जनजाति परिवार (पीओए) अधिनियम-1989ःके नियमों के अंतर्गत उपरोक्त अधिनियम मौद्रिक राहत है अनुसूचित लोगों को प्रदान किया गया जातियाँ, अनुसूचित जनजाति परिवार जो अत्याचार का शिकार बनते हैं के सदस्य द्वारा प्रतिबद्ध जाति के कारण अन्य समुदाय विचार, राहत की राशि `1.00 लाख से `8.25 लाख है अत्याचार के पीड़ितों को प्रदान किया गया, जो प्रकृति पर निर्भर करता है अत्याचार का. साल के दौरान 2018-19 बजट के विपरीत `80.00 लाख का प्रावधान 62.41 लाख की धनराशि व्यय की गई इसके तहत दिसंबर, 2018 तक इस योजना से 71 को लाभ हुआ व्यक्ति.
विभाग है व्यापक कार्यान्वयन एकीकृत योजना का नाम "असीम" रखा गया (सक्षम, सशक्त बनाने की एक योजना और विशेष की मुख्यधारा सक्षम) विशेष व्यक्तियों के लिए क्षमताएं. के घटक योजना के साथ-साथ वित्तीय एवं दिसंबर तक की भौतिक उपलब्धि, 2018 इस प्रकार है:-
i) विशेष रूप से सक्षम छात्रवृत्ति: यह योजना सभी के लिए लागू है विशेष योग्यजनों की श्रेणियाँ श्रवण सहित छात्र विकलांग व्यक्तियों के पास विशेष 40 प्रतिशत या उससे अधिक की क्षमता वहाँ परिवार पर विचार किए बिना आय। छात्रवृत्ति की दर `625-3,750 प्रति से भिन्न होता है दिन के विद्वानों के लिए महीना और `1,875-5,000 प्रति माह के लिए बोर्डर. बजट के ख़िलाफ़ `1.94 करोड़ तक का प्रावधान दिसंबर, 2018 पूरी रकम व्यय एवं लाभान्वित किया गया है 2,089 छात्र।
ii) व्यक्तियों को विवाह अनुदान के साथ विवाह करने वाले व्यक्ति विशेष योग्यताएँ:को सक्षम युवाओं को प्रोत्साहित करें पुरुषों या लड़कियों विशेष से शादी करने के लिए सक्षम लड़का हो या लड़की कम नहीं है 40 प्रतिशत से अधिक विशेष योग्यता और जिन्होंने प्राप्त कर लिया है विवाह योग्य आयु, यदि दोनों हैं विशेष योग्यजन, विवाह अनुदान जो हैं उन्हें 25,000 रु 40 से 69 वर्ष के विशेष योग्यजन प्रतिशत और उन लोगों को 50,000 रु जो अधिक विशेष योग्यजन हैं द्वारा 70 प्रतिशत से अधिक प्रदान किया जाता है राज्य सरकार. ख़िलाफ़ का बजट प्रावधान `0.67 करोड़ `0.21 की राशि करोड़ तक खर्च किये जा चुके हैं दिसंबर, 2018, वहां तक 134 व्यक्तियों को लाभ।
iii) जागरूकता सृजन और ओरिएंटेशन:प्रावधान है ब्लॉक को व्यवस्थित करने के लिए बनाया गया है और जिला स्तरीय समग्र के प्रतिनिधि के लिए शिविर व्यक्तियों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन विशेष योग्यताएं, एसएचजी और घास पर पीआरआई के प्रतिनिधि जड़ स्तर. इन शिविरों में चिकित्सा प्रमाण पत्र, सहायता और को आवेदन पत्र उपलब्ध कराये गये हैं विशेष योग्यता वाले व्यक्ति. ए इससे सभी योजनाएं अलग हो गईं वाले व्यक्तियों के लिए चलाया जा रहा है में विशेष योग्यताओं का प्रचार किया जाता है ये शिविर. एक बजट है हेतु `0.30 करोड़ का प्रावधान वर्ष 2018-19 एवं तक दिसंबर, 2018 के अंतर्गत योजना में कोई राशि नहीं दी गयी है खर्च किया गया।
iv) स्व-रोज़गार: विशेष सक्षम व्यक्तियों के पास विशेष 40 प्रतिशत और उससे अधिक की क्षमता द्वारा ऋण उपलब्ध कराया जाता है हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त और विकास लघु स्थापना के लिए निगम उद्यम. एससी/ओबीसी और अल्पसंख्यक कार्य विभाग परियोजनाओं पर सब्सिडी प्रदान करता है एच.पी. द्वारा स्वीकृत अल्पसंख्यकों वित्त और विकास निगम `10,000 या 20 तक परियोजना लागत का प्रतिशत (जो भी कम हो)। दौरान 2018-19 दिसंबर, 2018 तक, `3.32 करोड़ की राशि का ऋण द्वारा जारी किया गया है हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त और विकास 110 व्यक्तियों को निगम विशेष योग्यता के साथ. का प्रस्ताव अल्पसंख्यकों से सब्सिडी का इंतजार है निगम.
v) कौशल संवर्धन: व्यावसायिक दिव्यांगजनों को पुनर्वास प्रशिक्षण चयनित आईटीआई के माध्यम से है चिन्हित ट्रेडों में प्रदान किया गया। प्रशिक्षण निःशुल्क है और वजीफा `1,000 प्रति माह है विभाग द्वारा भुगतान किया गया। बजट `10.00 लाख का प्रावधान है के अंतर्गत प्रदान किया गया है योजना। वर्तमान के दौरान वित्तीय वर्ष, 45 विशेष योग्यजन बच्चों को प्रायोजित किया गया है प्रशिक्षण के लिए। प्रस्ताव का इंतजार है तकनीकी शिक्षा से.
vi) पुरस्कार की योजना: प्रावधान सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहन विशेष योग्यजन व्यक्तियों और निजी नियोक्ता उपलब्ध करा रहे हैं अधिकतम रोजगार उनके विशेष योग्यजन संगठन बनाया गया है. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले व्यक्ति हैं का नकद पुरस्कार दिया जाएगा `10,000 प्रत्येक। सर्वोत्तम निजी नियोक्ता को नकद राशि प्रदान की जानी है `5,000 का प्रोत्साहन।
vii) बच्चों के संस्थान विशेष आवश्यकताएँ:दो संस्थाएँ ढली और सुंदरनगर में हैं के लिए राज्य में स्थापित किया गया है शिक्षा प्रदान करना और व्यावसायिक पुनर्वास देखने और सुनने की सेवाएँ विकलांग बच्चे. में "बच्चों के लिए संस्थान विशेष योग्यता” सुन्दरनगर 14 देखने में और 98 सुनने में विकलांग लड़कियाँ रही हैं दाखिला लिया। इसके अलावा, 8 दृष्टिगत रूप से विकलांग और 3 श्रवण बाधित विकलांग लड़कियाँ ले रही हैं में विशेष आईटीआई में प्रशिक्षण सुंदरनगर. किस किस को भोजन, आवास और चिकित्सा द्वारा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं विभाग। दौड़ने के लिए और इसका रखरखाव बजट के खिलाफ संस्था `1.47 करोड़ का प्रावधान 1.23 करोड़ का व्यय हुआ है दिसंबर तक किया गया खर्च 2018. इसके अलावा एक रकम `28.04 लाख का हो गया है के लिए डीडब्ल्यूओ मंडी को प्रदान किया गया का संचालन एवं रखरखाव आईसीपीएस के तहत आईसीएसए सुंदरनगर। इसके अलावा `60.19 लाख है पुराने की मरम्मत के लिए प्राप्त हुआ है आईसीएसए सुंदरनगर का भवन जिसमें से `30.19 लाख है डीडब्ल्यूओ मंडी को जारी कर दिया गया है दिसंबर, 2018 तक HPCCW द्वारा संचालित संस्था ढल्ली (शिमला) और दाड़ी (कांगड़ा) स्कूल की एक राशि `39.92 लाख जारी किए गए हैं विभाग द्वारा इसके विरूद्ध `202.00 का बजट प्रावधान लाख. इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार अनुदान दे रही है और नि:शुल्क भोजन, आवास और कैदियों को चिकित्सा सुविधाएं प्रेम आश्रम ऊना, आस्था का वेलफेयर सोसायटी, नाहन, पैराडाइज़ चिल्ड्रेन केयर सेंटर, चुवाड़ी, आदर्श शिक्षा सोसायटी कलाथ, कुल्लू एवं उड़ान रेस्पिट केयर सेंटर, मिलने के लिए नया शिमला बोर्डिंग पर खर्च, 50 का आवास और शिक्षा मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चे और 20 मानसिक रूप से विक्षिप्त पुरुष वयस्क, 30 मानसिक रूप से विक्षिप्त वयस्क पुरुष और महिला (10 महिला और 20 पुरुष), 60 मानसिक रूप से विकलांग वयस्क महिलाएं और 15 मानसिक रूप से मंदबुद्धि बच्चे हो गए हैं प्रति कैदी `5,500 प्रदान किया गया क्रमशः महीना. एक बजट `105.00 लाख का प्रावधान है प्रदान किया गया और कोई राशि नहीं दिसंबर तक खर्च हो चुका है 2018.
viii) सेपियल क्षमता पुनर्वास केंद्र (डीआरसी):दो विशेष क्षमता पुनर्वास केंद्र हमीरपुर में स्थापित किये गये हैं और धर्मशाला के अंतर्गत एनपीआरपीडी. ये केंद्र हैं डीआरडीए के माध्यम से चलाया जा रहा है हमीरपुर और भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, धर्मशाला क्रमश। साल के दौरान 2018-19 की राशि `15.00 के तहत लाख का प्रावधान किया गया है यह योजना।
अनुसूचित जाति में इस प्रदेश में केंद्रित नहीं हैं विशिष्ट क्षेत्र लेकिन व्यापक रूप से हैं बिखरा हुआ और लाभान्वित होगा बाकी आबादी के समान ही। तदनुसार, आर्थिक दृष्टिकोण अनुसूचित के मामले में विकास जाति उप-योजना क्षेत्र आधारित नहीं है जनजातीय उप-योजना का मामला. बिलासपुर, कुल्लू, मण्डी, सोलन, शिमला और सिरमौर हैं मुख्य रूप से अनुसूचित जातियाँ जनसंख्या वाले जिले जहां अनुसूचित हैं जातियों का संकेन्द्रण ऊपर है राज्य का औसत. ये छह जिले 61.09 को एक साथ लिया गया अनुसूचित जाति का प्रतिशत राज्य में जनसंख्या.
शेड्यूल बनाने के लिए जाति उप-योजना की आवश्यकता आधारित और के लिए सिंगल लाइन सिस्टम प्रभावी है योजना निर्माण एवं अनुश्रवण किया गया है पेश किया गया है जिससे फंड हैं के आधार पर प्रत्येक जिले को आवंटित किया गया निश्चित पैरामीटर जो हैं एक जिले से दूसरे जिले में परिवर्तनीय नहीं दूसरे जिले और योजनाएं तैयार की जाती हैं प्रत्येक जिले के लिए जिला स्तर पर डिप्टी की निगरानी आयुक्त और के साथ परामर्श में जिला/क्षेत्रीय प्रमुख कार्यान्वयन के कार्यालय विभाग।
विभिन्न कार्यक्रम अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है। यद्यपि अनुसूचित जाति समुदायों को लाभ मिल रहा है सामान्य योजना के साथ-साथ जनजातीय भी उप-योजना, अभी तक उपलब्ध कराने के क्रम में व्यक्तिगत के अंतर्गत विशेष कवरेज लाभार्थी कार्यक्रम और में बुनियादी ढांचे का विकास अनुसूचित जातियाँ केन्द्रित थीं गाँव, कुल का 25.19 प्रतिशत राज्य योजना आवंटन के लिए निर्धारित है अनुसूचित जाति उपयोजना. मुख्य राज्य सरकार का जोर है अधिक से अधिक यथार्थवादी की पहचान करना योजनाएं, जो उत्पन्न कर सकती हैं पर्याप्त आय और रोजगार अनुसूचित जाति के परिवार.
एक अलग सब मेजर शीर्षक "789" के लिए बनाया गया है अनुसूचित जाति उपयोजना एवं ए अलग मांग (मांग संख्या 32) भी बनाया गया है. इस तरह के एक व्यवस्था भटकाने में बहुत सहायक है एक योजना से दूसरी योजना में धनराशि एक ही प्रमुख सिर और एक से 100 सुनिश्चित करने के लिए दूसरे की ओर प्रमुख सिर एससीएसपी के अंतर्गत प्रतिशत व्यय। वर्ष 2018-19 के दौरान कुल के तहत 1,586.97 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए अनुसूचित जाति का कल्याण राज्य और `1,788.49 करोड़ रहा है वर्ष 2019-20 हेतु प्रस्तावित।
जिला स्तरीय समीक्षा एवं क्रियान्वयन समिति ने किया है के तहत जिला स्तर पर गठित किया गया है के मंत्री की अध्यक्षता जिला एवं उपायुक्त के रूप में इसके उपाध्यक्ष. के अध्यक्ष जिला परिषद और सभी बीडीसी के अध्यक्ष सहित अन्य प्रमुख स्थानीय व्यक्ति रहे हैं गैर-सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत एवं सभी संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी एससीएसपी के साथ आधिकारिक सदस्य के रूप में समीक्षा, निरूपण और अनुसूचित जाति का कार्यान्वयन उप-योजना. के मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ त्रैमासिक समीक्षा बैठक की राज्य में प्रशासनिक सचिव स्तर। इसके अलावा, एक उच्च शक्ति प्राप्त समन्वय एवं समीक्षा समिति के अंतर्गत गठित किया गया है माननीय प्रमुख की अध्यक्षता मंत्री जी इसकी समीक्षा भी करते हैं अनुसूचित जाति का प्रदर्शन वर्ष में एक बार उप-योजना
95,772 एससी हैं राज्य में जो परिवार रहे हैं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हुए पाया गया द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण विकास विभाग वर्ष 2007 के दौरान. वर्ष के लिए 2018-19 में 2,038 का लक्ष्य है परिवारों का प्रस्ताव किया गया है और 4,134 तक परिवारों को लाभ हुआ नवंबर, 2018. इस के अलावा पोस्ट मेट्रिक स्कॉलरशिप होनी है गैर के तहत अनुसूचित जाति के छात्रों को प्रदान किया गया लक्षित योजना.
i) एकीकृत बाल संरक्षण योजना (अब इसका नाम चाइल्ड रखा गया है संरक्षण योजना): बाल संरक्षण सेवाएँ है सुधार के लिए योगदान दें बच्चों की भलाई में कठिन परिस्थितियाँ भी की कमी के संबंध में स्थितियों के प्रति संवेदनशीलता और ऐसे कार्य जो दुरुपयोग की ओर ले जाते हैं उपेक्षा, शोषण, का परित्याग और पृथक्करण माता-पिता से बच्चे. बच्चा देखभाल संस्थाएँ पंजीकृत किशोर न्याय (देखभाल) के तहत और बच्चों की सुरक्षा) एक्ट.2015 के अंतर्गत आते हैं योजना। वर्तमान में 48 बच्चे देखभाल संस्थान, जिसमें शामिल हैं 41 बाल गृह, 2 अवलोकन गृह-सह-विशेष, गृह-सह-स्थान सुरक्षा, 4 खुले आश्रय और 1 शिशु गृह (विशेषीकृत) दत्तक ग्रहण अभिकरण) चलाये जा रहे हैं स्कीम के तहत। के लिए जेजे एक्ट को सभी जगह लागू किया जाए जिले, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समितियाँ एवं जिला स्तर सलाहकार बोर्ड स्थापित किये गये हैं राज्य में ऊपर. चाइल्ड लाइन आपातकालीन सेवाओं का असर फोन नंबर। 1098 भी रहा है यानी सात जिलों में स्थापित शिमला, कुल्लू, कांगड़ा, सोलन, मंडी, चंबा और सिरमौर स्कीम के तहत। दौरान चालू वित्तीय वर्ष कुल केंद्र से बजट का आवंटन `14.34 करोड़ एवं राज्यांश है जिसमें से `78.09 लाख है `11.72 करोड़ की लागत आई है 12.12.2018 तक.
ii) मुख्यमंत्री बाल उद्धार योजना: यह योजना बन रही है राज्य द्वारा कार्यान्वित किया गया पूरक करने के लिए सरकार केन्द्र प्रायोजित बालक संरक्षण सेवा योजना. योजना के तहत वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है चाइल्ड केयर छोड़ने के बाद बच्चे आगे बढ़ाने के लिए संस्थाएँ उच्च/व्यावसायिक शिक्षा. अनुदान सहायता भी प्रदान की जाती है एचपी काउंसिल फॉर चाइल्ड कल्याण। वर्तमान के दौरान वित्तीय वर्ष 2018-19, विरूद्ध बजट प्रावधान `573.05 लाख, `208.71 का व्यय लाख तक का खर्च आया है नवंबर, 2018. 142
iii) बाल/बालिका सुरक्षा योजना और पालन-पोषण देखभाल कार्यक्रम: बाल/बालिका सुरक्षा योजना और पालन-पोषण देखभाल कार्यक्रम हैं राज्य में क्रियान्वित किया जा रहा है देखभाल की दृष्टि से और अनाथ/असहाय का भरण-पोषण करें सौहार्दपूर्ण परिवार में बच्चे पर्यावरण। बाल बालिका सुरक्षा योजना/पालन देखभाल कार्यक्रम की एक राशि `2,000 प्रति बच्चा प्रति माह हैं पालक के पक्ष में स्वीकृत भरण-पोषण के लिए माता-पिता बच्चे और `300 प्रति बच्चा प्रति माह पर स्वीकृत किये गये हैं अतिरिक्त सहायता का लेखा राज्य सरकार की ओर से बच्चों के पक्ष में रखा गया पालन-पोषण की देखभाल और में जमा किए जाते हैं उसका बैंक खाता या पोस्ट कार्यालय खाता परिपक्व होना है और उसके बाद बच्चे द्वारा खींचा गया 18 वर्ष की आयु प्राप्त करना। इस योजना के तहत इस दौरान चालू वित्तीय वर्ष, ए `273.93 लाख का व्यय तक खर्च किया गया है नवंबर, 2018 में लाभ होगा 1,019 बच्चे।
iv) एकीकृत बाल विकास सेवाएँ: एकीकृत बाल विकास सेवाएँ'' (आईसीडीएस) कार्यक्रम है सभी में क्रियान्वित किया जा रहा है के विकासात्मक ब्लॉक 78 आईसीडीएस परियोजनाओं के माध्यम से राज्य। को सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं बच्चे और गर्भवती/स्तनपान कराने वाली 18,386 माताओं के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्र और 539 मिनी राज्य में आंगनवाड़ी केंद्र। विभाग उपलब्ध करा रहा है अनुपूरक पोषण, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच रेफरल सेवाएँ और गैर औपचारिक प्री-स्कूल शिक्षा है 90:10 पर क्रियान्वित किया जा रहा है (केंद्र: राज्य) आधार। वहां एक है `284.48 का बजट प्रावधान वर्ष 2018-19 के लिए करोड़ में से किस राज्य का हिस्सा `30.34 है करोड़ और केन्द्रांश है `254.14 करोड़, की राशि `113.92 करोड़ खर्च किये गये नवंबर, 2018 तक जिसमें राज्य का हिस्सा `5.73 करोड़ है और केंद्र का हिस्सा `108.19 है करोड़. का मासिक मानदेय `3,000, `1,500 और `2,250 है की सरकार द्वारा तय किया गया है आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भारत, सहायिका एवं मिनी आंगनवाड़ी क्रमशः कार्यकर्ता। 10 प्रतिशत का मानदेय वहन किया जाता है राज्य सरकार एवं 90 केंद्र द्वारा प्रतिशत सरकार। राज्य सरकार `1,750, `900 और का भुगतान भी कर रहा है आंगनवाड़ी को `1,050 प्रति माह कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिका और मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रति इसके अलावा महीना 10 प्रतिशत हिस्सेदारी.
v) पूरक पोषण कार्यक्रम: इस कार्यक्रम के तहत, पूरक पोषण है आंगनवाड़ी केन्द्रों में उपलब्ध कराया गया बच्चों, गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए माताएं एवं बीपीएल किशोरियां लड़कियाँ। पोषण प्रदान किया जाता है साल में 300 दिन के लिए. दरें (प्रति लाभार्थी) निर्धारित किया गया है प्रति दिन) बच्चे `8, गर्भवती/ स्तनपान कराने वाली महिला `9.50, किशोर लड़कियाँ `5 और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे`12. इसके अंतर्गत व्यय कार्यक्रम द्वारा वहन किया जाता है केंद्र और राज्य सरकारें 90:10 के आधार पर. दौरान चालू वित्तीय वर्ष, वहाँ एक है राज्यांश के रूप में बजट प्रावधान `8.16 करोड़ और `52.32 करोड़ का भारत सरकार से अनुदान के रूप में प्राप्त हुए हैं और नवंबर, 2018 तक, `3.67 करोड़ राज्यांश एवं 143 `34.88 करोड़ केंद्र का हिस्सा है इस योजना के तहत उपयोग किया गया। 3,97,048 बच्चे और 96,228 गर्भवती/स्तनपान कराने वाली माताएँ लाभान्वित हुए हैं.
विभिन्न योजनाएं हैं के कल्याण हेतु क्रियान्वित किया जा रहा है प्रदेश में महिलाएं. प्रमुख योजनाएँ इस प्रकार हैं:-
ए) महिला राज्य गृह मशोबराःमुख्य उद्देश्य योजना का उद्देश्य निःशुल्क प्रदान करना है आश्रय, भोजन, वस्त्र, शिक्षा स्वास्थ्य एवं दवाइयां, परामर्श और युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण लड़कियाँ, विधवाएँ, परित्यक्ता, निराश्रित और महिलाएं जो अंदर हैं नैतिक ख़तरा. वर्तमान में 27 कैदी और 2 बाल कैदी राजकीय गृह में रह रहे हैं, मशोबरा। के पुनर्वास हेतु ऐसी महिलाएं राज्य छोड़ने के बाद घर, आर्थिक सहायता तक प्रति महिला 20,000 रुपये प्रदान किये जाते हैं। विवाह के मामले में सहायता `51,000 की राशि भी प्रदान की गई औरत। बजट के ख़िलाफ़ के दौरान `118.58 लाख का प्रावधान वित्तीय वर्ष तक नवंबर, 2018 की राशि 29.26 लाख रुपये खर्च किये गये हैं राज्य का संचालन/रखरखाव घर।
बी) मुख्यमंत्री कन्यादान योजनाःइस कार्यक्रम के अंतर्गत 40,000 का विवाह अनुदान है के अभिभावकों को दिया जा रहा है बेसहारा लड़कियों को उनके लिए विवाह ने अपना वार्षिक प्रदान किया आय से अधिक नहीं होती `35,000. 2018-19 के दौरान, ए `532.00 का बजट प्रावधान इसके लिए लाख रुपये रखे गये हैं उद्देश्य जिसमें से एक राशि 444.61 लाख रुपये खर्च किये गये और 1,111 लाभार्थी थे नवंबर, 2018 तक कवर किया गया।
सी) स्व-रोज़गार सहायता महिलाःइस योजना के तहत `5,000 प्रदान किए जाते हैं जिन महिलाओं की वार्षिक आय होती है ले जाने के लिए `35,000 से कम आय सृजन गतिविधियाँ. ए `8.02 लाख का बजट प्रावधान बन गया। 146 महिलाएं के तहत लाभान्वित किया गया है योजना और `7.30 की राशि लाख तक खर्च हो चुका है नवंबर, 2018.
घ) विधवा पुनर्विवाह योजना: का मुख्य उद्देश्य योजना में मदद करना है बाद में विधवा का पुनर्वास पुन: विवाह। इस योजना के तहत अनुदान के रूप में `50,000 की राशि, जोड़े को प्रदान किया जाता है। दौरान वर्ष 2018-19, एक बजट `104.00 लाख का प्रावधान रखा गया है जिसके विरूद्ध इस योजना के तहत 59 को 29.50 लाख रुपए दिए गए हैं नवंबर तक ऐसे जोड़े 2018.
ई) मदर टेरेसा असहाय मातृ संबल योजना:इसका उद्देश्य योजना सहायता प्रदान करने के लिए है `5,000 प्रति बच्चा प्रति वर्ष से संबंधित निराश्रित महिलाएं जो बीपीएल परिवार हैं या हैं आय ₹ 35,000 से कम उनके बच्चों का भरण-पोषण जब तक वे 18 वर्ष के नहीं हो जाते साल। सहायता होगी केवल दो बच्चों के लिए प्रदान किया गया। इसके लिए बजटीय प्रावधान वर्ष 2018-19 के लिए योजना है `10.00 करोड़, जिसमें से `4.41 करोड़ तक का उपयोग किया जा चुका है नवंबर, 2018 और 22,242 बच्चों को लाभ हुआ है.
च) विशेष महिला उत्थान योजना: में इस योजना की शुरुआत की गई है भारत के 100 जिले शामिल हिमाचल का ऊना जिला प्रदेश. राज्य सरकार ने विशेष महिला उत्थान की शुरुआत की योजना शत-प्रतिशत राज्य योजना के रूप में प्रशिक्षण हेतु योजना एवं 144 नैतिक रूप से महिलाओं का पुनर्वास राज्य में खतरा. वहां एक है वजीफा प्रदान करने का प्रावधान `3,000 प्रति माह प्रति प्रशिक्षु, प्रशिक्षण लागत `25 प्रति प्रशिक्षु घंटा और परीक्षण शुल्क `800 प्रति विभाग के माध्यम से प्रशिक्षु महिलाओं और बच्चों का विकास। धारा में वर्ष, बजट प्रावधान है जिसमें से 1.10 करोड़ रु की राशि `32.00 लाख रही है नवंबर, 2018 तक बिताया।
जी) वित्तीय सहायता और पीड़ितों को सहायता सेवाएँ बलात्कार योजना 2012 का:यह योजना को अधिसूचित कर दिया गया है 22.09.2012 को 100 प्रतिशत राज्य योजना योजना. योजना का उद्देश्य प्रदान करना है वित्तीय सहायता और समर्थन परामर्श जैसी सेवाएँ, चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता, शिक्षा और व्यावसायिक के आधार पर प्रशिक्षण बलात्कार पीड़ितों की जरूरतें. एक प्रभावित महिला हकदार होगी वित्तीय सहायता के लिए और पुनर्स्थापना समर्थन/सेवाएँ अधिकतम राशि तक जोड़ना `75,000 का. अतिरिक्त 25,000 की सहायता भी कर सकते हैं विशेष मामलों में अर्थात् में दिया जाना चाहिए नाबालिग से दुष्कर्म का मामला. दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट है `1.10 करोड़ का प्रावधान जिसकी राशि `90.10 लाख है तक खर्च किया गया है नवंबर, 2018.
ज) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजनाःइस योजना में है के 100 जिलों में लॉन्च किया गया है भारत का ऊना जिला भी शामिल है हिमाचल प्रदेश। साल में 2016-17 योजना रही है कांगड़ा और हमीरपुर में शुरू हुआ हिमाचल प्रदेश के जिले. वित्तीय वर्ष के दौरान बेटी बचाओ बेटी के तहत 2017-18 पढ़ाओ योजना पांच जिले का चयन किया गया अर्थात् सोलन, सिरमौर, शिमला, बिलासपुर और हिमाचल प्रदेश के मंडी के साथ रोकने का उद्देश्य लिंग आधारित लिंग चयनात्मक उन्मूलन, अस्तित्व सुनिश्चित करना, की सुरक्षा और शिक्षा बच्ची। यह योजना एक है गिरफ्तारी और वापसी की पहल एक प्रतिकूल और की प्रवृत्ति बाल लिंगानुपात में गिरावट. इस प्रक्रिया के माध्यम से, प्रयास बनाने के लिए बनाये जा रहे हैं जनता के बीच जागरूकता के दुष्परिणामों के बारे में घटता लिंगानुपात.
परिवर्तन की दृष्टि से परिवार और समुदाय का नकारात्मक रवैया जन्म के समय लड़की के प्रति और लड़कियों के नामांकन और ठहराव में सुधार लाना स्कूलों में बच्चे, बेटी है अनमोल में योजना क्रियान्वित की जा रही है राज्य। इस योजना के तहत जन्म के बाद दो लड़कियों को 12,000 रुपये का अनुदान प्रदान किया जाता है केवल बीपीएल परिवारों से संबंधित और प्रथम श्रेणी से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है उनकी शिक्षा के लिए स्नातक स्तर तक। से लेकर छात्रवृत्ति की दरें `450 से `5,000 प्रति वर्ष। साल के लिए 2018-19 का बजट प्रावधान है `12.00 करोड़, और `856 की राशि नवंबर तक खर्च हो चुके हैं करोड़ों रुपये 2018 और 16,000 लड़कियाँ रही हैं लाभ हुआ.
किशोरों के लिए योजना गर्ल्स (एसएजी) को सार्वभौमिक बना दिया गया है 01.04.2018 से और पूरी तरह से किशोरी शक्ति योजना का स्थान लिया। योजना क्रियान्वित की जा रही है की आंगनवाड़ी सेवाओं के माध्यम से छाता आईसीडीएस मंच और आंगनवाड़ी केंद्र केंद्र बिंदु हैं सेवाओं की डिलीवरी के लिए योजना स्कूल से बाहर सहायता करना लक्ष्य है 11-14 वर्ष की किशोरियाँ (OoSAGS)। 145 सफलतापूर्वक परिवर्तन के लिए वर्ष की आयु औपचारिक स्कूली शिक्षा या पुल पर वापस सीखना, उनके पोषण में सुधार करना और स्वास्थ्य स्थिति, जागरूकता को बढ़ावा देना स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और के बारे में घर जैसे विभिन्न कौशलों का उन्नयन कौशल, जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल और मौजूदा सार्वजनिक सेवाओं पर मार्गदर्शन। योजना का लागत साझाकरण अनुपात है केंद्र और के बीच 90:10 राज्य। 593 स्कूल से बाहर हैं 11-14 वर्ष की आयु की किशोरियाँ हिमाचल प्रदेश। पूरक सभी को पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है किशोर लड़कियाँ `9.50 प्रति प्रतिदिन किशोरियाँ।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना यूजना एक सेंट्रल हैं प्रायोजित योजना. लागत बँटवारा योजना का अनुपात 90:10 है केंद्र और राज्य. मुख्य PMMVY का उद्देश्य प्रदान करना है वेतन हानि के लिए आंशिक मुआवजा नकद प्रोत्साहन के संदर्भ में ताकि महिलाएं पहले पर्याप्त आराम कर सकती हैं और पहले जीवित बच्चे के जन्म के बाद और नकद प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा बेहतर स्वास्थ्य खोज की ओर ले जाएं गर्भवती के बीच व्यवहार महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ। अंतर्गत प्रधानमंत्री मातृ वंदना यूजाना, `5,000 का नकद प्रोत्साहन में सीधे प्रदान किया जाएगा गर्भवती महिलाओं का खाता और स्तनपान कराने वाली माताएँ तीन किश्तों में पहले जीवित बच्चे के लिए, पूर्ति के अधीन मातृ संबंधी विशिष्ट स्थितियाँ और बाल स्वास्थ्य. की राशि 20.06 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं 54,800 के बैंक खाते प्रत्यक्ष लाभ के माध्यम से लाभार्थियों 2018-19 के दौरान स्थानांतरण (डीबीटी) मोड 15.12.2018 तक.
वन स्टॉप सेंटर एक है केंद्रीय प्रायोजित योजना. मुख्य योजना का उद्देश्य प्रदान करना है को एकीकृत समर्थन और सहायता हिंसा से प्रभावित महिलाएं, दोनों में निजी और सार्वजनिक स्थान एक के अंतर्गत छत; और तत्काल सुविधा के लिए, आपातकालीन और गैर-आपातकालीन पहुंच सहित सेवाओं की एक श्रृंखला के लिए चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और एक ही छत के नीचे परामर्श सहायता किसी भी प्रकार की हिंसा के विरुद्ध लड़ें महिलाओं के खिलाफ. हिमाचल प्रदेश में पर वन स्टॉप सेंटर स्थापित किया गया है सोलन जिला. वित्तीय वर्ष के दौरान `17.04 लाख की राशि हो चुकी है वन स्टॉप सेंटर सोलन द्वारा प्राप्त किया गया और कुल 53 महिलाएँ रही हैं वन स्टॉप सेंटर के तहत सुविधा दी गई। में वित्तीय वर्ष 2018-19 सरकार भारत ने वन स्टॉप सेंटर को मंजूरी दे दी है मण्डी जिले के लिए और धनराशि वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है मण्डी जिला में प्राप्त हुआ।
भारत सरकार ने नामतः एक नई योजना को मंजूरी दी गई ग्रामीण को सशक्त बनाने के लिए महिला शक्ति केंद्र समुदाय के माध्यम से महिलाएं भागीदारी. सामुदायिक व्यस्तता कॉलेज छात्र स्वयंसेवकों के माध्यम से है 115 सबसे पिछड़े में कल्पना की गई ब्लॉक स्तर के हिस्से के रूप में जिले पहल. छात्र स्वयंसेवक खेलेंगे जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका विभिन्न महत्वपूर्ण के संबंध में पीढ़ी सरकारी योजनाएँ/कार्यक्रम यथा साथ ही सामाजिक मुद्दे भी. महिला शक्ति केन्द्र द्वारा स्वीकृत किया गया है हिमाचल प्रदेश के जिलों में यानि वर्ष के लिए ऊना, कांगड़ा और हमीरपुर 2017-18 और छह और जिले शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, मंडी और ब्लॉक स्तर पर पिछड़ा जिला चम्बा का चयन किया गया है वर्ष 2018-19 के लिए. स्कीम है लागत साझाकरण अनुपात के माध्यम से कार्यान्वित किया गया केंद्र और राज्यों के बीच 90:10 का. `1.24 करोड़ की राशि रही है जारी किया गया और `36.32 लाख किया गया है वित्तीय वर्ष के लिए पुनः मान्य किया गया 2018-19. आगे की मंजूरी मिल गई है के लिए सरकार द्वारा अवगत कराया गया में महिला शक्ति केन्द्र का कार्यान्वयन जिला चम्बा एवं भरने हेतु महिला कल्याण अधिकारी का एक पद और दो जिला समन्वयक जिला चम्बा में आउटसोर्सिंग आधार।
बजट भाषण में वित्तीय वर्ष 2017-18, नई योजना सशक्त महिला योजना रही है सशक्त बनाने की दृष्टि से परिकल्पना की गई है ग्रामीण महिलाओं को एक प्रदान करके संगठन और सामाजिक आर्थिक विकास के लिए इंटरफ़ेस और बनाना राज्य की हर महिला अच्छी है शिक्षित, कुशल और आत्मनिर्भर हर सम्मान इस प्रकार योगदान देता है का सामाजिक-आर्थिक विकास राज्य। इस योजना पर फोकस किया जाएगा सामाजिक-आर्थिक को बढ़ावा देना ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण उनके अधिकार के बारे में जागरूकता पैदा करना और संस्थागत समर्थन की सुविधा प्रदान करना उन्हें अपने अधिकार का एहसास करने में सक्षम बनाना और अपनी पूरी क्षमता का विकास/उपयोग करें। योजना सभी किशोरों को कवर करेगी 11-18 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियाँ और 19 वर्ष की आयु वर्ग की सभी महिलाएं- 45 वर्ष. शशकत महिला केंद्र करेगा की प्रत्येक पंचायत में स्थापित की जाये राज्य.सशक्त महिला केन्द्र होगा के बीच की आयु वाली महिलाओं द्वारा शासित 19-45 वर्ष जिनके पास ज्ञान/ सामाजिक कार्य या महिलाओं में विशेषज्ञता उनके स्थानीय क्षेत्र/गांव में संबंधित समस्या। सशक्त महिला केंद्र की स्थापना की जायेगी महिलाओं में जागरूकता पैदा करना और लड़कियों को उनके अधिकारों और कानूनों के बारे में बताया गया महिलाओं से संबंधित. की सरकार हिमाचल प्रदेश ने मंजूरी दे दी है वित्तीय हेतु `1.00 करोड़ की राशि इसे लागू करने हेतु वर्ष 2018-19 राज्य में योजना.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने कन्या सशक्तीकरण तथा कल्याण बोर्ड का गठन किया है तथा कल्याण बोर्ड़ का नाम बदलकर सक्षम गुड़िया बोर्ड, हिमाचल प्रदेश कर दिया गया है। बोर्ड हिमाचल प्रदेश. व्यापक बोर्ड के उद्देश्य इस प्रकार हैं:
i)बालिकाओं/किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए नीति के लिए सिफारिश करना।
ii) बालिकाओं/किशोरियों की सुरक्षा से सम्बन्धित कृत्यों नियमों, नीतियों और कार्यक्रमों पर सिफारिश करना।
iii)बालिकाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा करना।
iv)बालिकाओं/किशोरियों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने हेतु सुझाव देना।

19.ग्रामीण विकास

ग्रामीण विकास विभाग का मुख्य उद्वेश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन तथा क्षेत्र विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना है। राज्य मेंं निम्नलिखित राज्य तथा केंद्रीय प्रायोजित विकासात्मक योजनाएं/ कार्यक्रम कार्यान्वित किए जा रहे हैंः-
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार के स्थान पर राष्ट्रीय आजीविका मिशन (छत्स्ड)को प्रदेश में1.04.2013 से आरम्भ किया गया जिसका कार्यन्वयन पूरे प्रदेश में चरणबद्व तरीके से किया जाएगा। योजना का क्रियान्वयन गहन व गैर गहन खण्डों में किया जा रहा है। अब तक प्रदेश में कुल 32 गहन विकास खण्ड चयनित किए गए हैं। यह विकास खण्ड निम्न प्रकार से हैः- नामतः घुमारवीं, भरमौर, भटियात, चम्बा, पांगी, मैहला, सलूनी, तीसा, भोरंज, बिझड़ी, बैजनाथ, नूरपुर, रैत, कल्पा, निचार, पूह, बन्जार, कुल्लू, नग्गर, लाहौल, स्पिति, गोहर, मण्ड़ी सदर, सिराज, बसन्तपुर, मशोबरा, पच्छाद, पावंटा साहिब, धर्मपुर, कण्डाघाट, बंगाणा, और हरोली को कार्यक्रम के कार्यन्वयन हेतु लिया गया है। अन्य विकास खण्ड गैर गहन (छवद.प्दजमदेपअम) विकास खण्ड हैं। उपरोक्त के अतिरिक्त आजीविका मिशन (छत्स्ड) के अन्तर्गत् स्वरोजगार गतिविधियों जैसे कि ऋण वितरण, महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन, क्षमता विकास एवं संस्थागत निर्माण आदि का कार्यन्वयन प्रस्तावित है।अन्तर्गत् स्वरोजगार गतिविधियों जैसे कि ऋण वितरण, महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन, क्षमता विकास एवं संस्थागत निर्माण आदि का कार्यान्वयन प्रस्तावित है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए ृ25.00करोड़की वार्षिक कार्य योजना को अनुमोदित किया है जिसे राज्य ग्रामीण आजिविका मिशन की गतिविधियों के कार्यन्वयन पर व्यय किया जाएगा। चालू वित्त वर्ष में कुल 5,400 महिला स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से जोड़ना प्रस्तावित है जिन्हें ृ60.00 करोड़ ऋण के रूप में प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत् चार जिलों शिमला, मण्डी, कांगड़ा व ऊना में समस्त महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण पर ब्याज दर 4 प्रतिशत वार्षिक होगी तथा शेष 8 जिलों के महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रदान किए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर 7 प्रतिशत वार्षिक निर्धारित है। किन्तु उक्त ब्याज दरें मात्र उन महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ही लागू होगी जिनकी ऋण अदायगी समय सीमा के भीतर नियमानुसार हुई हो।

आजीविका मिशन के अन्तर्गत्दिसम्बर,2018 तक जिलावार वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्यों के अन्तर्गत् उपलब्धियां निम्न प्रकार से हैंः
गरीब ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल एव नियोजन के माध्यम से आजीविका ग्रामीण विकास मन्त्रालय, भारत सरकार की एक अनूठी पहल है। इस योजना के उद्वेश्यआवश्यकतानुसार ग्रामीण गरीबों की आय को विविधिकरण के माध्यम से विकसित करना एवं ग्रामीण युवाओं की व्यवसाय हेतु आकांक्षाओं को पूर्ण करना है।
परन्तु यह कार्यक्रम शुरू में हिमाचल प्रदेश में 2017-18 के दौरान हुआ और अब तक 12 परियोजना कार्यान्वयन ऐजेंसियों को 10,400 युवाओं का लक्ष्य आवंटित किया गया है। अब तक 3,800 ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को कार्यक्रम में शामिल किया गया है और वित्त वर्ष 2018-19 में 6,000 ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत लाभार्थी :
1) डी.डी.यु.जी.के.वाई. लक्षित समूह आयु वर्ग 15-35 में गरीब युवा हैं। जबकि, महिला उम्मीदवारों के लिए उपरी आयु सीमा और विशेष रूप से कमजोर जनजातियां समूहों (पीवीटीजी) विकलांग, व्यक्तियों (पीडब्ल्युडी), ट्रांसजेंडर और अन्य विशेष समूहों जैसे पुनर्वासित, बंधुआ श्रम व तस्करी के शिकार व्यक्ति, कुड़ा करकट उठाने वाले, ट्रांसजेंडर व एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्तियों आदि के लिए 45 वर्ष होगी।
2) गरीबों की पहचान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रक्रिया नामतः ‘‘सहभागिता से गरीबों की पहचान’’ के अन्तर्गत् की जाएगी। जब तक इस प्रक्रिया के अन्तर्गत लक्षित समूह का स्वरूप ना बन जाए तब तक लक्ष्य के लिए गरीबी की रेखा से नीचे रह रहे परिवारों में से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
3) मनरेगा कामगार परिवार के ऐसे युवा जो विगत वित्तीय वर्ष मे कम से कम 15 दिन का कार्य कर चुके हें।
4) ऐसे परिवार के युवा जिन्हें अन्तोदय अन्न योजना, बी.पी.एल., पी.डी.एस. कार्ड जारी किये गये हैं।
5)ऐसे परिवार का युवा जिसकी कोई महिला सदस्य एन.आर.एल.एम. के अन्तर्गत् स्वयं सहायता समूह की एक सदस्य है। एस.ई.सी.सी.-2011 के अनुसार स्वतः समावेशन मानदण्डां के तहत शामिल किए गए परिवारों के पात्र युवक भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ ले सकेगे।
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के बंजर क्षेत्रों, सूखा ग्रस्त मरूस्थल क्षेत्र के विकास हेतु ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्व में ‘‘एकीकृत जलागम प्रबन्धन कार्यक्रम’’(आई. डब्लयू. एम.पी.) अब परिवर्तित नाम ‘‘ प्रधानमन्त्री कृषि सिंचाई योजना(पी.एम.के.एस.वाई.)-जलागम विकास घटक के अन्तर्गत् वर्ष 2009-10 से 2014-15 तक प्रदेश के सभी जिलों के लिए 163 नई परियोजनाएं जिसकी कुल लागत ृ1,260 करोड़ है, स्वीकृति की जा चुकी है तथा इसे योजना के अन्तर्गत् 8,39,972 हैक्टेयर भूमि का विकास किया जाना प्रस्तावित है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा परियोजना लागत में 90ः10 की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। नवम्बर, 2018 तक ृ288.35 करोड़ की धनराशि सम्बन्धित जिलों को दी जा चुकी है जिसमें से ृ286.36 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं और अभी तक 1,50,753 हैक्टेयर क्षेत्रों का उपचार किया जा चुका है।
इस योजना का उद्देश्य 2,022 तक सभी बेघरों एवं कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को आधारभूत सुविधा युक्त घर प्रदान करना है, साफ सुथरा खाना बनाने के स्थान सहित लघुतम ईकाई के क्षेत्र को 20 वर्ग मी. से बढ़ाकर 25 वर्ग मी0 कर दिया गया है। पहाड़ी एवं कठिन स्थानों में नये मकान के निर्माण हेतु सहायता राशि ृ75,000 प्रति परिवार से बढ़ाकर ृ1.30 लाख कर दी गई है। इस योजना में केन्द्र सरकार व राज्य सरकार के मध्य में वित्त पोषण 90ः10 के अनुपात में निर्धारित किया गया है। इस योजना में लाभार्थियों के चयन का आधार सामाजिक एवं आर्थिक जाति जनगणना-2011 के आकडों को बनाया गया है। दिसम्बर,2018 तक 6,882 आवास स्वीकृत किए गए है व 5,926 पूर्ण कर लिए गए हैं।
नीचे सभी का उल्लेख किया गया है आवास योजनाएँ राज्य द्वारा चलायी जाती हैं सरकार।
i) मुख्यमंत्री आवास योजना (MMAY): राज्य सरकार ने किया था में इस योजना की घोषणा की पहली बार 2016-17 का बजट सामान्य श्रेणी के बीपीएल के लिए गैर-योजना घटक में राज्य. लेकिन इस योजना का लाभ है की सभी श्रेणियों तक विस्तारित किया गया है चालू वित्तीय वर्ष से बी.पी.एल 2018-19. बजट प्रावधान है चालू वर्ष 2018-19 में `12.19 जिसके साथ योजना घटक में करोड़ सभी श्रेणी के 937 मकान हैं राज्य में निर्माण किया जा रहा है। में गैर-योजना घटक भी है `30.00 करोड़ का बजट प्रावधान जिसमें सामान्य के 2,077 घर हैं श्रेणी बीपीएल हो रही है निर्मित.
ii) मुख्यमंत्री आवास मरम्मत योजना (MMARY): 3.30 करोड़ का प्रावधान है जिसके साथ कुल 1,320 घर के दौरान श्रेणियों की मरम्मत की जा रही है चालू वित्तीय वर्ष 2018-19. बाहर जिनमें 868 सामान्य, 332 एससी और 120 एसटी. इस योजना के तहत, लाभार्थियों का चयन a द्वारा किया जाता है एसडीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी जिस क्षेत्र में बीडीओ एवं एसडीओ (देव) हैं सदस्य.
इस योजना का मुख्य लक्ष्य निर्धारित ग्राम पंचायतों के समग्र विकास में मददगार प्रक्रियाओं में तेजी लाना है। आबादी के सभी वर्गो के जीवन स्तर और जीवन गुणवत्ता में पर्याप्त रूप से सुधार लाना है जिसमें उन्नत बुनियादी सुविधाएं, अधिकतम उत्पादकता, बेहतर मानव विकास, बेहतर आजीविका के अवसर, असमानता में कमी, अधिकार और हकदारी के लिए पहुंच दिलाना, व्यापक सामाजिक एकजुटता व समृद्ध सामाजिक पूंजी इत्यादि शामिल है। हिमाचल प्रदेश में सभी माननीय सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्र से चरण-1 के अन्तर्गत एक आदर्श ग्राम पंचायत तथा तीन सांसदों ने चरण-2 के अन्तर्गत एक आदर्श ग्राम पंचायत का चयन कर लिया है जिसका विवरण निम्न प्रकार हैः-
भारत सरकार ने वर्ष 2016 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरबन मिशन (एन.आर.यू.एम.) का शुभारम्भ किया है। इसका मूल उददेश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक, सामाजिक और भौतिक आधारभूत सुविधाओं के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के समान्तर विकसित करना है।
क्लस्टर होगा आवश्यकता के साथ मजबूत किया गया सुविधाएं, जिसके लिए यह प्रस्तावित है के माध्यम से संसाधन जुटाए जाएं विभिन्न योजनाओं का अभिसरण के रेखांकित विभागों की 151 सरकार, जिसके ऊपर और ऊपर एक क्रिटिकल गैप फंडिंग (सीजीएफ) होगी इस मिशन के तहत प्रदान किया गया भारत सरकार, फोकस के लिए इन समूहों का विकास. में दिसंबर, 2018 तक एनआरयूएम का सम्मान राज्य सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ `36.00 करोड़ जिसमें केंद्र का हिस्सा था `32.40 करोड़ और राज्य `3.60 करोड़। में इन समूहों की विभिन्न गतिविधियाँ डीआरडीए को कुल `22.50 करोड़ जारी। में किस केंद्र का हिस्सा `20.25 करोड़ है और राज्य का हिस्सा `2.20 करोड़ है।
यह योजना केवल महिलाओं के लिए है। इस योजना के अन्तर्गत् 10 वर्ष से 75 वर्ष तक की महिलाएं जो कि गरीबी रेखा से नीचे हैं लाभ के लिए पात्र हैं। इस योजना में परिवार की बीमागत महिला को मृत्यु या अपंगता होने पर सहायता राशि प्रदान की जाती है। दुर्घटना से, किसी भी प्रकार की शल्य चिकित्सा के दौरान जैसे कि नसबंदी, प्रजनन के समय किसी प्रकार की दुर्घटना से, डूबने से, बाढ़ में बहने से, भू-संख्लन, कीटडंक से तथा विवाहित महिला को यदि उसके पति की दुर्घटना में हुई मृत्यु होने की स्थिति में इस योजना के अन्तर्गत बीमा राशि 1.04.2017 से निम्न प्रकारसे प्रदान की जा रही हैः-
i) मृत्यु `2.00 लाख
ii) स्थायी कुल विशेष योग्यता `2.00 लाख.
iii) एक अंग और एक आंख की हानि या दोनों आंखें और दोनों अंग `2.00 लाख।
iv) एक अंग/एक कान की हानि `1.00 लाख।
v) पति की मृत्यु के मामले में `2.00 लाख. 2018-19 के दौरान, 91 की संख्या परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है तक `134.00 लाख की सहायता योजनान्तर्गत दिसम्बर, 2018।
भारत सरकार स्वच्छ भारत की शुरूआत की है मिशन (ग्रामीण) दिनांक 02.10.2014 को स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करें 2019. के मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम इस प्रकार हैं:-
i) में सुधार लाएं में जीवन की सामान्य गुणवत्ता ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है साफ़ सफाई स्वच्छता और खुले में शौच को ख़त्म करना.
ii) स्वच्छता कवरेज में तेजी लाएं लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों 02.10.2019 तक स्वच्छ भारत का।
iii) समुदायों को प्रेरित करें और पंचायती राज संस्थाओं को स्थायी स्वच्छता अपनाएँ प्रथाओं और सुविधाओं के माध्यम से जागरूकता निर्माण और स्वास्थ्य शिक्षा।
iv) लागत प्रभाव को प्रोत्साहित करें और के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियाँ पारिस्थितिक रूप से सुरक्षित और टिकाऊ स्वच्छता.
v) जहां आवश्यक हो वहां विकास करें समुदाय प्रबंधित स्वच्छता प्रणाली वैज्ञानिक पर ध्यान केंद्रित कर रही है ठोस एवं तरल अपशिष्ट समग्र रूप से प्रबंधन प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता. जिलेवार भौतिक स्वच्छ भारत के तहत प्रगति मिशन-ग्रामीण दिसम्बर, 2018 तक निम्न प्रकार है:-
महर्षि वाल्मिकी संपूर्ण स्वच्छता पुरस्कार (एमवीएसएसपी):महर्षि वाल्मिकी सम्पूर्ण स्वच्छता पुरस्कार (एमवीएसएसपी) वर्ष में शुरू किया गया था 2007-08. स्वच्छता को बढ़ावा देना हिमाचल प्रदेश में अभियान एक प्रतियोगिता आधारित राज्य पुरस्कार योजना यानि महर्षि वाल्मिकी सम्पूर्ण स्वच्छता पुरस्कार (एमवीएसएसपी) के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है कौन सा विजेता ओडीएफ जीपी (कुल 97 जीपी) राज्य स्तरीय पुरस्कार से पुरस्कृत किये जाते हैं हर वर्ष वितरण समारोह। इस योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन पैटर्न निम्न प्रकार है:-
1) ब्लॉक स्तरीय सबसे स्वच्छ ग्राम पंचायत `1.00 लाख
2) जिला स्तरीय सबसे स्वच्छ ग्राम पंचायत `3.00 लाख (यदि जिला है तो 2GP को पुरस्कार मिल सकता है 300 से अधिक जीपी)।
3) संभाग स्तरीय सबसे स्वच्छ ग्राम पंचायत `5.00 लाख
4) राज्य स्तरीय सबसे स्वच्छ ग्राम पंचायत `10.00 लाख
स्कूल स्वच्छता पुरस्कार योजना। :यह थी योजना वर्ष 2008-09 के दौरान लॉन्च किया गया सबसे स्वच्छ सरकारी प्राइमरी और जिला और ब्लॉक में मध्य विद्यालय स्तर। वर्ष 2011-12 के दौरान उच्च/ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी हैं प्रतियोगिता मानदंड में शामिल किया गया। योजना के तहत पुरस्कार दिए जा रहे हैं हिमाचल दिवस समारोह के दौरान दी गई हर साल 15 अप्रैल को. ये इनाम योजना उन स्कूलों को मान्यता देती है जो उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है स्कूल स्वच्छता में उपलब्धि और स्वच्छता शिक्षा और की एक राशि को पुरस्कार राशि के रूप में 88.20 लाख रुपये दिए गए हैं इस योजना के अंतर्गत विजेता विद्यालय।
वर्ष 2008 से महिला मंडल प्रोत्साहन योजना एक योजना है पुरस्कार सक्रिय महिला मंडल रहा है को शामिल करने के लिए उपयुक्त प्रतिबंधित है स्वच्छता के लक्ष्य और उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम हो रहा है. इस योजना ने पूरी तरह से स्वच्छता से जोड़ दिया गया है कार्यक्रम और `1.31 करोड़ की राशि वर्ष के दौरान आवंटित किया गया है 2018-19 महिलाओं को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए जिन मंडलों ने अच्छा प्रदर्शन किया है उनके यहां स्वच्छता के तहत काम करें गाँव/वार्ड और ग्राम पंचायत क्षेत्र योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार। प्रत्येक ब्लॉक पर 6 महिला मंडल का चयन करता है पहली से छठी स्थिति के आधार जो हैं पुरस्कृत :
पहले छह के अलावा चयनित महिला मंडल, सरकार का मानना है कि अन्य जिन महिला मंडलों ने योगदान दिया है के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए स्वच्छता अभियान को लेकर ग्रामीण को कुछ प्रोत्साहन भी दिया जाएगा टिकाऊ बनाए रखने के लिए उन्हें बढ़ावा दें स्वच्छता के अंतर्गत गतिविधियाँ। प्रत्येक ब्लॉक पर महिला मंडलों का चयन करेगी निम्नलिखित मानदंड और एक राशि प्रत्येक महिला को 8,000 रुपये दिए जाएंगे मंडल.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम द्वारा अधिसूचित किया गया था भारत सरकार ने सितम्बर में 2005 से प्रभावी किया गया। 2 फरवरी, 2006. प्रथम चरण में, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एनआरईजीएस) शुरू की गई थी दूसरे नंबर पर जिला चंबा और दूसरे नंबर पर सिरमौर फरवरी, 2006. दूसरे चरण में एनआरईजीएस जिला कांगड़ा में शुरू किया गया था और मंडी 1-4-2007 से प्रभावी। अब में तीसरे चरण के शेष सभी 8 जिले राज्य को इसके अंतर्गत शामिल किया गया है योजना प्रभावी 1-4-2008. वर्ष 2018-19 के दौरान केन्द्रीय शेयर राशि `575.78 करोड़ और राज्य का हिस्सा `63.31 करोड़ है राज्य में श्रेय दिया गया है रोजगार गारंटी निधि खाता. धनराशि `572.96 करोड़ है उपयोग किया गया है और 205.35 लाख द्वारा मानव दिवस सृजित किये गये हैं 4,79,004 को रोजगार उपलब्ध कराना गृहस्थी।

20.आवास एवम् शहरी विकास

हिमाचल प्रदेश सरकार के आवास मंत्रालय के अंतर्गत् हिमाचल प्रदेश आवास एवम् शहरी विकास प्राधिकरण, हिमुडा आम जनता को उनकी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के मकान, फ्लैट और विकसित भूखंड प्रदान कर रहा है ।
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए हिमुडा द्वारा क्रियान्वित किए जाने वाले कार्यों के लिए ृ107.91करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके अन्तर्गत् माह दिसम्बर, 2018 तक ृ94.19करोड़ का व्यय हो चुका है। वित्त वर्ष के दौरान 138 फ्लैट और 87 रिहायशी प्लाट विकसित करने का लक्ष्य है ।
आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण हिमाचल प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के निर्माण कार्य भी निक्षेप कार्यो के रुप में करता है। इसमें सामाजिक, न्याय एवं अधिकारिकता, जेल, पुलिस, युवा सेवाएं तथा खेल, पशुपालन, शिक्षा, मतस्य पालन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, हिमाचल बस अडड्ा प्रबन्धन, शहरी स्थानीय निकाय, पंचायती राज और आयुर्वेद विभाग प्रमुख है। वर्ष 2018-19 में विभिन्न विभागों के द्वारा 66 भवनों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
ठियोग, फलावरडेल, सन्जौली, मन्दाला परवाणु और जुरजा ;नाहनद्ध भटोलीखुरद ;बद््दीद्ध में आवासीय कालोनियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है और छवगरोटी, फ्लावरडेल और परवाणू का कार्य पूर्ण कर दिया गया है। वर्तमान में हिमुडा के पास हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 1,321 वीघा जमीन है जालन्धर लहर देहरा में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी प्रगति पर है।
हिमुडा द्वारा वर्ष 2018-19 में शील, सोलन, मोगीनंद-2, त्रिलोकपुर ;नाहनद्धभटोलीखुर्द, शुभखेड़ा चरण-2 धर्मपुर, सोलन कामली रोड परवाणू,रजवाड़ी, मण्डी में नई आवासीय योजनाओं का कार्य हाथ मेें लिया है तथा शिमला के विकास नगर में पैट्रोल पम्प के समीप एक व्यवसायिक परिसर के निर्माण का कार्य प्रगति पर है ।
हिमुडा ने सिंगापुर सरकार की एैजेंसी, सिंगापुर को-ओप्रेशन इन्टरप्राइज के सहयोग से शिमला के जाठिया देवी स्थित हवाई अडडा में एक आवास योजना की प्रक्रिया को शुरु किया है। जिसका निर्माण कार्य फरवरी, 2019 तक शुरु किया जाना है ।
नगर परिषद मण्डी में प्रधान मंत्री आवास योजना के अंर्तगत् एक मांग सर्वेक्षण किया है जिसके अनुसार 560 फ्लैट प्रधान मंत्री आवास योजना तथा 106 फ्लैट किफायती आवास योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने के लिए नगर परिषद मण्डी ने प्रक्रिया शुरु करके इस परियोजना का निर्माण कार्य हिमुडा को सौंपा है। इस परियोजना के लिए नगर परिषद मण्डी में मौहाल छिपनु, तहसील सदर, मण्डी में एक भू-खण्ड को चयनित किया है तदानुसार हिमुडा ने लेय आउट प्लान तैयार किया है। जमीन के कुल 13,657 वर्ग मी. क्षेत्रफल में से 3,480 वर्ग मी0 क्षेत्रफल नगर परिषद मण्डी ने अपने पास रखा है जिसके उपर 64 फ्लैट आर्थिक कमजोर वर्ग के लोगों के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत बनाए जाएंगे और शेष 10,177 वर्ग मी. भूमि हिमुडा के नाम तबादले के रुप में दे दी जाएगी। जिसके उपर हिमुडा 68 फ्लैट उच्च आय वर्ग के लिए बनाएगा। हिमुडा इस जमीन के तबादले के बदले में 64 फ्लैट, आर्थिक कमजोर वर्ग के लिए बनाकर नगर परिषद मण्डी को देगा।
हिमुडा ने मंजूरी दे दी है निम्नलिखित नीतियां/योजनाएं:
i) भूमि स्वामी बनने हेतु नीति के विकास में भागीदार राज्य में हाउसिंग कॉलोनियाँ और अशोक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये सिरमौर में एलॉयज (पी) लिमिटेड जिला एवं निजी डेवलपर्स मै आकाश दुर्लभ वास्तविकताएँ और पाइनवुड लाइफस्पेस का विकास किया जाएगा हाउसिंग कॉलोनियां भराड़ी (शिमला) और भगवती इसके अंतर्गत नगर, शिमला योजना।
ii) आवंटन हेतु योजना विभिन्न मकान/फ्लैट/प्लॉट हिमुडा द्वारा बसाई गई कॉलोनियां "पहले आओ पहले पाओ" के आधार पर निपटान के लिए लागत रोकने के बाद बिना बिकी इकाइयों की.
iii) भूमि आवंटन हेतु नीति/ अतिरिक्त भूमि.
iv) अतिरिक्त प्रीमियम के लिए पॉलिसी में तीसरी मंजिल का निर्माण में बूथ एवं दुकान स्थल आवंटित किये गये हाउसिंग कॉलोनियाँ।
हिमुडा ने निर्माण किया है इसका सर्कल कार्यालय (उत्तर) भवन में है पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर धर्मशाला जो है नवीनतम ईपीएस प्रौद्योगिकी एवं निर्माण में अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक की इंजीनियरों के आवास समान का उपयोग कर रहे हैं टेक्नोलॉजी भी पूरी होने वाली है. अंचल कार्यालय भवन रहा है 4 महीने की अवधि के भीतर निर्माण किया गया।
मानव इंटरफ़ेस को कम करने के लिए और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, हिमुडा ने ई-गवर्नेंस की ओर कदम बढ़ाया है और डिजिटलीकरण किया है प्रधान कार्यालय में रिकॉर्ड करें और स्थापित करें टैली एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) अकाउंटिंग और HIMDUA भी शामिल है वेबसाइट बनाने की प्रक्रिया इसके रोजमर्रा के काम को सुविधाजनक बनाना और करना बेहतर प्रशासन और सौहार्दपूर्ण संबंध ग्राहकों के साथ. वेबसाइट होगी की परियोजनाओं की समस्त जानकारी उपलब्ध करायें एक क्लिक पर हिमुडा। आवंटियों को होगा अपने रिकार्ड स्वयं देख सकेंगे और बिक्री, पंजीकरण के लिए सभी आवेदन, एनओसी, टेंडर आदि उपलब्ध होंगे ऑनलाइन। HIMDUA ने लॉन्च करने की योजना बनाई है इस वर्ष वेबसाइट.
74वें पर परिणाम संवैधानिक संशोधन, अधिकार, शहरी स्थानीय की शक्तियाँ और गतिविधियाँ शरीर कई गुना बढ़ गए हैं। वहाँ हिमाचल में 54 शहरी स्थानीय निकाय हैं शिमला सहित प्रदेश और धर्मशाला नगर निगम। सरकार उपलब्ध करा रही है इन स्थानीय लोगों को हर साल अनुदान सहायता निकायों को नागरिक प्रदान करने में सक्षम बनाने के लिए आम जनता को सुविधाएं. के अनुसार राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2018-19 के दौरान कुल को 120.65 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं यूएलबी. इसमें विकासात्मक भी शामिल है अनुदान और अंतर पूर्ति अनुदान के बीच आय और व्यय।
नगरपालिका में सड़कों का रखरखाव क्षेत्रःलगभग 3,098 कि.मी. सड़कें/ पथ/गलियाँ एवं नालियाँ बन रही हैं 54 शहरी स्थानीय निकायों द्वारा बनाए रखा गया और `5.34 करोड़ जारी किए गए शहरी स्थानीय निकायों के अनुपात में शहरी स्थानीय निकायों द्वारा बनाए रखी जा रही सड़कों/सड़कों/पथों की लंबाई 2018-19 के दौरान. बजट प्रावधान इस योजना के अंतर्गत `6.00 करोड़ है।
योजना का उद्दे्श्य शहरी क्षेत्रों में रह रहे गरीब परिवारों का सामाजिक आर्थिक एवं संस्थागत क्षमता विकास करते हुए प्रशिक्षण व वित्तीय सहायता के माध्यम से रोजगार एवं स्वरोजगार अवसर प्रदान करते हुए सतत तौर पर आजिविका साधनों को मजबूत करना है जिससे धरातल स्तर पर गरीबों के लिए संस्थान बनाए जा सके। इस योजना के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं
i) कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार और प्लेसमेंट.
ii) सामाजिक गतिशीलता और संस्था विकास।
iii) क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण।
iv) स्व-रोज़गार कार्यक्रम।
v) शहरी बेघरों के लिए आश्रय।
vi) शहरी स्ट्रीट वेंडरों को सहायता।
vii) नवोन्वेषी और विशेष परियोजनाएँ। वित्त वर्ष 2018-19 में इस योजना के कार्यान्वयन के लिएृ1.67 करोड़ केन्द्रीय तथा राज्य अनुदान का प्रावधान किया गया है तथा अभी तक सरकार द्वारा विभाग को अतिरिक्तता के रुप में ृ2.34 करोड़ जारी किए गए हैं। इस योजना के अन्तर्गत् अभी तक 240 स्वयं सहायता समूह बनाए जा चुके हैं। 739 लाभार्थियों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है एवं 116 लाभार्थियों को रोजगार प्रदान किया गया है। लघु उद्यम स्थापित करने के लिए 244 लाभार्थियों, एक समूह तथा 59 स्वयं सहायता समूहों को कम व्याज पर ऋण प्रदान किया गया है। 5,000 रेहड़ी फड़ी वालों कोविभिन्न पाठयक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया तथा उन्हें पहचान पत्र जारी किये जा रहे हैं।
एक बजट है सामान्यतः `43.21 करोड़ का प्रावधान योजना, गैर योजना और एससीएसपी घटक में सीवरेज योजनाओं के लिए और सीवरेज योजनाओं का रखरखाव वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान. ए `38.52 करोड़ का शेयर स्टैंड अब तक जारी किया गया। चूंकि, यह योजना है आई द्वारा निष्पादित किया जा रहा है
इस योजना के अंतर्गत् शिमला, और कुल्लू शहरों का चयन किया गया है।वित्तीय वर्ष 2017-18 में इस मिशन के अन्तर्गत् ृ22.98 करोड़ की राशि जारी की गई हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस मिशन के लिए ृ55.00 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
स्मार्ट सिटी मिशन जून, 2015 को शुरू किया गया था। केन्द्र सरकार ने इस मिशन के अन्तर्गत् नगर निगम धर्मशाला की योजना को स्वीकृत किया है, जिसकी कुल लागत ृ2,109.69 करोड़ है। धर्मशाला स्मार्ट सिटी के लिए विशिष्ट प्रयोजन यान (एस.पी.वी.) को कंपनी नियम, 2013 के अधीन पंजीकृत किया गया है। वर्ष 2017-18 में भारत सरकार द्वारा नगर निगम शिमला को भी स्मार्ट सीटी मिशन के अन्तर्गत् शामिल किया गया है जिसकी परियोजना लागत ृ2,905.97 करोड़ हैं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा विशिष्ट प्रयोजन यान अधिसूचित किया जा चुका है।वित्तीय वर्ष 2018-19 में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा इस मिशन के लिए ृ110करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है जिसमें से ृ36.00 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।
स्वच्छ, भारत अभियान भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है और भारत सरकार के आवास एवंशहरी विकास मामलों के मंत्रालय द्वारा सभी शहरी नगर निकायों में कार्यान्वित है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर/कस्बों को खुले में शौच मुक्त व नागरिकों को स्वस्थ और रहने योग्य वातावरण प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत्निम्न कार्य प्रगतिशील है।
1) स्थानीय निकाय द्वारा व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक शौचालय के निर्माण के लिए धन संवितरित करना और कस्बों में सार्वजनिक/सामुदायिक शौचालयों की पर्याप्त सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। अभी तक इस अभियान के अंतर्गत् जिनके पास शौचालय की व्यवस्था नहीं थी उनके लिए 2,200 व्यक्तिगत शौचालय बनाए जा चुके हैं। 265 सामुदायिक और 1,081 सार्वजनिक शौचालय सीटें नए अथवा पुनरुद्धार किए जा चुके हैं।
2)3 शहर धर्मशाला, पावंटा साहिब और सुंदरनगर में भूमिगत कुड़ेदान परियोजना का कार्य पायलट आधार पर शुरु हो चुका है। भूमिगत परियोजना के अन्तर्गत् धर्मशाला और सुन्दरनगर में भूमिगत कूड़ेदान बनाए जा चुके हैं और पांवटा साहिब मे कार्य प्रगति पर है।
3) राज्य में सामान्य जनता को जागरुक करने के लिए विभिन्न आई.ई.सी. गतिविधियां नियमित तौर पर संचालित की जा रही है। जागरुकता के लिए स्वच्छता पखवाड़ा, होर्डिंग/बैनर, नुक्कड़ नाटक, प्रिंट एवं इलैक्ट्रानिकमीडिया, रैलियां आदि के माध्यम से करवाए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस योजना को लागू करने के लिएृ20.00 करोड़ केन्द्रीय तथा राज्य अनुदान के रूप में प्रावधान किया गया है।इस योजना के अन्तर्गत् ृ2.99करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।
सबके लिए मकान भारत सरकार द्वारा यह नई योजना शहरी क्षेत्रों के लिए शुरू की गई है, जिसको 17.06.2015 से 31.03.2022 तक लागू किया जाना है इस योजना का उद्देश्य शहरों को स्लम मुक्त करके उन्हें बसाना, निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के लिए ऋण आधारित सब्सिडी योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को बैंकों से ऋण उपल्बध करवाकर आवासों का निर्माण करना, पब्लिक प्राईवेट साझेदारी के माध्यम से आवासीय मकान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग परिवारों के लिए सुनिश्चित करना और लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निमार्ण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग परिवारो को स्वयं उनके द्वारा नए आवासां के निर्माण एवं मौजूदा आवास के सुधार के लिए आर्थिक साहयता प्रदान करना सुनिश्चित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस योजना को लागू करने के लिए ृ50.00 करोड़ केन्द्रीय तथा राज्य अनुदान का प्रावधान किया गया है जिसमें से ृ21.87 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है। शेष राशि इस वित्तीय वर्ष में जारी कर दी जाएगी।
इस योजना के अन्तर्गत् नई सृजित नगर पंचायतों एवं नगर निगम व नगर परिषदों में नए सम्मिलित क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करने हेतु वित्तीय वर्ष 2018-19 में1.50 करोड़ का बजट प्रावधान है जिसमें से ृ1.10 करोड़ नगर निगम धर्मशाला,नगर परिषद, रामपुर व नैरचौक तथा नगर पंचायत टाहलीवाल, ज्वाली एवं बैजनाथ-पपरोला को जारी किए जा चुके हैं।
14वें वित्तायोग के अन्तर्गत्शहरी स्थानीय निकायों को दो प्रकार के अनुदान स्वीकृत किए है। सामान्य बुनियादी अनुदान जो कि बिना शर्त के प्रदान किया जा रहा है और दूसरा सामान्य निष्पादन अनुदान है जो कि वित्तायोग द्वारा सुझाई गई कुछ शर्तो को पूर्ण करने के उपरान्त जारी किया जाता है। इस वित्तीय वर्ष के लिए ृ46.01 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। ृ17.92 करोड़ की बुनियादी अनुदान राशि पहली किस्त के रूप में शहरी स्थानीय निकायों को जारी की जा चुकी है जबकि सामान्य निष्पादन अनुदान को भारत सरकार द्वारा अभी जारी किया जाना है।
शहरी स्थानीय निकायों में पार्किग की समस्या के समाधान हेतु वित्तीय वर्ष 2018-19 में ृ10.00 करोड़ का बजट प्रावधान है जिसमें से ृ3.25 करोड़ की राशि 3 शहरी स्थानीय निकायों को पार्किंग के निर्माण हेतु जारी की जा चुकी है। इस योजना के अन्तर्गत् 50 प्रतिशत अनुदान तथा 50 प्रतिशत भाग शहरी स्थानीय निकायों द्वारा खर्च किया जाना है। पार्कों का विकास:-
पार्कों के निर्माण के लिए शहरी स्थानीय निकायों में चरणबद्ध तरीके से तरीके से, `10.00 करोड़ की राशि है के दौरान बजट में प्रावधान किया गया जिसमें से वित्तीय वर्ष 2018-19 1 शहरी को `35.00 लाख जारी किए गए स्थानीय निकाय के विकास के लिए अब तक पार्क. इस योजना के अंतर्गत धनराशि हैं 60:40 के अनुपात में जारी किया जाता है (अर्थात्)60% है सरकार द्वारा प्रदान किया गया. और 40% द्वारा संबंधित (यूएलबी)।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अटल श्रेष्ठ शहर योजना 2018 लागू की है। इस योजना का मुख्य उद्ेदश्य शहरी स्थानीय निकायों में प्रतिस्पर्धा के माध्यम से ऐसी शहरी स्थानीय निकाय जो शहर को साफ सुथरा रखने में प्रयासरत है तथा लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अच्छा कार्य कर रही है। ऐसी शहरी स्थानीय निकायों को पुरस्कृत करना है। ऐसी शहरी स्थानीय निकायों को हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपायी की पुण्यतिथि 25 दिसम्बर पर नकद पुरस्कार देकर सम्मानित करेगी। सर्वश्रेष्ठ नगर परिषद को पुरस्कार राशि ृ1.00 करोड़ रखी गई है और नगर पंचायतों को यह राशि ृ0.75 करोड़ लाख की गई है। नगर निगमों को छोड़कर सभी शहर स्थानीय निकाय भाग लेने के लिए पात्र हैं।
सन्तुलित विकास और विनियमन द्वारा भूमि संसाधनों में कमी के दृष्टिगत जनसांख्यिकी और सामाजिक आर्थिक तथ्यों का विवेकपूर्ण उपयोग करके कार्यात्मक, आर्थिक, पर्यावरणीय सतत् और सौन्दर्यात्मक जीवन सुनिश्चित करने, पर्यावरण के संरक्षण, विरासत और मूल्यवान भूमि संसाधनों के सतत् विकास के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी द्वारा हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 को 55 योजना क्षेत्रों (राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 1.60 प्रतिशत) है और 35 विशेष क्षेत्र (राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.06 प्रतिशत) लागू किया गया है।
1) धौलाकुआँ माजरा एवं अम्ब-गगरेट के लिए भू-उपयोग मानचित्र व रजिस्टर तैयार किया गया।
2) नग्गर, रिकांग-पिओ, हाटकोटी एवं कण्डाघाट विशेष क्षेत्रों के लिए विकास योजनाएं तैयार कर ली गई है और स्वीकृति हेतू सरकार को भेज दिया गया है।
3) ्रदेश सरकार द्वारा शेष 20 नगर निकायों नामतः श्री नयना देवी जी, संतोखगढ़, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा, कोटखाई, सुन्नी, जुब्बल, अर्की, राजगढ़, दौलतपुर, टाहलीवाल, देहरा, ज्वालामुखी, ज्वाली, चौवारी, सरकाघाट, रिवाल्सर करसोग एवं बन्जार को नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 के तहत योजना क्षेत्र घोषित किया गया।
4) रजिस्टर्ड प्राइवेट प्रोफेशनल की निर्देशिका तैयार करके विभागीय वेबसाईट पर अपलोड कर दी गई है
5) प्रदेश सरकार द्वारा नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 में निहित अध्याय IX.।एवं IX-Bहटा दिया गया है और अब प्रदेश में त्म्त्।अधिनियम एवं नियम पूर्ण तौर पर लागू किये गये हैं।
6) के लिए जीआईएस आधारित विकास योजनाएं तैयार करने का कार्य शिमला और कुल्लू योजना क्षेत्र अमृत योजना के अंतर्गत है प्रगति। यह सुनिश्चित करेगा के लिए व्यापक योजना इन क्षेत्रों का विकास
7) ऑट और हिनर योजना क्षेत्र और सांगला-कामरू विशेष क्षेत्र है प्रावधानों के अंतर्गत लाया गया है हिमाचल प्रदेश के शहर और देश नियोजन अधिनियम, 1977 के अनुसार डॉ. श्यामा के अधीन आवश्यकताएँ प्रसाद मुखर्जी रूर्बन द्वारा शुरू किया गया मिशन भारत सरकार। जीआईएस आधारित मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का कार्य है प्रगति मे।
8) अधिनियम, नियमों का प्रचार-प्रसार करने हेतु और विभाग के नियम, प्रचार-प्रसार कोषांग का गठन किया गया है निदेशालय में.
9) राज्य सरकार। को मंजूरी दे दी है टाउन और लागू करने के लिए दिशानिर्देश देश नियोजन अधिनियम, 1977 और के तहत नियम बनाए गए हैं 09.07.2018 एवं जिला स्तरीय समन्वय समितियां रही हैं के अंतर्गत सभी जिलों में गठित किया गया है संबंधित की अध्यक्षता निपटने के लिए उपायुक्त अनाधिकृत की समस्या राज्य में निर्माण.
10)प्रशिक्षण के लिए इंटर्नशिप नीति अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण बीटेक। और एम. टेक. पाठ्यक्रम में शहरी और क्षेत्रीय क्षेत्र योजना सरकार द्वारा अनुमोदित.
जो परियोजनाएं हैं अगले के लिए लक्षित करने का प्रस्ताव है वित्तीय वर्ष 2019-20 जिसमें सम्मिलित है योजना क्षेत्रों का गठन, विशेष क्षेत्र, मौजूदा भूमि की तैयारी मानचित्रों, विकास योजनाओं आदि का उपयोग करें क्षेत्रीय योजनाएँ इस प्रकार हैं:-
(i) के लिए क्षेत्रीय योजनाएं तैयार करना सोलन और लाहौल और स्पीति।
(ii) विकास योजनाओं की तैयारी जोगिंदरनगर, नेर-चौक के लिए, सुजानपुर, चिंतपूर्णी, भोटा, धौलाकुआं-माजरा, भरमौर और चायल.

21.पंचायती राज

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 12 जिला परिषदें, 78 पंचायत समितियां तथा 3,226 ग्राम पंचायतें गठित है। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के प्रावधान के अर्न्तगत पंचायती राज संस्थाओं का वर्तमान में पांचवां कार्यकाल है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में समय-समय पर किए गए प्रावधानों के अनुरूप या उनमें कार्यकारी निर्देशों द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार विभिन्न शक्तियां, कार्य व जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। ग्राम सभाओं को विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत लाभार्थियों के चयन की शक्तियां प्रदान की गई हैं। ग्राम सभा को ग्राम पंचायत की योजना तथा परियोजना का अनुमोदन करने तथा ग्राम पंचायत द्वारा विभिन्न कार्यां में व्यय की गई धनराशि से सम्बन्धित उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। पंचायती राज संस्थाओं को सरकार ने और अधिक अधिकार व कार्य सौंपे हैं जिनमें ग्राम पंचायतों को सिलाई अध्यापिका, पंचायत चौकीदार, प्राथमिक पाठशालाओं में अंशकालिक जलवाहकों व जलरक्षकों को नियुक्त करने की शक्तियां प्रदान की गई है। सहायक अभियन्ता, पंचायत सहायक, निजी सहायक और कनिष्ठ अभियन्ताओं की नियुक्त करने का अधिकार जिला परिषद को दिया गया है। नियमित कनिष्ठ लेखा पाल की सेवाओं को भी जिला परिषद काडर में रखा गया है।पंचायत सहायकों की श्रेणी को समाप्त करते हुए, वर्तमान में कार्यरत पंचायत सहायकों को पंचायत सचिव (अनुबन्ध) पदनामित किया गया है ।
ग्राम पंचायतों को प्राथमिक पाठशाला भवनों का स्वामित्व तथा रखरखाव सौंपा गया है। ग्राम पंचायतों को भूमि मालिकों/सही धारकों से भू-राजस्व एकत्रित करने की शक्ति प्रदान की गई है तथा एकत्रित राशि के उपयोग करने के बारे ग्राम पंचायत स्वयं निर्णय लेगी। पंचायतों को विभिन्न प्रकार के कर, फीस तथा जुर्माना अधिरोपित करने तथा आय अर्जित करने वाली परिसम्पतियों के निर्माण हेतु ऋण लेने के लिए प्राधिकृत किया गया है। पंचायत क्षेत्र में लघु खनिज के खनन के लिए जमीन पट्टे पर देने से पूर्व संबंधित पंचायत के प्रस्ताव को अनिवार्य किया गया है। पंचायतों को योजना बनाने के लिए भी अधिकृत किया गया है। मोबाईल टावर लगाने एवं शुल्क अधिरोपित करने के लिए ग्राम पंचायतों को प्राधिकृत किया गया है। ग्राम पंचायतों को दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 के अधीन भरण पोषण के लिए आवेदन की सुनवाई/निर्णय तथा ृ500 प्रतिमाह तक भरण पोषण भत्ता प्रदान करने हेतु आदेश देने की भी शक्ति प्रधान की गई है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में ृ1.00 प्रति बोतल की दर से शराब की बिक्री पर उपकर ग्राम पंचायतों को हस्तातंरित किया गया है और इससे प्राप्त निधि को वह विकासात्मक कार्यां के पर व्यय कर सकेगी।
यह अनिवार्य किया गया है कि कृषि,पशु-पालन, प्राथमिक शिक्षा, वन, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, बागवानी, सिंचाई एवं जन-स्वास्थ्य, राजस्व और कल्याण विभाग के गांव स्तर पर कार्यरत कर्मी उस ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेगें जिसकी अधिकारिता में वे तैनात हैं तथा यदि ऐसे गांव स्तर के कर्मचारी बैठकों में उपस्थित नहीं होते हैं तो ग्राम सभा, ग्राम पंचायत के माध्यम से उनके नियंत्रक अधिकारी को मामले की रिर्पोट करेगी, जो रिर्पोट प्राप्त होने की तारीख से एक माह के भीतर ऐसे कर्मचारियों के विरूद्व अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा और रिपोर्ट पर की गई कार्यवाही के बारे में ग्राम पंचायत के माध्यम से ग्राम सभा को सूचित करेगा।
पंचायती राज से सम्बन्धित अन्य प्रमुख प्रावधान निम्न हैंः
i) राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को मानदेय प्रदान कर रही है। मासिक मानदेय की दर से जिला परिषद के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को ृ11,000 तथा ृ7,500, पंचायत समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को ृ6,500 तथा ृ4,500 तथा ग्राम पंचायत के प्रधान व उप-प्रधान को ृ4,000 एवं ृ2,500 प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सदस्य जिला परिषद और सदस्य पंचायत समिति को मानदेय क्रमशः ृ4,500 तथा ृ4,000 प्रदान किया जा रहा है तथा ग्राम पचांयत के सदस्यों को माह में अधिकतम दो बैठकों में भाग लेने पर ृ240 का मानदेय प्रदान किया जा रहा है।
ii) सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित पदाधिकारियों को, पंचायत से सम्बन्धित कार्य के लिए, दैनिक एवं यात्रा भत्तां हेतु अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
iii) राज्य सरकार ने सरकारी विश्राम गृहां में जिला परिषद तथा पंचायत समिति के पदाधिकारियों को कार्यालय सम्बन्धित यात्रा के दौरान ठहरने की सुविधा प्रदान की है।
iv) 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें 2015-16 से शुरू हुई थी तथा 2019-20 तक लागू रहेगी। इन सिफारशों के अन्तर्गत् हिमाचल प्रदेश की बुनियादी अनुदान के रूप में ृ1,628.82 करोड़ और प्रदर्शन आधारित अनुदान के रूप में ृ180.98 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
v) पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से अनुबन्ध/नियमित आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक इस प्रकार से हैः- पंचायत सचिव (अनुबंध) ृ9,710, तथा कनिष्ठ लेखापाल (अनुबंध) ृ9,710, (नियमित) ृ5,910-20,200 ़ 1,900, कनिष्ठ अभियन्ता (अनुबंध) ृ17,900, (नियमित) 10,300-34,800़3,800, कनिष्ठ आशुलिपिक (नियमित) 5,910-20,200 ़ 2,800 सहायक अभियन्ता (नियमित) 15,660- 39,100़5,400, डाटा एन्ट्री ऑपरेटर (जि0प0) (अनुबंध) ृ9,710, (नियमित) ृ5,910 -20,200$1,900 सेवादार कम चौकीदार (जि0प0) (अनुबंध) ृ8,200,(नियमित) 4,900-10,680 $ 1,650, सिलाई अध्यापिका (अनुबंध) ृ6,300, पंचायत चौकीदार (अनुबंध) ृ4,000, जलरक्षक (अनुबंध) ृ2,100 दिए जा रहे हैं।मिशन मोड परियोजना के अन्तर्गत् (ई/पंचायत योजना) 12 कोर सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन पंचायतों के लिए बनाई है। पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों के लिए इन एप्लीकेशन को चलाने हेतु प्रशिक्षण भी पंचायती राज प्रशिक्षण केन्द्र मशोबरा में दिया जा रहा है। पंचायती राज संस्थाओं ने पहले से ही इन एप्लीकेशन का उपयोग करना शुरू कर दिया गया है।

22.सूचना एवम् विज्ञान प्रौद्योगिकी

राष्ट्रीय ई-शासन योजना के तहत, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा ;डी.आई.टी.एच.पी.द्ध हिमस्वान नामक सुरक्षित नेटवर्क बनाया गया। हिमस्वान ब्लाक स्तर तक सभी राज्य सरकार के विभागों के लिए सुरक्षित नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान करता है। हिमस्वान को कुशलतापूर्वक विभिन्न इलैक्ट्रोनिक सेवाऐं जी.टू.जी.;सरकार से सरकारद्ध जी.टू.सी.;सरकार से नागरिकद्ध, जी.टू.बी.;सरकार से व्यापारद्ध सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इलैक्ट्रोनिक सूचना और प्रौद्योगिकी मन्त्रालय, भारत सरकार ने 6 वर्ष की प्रारम्भिक अवधि के लिए इस परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान की थी। हिमस्वान 5.02.2008 को भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया था। यह अवधि वर्ष 2014 तक समाप्त हो गई है। अब राज्य सरकार इस परियोजना के संचालन तथा रख-रखाव का खर्च वहन कर रही है।
हिमस्वान परियोजना वर्तमान में एकल स्तरीय वास्तुकला की तकनीकों के साथ एम.पी.एल.एस. तथा वी.पी.एन.बी.बी. के द्वारा कार्यालयों में वीडियो कॉन्फ्रैसिंग तथा इन्टरनैट आधारित ऐपलिकेशनों का कार्यालयों में प्रयोग होने के कारण व्रॉडबैंड की बढ़ती मांग तथा राज्य की कला प्रौद्योगिकी का उपयोग करके एस.एल.ए. नेटवर्क डाउन टाइम, आवाज, डाटा और वीडियो सेवा के कारण हिमस्वान को तीन स्तरीय वास्तुकला के साथ पुर्नोत्थान किया जा रहा है। वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां अर्जित की हैः-
1) पूरे राज्य में 2,095 सरकारी कार्यालय हिमस्वान नेटवर्क के माध्यम से जुड़े हुए हैं।
2) ओरेंज कंपनी को हिमस्वान ऑप्रेटर के रूप में तथा ई. एवं वाई. कंपनी को तीसरी पार्टी लेखापरीक्षक टी.पी.ए पांच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया गया हैं।
3) अन्य हिमस्वान बैंडविड्थ प्रदाता के लिए भारती एयरटैल लिमिटिड को नियुक्त किया गया हैं।
राष्ट्रीय ई-शासन योजना ;एन.ईजी.पी.द्धके तहत, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग नागरिकों के लाभ के लिए विभिन्न सरकारी विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी की सेवाओं का प्रयोग करने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य डाटा सेंटर की स्थापना प्रक्रिया में है। विभिन्न सरकारी विभागों के ऐपलिकेशनों की मेजबानी करने तथा कुशल निष्पादन हेतु जी.टू.सी.;सरकार से नागरिकद्ध, जी.टू.जी.;सरकार से सरकारद्ध जी.टू.बी.;सरकार से व्यापारद्ध सेवाएं तथा राज्य सरकार के कार्यालयों के लिए आम बुनियादी ढांचा तैयार करना ;कम्पयिट्रक संयन्त्र, सांझा सर्वर, भण्डारण, नेटवर्क संयंत्र, विद्युतीय, वातानुकूलन, नेटवर्क कनेक्टिविटी, यू.पी.एस. व रैक इत्यादिद्ध़ जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचे की स्थापना एवं एकीकरण;सर्वर, दूर संचार उपकरणों एकीकृत पोर्टल/विभागीय सूचना प्रणाली उद्यम और नेटवर्क प्रबंधन प्रणाली, सुरक्षा, फायरवॉल/आई.डी.एस. नेटवर्किंग घटक इत्यादिद्ध़ सॉफ्टवेयर डाटावेस तैयार करना शामिल है। इलैक्ट्रोनिक तथा सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्रालय, भारत सरकार नें पांच साल की अवधि के लिए स्थापना, संचालन और राज्य डाटा सेंटर के रख-रखाव की लागत को 80ः20 में वहन कर रही हैं। इस योजना के अन्तर्गत् वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां हैंः-
1) हि0 प्र0 राज्य डाटा सैंटर 26.05.2016 से परिचालन कर रहा है ।
2) मै0 औरेंज कम्पनी 5 वर्ष की अवधि के लिए 26.05.2014 से एच.पी. एस.डी.सी. की स्थापना, शुरूआत तथा रख-रखाव करेगी।
3) एैपलिकेशन होस्ट की संख्याः 105 हैजो किनिर्माणाधीन हैं। (अतिरिक्त 39 वैब एैपलिकेशन स्टेजिंग सर्वर क्षेत्र में है)।
4) एस.डी.सी. एपलीकेशन का कलाउड 1.09.2016 से चल रहा है।
5) मै0 ई. एण्ड वाई. को, एच.पी.एस.डी.सी. में सेवा स्तर की निगरानी,पांच वर्ष की अवधि के लिए तीसरी पार्टी लेखा परीक्षक नियुक्त किया गया है जिसका एच.पी.एस.डी.सी. आपरेटर द्वारा पालन किया जा रहा है।
7) एच.पी.एस.डी.सी. को आई.एस.ओ. 27001 (प्ैव् 27001), आई.एस.ओ. 20000 (प्ैव् 20000) और सी.ई.आर.टी.-आई एन (ब्म्त्ज्.प्छ) के सुरक्षा स्टैंडर्ड के साथ लागू किया गया है।
8) मै0 नक्षत्रा डाटा लिमिटेड को एच.पी.एस.डी.सी. ने डाटा अनुसंधान साईट के लिये आशय पत्र दिया है।
इस योजना का उद्द्ेश्य राज्य के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपकरणों का उपयोग करके एक समन्वित तरीके से राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर लोक मित्र केन्द्रों की स्थापना करना तथा ग्रामीण नागरिकों को सरकारी, निजी तथा सामाजिक क्षेत्र की सेवाएं सीधे घर द्वार पर उपलब्ध करवाना है। लोक मित्र केन्द्र ग्राम स्तर पर राज्य के नागरिकोंं को आई.सी.टी. सेवाओं को उपयोगकर्ताओं तक सीधे पंहुचा रहे है। राज्य सरकार भी ई-जिला परियोजना लागू कर रही है। इन सेवाओं की डिलिवरी भी लोक मित्र केन्द्रों के माध्यम से की जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत् गत वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां हैंः-
वर्तमान में कुल 4,793 कामन सर्विस सेंटर को आई.डी. जारी कर दिया गया है और हिमाचल प्रदेश में 3,100 कामन सर्विस सेंटर सक्रिय हैं जा 195 बी.टू.सी./जी.टू.सी. सेवाएं प्रदान कर रहे हैः-
1) बिजली बिल संग्रहण
2) आईपीएच जल बिल संग्रह
3) एचआरटीसी टिकट बुकिंग
4) राजस्व - जमाबंदी
5) किसान केंद्रित सेवाएं
6) एमसी शिमला बिल (जल, संपत्ति)
7) एचपी पीएससी और एचपी एसएससी
8) कृषि सेवाएँ
9) स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ
10) पीएमजीदिशा योजना107870 के तहत पंजीकृत विद्यार्थी 1,05,409 प्रशिक्षित दिसंबर तक 45,436 प्रमाणित, 2018.
भारत सरकार की क्षमता निर्माण परियोजना के अंतर्गत् विभिन्न घटकों में राज्य सरकार के कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना, राज्य सरकार के लिए तकनीकी व व्यवसायिक मानव संसाधन उपलब्ध करवाना ताकि विभिन्न ई-गवर्नेस परियोजनाओं के कार्यान्वयन में राज्य सरकार को सहायता प्रदान हो इस योजना के अन्तर्गत् गत वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां हैंः-
1)हर माह के दुसरे एव चौथे सोमवार को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में उपयोगकर्त्ता विभागों को ई-ऑफिस और ई-प्रोक्योरमैट प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निर्धारित किया जाता है।
2) SeMT के अंतर्गत, 4 तकनीकी संसाधनों को तैनात किया गया है एनईजीडी के माध्यम से।
3) पी.एम.जी.दी.शा. के अंर्तगत् 1,05,409 छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया है।
4) राज्य स्तर पर डिजिटल लॉकर के बारे में जागरूकता और एकीकरण पर अधिकतर विभागों में कार्यशाला आयोजित की गई।
राजस्व न्यायालय मामले की निगरानी प्रणाली, जिला, मण्डल और तहसील स्तर पर राजस्व न्यायालयों के उपयोग के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित किया गया है। इस प्रणाली द्वारा राजस्व अदालतों की कार्यवाही अन्तरिम आदेशों/ निर्णयों को प्राप्त कर सकते हैं। राजस्व मामलों का ब्यौरा आम जनता के लिए ऑन लाइन उपलब्ध है नागरिकों को अपने मामलों की स्थिति सूची देखना अन्तरिम आदेशों/निर्णयों को ऑनलाइन डाउनलोड़ कर सकते हैं। इस योजना के अन्तर्गत् वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां हैंः-
1) आर.सी.एम.एस. परियोजना के अंतर्गत् भारत में ई-गर्वेनस क्षेन्न में पहल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 2,014 सी.एस.आई. निहिलैट ई-गर्वेनस पुरस्कार मिला है।
2) 280 राजस्व न्यायालयों में आर.सी.एम.एस.सॉफ्टवेयर का उपयोग हो रहा हैं।
3) 78,934 अदालती मामले आर.सी.एम.एस. में दर्ज किए गए है जिनमें से 39,923 मामलों का फैसला हो चुका है।
किसी भी सरकारी विभाग के लिए न्यायिक मुकदमों की निगरानी एक बड़ी चुनौती है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इसके लिए एक सामान्य सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है इस सॉफ्टवेयर के प्रयोग से सेक्रेटरी/ विभागाध्यक्ष न्यायिक मुकदमों की निगरानी सरल तरीके से कर सकते है और लम्बित मामलों का निर्धारित समय में उत्तर तैयार करके, वर्तमान स्थिति और व्यक्तिगत उपस्थिति के मामलों का निरीक्षण कर सकते हैं।
इस योजना के अन्तर्गत् वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां हैंः-
1) महाधिवक्ता कार्यालय सभी मामलों की स्थिति को ऑनलाईन अवगत करवा रहा है। महाधिवक्ता कार्यालय के भीतर फाईल से सम्बन्धित गतिविधियां सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपलब्ध हैं।
2)सभी सरकारी विभाग अपने मामलों की दैनिक स्थिति को देखने के लिए स्डै प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं।
3) सभी पत्राचार सम्बन्धित विभागों को इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं। निम्नलिखित विशेषताओं को एल.एम.एस. सॉफ्टवेयर में शामिल किया गया है :
i) ई-मेल और एस.एम.एस. के माध्यम से सूचना सम्वन्धित विभागों के प्रशासनिक विभागों, विभागों के प्रमुखों, नोडल अधिकारियों को भेजी जाती है।
ii) सम्वन्धित विभाग के मामले का विवरण दर्ज होने पर स्वचालित पत्र तैयार हो जाता है।
iii) मामलों का स्थानांतरण तथा हटाना का विकल्प भी सॉफ्टवेयर में शामिल है।
iv) मामलों की सूची भी आनलाईन जनरेट की जा रही है जिसमें कुल मामले 40,762 थे और 407 मामले अनुमोदित कर दिए गए।
आधार कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश में दिसम्बर, 2010 में शुरु किया गया था और तब से राज्य सरकार ने आधार बनाने में अग्रणी स्थान बनाए रखा है। राज्य में 73,14,691 निवासी (अनुमानित जनसंख्या 2018) के अनुसार हैं। 77,57,779 के यू.आई.डी. (106.06 प्रतिशत) बनाये गये हैं।
आधार का उपयोग :
1)आधार के डाटाबेस के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 90.56 प्रतिशत, मनरेगा में 97.39 प्रतिशत, शिक्षा में 99.90 प्रतिशत, एन.एस.ए.पी. में 84.04 प्रतिशत, एल.पी.जी. में 93 प्रतिशत चुनाव में 71.71 प्रतिशत और ई.पी.एफ. में 35.32 प्रतिशत तक आधार सीडींग कर दी गई है
2) दिसम्बर 2018 तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के अंतर्गत् 50 योजनाओं के ृ3,222.09 करोड़ सीधे तौर पर आधार से जुडे बैंक खातों के लाभार्थीयों को सफलतापूर्वक वितरित किये गये हैं।
3) हिमाचल मनरेगा में डी. बी. टी. आरम्भ करने वाला पहला राज्य है।
4) आधार पर आधारित बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली शहरी एवं नगर योजनाविभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास, कारागार निदेशालय, मत्स्य विभाग और औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र में कार्यरत है।
ई-कार्यालय एक उत्पाद है जिसका उद्द्ेश्य अधिक कुशल, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से सरकारी लेन-देन सरकार के मध्य व सरकारों के साथ करना है। निम्नलिखित विभागों में ई-कार्यालय कार्यान्वयन प्रक्र्रिया में है
1) ई-ऑफिस के अन्तर्गत् 25 विभाग मैप किए गए।
2)ई-ऑफिस के अन्तर्गत् 1,066 उपयोगकर्त्तामैप किए गए ई-ऑफिस का उपयोग करने वाले विभागों की सूची:
i)सूचना विभाग तकनीकी।
ii). पुलिस मुख्यालय
iii) सशस्त्र पुलिस और प्रशिक्षण मुख्यालय
iv) एचपी पुलिस संचार एवं तकनीकी सेवाएं,
v) अधीक्षक कार्यालय पुलिस, मण्डी
vi) हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, शिमला
vii) कोष निदेशालय खाते एवं लॉटरी, शिमला,
viii) उपायुक्त कार्यालय, सिरमौर
ix) मुद्रण एवं स्टेशनरी विभाग
x) हिमाचल प्रदेश सिंचाई एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य (सर्कल कार्यालय), शिमला
xi) अधीक्षक कार्यालय पुलिस, बिलासपुर
xii) उपायुक्त कार्यालय, मंडी.
xiii) उपायुक्त कार्यालय, कांगड़ा
xiv) कैपिटल ट्रेजरी, शिमला,
xv) जिला कोष, सोलन,
xvi) जिला खजाना, शिमला,
xvii) खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग और उपभोक्ता मामले,
xviii) आयुर्वेद विभाग,
)xix पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सिरमौर
xx) होम गार्ड सिविल निदेशालय रक्षा एवं अग्निशमन सेवाएँ,
xxi) सचिवालय प्रशासन विभाग
xxii) कार्मिक विभाग- II, III
xxiii) चुनाव विभाग (मुख्यालय),
xxiv) पर्यावरण विभाग विज्ञान प्रौद्योगिकी,
xxv) उपायुक्त कार्यालय, हमीरपुर. ई-पेशी वीडियो सी
यह सुविधा अदालत में कैदियों को ले जाने की आवश्यकता को समाप्त करेगी व तुरन्त न्याय देने में सहायक सिद्ध होगी। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष के दौरान निम्न उपलब्धियां हैंः-
1) मै0 भारती एयरटेल राज्य में वीडियो कान्फ्रेसिंग के उपकरणों की आपूर्ति, तथा स्थापित करने व परियोजना को चालू होने की तिथि से 5 वर्ष की अवधि के रख-रखाव के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है।
2) मै0 भारती एयरटेल ने 63 विडियो कान्फ्रेसिंग की आपूर्ति तथा स्थापित करने का आदेश दिये गये सभी 63 वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधाओं को सफलतापूर्वक वितरित/स्थापित कर दिया गया है।
3) 7 न्यायालयों, 13 जेलां में वीडियो कान्फ्रैंसिंग की सुविधा प्रदान की गई है।
3) वीडियो कान्फ्रेंसिंग की सुविधा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, पॉवर कार्पोरेशन लिमिटिड, पंचायती राज, महानिदेशक जेल, राज्य फोरेंसिक प्रयोगशाला तथा स्वास्थ्य विभाग में प्रदान की जा रही है।
ई-जिला परियोजना एक मिशन मोड़ (एम.एम.पी.) परियोजना है जिसका उद्द्ेश्य एकीकृत नागरिक केन्द्रित सेवाएं प्रदान करना, जिला प्रशासन द्वारा नागरिक सेवाओं के एकीकरण और सहज वितरण कार्य प्रवाह से स्वचालन, बैकेन्ड कम्पयूटरीकरण, डाटा डिजिटलीकरण की विभिन्न विभागों द्वारा परिकल्पना की गई है। भविष्य में इसका उद्द्ेश्य ऐपलीकेशनों का एकीकरण करना, सार्वजनिक मामलों/ अपीलों /शिकायतों का तेजी से प्रसंस्करण कर सूचनाओं का जनता की आवश्यकता के अनुसार प्रसार व अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को सामान्य सेवा केन्द्रों के माध्यम से नया स्वरुप देना है। इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत् निम्नलिखित गतिविधियां पूरी कर ली गई हैंः-
1) ई-डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत 52 ई-सेवाएँ, सभी 12 जिलों में लॉन्च किया गया।
2) ई-जिला प्रबंधक और डीईजीएस सभी 12 जिलों में गठित
3) मेसर्स आईएल एंड एफएस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड है एसआई (सिस्टम इंटीग्रेटर) के रूप में कार्य करना ई-डिस्ट्रिक्ट एमएमपी के राज्यव्यापी कार्यान्वयन के लिए।
i) हार्डवेयर डिलीवरी बिल्कुल सभी 12 के लिए विभागीय स्थान जिले.
ii) ई-डिस्ट्रिक्ट का एकीकरण यूआईडीएआई (आधार) के साथ आवेदन, एसएमएस गेटवे, भुगतान गेटवे, भूमि रिकॉर्ड, ईपरिवार, बीपीएल, सीआरएस, सार्वजनिक सेवा गारंटी अधिनियम (पीएसजी) हैं पूर्ण।
4) की अतिरिक्त 13 G2C सेवाएँ एसआई को दिए गए विभिन्न विभाग ई-डिस्ट्रिक्ट के तहत विकास हेतु परियोजना
यह एक वेब आधारित ऑनलाइन उपकरण है जो निविदाएं और ई-प्रापण की प्रक्रिया अधिक कुशल बनाने के लिए है।ई-प्रापण सिस्टम हिमाचल प्रदेश में निविदाकर्ता को निविदा अनुसूची मुफ्त में डाउनलोड करने में सक्षम बनाता है और फिर इस पोर्टल के जरिए ऑनलाइन बोलियां जमा कर सकता है। इस प्रणाली का उद्देश्य ई-प्रापण की लागतों को कम करना, ई-प्रापण क्षमता को अधिकतम करना, राज्य भर में प्रतिस्पर्धात्मक और एक सम्मान दरें, अधिकारिक प्रक्रिया में पारदर्शिता,कोई हेर फेर न हो सके, समय बचाने और निविदाओं की पूलिंग न होना है।
1) 48 विभाग/निगम हैं इस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करना जैसे PWD, डीआईटी, आईएंडपीएच, एमसी शिमला आदि। विभिन्न निगम जैसे एचआरटीसी, एचपीएमसी, एचपीएसईडीसी, आदि।
2) परियोजना प्रबंधन इकाई के पास है और अधिक शामिल करने के लिए सेटअप किया गया है अधिक विभाग.
3) विश्व बैंक इस परियोजना का वित्तपोषण कर रहा है पाँच वर्ष की अवधि के लिए और संवितरण से जुड़ा हुआ है लक्ष्य:
i) भारत की डिजिटल लाइब्रेरी बनेगी वर्तमान वित्तीय के लिए हासिल किया गया वर्ष `3,173.30 करोड़ है।
ii) कुल 3410 नं. निविदाओं का (एओसी) से सम्मानित किया गया है पूर्ण) वित्तीय के दौरान साल 2018-19 जो लायक हैं `2,190.46 करोड़।
4)वित्त विभाग जारी करेगा में कमी हेतु अधिसूचना निविदा मूल्य सीमा `5.00 लाख प्रभावी 1.04.2018 ऑनलाइन उपयोग करने के लिए सभी खरीद के लिए पोर्टल पारित तरीके से.
5) ऑनलाइन पेमेंट गेट हो गया है प्रदान करने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया आसान और सुविधाजनक ऑनलाइन मोड ईएमडी बनाने के लिए बोलीदाताओं को और निविदा शुल्क भुगतान.